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Ashique Parwez
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नादानी – जीवन की एक भूल

हमारे पड़ोस में एक लड़के के दोस्तों का ग्रुप था उनके ग्रुप के एक लड़के का किस्सा आज आपको सुनाने जा रहा हूँ उनके ग्रुप में लड़का था “अनूप” जो बहुत ही शरारती था, वो हर समय कोंई न कोंई उल्टी-सीधी हरकते करता रहता था, पर उसको अपने दोस्तों,सहपाठियों और भाई-बहनों का बड़ा सपोर्ट रहता था इसलिए वो किसी भी चीज़ को गंभीरता से नहीं लेता था,, समय के साथ उसकी शरारते भी बढती रही,, पर ये सभी हरकते अभी तक दोस्तों, सहपाठियों, भाई-बहनों के कारण नियंत्रण में थी,

समय बीतने लगा और अब उसके हाई-एजुकेशन का समय आ गया, तो उसने एक अच्छे कॉलेज के लिए प्रवेश परिक्षाए देना शुरू कर दिया, फिर उसे मनचाहा तो नहीं पर उसके सुविधा के अनुसार कॉलेज मिल गया| जहाँ वो पढने के लिए गया वहाँ से उसको कॉलेज में आधे घंटे का सफर तय करना पड़ता था क्योंकि कॉलेज सब शहर से बाहर के क्षेत्र में ही स्थापित होते है तो वो वहाँ १२:०० बजे जाता और ५:०० बजे वहाँ से छुटता था उसने दूरी को कम करने के लिए एक कच्चे रस्ते से जाना शुरू कर दिया|

दोस्तों , अब यहाँ से किस्सा शुरू होता है… उस रस्ते पर अक्सर लोग किसी न किसी शव को जलाने के लिए लाते थे और उधर काफी कचरा शहर का भी डाला जाता था, “अनूप” शरारती तो था ही तो अपने दोस्तों के साथ गप्पे- बातचीत में उसको देर हो जाती थी और लौटते समय अँधेरा हो जाता था, एक दिन वो उसी रास्ते से जा रहा था तो रास्ते मे उसे एक लड़की मिली , जब उस लड़की ने उसे कहा की तुम मुझे कुछ दूरी पर छोड़ दोगे क्या,, तो अनूप इसे क़िस्मत का तोहफा समझते हुए तुरंत तैयार हो गया ,पर इसमें एक अजीब बात ये थी की वो जहाँ रूकती थी उसके थोड़ी देर बाद ही मज्ज़िद में अज़ान शुरू हो जाती या फिर मंदिर में घंटिया बजनी शुरू हो जाती थी|

समय इसी तरह निकलता गया उन दोनों में दोस्ती हो गई एक-दो बार वो उसे घर पर भी लाया, एक दिन अनूप शहर में किसी काम की वजह से कॉलेज नही.....
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