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Sanatan Dharam
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श्री सनातन धर्म विश्व का प्राचीनतम धर्म है ।
श्री सनातन धर्म विश्व का प्राचीनतम धर्म है ।

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आज की श्रीमद् भागवत कथा

प्रवृत्तिं च निर्वत्तिं च कार्यकार्ये भयाभय ।
बन्धं मोक्षं च या वेत्ति बुध्दि: सा पार्थ सात्त्विकी । ३० ।
यया धर्ममधर्म च कार्य चाकार्यमेव च ।
अयथावत्प्रजानाती बुध्दि: सा पार्थ राजसी । ३१ ।
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आज का विचार

यदि आप अच्छा बना नहीं सकते तो कम से कम ऐसा करिए कि वो अच्छा दिखे ।
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आज की श्रीमद् भागवत कथा

रागी कर्मफलप्रेप्सुर्लुब्धो हिंसात्मकोशुचि: ।
हर्षशोकान्वित: कर्ता राजस: परिकीर्तित: । २७ ।
आयुक्त: प्राकृत: स्तब्ध: शठोनैष्कृतिकोलस: ।
विषादी दीर्घसूत्री च करता तामस उच्यते । २८ ।
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आज का विचार

अपनी स्त्री, भोजन और धन इन्हीं तीनों में संतोष करना चाहिए । - चाणक्यनीति
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आज की श्रीमद् भागवत कथा

कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेर्जुन ।
सङ्गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्याग: सात्त्विको मत:। ९ ।
न दुेष्ठचकुशलं कर्म कुशले नानुषज्जते ।
त्यागी सत्त्वसमाविष्टो मेधावी छिन्नसंशय: । १० ।
न ही देहभृता शक्यं त्यत्त्कुं कर्माण्यशेषत: ।
यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते । ११ ।
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आज का विचार

बिना देखे कभी किसी वस्तु का पान करो और बिना पड़े कभी कहीं हस्ताक्षर न करो । - स्पेनिश लोकोक्ति
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श्रीमद् भागवत कथा

दुःखमित्येव यतकर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत् ।
स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत् ।
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आज का विचार

कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है ।
ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है ।
अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं । - स्वामी विवेकानंद
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आह्वान करना

विभिन्न क्षेत्रो के मन्दिर तथा जिला समितियों के लिए कर्मठ युवा सनातन धर्म बन्धुओं की अत्यन्त आवश्यकता है।ऐसी स्थिति में हम आपकी ओर आशा भरी पवित्र दृस्टि से देख रहे है ओर हमें पूरी आशा ही नहीं परन्तु विश्वास हे की दिल्ली का समस्त सनातन जगत पूज्य सन्तों की छत्रछाया में जुड़ कर के एक आवाज बनेगा।

आओ सनातनजगत में एक आवाज से तन-मन-धन की आहुति प्रदान करे आप भी जगे औरो को भी जागृत करें जिससे आने वाली पीडिया गर्व का अनुभव कर सकें – यही हमारी वाणी है।
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विनम्र प्रार्थना

सनातन धर्म बन्धुओं से निवेदन है की वर्तमान में मन्दिरों से सम्बन्धित बन्धुओं पर बहुत बड़ा उत्तरदायित्व है की आज धर्म, के प्रति दिग्भ्र्मित सामान्य जन में श्रद्धा ओर विश्वास का विशेष आधान करे। अन्यथा कालान्तर में समाज एवं परिवार का नेतृत्व करने पर उनमे धर्म के प्रति श्रद्धा विश्वास नहीं होगा। इससे निश्चित रूप से सनातन हिन्दू समाज तथा राष्ट्र का बहुत बड़ा अहित होगा. अत: हम अपने उत्तर्दायियत्व का अवश्य निर्वहन करें तथा प्रत्येक सनातन बन्धु तन- मन- धन से सभा से अथवा किसी भाव से सेवा करें।

इन सारि व्यवस्थाओं के निर्वहन के लिए केंद्रीय / विभागीय एवं जिला पदाधिकारी वार्षिक 2100/- रु सहयोग राशि के रूप में सभा को दे रहे है। सम्पन्न सनातन धर्मावलंबी बन्धु 15000/- रु का सहयोग दे कर संरक्षण मण्डल के सदस्य बन सकते है। उक्त राशि सभा के फिक्स्ड डिपॉज़िट में जमा रहेगी आजीवन सदस्य्ता बनने हेतु 5000/- रु का सहयोग प्रार्थित है।
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