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Dileep Shakya
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मैं और वह
______________कविता-श्रृंखला [13] हम एक तस्वीर का निगेटिव बनकर आए थे दुनिया में वह फोटोग्राफर कहां होगा जिसने हमारा पोज़ीटिव निकाला था : मैंने उसकी स्मृति में लौटते हुए पूछा फोटोग्राफर को छोड़ो, उस पोज़ीटिव को ढूढ़ो : मेरी विस्मृति को जगाते हुए उसने कहा तो क्या...

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मैं और वह
------------------कविता-श्रृंखला [12] मैं किसी काम में बिज़ी था जब मैंने उससे कहा : कैच यू लेटर यू कान्ट कैच मी : उसने कहा कैच मी इफ यू कैन : मैंने सुना काम अधूरा छोड़कर मैं उसकी तलाश मैं निकल पड़ा उसने अपना चेहरा किसी फूल से बदल लिया था बसंत के विदा लेने से प...

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मैं और वह
------------------कविता-श्रृंखला [11] म्यूज़िक लाइब्रेरी में एक पुराना रिकॉर्ड तलाशते हुए उसने कहा : सब थे यहां, जब तुम नहीं थे जब तुम थे, कोई नहीं था दूर-दूर तक मैंने कहा : अब ? अब सब हैं यहां, और तुम भी हो : उसने कहा मैंने कहा : कोई नहीं है यहां, मैं भी नह...

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मैं और वह
------------------कविता-श्रृंखला [10] मैं पूरब से आया और वह पश्चिम से..फिर हम दोनों एक बाज़ार में पहुंचे मैंने घोड़े की नाल खरीदी और उसने घोड़े के पंख यह युद्ध का समय नहीं : मैंने उससे कहा यह शांति का भी समय नहीं : उसने प्रतिवाद किया घोड़ा कहां मिलेगा : तब मैंन...

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मैं और वह
------------------कविता-श्रृंखला [9] नेताजी के भाषण में पार्टी की टोपी थी, पार्टी का माइक था और मुंह भी शायद पार्टी का ही था मैंने उससे पूछा: नेताजी का क्या है ? कुछ नहीं, सब जनता का है : बालों से हेयर पिन निकालते हुए उसने कहा बीच में पार्टी कहां से आयी फिर...
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