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Rajanikant Mishra
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जबकि मौन हो तुम मैं पढ़ रहा हूँ, भाषा उग आई दीवार इक, गिर पड़ी है।  तक़रीबन। २. जबकि शांत चुप चाप हो तुम मैं गिन रहा हूँ, लहर संयत स्वर में, रागिनी घुल गयी है। मधुर। ३. अब जबकि  बेचैन हो तुम मैं माप रहा, दूरी परे समय के, रच रहे साथ हम। हरदम।    

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पुनः पुनः
१.  दिन ढला  पुनः पुनः  शाम से रात ही, समय का सफर।  २.  इंतज़ार  पुनः इंतज़ार  तुमसे मिलना ही, एकमेव ख्वाहिश।  ३.  छपाक छपाक  उम्मीदों का सफर  तैरता मैं अंतहीन। 

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तुम्हारी कटान है या हीरे की आरी।
१.  नशा ही नहीं, खूबसूरत भी।  अफीम है तो मज़ेदार। २.  इस पार से या उस पार से परदा हटे तो  दीदार भी हो।  ३.  बहुत बारीक़  बहुत तेज़  तुम्हारी कटान है या हीरे की आरी।  ४.  पसीना भी अच्छा  फेरोमोन्स  और स्वाद रंगीन।  ५.  नमक इश्क़ का  बेमुरौवत फीका  चटक वासना की ड...

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१.  सिरों के परे, दिखती दुनिया विशाल, सिरों  मध्य मैं झूला।  २.  अटक गया मध्य कहीं मैं, ज़िन्दगी है कि डमरू कोई।  ३.  दोनों छोर खुले  हुए  कई कई छेदों से बजता मैं। 

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नानी तुम नानी ही रहना।
मौसी मेरी बड़ी सयानी  मौसी की मम्मी है नानी।  मामा माँ बोले नानी को  नानी बेटा बोले मुझको  भाई हुआ जो मैं मामा का  मामा बोलूं फिर मैं किसको।  गड़बड़ झाला फिर ना करना  नानी तुम नानी ही रहना। 

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आओ खेले हम अब खेल
भैय्या देखो पापा आए  राजू चाचा साथ हैं आए।  चाचा के संग चाची आईं  मुन्नी दीदी साथ है आई।  मम्मी चाची करती मेल  आओ खेले हम अब खेल।  पापा कहते छोड़ो डॉल  जाओ खेलो तुम फुटबॉल। 

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जय जय भैय्या जय जय राम।
छत पर मेरे कौवे आते  तरह तरह करतब दिखलाते।  बोला मोटा कौवा एक दिन  अच्छा नहीं लगता मेरे बिन  बोला दुबला कौवा फिर  लाओ खिलाओ दूध औ खीर।  बोले कौवे सुबहो शाम  जय जय भैय्या जय जय राम। 

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जाना नहीं मुझे स्कूल
जाना नहीं मुझे स्कूल  जाना नहीं मुझे स्कूल।  अभी तो छोटा बच्चा हूँ  उमर में काफी कच्चा हूँ  बच्चा पर मैं सच्चा हूँ  घर पर ही मैं अच्छा हूँ।  जाना नहीं मुझे स्कूल  जाना नहीं मुझे स्कूल।  खेल कूद और गाना गाना  हंसी ख़ुशी और मौज़ मनाना  घर पर ही मैं अच्छा हूँ  अ...

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नई कहानी खुद नानी की
ना राजा की ना रानी की  नई कहानी खुद नानी की।  नानी के थे काले बाल  चिकने चिकने लम्बे बाल।  नानी पीती थी खुब दूध  भरा गिलास मलाई खूब।  नानी से डरते थे नाना  थरथर कापें बड़के मामा।  मम्मी नानी से है डरती  नानी प्यार मुझी से करती।    

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नींद नहीं आती ख्वाब आते रहे दिन औ रात।
१.  कब्रगाहों में दफ्न  आशाओं के तेवर, कुंडली मार छिप गयीं  योजनाएं ख़ुशी की, और काई पर फिसल गई  तेरी हँसी  बेतरतीब बिला वज़ह ख्वाब दर ख्वाब आती रहती है।  परत दर परत जमते जाते हैं मुझ पर ख्वाब मेरे।  २.  नींद नहीं आती  ख्वाब आते रहे दिन औ रात।  ३.  देखी बचपन ...
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