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Baba Mayaram
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हमेशा नेपथ्य में रहते थे अशोक जी
x अशोक   जी , यानी   अशोक   सेकसरिया , लेकिन हम सब उन्हें   अशोक   जी   कहते थे. उनकी   बहुत सी यादें हैं , मेरे मानस पटल पर. फोन पर लगातार बातें तो
होती रहती थी , मिला भी
तीन-चार बार. लेकिन जब भी मिला बहुत स्नेह मिला. जब सामयिक वार्ता , दिल्ली से इटारसी आ ...
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वैचारिक जड़ता के खिलाफ पृथ्वी मंथन
भारत में वैश्वीकरण
के असर पर पर्यावरणविद् आशीष कोठारी और असीम श्रीवास्तव की नई किताब आई है- पृथ्वी
मंथन। यह किताब बताती है भारत में वैश्वीकरण
से क्या हो रहा है, कहां हो रहा है और इसका देश के बड़े तबके पर क्या असर हो रहा
है। और जबसे यह  प्रक्रिया चली है तबसे...
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जनांदोलन के प्रेरणास्रोत थे रावल जी
समाजवादी चिंतक और
जन आंदोलनों के वरिष्ठ साथी ओमप्रकाश रावल जी की कल पुण्यतिथि है। 23 बरस बीत गए
लेकिन उनकी स्मृति सदैव बनी रहती है। लंबी कद काठी, सफेद
कुर्ता पायजामा, चेहरे पर मोटी फ्रेम का चश्मा और स्मित मुस्कान उनकी पहचान थी।
पुरानी लूना से शहर में कार्यक...
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विकल्प की खोजने वाले विचारक
किशन जी (किशन
पटनायक) का स्मरण करते ही कितनी ही बातें खयाल में आती हैं। उनकी सादगी , सच्चाई और आदर्शमय जीवन की, दूरदराज के इलाकों की
लम्बी यात्राओं की, राजनीति के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की कोशिशों की और उनके
ओजस्वी व्याख्यानों की, जहां लोग चुपचाप उनके भ...
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सुनील भाई का जाना
सुनील भाई नहीं रहे, यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है। जब 16 अप्रैल को उनकी तबीयत बिगड़ी और स्मिता जी और मैं उन्हें इटारसी ले जा रहे थे, तब मैंने उनकी टेबल पर उसी सुबह वार्ता के लिए लिखा अधूरा संपादकीय छोड़ दिया था, यह सोचकर कि वे इटारसी से लौटकर उसे पूरा क...
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सुनील भाई का जाना
सुनील भाई नहीं रहे, यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है। जब 16 अप्रैल को उनकी तबीयत बिगड़ी और स्मिता जी और मैं उन्हें इटारसी ले जा रहे थे, तब मैंने उनकी टेबल पर उसी सुबह वार्ता के लिए लिखा अधूरा संपादकीय छोड़ दिया था, यह सोचकर कि वे इटारसी से लौटकर उसे पूरा क...
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फूलों का त्यौहार है सरहुल
किसी भी आदिवासी समुदाय की पहचान उसकी संस्कृति से होती है। और इन संस्कृतियों की पहचान उसके पर्व-त्यौहारों से होती हैं। झारखण्ड के आदिवासियों का सबसे बड़ा त्यौहार सरहुल है। ये एक ऐतिहासिक पर्व है तथा इसकी परंपराएं बहुत भिन्न हैं।  इस पर्व में पाहन जो गांव का ...
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सेवक की प्रार्थना
हे नम्रता के सागर! दीन दुखी की हीन कुटिया के निवासी, गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र के जलों से सिंचित इस सुंदर देश में तुझे सब जगह खोजने में हमें मदद दे। हमें ग्रहणशीलता और खुला दिल दे; अपनी नम्रता दे; हिन्दुस्तान की जनता से एकरूप होने की शक्ति और उत्कण्ठा दे। ...
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मुख्यधारा
हमारी ज़मीन के नीचे की दुनिया के देवताओं ने जब-जब भेजा उन्हें वे नज़र आए हमारे बाज़ारों में सिर्फ नमक और मिट्टी का तेल खरीदने के वास्ते उ...
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