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Digamber Naswa
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जागती आँखों से स्वप्न देखना मेरी फितरत है.
जागती आँखों से स्वप्न देखना मेरी फितरत है.

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अबट सुंदर संकलन है ...
बहुत आ हर मेरी ग़ज़ल को जगह देने में लिए ...
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इन नायब गजलों का संकलन एक ही जगह ....
बहुत कमाल और कितना शोध और मेहनत की है अपने ये मोती जुटाने में ...

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उनकी यादों के अध-जले टुकड़े
आसमानी सी शाल भी होगी

यूँ उजाला नज़र नहीं आता
चुप सी जलती मशाल भी होगी

प्रेम जीता हो दिल में तो अकसर
एक प्रतिमा विशाल भी होगी ...

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धूप के इस तरह मुकरने में
कुछ तो बादल की चाल भी होगी

गौर से इसकी थाप को सुनना
बूँद के साथ ताल भी होगी

जोर से बोल दें अगर पापा
पूछने की मजाल भी होगी ...

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बहुत खूब ...
प्रेम की महक लिए हर शेर...
प्रेम भरे उलाहने छलक छलक रहे हैं इन शेरो से ... बंद लिफाफों में आ जाया तो करो .... कामयाब शेर सभी ...
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माँ से जुड़ी कोई एक बात भी कई कई रचनाओं को पीछे छोड़ जाती है ...
बहुत ही सुन्दर ... दिल को छू के गुज़रती ...
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अच्छा रचना संसार है आपका ...
मित्र मंडली -95
मित्र मंडली -95
rakeshkirachanay.blogspot.com
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सच है कि मिट्टी के दीपों में साथ जीवन के दीप भी जलते रहने चाहिए .... बेटियों का प्रकाश हर आशा का प्रकाश जगमगाना चाहिए ...
बुझते दीप
बुझते दीप
purushottamjeevankalash.blogspot.com
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आँचलिक स्वाद लिए मधुर रचना ...
कान्हा का ज़िक्र ही ख़ुशी का अहसास है ...
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हक़ीक़त लिख दी आपने ...
अक्सर वैसे भी एक समय के बाद इंसान अपने घर में अतिथि हो होता है ... जैसे ये आत्मा शरीर में रहती है अतिथि बन के ...
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