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रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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सोमवार, 29 मई 2017
दोहे "उल्लू का आतंक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दुनियाभर में बहुत हैं, ऐसे जहाँपनाह।
उल्लू की होती जिन्हें, कदम-कदम पर चाह।।
--
उल्लू का होता जहाँ, शासन पर अधिकार।
समझो वहाँ समाज का, होगा बण्टाधार।।
--
खोज रहें हों घूस के, उल्लू जहाँ उपाय।
न्यायालय में फिर कहाँ, होगा पूरा न्याय।।
--
दिनभर जो सोता रहे, जागे पूरी रात।
वो मानव की खोल में, उल्लू की है जात।।
--
जगह-जगह फैला हुआ, उल्लू का आतंक।
कैसा भी तालाब हो, रहता ही है पंक।।
--
सत्ता के मद-मोह में, बनते सभी उलूक।
इसीलिए होता नहीं, अच्छा कभी सुलूक
--
बैठा जिनके शीश पर, उल्लू जी का भूत।
आ जाता है खुद वहाँ, लालच बनकर दूत।।
--
http://uchcharan.blogspot.in/2017/05/blog-post_97.html

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दोहे "उल्लू का आतंक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
दुनियाभर में बहुत हैं, ऐसे जहाँपनाह। उल्लू की होती जिन्हें, कदम-कदम पर चाह।। -- उल्लू का होता जहाँ, शासन पर अधिकार। समझो वहाँ समाज का, होगा बण्टाधार।। -- खोज रहें हों घूस के, उल्लू जहाँ उपाय। न्यायालय में फिर कहाँ, होगा पूरा न्याय।। -- दिनभर जो सोता रहे, जा...

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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (30-05-2017) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in">
"मानहानि कि अपमान में इजाफा" (चर्चा अंक-2636)
</a> पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (30-05-2017) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in">
"मानहानि कि अपमान में इजाफा" (चर्चा अंक-2636)
</a> पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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"मानहानि कि अपमान में इजाफा" (चर्चा अंक-2636)
</a> पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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"मानहानि कि अपमान में इजाफा" (चर्चा अंक-2636)
</a> पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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"मानहानि कि अपमान में इजाफा" (चर्चा अंक-2636)
</a> पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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"मानहानि कि अपमान में इजाफा" (चर्चा अंक-2636)
</a> पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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सोमवार, 29 मई 2017
दोहे "कहते लोग रसाल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

निर्वाचन ने कर दिया, आज आम को खास।
आम-खास के बीच में, अब लेकिन भरी खटास।।

भरी हुई है आम में, जब तक बहुत मिठास।
तब तक दोनों में रहे, नातेदारी खास।।

आम-खास के खेल में, आम गया है हार।
आम सभी की कर रहा, सदियों से मनुहार।।

खाते-खाते आम को, लोग बन गये खास।
मगर आम की बात का, करते सब उपहास।।
--
आम पिलपिले हो भले, देते हैं आनन्द।
उन्हें चूसने में मिले, वाणी को मकरन्द।।
--
अम्बुआ अपने देश के, दुनिया में मशहूर।
लेकिन आज गरीब की, हुए पहुँच से दूर।।
--
मीठा-मीठा आम में, भरा हुआ है माल।
इसीलिए तो आम को, कहते लोग रसाल।।
--
http://uchcharan.blogspot.in/2017/05/blog-post_29.html

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दोहे "कहते लोग रसाल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
निर्वाचन ने कर दिया , आज आम को खास। आम-खास के बीच में , अब लेकिन भरी खटास।। भरी हुई है आम में , जब तक बहुत मिठास। तब तक दोनों में रहे , नातेदारी खास।। आम-खास के
खेल में, आम गया है हार। आम सभी की
कर रहा, सदियों से मनुहार।। खाते-खाते आम को , लोग बन गये खा...
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