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Kapil Choudhary
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मै झारखण्ड के धनबाद से हूं। मुझे देश दुनियाके नये नये जगह घुमना, लोगो से मिलना - जुलना, उनके रहन - सहन,विरासत और परम्परा को जानना ध्येय है।
मै झारखण्ड के धनबाद से हूं। मुझे देश दुनियाके नये नये जगह घुमना, लोगो से मिलना - जुलना, उनके रहन - सहन,विरासत और परम्परा को जानना ध्येय है।

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जरूर पढ़ने वाली किताब - लाल नदी नीले पहाड़
अगर आप भारत के
पूर्वोत्तर राज्यों को जानना चाहते हैं तो आपके लिए बेहतरीन किताब हो सकती है लाल
नदी नीले पहाड़। वैसे हिंदी में पूर्वोत्तर पर बहुत कम किताबें लिखी गई हैं। इन
सबके बीच एक ऐसी समग्र किताब जो आपको पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से परिचित कराए,
इसकी तलाश...
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Research: फेसबुक के इस्तेमाल से बढ़ सकती है आपकी उम्र, जानें कैसे...

फेसबुक का इस्तेमाल ज्यादा दिन जीने में मदद कर सकता है। लेकिन यह तभी संभव है जब आप इसका इस्तेमाल वास्तविक दुनिया के सामाजिक संबंध को बनाए रखने में करेंगे। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया कि सकारात्मक चैट से खुशियां तो बढ़ती ही है, सेहत भी सुधरती है।


http://dhunt.in/1CHpA?ss=gpls
via Dailyhunt
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पिछला लेख मे आपने मेरे असम तक पहुचने का वृत्तांत पढा।कही कोई पर्यटक अथवा घुमक्कड़ जाता है तो मुख्यतः तीन चीज विचार करने योग्य होता है। वहां का भुगोल ,इतिहास और सामाजिक बनावट ।
आइऐ एक नजर असम के इतिहास पर डालते है ।
महाभारत काल मे इस भूभाग को "प्रागज्योतिष" के नाम से जाना जाता था।कहा जाता है कि यहां का राजा भागदत्त ने महाभारत युद्ध मे भाग लिया था।इसके बाद प्रचीन काल मे इस भू भाग को कामरूप के नाम से जाना गया ।तथा इसके बाद मध्य काल मे यह छोटे -छोटे क्षेत्र मे बट कर अलग -अलग शासको ने शासन किया।कामरूप साम्राज्य का पूर्वी क्षेत्र (ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण से मध्य असम) कचारी लोगो का शासन था।ब्रह्मपुत्र नदी से उत्तर और पूर्वी असम मे सूतिया लोगो का शासन था। और कुछ क्षेत्र सूतिया राज्य के पश्चिम मे भूईंया लोगो के नियंत्रण मे था। कचारी और सूतिया राज्य के मध्य के भू - भाग मे बर्मा प्रवासियो के नेता "सुकाफा " ने अहोम साम्राज्य की स्थापना किया। 16वीं शताब्दी मे अहोम साम्राज्य की विस्तारवादी नीति अपनाया। सूतिया राज्य के कुछ क्षेत्र को अपने मे मिलाकर उसे मध्य असम से पूर्व की ओर दबा दिया। और कोच राज्य (कचारी) के कुछ हिस्से को कब्जाकर उसे पश्चिम की ओर धकेल दिया। इस प्रकार अहोम साम्राज्य लगभग असम मे कायम हो गया।अहोम साम्राज्य मे ही श्रीमंत शंकरदेव ने एकशरण धर्म की स्थापना किया जो आज लगभग असम के सभी गांवो, कस्बों और शहरों मे स्थापित नामघर मे उनके रचे ग्रंथ को पूजा जाता है और पाठ किया जाता है। 1671 ई• मे अहोम-मुगल युद्ध जो सरायघाट का युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है ।यह युद्ध 1682 ई• मे मुगल के पराजय के बाद खत्म हुआ। 1824 ई•को आंग्लो - बर्मा युद्ध के बाद औपनवैशिक राज धीरे - धीरे असम मे कायम हुआ। आजादी के बाद 1979 ई• असम आन्दोलन All Assam Studen Union और All Assam Gana Sangram Parisad के नेतृत्व मे सरकार से गैर कानूनी ढंग से बंगलादेश से आये प्रविसियो को पहचान कर बाहर करने और नये प्रवासियो को आने से रोकने की मांग किया।आरम्भ मे यह आन्दोलन अहिंसक था लेकिन बाद मे यह बहुत हिंसक हो गया और नौगांव जिला मे लगभग 3000 ज्यादा (सरकारी आंकडा) वास्तव मे लगभग 10,000 लोगो ने अपनी जान गवाया।यह नरसंहार 1985 ई• मे आन्दोलन के नेता और भारत सरकार के बीच "असम समझौता" होने के बाद बन्द हुआ।

यहां के स्मारको और दर्शनीय स्थलो की फोटो और उनसे सम्बन्धित जानकारी जल्द ही मेरा ब्लाॅग "मेरा नजर मेरी राह" kdchoudhary.blogspot.com मे प्रकाशित होगा।
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असम के जन जीवन से एक मुलाकात ।
मै पहली बार दिसम्बर 2013 मे असम की यात्रा की । असम के एक लड़का से मित्रता हुआ । फिर वापस घर आने के बाद बातचित से मित्रता बढी। और दो वर्ष बाद 27 दिसम्बर 2015 को मै असम के ग्रामीण जन जीवन को देखने उसके घर गया । आप देखिए एक बार मेरे नजर से असम । तो लिंक पर क्लिक कर पढिये पूरा लेख और अपना बहुमूल्य सुझाव जरूर दे ।
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