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हिन्दू परिवार संघठन संस्थ
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चाणक्य नीति : हिंदू धर्म का सही अर्थ,
चाणक्य नीति : हिंदू धर्म का सही अर्थ, जीव मात्र पर दया है, पूरा प्रसंग पढ़कर आपको शाकाहारी होने पर गर्व होगा बहुत पुराणी बात है, एक बार मगध साम्राज्य में अकाल पद गया। मनुष्य तो मनुष्य पशु और पक्षी भी दो समय के भोजन के लिए तरसने लगे, राज्य में चरों ओर त्राहि ...

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पके हुए फल की तीन पहचान होती है…
एक तो वह नर्म हो जाता है, दूसरे वह मीठा हो जाता है, तीसरे उसका रंग बदल जाता है…”
”इसी तरह से परिपक्व व्यक्ति की भी तीन पहचान होती है…
पहली उसमें नम्रता होती है… दूसरे उसकी वाणी मे मिठास होती है और तीसरे उसके चेहरे पर आत्मविश्वास का रंग होता है….. ”



श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत निर्णय
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1) इस वर्ष प्रायः सभी पंचांगों के मतानुसार निर्विवाद रूप से स्मार्त्तमतावलम्बी के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 14/8/2017 को रात्रि अष्टमी तिथि वृष लग्न मध्यरात्रि में मनाया जायेगा ।।

2) वैष्णवमतावलम्बी ( जो कि सूर्य-उदय कालीन अष्टमी को मान्य करते हैं ) के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 15/8/2017 को मनाया जायेगा ।

3) वैष्णवमतावलम्बी (जो कि रोहिणी नक्षत्र को ही मान्य करतें हैं ) के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 16/8/2017 को मनाया जायेगा ।

अतः परमात्मा के सभी देव/देवी-विग्रहों के उपासक स्मार्त्तजन 14/8/2017 को निर्विवाद रूप से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनायें ।

तथा विशेष रूप से किसी वैष्णव सम्प्रदाय से दीक्षित तथा भगवान विष्णु प्रधान विग्रह के ही उपासक वैष्णवजन निज सम्प्रदाय मतानुसार 15/8 अथवा 16/8 को निर्विवाद रूप से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनायें ।
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Shri Krishna Janmashtami 2017 : जानें तिथि, मुहूर्त, नियम और महत्व
  जानें तिथि, मुहूर्त, नियम और महत्व श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्स्व है. जन्माष्टमी भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं. जानिये श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त और नियम ? - शास्त्रों ...

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जम्मू कश्मीर के नागरिक पुरे भारत में घर/ज़मीन खरीद सकता है पर
भारत के अन्य राज्यों के नागरिक जम्मू कश्मीर में घर ज़मीन नहीं खरीद सकते
इसका कारण आर्टिकल 35A
जो के 1954 में नेहरू ने लागु किया जिसका कीमत आजतक देश चूका रहा है
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अद्भुत: जानिए इन 5 भव्य मंदिर के बारे में जो एक ही रात में बनकर तैयार हुए!! आप यकीन करो या न करो पर एक रात में ही बनकर तैयार हुए हैं यह 5 भव्य मंदिर! भारत के कई जाने माने मंदिर ऐसे हैं जिनके निर्माण के इतिहास को जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे क्योंकि यह ऐसे म...

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परशुराम ने किया था शिवलिंग का जलाभिषेक
परशुराम थे पहले कावड़िये? परशुराम ने किया था शिवलिंग का जलाभिषेक--- भगवान परशुराम पहले कावड़िये थे जिन्होंने गंगा जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया। शास्त्रों में इसका उल्लेख मिलता है। परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि कजरी वन में अपनी पत्नी रेणुका के साथ रहते थे।...

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14 Heroes Of Kargil War We Simply Can’t Forget
14 Heroes Of Kargil War We Simply Can’t Forget While wars are never welcome, some wars are inevitable. The Kargil war along the borders of India and Pakistan was one such. It was also one that showed the valour and spirit of Indian soldiers in vivid colours...

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क्या है कारगिल विजय दिवस: एक कहानी वीर जवानों की

आज कारगिल विजय दिवस है. आज भारत कई मुश्किल परेशानियों से गुजर रहा है और ऐसे में लोग 26 जुलाई, 1999 के उस दिन को भूल गए जब कारगिल में देश के वीर सिपाहियों ने पाकिस्तानी सेना को धूल चटा कर “ऑपरेशन विजय” की सफलता का बिगुल बजाया था.

26 जुलाई 1999 का दिन भारतवर्ष के लिए एक ऐसा गौरव लेकर आया, जब हमने सम्पूर्ण विश्व के सामने अपनी विजय का बिगुल बजाया था. इस दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन विजय’ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत भूमि को घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था. इसी की याद में ‘26 जुलाई’ अब हर वर्ष कारगिल दिवस के रूप में मनाया जाता है.
कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि

कारगिल युद्ध जो कारगिल संघर्ष के नाम से भी जाना जाता है, भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में मई के महीने में कश्मीर के कारगिल जिले से प्रारंभ हुआ था.

कारगिल युद्ध की वजह

1999 के शुरुआती महीनों में, जबकि ठंड बहुत ज्यादा थी, पाकिस्तान ने ऑपरेशन बद शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तानी सेना की नॉर्दर्न लाइट इन्फेंट्री की कई बटालियन ने अफगानी लड़ाकुओं और अनियमित सेनाओं को लेकर करगिल और दास क्षेत्र में भारतीय सेनाओं द्वारा छोड़ी गई चौकियों पर कब्जा कर लिया. अनियमित सेना और अफगानी लड़ाकुओं को आगे रखा गया था ताकि यह भ्रम फैलाया जा सके कि इसमें पाकिस्तान की नियमित सेना का कोई हाथ नहीं है. इस तरह पाकिस्तानी सेना भारतीय सेना के चौकियों में वापस आने से पहले ही नैशनल हाईवे 1डी के साथ लगी 150 वर्ग किलोमीटर में फैली ज्यादातर चोटियों पर कब्जा जमाकर बैठ गई थी. यह वह वक्त था जब पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भारत से शांति वार्ताओं का सिलसिला शुरू किए हुए थे और पाकिस्तान के सशस्त्र भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की किसी को आशंका तक न थी.
कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के जरिये घुसपैठ करने की साजिश के पीछे तत्कालीन पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख परवेज मुशर्रफ को जिम्मेदार माना जाता है.
मई 1999 में एक लोकल ग्वाले से मिली सूचना के बाद बटालिक सेक्टर में ले. सौरभ कालिया के पेट्रोल पर हमले ने उस इलाके में घुसपैठियों की मौजूदगी का पता दिया. शुरू में भारतीय सेना ने इन घुसपैठियों को जिहादी समझा और उन्हें खदेड़ने के लिए कम संख्या में अपने सैनिक भेजे, लेकिन प्रतिद्वंद्वियों की ओर से हुए जवाबी हमले और एक के बाद एक कई इलाकों में घुसपैठियों के मौजूद होने की खबर के बाद भारतीय सेना को समझने में देर नहीं लगी कि असल में यह एक योजनाबद्ध ढंग से और बड़े स्तर पर की गई घुसपैठ थी, जिसमें जिहादी नहीं, पाकिस्तानी सेना भी शामिल थी. यह समझ में आते ही भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया, जिसमें 30,000 भारतीय सैनिक शामिल थे. थल सेना के सपोर्ट में भारतीय वायु सेना ने 26 मई को ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ शुरू किया, जबकि जल सेना ने कराची तक पहुंचने वाले समुद्री मार्ग से सप्लाई रोकने के लिए अपने पूर्वी इलाकों के जहाजी बेड़े को अरब सागर में ला खड़ा किया.
कारगिल युद्ध का अंजाम

पूरे दो महीने से ज्यादा चले इस युद्ध (विदेशी मीडिया ने इस युद्ध को सीमा संघर्ष प्रचारित किया था) में भारतीय थलसेना व वायुसेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल पार न करने के आदेश के बावजूद अपनी मातृभूमि में घुसे आक्रमणकारियों को मार भगाया था. आखिरकार 26 जुलाई को आखिरी चोटी पर भी फतह पा ली गई. यही दिन अब ‘करगिल विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.

‘करगिल विजय दिवस’

स्वतंत्रता का अपना ही मूल्य होता है, जो वीरों के रक्त से चुकाया जाता है.इस युद्ध में हमारे लगभग 527 से अधिक वीर योद्धा शहीद व 1300 से ज्यादा घायल हो गए, जिनमें से अधिकांश अपने जीवन के 30 वसंत भी नही देख पाए थे. इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य व बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया, जिसकी सौगन्ध हर सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है.

आज देश के शीर्ष नेता 2 जी और कॉमनवेल्थ जैसे घोटालों करने पर तुले हैं और देश की सुरक्षा में शहीद हुए इन सिपाहियों को भूल बैठे हैं जिनके कारण आज वह सुरक्षित हैं. वैसे इन नेताओं को कोई शर्म भी नहीं है क्यूंकि कारगिल युद्ध शहीदों की मृत्यु के बाद ताबूत घोटाले तक सामने आएं जिनसे साफ हो गया कि इन नेताओं को कोई शर्म नहीं है. लेकिन देश के वीर सिपाहियों पर हमें बहुत नाज है.
Lieutenant Manoj Kumar Pandey, 1/11 Gorkha Rifles, Param Vir Chakra, Posthumous

Captain Vikram Batra, 13 JAK Rifles, Param Vir Chakra, Posthumous

Rifleman Sanjay Kumar, 13 JAK Rifles, Param Vir Chakra

Casualties for both sides were heavy for India and Pakistan. Pakistani claimed to have lost 357 soldiers but was challenged as some claimed that 4,000 Pakistani soldiers were killed in the conflict. According to India, Indian losses stand at 527 soldiers killed, 1,363 wounded, and 1 captured. Finally India lost 500 young brave soldiers with a median age 19 to 35 years. The grim-faced army officers receiving the coffins, draped in the tricolour, the carriage to the army parade ground.Â

Some of the brave Indian Soldiers and heroes who died protecting the Indian nation in the Kargil War:

OFFICERS (INDIAN ARMY)

LT. COL. VISHWANATHAN
LT. COL. VIJAYARAGAHVAN
LT. COL. SACHIN KUMAR
MAJOR AJAY SINGH JASROTIA
MAJOR KAMLESH PATHAK
MAJOR PADHMAPHANI ACHARYA
MAJOR MARRIAPAN SARVANAN
MAJOR RAJESH SINGH ADHIKARI
MAJOR HARMIDER PAL SINGH
MAJOR MANOJ TALWAR
MAJOR VIVEK GUPTA
MAJOR SONAM WANGCHUK
MAJOR AJAY KUMAR
CAPTAIN AMOL KALIA
CAPTAIN KIESHING CLIFFORD NONGRUM
CAPTAIN SUMEET ROY
CAPTAIN AMIT VERMA
CAPTAIN PANNIKOT VISVANATH VIKRAM
CAPTAIN ANUJ NAYYAR
CAPTAIN VIKRAM BATRA
DY. COMMANDENT JOY LAL(BSF)
CAPTAIN JINTU GOGOI
LT. VIJAYANT THAPER
LT. N. KENGURUSE
LT. HANIF-U-DIN
LT. SUARAV KALIA
LT. AMIT BHARDWAJ
LT. BALWAN SINGH
LT. MANOJ KUMAR PANDEY

OFFICERS (INDIAN AIR FORCE)
SQUADREN LEADER AJAY AHUJA
SQUADREN LEADER RAJIV PUNDIR
FLT. LT. S MUHILAN
FLT. LT. NACHIKETA RAO
SEARGENT PVNR PRASAD
SERGEANT RAJ KISHORE SAHU

JUNIOR COMMISSIONED OFFICERS (INDIAN ARMY)
Naik Chaman Singh
Naik R Kamraj
Naik Kudeep Singh
Naik Birendra Singh Lamba
Naik Jasvir Singh
Naik Surendra Pal
Naik Rajkumar Punia
Naik S N Malik
Naik Surjeet Singh
Naik Jugal Kishore
Naik Suchha Singh
Naik Sumer Singh Rathod
Naik Surendra Singh
Naik Kishen Lal
Naik Rampal Singh
Naik Ganesh Yadav
Havaldar Major Yashvir Singh
Lance Naik Ahmed Ali
Lance Naik Gulam Mohammed Khan
Lance Naik M R Sahu
Lance Naik Satpal Singh
Lance Naik Shatrugan singh
Lance Naik Shyam Singh
Lance Naik Vijay Singh
Naik Degender Kumar
Havaldar Baldev Raj
Havaldar Jai Prakash Singh
Havaldar Mahavir Singh
Havaldar Mani Ram
Havaldar Rajbir Singh
Havaldar Satbir Singh
Havaldar Abdul Karim
Havaldar Daler Singh Bahu
Subedar Bhanwar Singh Rathod
Rifleman Linkon Pradhan
Rifleman Bachhan Singh
Rifleman Satbir Singh
Rifleman Jagmal Singh
Rifleman Rattan Chand
Rifleman Mohamad Farid
Rifleman Mohamad Aslam
Rifleman Yogendra Singh
Rifleman Sanjay Kumar

SEPOYS (INDIAN ARMY)
Grenadier Manohar Singh
Gunner Uddabh Das
Sepoy Amardeep Singh
Sepoy Vijay Pal Singh
Sepoy Virendra Kumar
Sepoy Yashwant Singh
Sepoy Santokh Singh
Sepoy Dinesh Bhai
Sepoy Harendragiri Goswami
Sepoy Amrish Pal Bangi
Constable Suraj Bhan (BSF)
Sepoy Lakhbir Singh
Sepoy Bajindra Singh
Sepoy Deep Chand
Sepoy Dondibha Desai
Sepoy Keolanand Dwivedi
Sepoy Harjindra Singh
Sepoy Jaswant Singh
Sepoy Jaswinder Singh
Sepoy Lal Singh
Sepoy Rakesh Kumar(RAJ)
Sepoy Rakesh Kumar (Dogra)
Sepoy Raswinder Singh
Sepoy Bir Singh
Sepoy Ashok Kumar
Tomar
Sepoy R. Selvakumar

So after 10 years of Kargil, we take a moment to remember the brave soldiers and Heroes who fought the Kargil War and died for the nation.
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आज हम उन्हीं में से आज
भारत मंदिरों का देश है, हमारे देश में हर गली-मोहल्ले में एक ना एक मंदिर देखने को मिल ही जाता है। मंदिर भगवान की पूजा-स्थली को कहते हैं जहां आकर के लोग अपने आराध्य देवताओं की पूजा करते हैं। हमारे देश में बहुत से प्राचीन मंदिर हैं जो अपने आप में महान रहस्यमयी...

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बंगलुरु में मेट्रो स्टेशन पर हिंदी साइन बोर्ड को रक्षणा संगठन ने मिटाया
बंगलुरु में मेट्रो स्टेशन पर हिंदी साइन बोर्ड को रक्षणा संगठन ने मिटाया कर्नाटक में इन दिनों का अलग झंडे की मांग चरम पर है, लेकिन इसके बीच हिंदी भाषा के प्रयोग के खिलाफ प्रदर्शन फिर तेज हो गया है. कर्नाटक रक्षणा संगठन के कुछ सदस्यों ने बंगलुरु मेट्रो स्टेशन...
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