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Lalit Jain
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Lalit Jain

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Jnu में पड़ने वाले प्रत्येक छात्र पर सब्सिडी ₹293192 और सियाचिन पर जवान को महज़ ₹21000 हार्डशिप अलाउंस मतलब साफ़ है ये देशद्रोही हमारे टैक्स के पैसे पर पढ़ाई का नाटक कर देश तोड़ने की साज़िश रच रहे हैं।। स्टूडेंट्स यूनियन के अध्य्क्ष का सरोकार विश्वविद्यालय के छात्रों के हित के मामले उठाना है ना की आतंकीयो और कश्मीर का मुद्दा उठाना।।जिस आतंकी को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दोषी करार कर दिया माननीय राष्ट्रपती जी द्वारा उसकी दया याचिका ठुकरा देने के बाद फाँसी हुई हो इस सब को जानते हुए संविधान के खिलाफ जाकर आतंकी के लिए आवाज़ उठाना संविधान को खुली चुनौती देना है।। जिस प्रकार ये आतंकीयो के लिए आवाज़ उठा रहे है शक होता है की वो आतंकी इनके घर आया था या इन देशद्रोहीयों की माँ उधर गई थी।। #ShutDownJNU....JNU जैसे देशद्रोही ज़हर उगलने वाले "अड्डे" हमारे टैक्स के पैसों पर पल रहे हैं... इसलिए.. १) तत्काल प्रभाव से इन विश्वविद्यालयों में जारी "मुफ्तखोरी" और "हरामखोरी" को बन्द किया जाए... कोई फेलोशिप नहीं, कोई ग्रांट नहीं, कोई रियायत नहीं.... पूरी फीस भरो और पढ़ाई करो. २) इस विश्वविद्यालय को दिल्ली से बाहर विस्थापित किया जाए... ३) इस विवि के सभी होस्टल तत्काल प्रभाव से बन्द किए जाएँ..... सरकार को पूरी ताकत से इन देश द्रोहियों को कुचलाना चाहिए..... Just Crack Down These Traitors..... अंत में शहीदों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि...........अमर रहे वो हर वीर बलिदानी जिसने मातृभूमि की रक्षा हेतु प्राण न्योछावर करने की ठानी।। जाग उठो ए हिन्दुस्तानी, जग उठो ए हिन्दुस्तानी सीमा पर जो सपूत देता प्राणों की कुर्बानी अमर रहे वो हर योद्धा वीर बलिदानी।। तिरंगे और वतन की रक्षा को देता कुर्बानी सर पर बाँध कफ़न, हर पल जान हथेली पर रख कर चलता है,हर पल मौत से दो दो हाथ है करता,यह सोच कर की खुश रहे हर हिन्दुस्तानी।। वहीं देश में वतन विरोधी नारे लगते हैं क्या ये नहीं है शहादत से बेईमानी वतन विरोधी नारे लगाने वालों क्या डूब मरने को नहीं मिलता तुम्हें चुल्लू भर पानी जाग उठो हिन्दुस्तानी,अमर रहे वीर बलिदानी।। आतंकियों को मौत के सौदागरों को शहीद का दर्जा देता,क्यों शहीदों की मर्यादा का उलंघन करते हो।। क्यों अपनी माँ के दूध को लजाते हो आतंकियों को शहीद कहकर सच्चे शहीदों को अपमानित करते हो असली शहादत पर आघात कठोर करते हो।। सीमा पर दिन रात खड़ा जवान मुस्तैदी से वतन की रक्षा करता है और वक्त आने पर भारत माता के चरणों अपने प्राण अर्पण करता है।। वातानुकूलित, सुरक्षित घर में बैठा आमिर डरता है,और देश को असुरक्षित कह मातृभूमि की शान को कलंकित करता है।। जहाँ हर पल मौत का खतरा रहता है फिर भी भारत माता के मुकुट की रक्षा वीर सपूत करता है और तू घर में बैठा डरता है।। पूरब से पश्चिम उत्तर में कश्मीर की घाटी से लेकर सुदूर दक्षिण के सागर तक हर पल सैनिक देश की रक्षा करता है इसी कारण देश का नागरिक स्वछंद विचरण करता है।। वीर सपूतों की निष्ठा,साहस और बलिदान को पूरा हिन्दुस्तान हाथ जोड़ नमन करता है।। अमर रहे हर वो वीर बलिदानी जिसने मातृभूमि की रक्षा हेतु प्राण बलिदान करने की है ठानी।। जाग उठो ए हिन्दुस्तानी जाग उठो ए हिन्दुस्तानी।। अमर रहे हर बलिदानी अमर रहे हर बलिदानी।। 🏻🏻🏻🏻🏻🏻🏻🏻
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" दोस्तों पिछले 65 वर्षों से देश में दीमक और चूहों ने इस देश में किस प्रकार अपना वर्चत्व बना रखा था , ये अब देश के सामने आ रहा है .....किस प्रकार साहित्यकार का चेहरा या आतंकवाद पर विपक्षी पार्टियों की मौन सहमति हो , JNU में हुई देशद्रोही गतिविधया हो या कुछ फ़िल्मी कलाकारों की टैक्स चोरी पर सरकार के खिलाफ वयान "''''''

इन लोगों को बस मनमोहन सिंह की तरह कठपुतली प्रधानमंत्री चाहिए था , जो देश को गर्त में जाता हुआ देखता रहे ....जय हिन्द
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Lalit Jain

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ख़तरे मे हैं देश...
अब आप बतायें कि एक पढ़ा लिखा आदमी केवल सत्ता के लालच में एक देशद्रोही कांग्रेस परिवार की पार्टी का हित साधने में मगन है और हम हैं कि उन सबको बार-बार जिता कर संसद भेज देते हैं...

मेरा प्रश्न इस देश की जनता से है जो अपने को पढ़ा-लिखा और समझदार बोलती है:
कब तक करते रहेंगे यह गलती, कब लेंगे सबक ?
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Lalit Jain

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संवाद सेवा द्वारा साभार
डीएम चन्द्रकला के साथ जबरन सेलफ़ी लेने पर मुस्लिम युवक को जेल भेजने पर। पत्रकारो ने डीएम से पूछा की युवक के मुस्लिम होने के कारण आपने युवक को जेल भेजा।
तो डीएम चन्द्रकला ने कहा आपके बहनो की फोटो खिचवाऊँ क्या उसके साथ?
ये है जवाब दलाल पत्रकारो को।

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Lalit Jain

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मित्रों कल "ताल ठोक के" कार्यक्रम मे बिट्टा साहब ने सारे गद्दारों कि बोलती बंद कर दी और ये खुला चैलेंज किया कि अगर १५ से २० दिन के अंदर सरकार ने देश द्रोहीयों के खिलाफ कारवाई नही कि तो वो सारे देश के शहीदों कि परिवार और बच्चों को लेकर जेएनयू में बैठ जाएँगे।
दिल जीत लिया बिट्टा जी ने।
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Lalit Jain

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काम-रेड कथा

अभी पुष्पा को कालेज आये चार ही दिन हुए थे कि उसकी मुलाक़ात एक क्रांतिकारी से हो गयी. लम्बी कद का एक सांवला सा लौंडा...ब्रांडेड जीन्स पर फटा हुआ कुरता पहने क्रान्ति की बोझ में इतना दबा था कि उसे दूर से देखने पर ही यकीन हो जाता था ..इसे नहाये मात्र सात दिन हुये हैं..... .बराबर उसके शरीर से क्रांति की गन्ध आती रहती थी... लाल गमछे के साथ झोला लटकाये सिगरेट फूंक कर क्रांति कर ही रहा था तब तक....
पुष्पा ने कहा..."नमस्ते भैया.. ..

"हुंह ये संघी हिप्पोक्रेसी."..काहें का भइया और काहें का नमस्ते?..हम इसी के खिलाफ तो लड़ रहे हैं...प्रगतिशीलता की लड़ाई...ये घीसे पीटे संस्कार...ये मानसिक गुलामी के सिवाय कुछ नहीं.....आज से सिर्फ लाल सलाम साथी कहना।

पुष्पा ने सकुचाते हुए पूछा.."आप क्या करते हैं ..क्रांतिकारी ने कहा.."हम क्रांति करते हैं....जल, जंगल, जमीन की लड़ाई लड़ते हैं.. शोषितों वंचितों की आवाज उठातें हैं..
क्या तुम मेरे साथ क्रांति करोगी?
पुष्पा ने सर झुकाया और धीरे से कहा...."नहीं मैं यहाँ पढ़ने आई हूँ...कितने अरमानों से मेरे किसान पिता ने मुझे यहाँ भेजा है..पढ़ लिखकर कुछ बन जाऊं तो समाज सेवा मेरा भी सपना है.....".

क्रांतिकारी ने सिगरेट जलाई और बेतरतीब दाढ़ी को खुजाते हुए कहा....यही बात मार्क्स सोचे होते...लेनिन और माओ सोचे होते....कामरेड चे-ग्वेरा....? बोलो?
तुमने पाश की वो कविता पढ़ी है...
"सबसे खतरनाक होता है मुर्दा शान्ति से भर जाना"
तुम ज़िंदा हो पुष्पा. मुर्दा मत बनों....क्रांति को तुम्हारी जरूरत है....लो ये सिगरेट पियो...."
पुष्पा ने कहा..."सिगरेट से क्रांति कैसे होगी..?
क्रांतिकारी ने कहा.."याद करो माओ और चे को वो सिगरेट पीते थे...और जब लड़का पी सकता है तो लड़की क्यों नहीं....हम इसी की तो लड़ाई लड़ रहे हैं..." यही तो साम्यवाद है ।

और सुनों कल हमारे प्रखर नेता कामरेड फलाना आ रहे हैं....हम उनका भाषण सुनेंगे..और अपने आदिवासी साथियों के विद्रोह को मजबूत करेंगे...लाल सलाम.चे.मावो..लेनिन.."
पुष्पा ने कहा..."लेकिन ये तो सरासर अन्याय है...कामरेड फलाना के लड़के तो अमेरिका में पढ़ते हैं...वो एसी कमरे में बिसलेरी पीते हुए जल जंगल जमीन पर लेक्चर देते हैं...और वो चाहते हैं की कुछ लोग अपना सब कुछ छोड़कर नक्सली बन जाएँ और बन्दूक के बल पर दिल्ली पर अपना अधिकार कर लें...ये क्या पागलपन है..उनके अपने लड़के क्यों नहीं लड़ते ये लड़ाई. हमें क्यों लड़ा रहे.? क्या यही क्रांति है"?

क्रांतिकारी को गुस्सा आया...उसने कहा.."तुम पागल हो..जाहिल लड़की..तुम्हें ये सब बिलकुल समझ नहीं आएगा...तुमने न अभी दास कैपिटल पढ़ा है न कम्युनिस्ट मैनूफेस्टो...न तुम अभी साम्यवाद को ठीक से जानती हो न पूंजीवाद को..."
पुष्पा ने प्रतिवाद करते हुए कहा...."लेकिन इतना जरूर जानती हूँ कामरेड कि मार्क्सवाद शुद्ध विचार नही है..इसमें मैन्यूफैक्चरिंग फॉल्ट है।

यह हीगल के द्वन्दवाद, इंग्लैण्ड के पूँजीवाद और फ्रांस के समाजवाद का मिला जुला रायता है.....जो न ही भारतीय हित में है न भारतीय जनमानस से मैच करता है।.
क्रांतिकारी ने तीसरी सिगरेट जलाई...और हंसते हुए कहा... "ये बुजुर्वा हिप्पोक्रेसी.. तुम कुछ नहीं जानती... छोड़ो...तुम्हें अभी और पढ़ने की जरूरत है...कल आवो हम फैज़ का वो गीत गाएंगे....
"आई विल फाइट कामरेड"
"हम लड़ेंगे साथी..उदास मौसम के खिलाफ"
अगले दिन उदास मौसम के खिलाफ खूब लड़ाई हुई...पोस्टर बैनर नारे लगे...साथ जनगीत डफली बजाकर गाया गया और क्रांति साइलेंट मोड में चली गयी.. तब तक दारु की बोतलें खुल चूकीं थीं.....
क्रांतिकारी ने कहा..."पुष्पा ये तुम्हारा नाम बड़ा कम्युनल लगता है..पुष्पा पांडे....नाम से मनुवाद की बू आती है...कुछ प्रोग्रेसिव नाम होना चाहिए..... आई थिंक.. कामरेड पूसी सटीक रहेगा।

पुष्पा अपना कामरेडी नामकरण संस्कार सुनकर हंस ही रही थी तब तक क्रान्तिकारी ने दारु की गिलास को आगे कर दिया....
पुष्पा ने दूर हटते हुए कहा...."नहीं...ये नहीं..हो सकता।"
क्रान्तिकारी ने कहा..."तुम पागल हो..क्रान्ति का रास्ता दारु से होकर जाता है..याद करो माओ लेनिन और चे को...सबने लेने के बाद ही क्रांति किया है.."
पुष्पा ने कहा..लेकिन दारु तो ये अमेरिकन लग रही...हम अभी कुछ देर पहले अमेरिका को जी भरके गरिया रहे थे......

क्रांतिकारी ने गिलास मुंह के पास सटाकर काजू का नमकीन उठाया और कहा..."अरे वो सब छोड़ो पागल..समय नहीं ..क्रान्ति करो. दुनिया को तेरी जरूरत है....याद करो चे को माओ को.....हाय मार्क्स।
पुष्पा का सारा विरोध मार्क्स लेनिन और साम्यवाद के मोटे मोटे सूत्रों के बोझ तले दब गया.....वो कुछ ही समय बाद नशे में थी....
क्रांतिकारी ने क्रांति के अगले सोपान पर जाकर कहा..."कामरेड पुसी ..अपनी ब्रा खोल दो.."
पुष्पा ने कहा.."इससे क्या होगा?...

क्रांतिकारी ने उसका हाथ दबाते हुए कहा.. "अरे तुम महसूस करो की तुम आजाद हो..ये गुलामी का प्रतीक है..ये पितृसत्ता के खिलाफ तुम्हारे विरोध का तरीका है..तुम नहीं जानती सैकड़ों सालों से पुरुषों ने स्त्रियों का शोषण किया है.....हम जल्द ही एक प्रोटेस्ट करने वाले हैं...."फिलिंग फ्रिडम थ्रो ब्रा" जिसमें लड़कियां कैम्पस में बिना ब्रा पहने घूमेंगी।"
पुष्पा अकबका गई..."ये सब क्या बकवास है कामरेड..ब्रा न पहनने से आजादी का क्या रिश्ता"?

क्रांतिकारी ने कहा....'यही तो स्त्री सशक्तिकरण है कामरेड पुसी...देह की आजादी...जब पुरुष कई स्त्रियों को भोग सकता है...तो स्त्री क्यों नहीं....क्या तुम उन सभी शोषित स्त्रियों का बदला लेना चाहोगी?"
पुष्पा ने पूछा...."हाँ लेकिन कैसे"?...
क्रान्तिकारी ने कहा..."देखो जैसे पुरुष किसी स्त्री को भोगकर छोड़ देता है...वैसे तुम भी किसी पुरुष को भोगकर छोड़ दो...."

पुष्पा को नशा चढ़ गया था...
"कैसे बदला लूँ.. कामरेड...?
क्रांतिकारी की बांछें खिल गयीं..उसने झट से कहा..."अरे मैं हूँ न..पुरुष का प्रतीक मुझे मान लो..मुझे भोगो कामरेड और हजारों सालों से शोषण का शिकार हो रही स्त्री का बदला लो।" बदला लो कामरेड.....उस दैत्य पुरुष की छाती पर चढ़कर बदला लो।"
कहतें हैं फिर रात भर लाल सलाम और क्रान्ति के साथ बिस्तर पर स्त्री सशक्तिकरण का दौर चला..और कामरेड ने दास कैपिटल को किनारे रखकर कामसूत्र का गहन अध्ययन किया।

अध्ययन के बाद सुबह पुष्पा उठी तो...आँखों में आंशू थे..क्या करने आई थी ये क्या करने लगी...गरीब माँ बाप का चेहरा याद आया...हाय.....कुछ दिन से कितनी चिड़चिड़ी होती जा रही...चेहरा इतना मुरझाया सा...अस्तित्व की हर चीज से नफरत होती जा रही. नकारात्मक बातें ही हर पल दिमाग में आती है.... हर पल एक द्वन्द सा बना रहता है...."अरे क्या पुरुषों की तरह काम करने से स्त्री सशक्तिकरण होगा की स्त्री को हर जगह शिक्षा और रोजगार के उचित अवसर देकर.....पुष्पा का द्वन्द जारी था...

उसने देखा क्रांतिकारी दूर खड़ा होकर गाँजा फूंक रहा है....
पुष्पा ने कहा. "सुनों मुझे मन्दिर जाने का मन कर रहा है.....अजीब सी बेचैनी हो रही है...लग रहा पागल हो जाउंगी....."
क्रांतिकारी ने गाँजा फूंकते हुए कहा.."पागल हो गयी हो..क्या तुम नहीं जानती की धर्म अफीम है"?
जल्दी से तैयार हो जा..हमारे कामरेड साथी आज हमारा इन्तजार कर रहे...हम आज संघियों के सामने ही "किस आफ लव करेंगे"...
शाम को याकूब, इशरत और अफजल के समर्थन में एक कैंडील मार्च निकालेंगे...

पुष्पा ने कहा..."इससे क्या होगा ये सब तो आतंकी हैं. देशद्रोही....सैकड़ों बेगुनाहों को हत्या की है...कितनों का सिंदूर उजाड़ा है...कितनों का अनाथ किया है.....
क्रांतिकारी ने कहा..."तुम पागल हो लड़की....
पुष्पा जोर से रोई...."नहिं मुझे नहीं जाना... मुझे आज शाम दुर्गा जी के मन्दिर जाना है...मुझे नहीं करनी क्रांति...मैं पढ़ने आई हूँ यहाँ...मेरे माँ बाप क्या क्या सपने देखें हैं मेरे लिए.....नहीं ये सब हमसे न होगा...."
क्रांतिकारी ने पुष्पा के चेहरे को हाथ में लेकर कहा....."तुमको हमसे प्रेम नहीं.?...गर है तो ये सब बकवास सोचना छोड़ो....." याद करो मार्क्स और चे के चेहरे को...सोचो जरा क्या वो परेशानियों के आगे घुटने टेक दिए...नहीं...उन्होंने क्रान्ति किया। आई विल फाइट कामरेड....

पुष्पा रोइ...लेकिन हम किससे फाइट कर रहे हैं..?
क्रांतिकारी ने आवाज तेज की और कहा ये सोचने का समय नहीं.....हम आज शाम को ही महिषासुर की पूजा करेंगे...और रात को बीफ पार्टी करके मनुवाद की ऐसी की तैसी कर देंगे.. फिर बाद में दारु के साथ चरस गाँजा की भी व्यवस्था है।
पुष्पा को गुस्सा आया..चेहरा तमतमाकर बोली...."अरे जब दुर्गा जी को मिथकीय कपोल कल्पना मानते हो तो महिषासुर की पूजा क्यों....?

क्रान्तिकारी ने कहा. अब ये समझाने का बिलकुल वक्त नहीं...तुम चलो...मुझसे थोड़ा भी प्रेम है तो चलों..हाय चे हाय मावो...हाय क्रांति...".
इस तरह से क्रांति की विधिवत शुरुवात हुई.... धीरे धीरे कुछ दिन लगातार दिन में क्रांति और रात में बिस्तर पर क्रांति होती रही...पुष्पा अब सर्टिफाइड क्रांतिकारी हो गयी थी......पढ़ाई लिखाई छोड़कर सब कुछ करने लगी थी...कमरे की दीवाल पर दुर्गा जी हनुमान जी की जगह चे और मावो थे....अगरबत्ती की जगह..सिगरेट..और गर्भ निरोधक के साथ सर दर्द और नींद की गोलियां....अब पुष्पा के सर पे क्रांति का नशा हमेशा सवार रहता...

कुछ दिन बीते. एक साँझ की बात है पुष्पा ने अपने क्रांतिकारी से कहा..."सुनो क्रांतिकारी..तुम अपने बच्चे के पापा बनने वाले हो...आवो हम अब शादी कर लें?
कहते हैं तब क्रांतिकारी की हवा निकल गयी...
मैंनफोर्स और मूड्स के बिज्ञापनों से विश्वास उठ गया..उसने जोर से कहा.."नहीं पुष्पा...कैसे शादी होगी..मेरे घर वाले इसे स्वीकार नहीं करेंगे....हमारी जाति और रहन सहन सब अलग है......यार सेक्स अलग बात है और शादी वादी वही बुजुर्वा हिप्पोक्रेसी....मुझे ये सब पसन्द नहीं..हम इसी के खिलाफ तो लड़ रहे हैं। ?"

पुष्पा तेज तेज रोने लगी.... वो नफरत और प्रतिशोध से भर गयी...लेकिन अब वो वहां खड़ी थी जहाँ से पीछे लौटना आसान न था।
कहतें हैं क्रांति के पैदा होने से पहले क्रांतिकारी पुष्पा को छोड़कर भाग खड़ा हुआ और क्रान्ति गर्भपात का शिकार हो गयी।
लेकिन इधर पता चला है की क्रांतिकारी अपनी जाति में विवाह करके एक ऊँचे विश्वविद्यालय में पढ़ा रहा।
और कामरेड पुष्पा अवसाद के हिमालय पर खड़े होकर सार्वजनिक गर्भपात के दर्द से उबरने के बाद जोर से नारा लगा रही..

"भारत की बर्बादी तक जंग चलेगी जंग चलेगी
काश्मीर की आजादी तक जंग चलेगी जंग चलेगी।"
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Lalit Jain

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MCX / NSE F&O IntraDay & Positional Trend - 21Nov2012
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