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अनूप शुक्ला
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त्योहार बाजार की गोद में बैठकर आता है
अभी-अभी पैदा हुआ बच्चा झालर बनाने में लग गया। कूदते हुए कहीं चोट लग जाये तो कौन जिम्मेदार होगा। बालश्रम का सरासर उल्लंघन है यह कानून। दीपावली एक बार फ़िर आ गई ! पूरे फ़ौज फ़ाटे के साथ आई है। साथ में बाजार को लाई है। आजकल हर त्योहार बाजार के साथ ही आता है। हर त...
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आपका क्या होगा जनाबे अली
तीन मीटर दूरी पर रखे रेडियो पर यह गाना बज रहा है। बार बार कह रहा है -'आप का क्या होगा जनाबे अली।' जैसे हमी से सवाल कर रहा हो। मन किया उठकर जाएं और उमेठ के बंद कर दें कहते हुए -'बड़ा आया पूछने वाला -आप का क्या होगा जनाबे अली।' लेकिन आलस्य ने बरज दिया। आलस्य क...
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शान्तिलाल जैन और मार्जिन में पिटता आदमी
"मार्जिन में रहना, मार्जिन में रखना, मार्जिन से डरना और मार्जिन में पिटना हमारी मजबूरी है।" -शान्तिलाल जैन शान्तिलाल जैन जी के तीसरे व्यंग्य संग्रह ’मार्जिन में पिटता आदमी’ के लेख की ये पंक्तियां देश की आबादी के बड़े हिस्से की कहानी कहता है जो पूरी दुनिया पर...
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कानपुर से भोपाल
सूरज भाई ने भोपाल में लपक कर हाथ मिलाया कल सुबह भोपाल पहुंचे। ब्राह्ममूहुर्त और गजरदम से भी पहले। गाड़ी को नौ बजे पहुंचना था। लेकिन मुंडी पर 'दुर्घटना से देर भली' का झंडा लहराते हुए मुई 3 बजे पहुंची। इस बीच हर घण्टे घंटे भर लेट होती रही। हम कई बार सोये। हर ब...
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नानी से मुलाकात
नानी के साथ कमलेश पाण्डेय, आलोक पुराणिक और अनूप शुक्ल  —  Kamlesh Pandey  के साथ. सबेरे कमरे से निकलते ही ओला खरीद लिए। ठहराव स्थल से भोपाल ताल तक के 155/- रुपये धरा लिए अगले ने। बैठते ही अपन ने पूछा तो ड्राइवर बाबू बोले -'रात भर चलाई है टैक्सी। नींद आ रही ...
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इंसानियत का रिश्ता
बाब-ए-सिकंदर बेगम भोपाल के ताल के सामने एक बड़ी इमारत दिखी। दिखी तो गए साल भी थी लेकिन तब केवल बाहर से देख लिए। इस बार मन किया अंदर से भी देखा जाए। इमारत की सीढ़ियां चढ़ते हुए लगा कि कोई मस्जिद है। मन मे आया कि कहीं गलत तरीके से घुसने के नाम पर दौड़ा न लिए जाएं...
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कानपुर में सीधा कोई नहीं चलता
Add caption सबेरे उतरे स्टेशन पर। भोपाल में आधे घण्टे लेट चली पुष्पक कानपुर में बीस मिनट पहले पहुँच गयी। भागी होगी सरपट अंधेरे में। झांसी तक ही राइट टाइम हो गयी। इससे हमको यह शिक्षा मिलती है कि शुरू में पिछड़ जाने पर भी लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। पुष्पक ज...
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लगता है गंगा मैया नाराज हैं
पानी में भीगे कपड़ों संग खुद भी सूखती महिला। साथ में सवाल पूछते लोग। 'आज लागत है गंगा मैया नाराज हैं। तीन लोगन मां केहू के कुछ नहीं मिल रहा। एक्को सिक्का तक नहीं मिला।' भैरो घाट की सीढ़ियों पर बैठे गंगा जी में गरदन तक घुसे तीन लोग गंगा के तल से हाथ से खोद कर ...
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जिंदगी के स्कूल में पढाई की फ़ीस नहीं पडती
जिंदगी का स्कूल रोज खुल रहता है, कभी छुट्टी नहीं होती यहां सुबह सूरज भाई उगे। देखते-देखते जियो के मुफ़्तिया नेट कनेक्शन की तरह हर तरफ़ उनका जलवा फ़ैल गया। इतवार की तीसरी चाय ठिकाने लगाकर हम भी निकल लिये। यह निकलना ऐसा ही थी जैसे चुनाव के मौके पर अपनी पार्टी मे...
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सुभाष चन्द्र बोस उग्र राष्ट्रवादी और समाजवादी थे-परसाई
प्रश्न: नेताजी सुभाष चन्द्र बोस महात्मा गांधी के साथ अन्य नेताओं की तरह मिलकर कार्य नहीं कर सके। ऐसा क्यों हुआ? बिलासपुर से रामकिशोर ताम्रकार , दिनांक १४ अप्रैल, १९८५ उत्तर: गांधी जी हर चीज को नैतिक आधार देते थे। अहिंसा का रास्ता उनके लिये नैतिकता का रास्ता...
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