Profile cover photo
Profile photo
अनूप शुक्ला
2,309 followers -
अनूप शुक्ल
अनूप शुक्ल

2,309 followers
About
Posts

Post has attachment
बापू
हिन्दुस्तान में ‘बापू’ घर-परिवार के बड़े-बुजुर्गों को कहा जाता है। लेकिन गांधी जी को ’बापू’ की उपाधि आउट ऑफ़ टर्न प्रोमोशन की तरह 49 साल की उमर में ही मिल गयी जब उन्होंने चम्पारन सत्याग्रह का नेतृत्व किया। किसी को बापू कहने मतलब यही है कि अब उसको चुपचाप सब का...
बापू
बापू
fursatiya.blogspot.com
Add a comment...

Post has attachment
बेवकूफ़ी का सौंदर्य के कुछ पंच
1. शब्द समुदाय में लिंग के आधार पर व्यवहार भेद नही होता। 2. खेलों में फ़िक्सिंग रोकनी है तो खिलाड़ियों को फ़िक्सिंग न करने के लिये ’नॅान फ़िक्सिंग एलाउंस’ (नफ़ा) मिलना चाहिये। 3. सरकार हर विभाग के लिये, हर मंत्री के लिये, हर पद के लिये उसकी घोटाला क्षमता के अनुस...
Add a comment...

Post has attachment
पुल भी मस्तिया रहा था सुबह-सुबह।
सबेरे निकले। आसमान सूरज की अगवानी में अपने एक हिस्से में लाल कालीन बिछा रहा था। कालीन बिछते-बिछते मटमैली हो गई थी। घिस गई थी। एक ही चीज, बहाना, अदा प्रयोग करते जाने में खत्तम होती जाती है। चाय की दुकान पर पांच साइकिलिये रुके। चाय लेकर बिस्कुट डुबो-डुबोकर खा...
Add a comment...

Post has attachment
विकास हो रहा है, धड़ल्ले से हो रहा है
शाम को गंगापुल से पैदल वापस लौट रहे थे। सामने से टेम्पो, मोटरसाइकिल धड़धड़ाते चले आ रहे थे। लगता कि बस चले तो हमारे ऊपर से निकल जाएं। पुल पर बत्तियां गोल। अंधेरा। खम्भे पर बल्ब लगे थे लेकिन फ्यूज। पुल भी तो पुराना है। बड़ी गाडियों के लिए बंद हो गया है। बुज़ुर्ग...
Add a comment...

Post has attachment
गुडमार्निंग का फ़ैशन
सबेरे टहलने का मजा ही और है। यह बात आज साइकिलियाते हुये फ़िर महसूस हुई। घर से निकलने के लिये जैसे ही गेट खोला वैसे ही बन्दर बाबा बाउंड्री की दीवार पर दौड़ते हुये आये और गेट से फ़लांगते हुये दूसरी तरफ़ फ़ूट लिये। यह बन्दरकूद वे बाद में भी कर सकते थे। हमारे निकलते...
Add a comment...

Post has attachment
बाजार पैसे का मायका होता है
बहुत दिन बाद आज शाम को निकले साइकिलियाने। निकलते ही लोगों के ठट्ठ के ठट्ठ अड़ गये सामने। गोया कह रहे हों सड़क पार न करने देंगे। ठहरे-ठहरे चलते हुये सड़क पार की। बचते-बचते। सड़क , आप ये समझ लो कि, देश की आम जनता सरीखी चित्त लेटी थी। उस पर वाहन साझा सरकार में अध्...
Add a comment...

Post has attachment
असली नाम बताएं कि नकली
सबेरे निकले । नजारा नया था। आज बन्दर धमाचौकड़ी नहीं मचा रहे थे। बन्दरहाव से मुक्त बगीचा, सड़क और आसपास। बंदर लगता है पटाखे के डर से इधर-उधर हो गए थे। बंदरों की जगह पर कुत्तों ने कब्जा कर लिया था। बन्धरहाव की जगह कुकरहाव जारी था। बंदरों की जगह कुत्तों के कब्जे...
Add a comment...

Post has attachment
वो दारू नहीं नहीं गांजा पीते हैं
इसके पहले का किस्सा बांचने के लिये इधर पहुंचे  https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10212805174417651 शुक्लागंज पुल पार करके बाईं तरफ मुड़े। एक बार फिर बायें मुड़े। आगे सड़क किनारे ही रास्ता बना है। नीचे उतरने का। फिसलपट्टी से खड़ंजे के रास्ते पर साइकि...
Add a comment...

Post has attachment
अबे लंबा दांव लगाओ यार
पिछली पोस्ट बांचने के लिये इधर आइये https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10212805567627481 गंगा किनारे से लौटते हुये कटे हुये बाल और दीगर गंदगी जगह-जगह दिखी। गंदगी को निपटाने के लिये सुअर भी लोट-पोट करते दिखे। जगह-जगह लोग वह काम करते हुये दिखे जिसक...
Add a comment...

Post has attachment
अखिल अचराचर विश्व के लिये चाय
इसके पहले का किस्सा बांचने के लिये इधर आयें https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10212806308446001 गंगा तट से चले तो जगह पड़ी जहां शाम को बाजार लगता है। दुकानों वाले प्लेटफ़ार्म के बीच की जगह को पिच की तरह इस्तेमाल करते हुये दो लड़के क्रिकेट खेल रहे थ...
Add a comment...
Wait while more posts are being loaded