Profile cover photo
Profile photo
नवोत्पल साहित्यिक मंच
18 followers
18 followers
About
Communities and Collections
Posts

Post has attachment
The Walls of Delhi- Book Reading: Dr. Gaurav Kabeer
दिनांक
27-2-2018 को ‘ आउट ऑफ कांटेक्स्ट बुक क्लब ’ ने पणजी , गोवा मे श्री उदय प्रकाश जी की लिखी हुई कहानियों (दिल्ली की दीवार , मोहन दास और मैंगोसील ) का त्रि-भाषीय पाठ का आयोजन किया । हिन्दी मे लिखी
मूल कहानियों , श्री जैसन ग्रुंबाम द्वारा किए गए अङ्ग्रेज़ी...
Add a comment...

Post has attachment
The Walls of Delhi- Book Reading: Dr. Gaurav Kabeer
दिनांक
27-2-2018 को ‘ आउट ऑफ कांटेक्स्ट बुक क्लब ’ ने पणजी , गोवा मे श्री उदय प्रकाश जी की लिखी हुई कहानियों (दिल्ली की दीवार , मोहन दास और मंगोसील ) का त्रि-भाषीय पाठ का आयोजन किया । हिन्दी मे लिखी
मूल कहानियों , श्री जैसन ग्रुंबाम द्वारा किए गए अङ्ग्रेज़ी
...
Add a comment...

Post has attachment
आना-पाई दमड़ी-वमड़ी तक सब वसूल है- 'बरेली की बर्फी' : हेमा दीक्षित
हेमा दीक्षित क्या आपने ' बरेली की बर्फी ' खाई है ... नहीं अब
तक नहीं तो जाईये जल्दी से खा लीजिये नहीं तो सच मानिये जिनगी बेकार है ... बहुत
दिनों बाद हँस-हँस कर दोहरे हो जाने वाली कोई फिल्म आई है ... यह एक ऐसी फिल्म है जिसका जबर ताली पीट
हास्यबोध के साथ आनंद...
Add a comment...

Post has attachment

Post has attachment
#40# साप्ताहिक चयन 'जानती हो सहेली ज़िन्दगी बोझ है' / प्रदीप कुमार '
प्रदीप कुमार युवा कवि प्रदीप कुमार एक सहज सहृदय कवि हैं l आपकी कवितायेँ बड़ी ही सरलता से जीवन राग सुनाती हैं l नवोत्पल साप्ताहिक चयन की इस प्रविष्टि पर अपना अभिमत दे रहे हैं श्री अमित कुमार श्रीवास्तव 'बेइंतिहा ' जी l 'बेइंतिहा ' जी उम्दा कलमकार हैं और बैंक ...
Add a comment...

Post has attachment

Post has attachment
डेढ़ इश्किया .......नारी का डेढ़ विमर्श
 श्री सुरेन सिंह  श्रम प्रवर्तन विभाग में वरिष्ठ अधिकारी हैं पर मन रमता है कला और साहित्य  में।  थोड़ी देर से     ही सही पर फिल्म डेढ़ इश्किया पर  लिखी उन  की ये  समीक्षा पढ़ने योग्य  है ।   [मॉडरेटर] कल शाम विशाल भरद्वाज और अभिषेक चौबे की ‘डेढ़ इश्किया’ देखी ....
Add a comment...

Post has attachment
#38 # साप्ताहिक चयन '‘पिता..! " / कल्पना झा
कल्पना झा  बोर्ड की परीक्षा से   3  माह पहले से ही टीवी देखने और मोबाइल पर पाबंदी लगा देने वाला पिता जो बहुत
क्रूर दिखाई देता था ,   न जाने क्यूँ रिज़ल्ट से तीन-चार
  दिन पहले से ही बड़ा निर्लिप्त दिखाई देने लगता है   ,  जैसे उसे पड़ी ही न हो कि बच्चे का परीक्...
Add a comment...

Post has attachment

Post has attachment
MOM : एक माँ,स्त्री और एक परिवार के कर्ता की नजर से .... हेमा दीक्षित
'मॉम' फिल्म की कहानी कोई नई कहानी नहीं है ... हमने ऐसी कहानी पर कई फ़िल्में अलग-अलग नजरियों से देखीं हैं ... एक टीनऐज बच्ची के गैंगरेप उससे जुड़े परिवार परिस्थितियों हमारी न्यायिक व्यवस्था उसकी खामियों, उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार, अपराधियों के बच निकलने, अन्य...
Add a comment...
Wait while more posts are being loaded