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Ritu Asooja Rishikesh
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जीते तो सभी हैं ,पर मनुष्य जीवन वह सफल है ,जो किसी काम आ सके ।परमात्मा की प्रेरणा से लिखना शुरू किया , अब लेखनी ही मेरी उपासना है ।
जीते तो सभी हैं ,पर मनुष्य जीवन वह सफल है ,जो किसी काम आ सके ।परमात्मा की प्रेरणा से लिखना शुरू किया , अब लेखनी ही मेरी उपासना है ।

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मेरे मीठे सपने “
सितंबर 18, 2018
⭐️⭐️ “वो जो मेरे अपने थे ,
“ मेरे सपने थे “⭐️⭐️
वो जो मेरे सबसे अज़ीज़ थे
कब से छुपा के रखा थे
दुनियाँ की नज़रों से
पलकों के दरवाज़ों में बंद करके ।
आज आँखो से छलक पड़े अश्रु बनकर
देख दुनिया का व्यभिचार , आतंकवाद का
घिनौना तांडव ...
मेरे सपने रुदन करने लगे
दर्द में कराहते हुए , कहने लगे
बस - बस करो ,
हमारे पूजनीय , गौतम , राम , रहीम , कबीर ,
विवेकानंद आदि महान विभूतियों ... की धरती पर
ये अहिंसक व्यवहार ....
मुझमें तो सिंचित थे , भारत भूमि के
महान विभूतियों ,धधिचि ,ध्रुव ,
एकलव्य आदि के चरिथार्थ
मैं हूँ अपने पूर्वजों की , कृतार्थ

⭐️🌸“यूँ तो मेरे सपनों की किताब खुली थी
फिर भी दुनियाँ की नज़रें ना उन पर पड़ी थी ।
“मेरे सपनों का ज़हाँ बहुत ही हसीन है 🌺🌺
सन्तुष्टता के धन से सब परिपूर्ण हैं
धर्म सबसे बड़ा इंसानियत है
भेदभाव की ना कोई जगह है
सभी सुसंस्कृत , सभ्य आचरण वाले ,
कभी किसी का दिल ना दुखाने वाले
सब सबके प्रिय , मुस्कुराते चेहरों वाले
ख़ुशियों के सौदागर
एक दूजे की त्रुटीयो को माफ़ करने वाले
सबको इंसानियत की राह दिखाने वाले
हिंसा और वैर ,विरोध की झड़ियाँ काटने वाले
अप्नत्व की फ़सल उगाने वाले
सतयुगी दुनियाँ की चाह रखने वाले
धरती पर स्वर्ग की दुनियाँ बसाने वाले हैं ।

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हिंदी मेरी मातृभाषा माँ तुल्य पूजनीय ''

जिस भाषा को बोलकर मैंने अपने भावों को व्यक्त किया ,जिस भाषा को बोलकर मुझे मेरी पहचान मिली ,मुझे हिंदुस्तानी होने का गौरव प्राप्त हुआ , उस माँ तुल्य हिंदी भाषा को मेरा शत -शत नमन।

भाषा विहीन मनुष्य अधूरा है।
भाषा ही वह साधन है जिसने सम्पूर्ण विशव के जनसम्पर्क को जोड़ रखा है। जब शिशु इस धरती पर जन्म लेता है ,तो उसे एक ही भाषा आती है वह है, भावों की भाषा ,परन्तु भावों की भाषा का क्षेत्र सिमित है।
मेरी मातृभाषा हिंदी सब भाषाओँ में श्रेष्ठ है। संस्कृत से जन्मी देवनागरी लिपि में वर्णित हिंदी सब भाषाओँ में श्रेष्ट है। अपनी मातृभाषा का प्रयोग करते समय मुझे अपने भारतीय होने का गर्व होता है। मातृभाषा बोलते हुए मुझे अपने देश के प्रति मातृत्व के भाव प्रकट होते हैं। मेरी मातृभाषा हिंदी मुझे मेरे देश की मिट्टी की सोंधी -सोंधी महक देती रहती हैं ,और भारतमाता माँ सी ममता।
आज का मानव स्वयं को आधुनिक कहलाने की होड़ में 'टाट में पैबंद ' की तरह अंग्रेजी के साधारण शब्दों का प्रयोग कर स्वयं को आधुनिक समझता है।
अरे जो नहीं कर पाया अपनी मातृ भाषा का सम्मान उसका स्वयं का सम्मान भी अधूरा है। किसी भी भाषा का ज्ञान होना अनुचित नहीं अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। इसका ज्ञान होना अनुचित नहीं।
परन्तु माँ तुल्य अपनी मातृभाषा का प्रयोग करने में स्वयं में हीनता का भाव होना स्व्यम का अपमान है।
मातृभाषा का सम्मान करने में स्वयं को गौरवान्वित महसूस करें। मातृभाषा का सम्मान माँ का सम्मान है.
हिंदी भाषा के कई महान ग्रन्थ सहित्य ,उपनिषद ' रामायण ' भगवद्गीता ' इत्यादि महान ग्रन्थ युगों -युगों से विश्वस्तरीय ज्ञान की निधियों के रूप में आज भी सम्पूर्ण विश्व का ज्ञानवर्धन कर रहे हैं व् अपना लोहा मनवा रहे है।
भाषा स्वयमेव ज्ञान की देवी सरस्वती जी का रूप हैं। भाषा ने ही ज्ञान की धरा को आज तक जीवित रखे हुए हैं
मेरी मातृभाषा हिंदी को मेरा शत -शत नमन आज अपनी भाषा हिंदी के माध्यम से मैं अपनी बात लिखकर आप तक पहुंचा रही हूँ।
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🌟🌟🌟🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌟🌟🌟

“हिंदी माथे की बिंदी “

🌺🌺🌺हिंदी में जो बिंदी है वो भारत माता के सिर का ताज है🌺🌺🌷🌷

“मेरी मात्र भाषा हिन्दी “
जिस भाषा को बोलकर सर्वप्रथम मैंने अपने भावों को प्रकट किया , माँ तुल्य उस हिन्दी भाषा को मेरा शत्-शत् नमन ।

हिंदी मेरी मात्र भाषा मुझे माँ तुल्य पूजनीय है
हिंदी
स्वयं में ही श्रिंगार से परिपूर्ण भाषा है ,
हिन्दी कोई साधारण भाषा नहीं ,प्राचीनतम से प्राचीनता भाषा हैहिंदी मेरी मात्र भाषा देवताओं की भाषा है।
हिंदी लिपि की भाषा है ।
मैं अपनी भाषा को लिखकर , बोलकर स्वयं को गरवान्वित महसूस करता हूँ ।
ग्यारह स्वर , मेरी मातृभाषा हिन्दी को सुरीला ,और सुपाठ्य बनाते हैं , तैंतिस व्यंजन , अलंकार , रस आदि स सजती मेरी मात्र भाषा हिन्दी स्वयं में सुशोभित है अथवा स्वयं ही स्वयं का श्रिंगार करती है . कहते हैं,हिन्दी संस्कृत भाषा से जी जन्मी है या यूँ कहिए संस्कृत का सरल रूप है ।
संस्कृत भारतीय ब्राह्मण समाज की प्राचीनतम एवं शुद्ध भाषा है “अथर्वेद” ऋ””ऋग्वेद” “सामवेद “ यजुर्वेद , “उपनिषद “आदि भारतीय संस्कृति और भाषा की मूल जड़े हैं ।”हिंदी”में जो बिंदी है , वो मेरी मात्र भाषा का ताज है ।
आज का आधुनिक समाज अपनी मात्र भाषा में बात करने से स्वयं को हीन महसूस करता है ,अपनी भाषा का प्रयोग करते समय उसमें अंग्रेज़ी के शब्दों का उपयोग तो ऐसे करता है , जैसे मानो बहुत ज्ञानी हो गया । अजी ........ज्ञानी कुछ नहीं वो तो अधूरा ही रह गया ,त्रिशंकु की तरह ,
अरे जिसे अपनी मात्र भाषा का सम्मान नहीं कर पाया , उसका स्वयं का क्या सम्मान होगा ।
मैं यहाँ पर यही कहना चाहूँगी ,किसी भी भाषा को सीखना कोई अपराध नहीं , जितनी आप सीख सकते हैं उतनी भाषायें सीखिये , क्या कब कौन सी भाषा काम आ जाये ।
लेकिन सर्वप्रथम अपनी मातृभाषा का सम्मान कीजिये । हिन्दी मेरी मात्र भाषा मुझे अत्यंत प्रिय है ,
क्योंकि सर्वप्रथम इसी भाषा को बोल कर मैंने कुछ व्यक्त किया था .
हिंदी मेरी मात्र भाषा मुझे माँ तुल्य पूजनीय हैं ।

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“ चैन की तलाश “

ज़िन्दगी भर भटकता रहा , चैन की तलाश में
ठहराव की चाह में , कुछ पल का चैन ,
फिर बैचेनी , ख़ुशियाँ अनगिनत ,
पर सब एक -एक कर
यादों के बक्से में बंद
कहने को सब कुछ
उसी पल का
सब नश्वर
ऐसी ज़िन्दगी
सिर्फ़ भटकाव
क्या करूँ ?
कहाँ से लाऊँ
शाश्वत सुख
कभी ना ख़त्म
होने वाला चैन
“मैं बेचैन “
तभी एक राह दिखायी दी
एक आवाज सुनायी दी
मेरा कनेक्शन परमात्मा से जुड़ा
वहाँ तो शान्ति का सागर था
अभी तो शुरुआत थी मेरी आत्मा
को असीम शान्ति का अनुभव होने लगा
अब वहाँ से आने को मन ना करा
अचानक मानो परमात्मा ने सन्देश दिया
जा औरों को भी ये राह दिखा
वो शान्ति का सागर है , दया का भण्डारहै
वहीं से तु आया है , वहीं से तुझको सब कुछ मिलेगा
तु दुनियाँ में ना भटक इस तरह
बस दुनियाँ में जी इस तरह
तू बन जाये सबके मुस्कुराने की वजह ......

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भगवान ने दो हाथ दिये हैं , किसी के आगे फैलाते नहीं , मेहनत करते हैं गंगा किनारे बैठ फूल बेचते है , ना शिकवा करते हैं ना शिकायत ,बस दो वक़्त की रोटी के लिये दिन भर जुगाड़ करते रहते हैं ,गंगे माता का आशीर्वाद बना रहे , यूँ ही ज़िन्दगी कट जाये , बच्चे पड़ लें कुछ बन जाये बस बहुत है ....
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🙏🙏🙏 शिक्षक दिवस पर विशेष 🙏🙏🙏
🌻🌻🌻🌹🌹🌹🌹💐🌹🎉🎉🎉🎉🌷🌺🌷

🙏💐🌻“आज शिक्षक दिवस पर ,विचार आया ,

🤗बचपन में विस्तार से पढ़ाई गयी शिक्षा का सार समझ में आया “मैं”नतमस्तक हो गया

महान शिक्षकोंकी शिक्षा से मैं आज ग़र्वानवित हो गया 😊

🌼🌺शिक्षकों के सम्मान में “मैं “

हर्षित ,मन से नतमस्तक हो गया”⭐️⭐️⭐️🌷🌷⭐️⭐️
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