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Posham Pa
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An attempt to preserve, promote and cherish the best of Hindi, English and Urdu literature. Website: http://poshampa.org
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विवरण: जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन (डबलिन, आयरलैंड, 1851-1941) बहुभाषाविद् और आधुनिक भारत में भाषाओं का सर्वेक्षण करने वाले पहले भाषावैज्ञानिक थे। वे 1870 के लगभग आई.सी.एस. होकर भारत आये। वे बंगाल और बिहार के कई उच्च पदों पर 1899 तक कार्यरत रहे। फिर वापस…
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गवाचीयाँ गल्लां, अनवर अली इस किताब के बारे में न लिखता तो गुस्ताख़ी सी हो जाती। स्कूल के बाद शायद इतने विस्तार से पंजाबी अब ही पढ़ी है। और दुःख हुआ, कि इतने साल क्यूँ नहीं पढ़ी। शायद किताब इतनी दिलचस्प न होती तो यह भी बीच में छूट जाती। मगर सच कहूं तो अंत ……
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30 सितम्बर, 1925 प्रिय जवाहर, हम विचित्र समय में रह रहे हैं। शीतला सहाय अपना बचाव कर सकते हैं। आगे की घटनाओं से मुझे परिचित रखना। वह क्या है? वकील हैं? उनका कभी क्रान्तिकारी प्रवृत्तियों से कोई सम्बन्ध रहा है? कांग्रेस की बात यह है कि उसे जितना सादा बना…
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बहुत मुश्किल से एक अदद मामूली नौकरी पा लेने के बाद उसने महसूस किया कि अभी और भी कई चीजें हैं जिन्हें पा सकना आसान नहीं। सबसे पहले महानगरी दिल्ली में रहने के लिए जगह। यह मुश्किल एक परिचित के परिचित ने हल कर दी – नई दिल्ली के लगभग टूटने को तैयार एक क्वार्टर…
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हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती स्वयं प्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती ‘अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़ प्रतिज्ञ सोच लो, प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो!’ असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्य दाह-सी सपूत मातृभूमि के, रुको न शूर साहसी!…
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25 अप्रैल, 1925 प्रिय जवाहरलाल, मैं तीथल में हैं। यह जगह कुछ-कुछ जुहु जैसी है। यहाँ मैं बंगाल की अग्नि-परीक्षा के लिए तैयार होने को चार दिन से आराम ले रहा हूँ। मैं यहाँ अपना पत्र-व्यवहार निपटाने की कोशिश कर रहा हूँ। उसमें तुम्हारा वह पत्र भी है, जिसमें…
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यह तुम पर लिखी अंतिम कविता है यह तुम्हारा अंतिम परिचय है ** तुम एक गीत हो अपशकुन लाने वाला गीत ऐसी मान्यता है ~ तुम्हें गाने वालों पर होता है अपनों ही द्वारा कुठाराघात । परन्तु, तुम चढ़ गई हो मेरी ज़ुबान पर और सारे ख़ानदान के बार-बार रोकने के बावजूद मैं…
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मैं रोज एक हवन करती हूँ तुम्हारी यादों की समिधा से आहुति दे दे कर फिर विसर्जित कर देती हूँ समय की नदी में उसे और तुम नित्य नए जन्म ले लेते हो मुझे छलने के लिए, हँसते हुए फिर से आ जाते हो फिर तुम्हें देखकर मैं खीझ कर चीख़ उठती हूँ मेरी चीख़ों … Continue…
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एक प्यारी-सी लड़की अकेले प्रकाश में उसका चेहरा ही प्यार बोलता था मैंने उसका आलिंगन किया मैंने उसके होंठों को चूमा आह, कितना सुखद-सुख… नेता, योद्धा, राजे-महाराजे इस धरती के महान लेकिन इस भीड़ के सबसे ऊपर मैंने खुद ईश्वर का अभिनय किया माँ धरती की गोद में…
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ऊधो जो अनेक मन होते तो इक श्याम-सुन्दर को देते, इक लै जोग संजोते एक सों सब गृह कारज करते, एक सों धरते ध्यान। एक सों श्याम रंग रंगते, तजि लोक लाज कुल कान। को जप करै जोग को साधै, को पुनि मूँदे नैन। हिए एक रस श्याम मनोहर, मोहन कोटिक मैन। ह्याँ तो हुतो ……
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