Profile cover photo
Profile photo
Govind Mathur
254 followers
254 followers
About
Govind's posts

Post has attachment

Post has attachment
Photo

कविता
-------
गिरना और गिरना
---------------
पैदा होते ही
मां की कोख से गिरा

घुटनों के बल
चलते हुए गिरा
दौड़ते हुए गिरा
सड़क पर
साइकिल चलाते हुए गिरा

ग्यारवीं में फेल होने पर
समाज की नज़रों से गिरा
बेरोजगार रहने पर
परिवार की नजरों से गिरा
पिछड़ जाने पर
दोस्तों की नजरों से गिरा

डूबने से पहले
प्रेम में गिरा

सर्दी में गिरा
बर्फ की तरह
बारिश में गिरा
बूंदों की तरह
गर्मी में गिरा
स्वेद की तरह
पतझड़ में गिरा
ओस की तरह

रोटी में गिरा
नमक की तरह

गुरुत्वाकर्षण का नियम
जानने से पहले ही
पेड़ों से गिरा फल की तरह

मैं नहीं गिरा
दूध में मक्खी की तरह
दाल में कंकड़ की तरह
पानी में गलन की तरह
हवा में चुभन की तरह

लोग चढ़ते गए
यश, पद, वैभव और
गर्व की ऊंचाइयां
मैं गिरता चला गया
अभिमान की तरह
-----

कविता
-------
बची हुई हँसी
-----------
हँसी के झरने नहीं गिरते
किसी की खिलखिलाहट
सितार सी झंकृत नहीं होती
ठहाकों से आसमान
नहीं फटता इन दिनों

बर्फ सी पिघलती हँसीं
बची है मेरे शहर में

मित्रों के पास
बची है ईर्ष्या
जीवन में तनाव
ज़िस्म को चीरती
एक क्रूर हँसी
बची है मेरे शहर में

सूरज में बची हैं
थोड़ी सी धूप
नदी में बचा है
थोड़ा सा जल
पेड़ों पर बचे हैं
थोड़े से फल

घरों में बचा है
थोड़ा सा नमक

बच्चों में थोड़ी सी हँसी
बची है मेरे शहर में
---------

कविता
--------
उस लड़की की हँसी
-----------------
उस खिलखिलाती लड़की की
तस्वीर कैद कर लो
अपनी आंखों के कैमरे में

उस लड़की की अल्हड़ता
उस लड़की की हँसी
उस लड़की का शर्माना
कैद कर लो अपनी यादों में

कुछ दिन बाद
देखोगे किसी गृहणी को
कपड़े धोते हुए
उसकी आंखों में कुछ
तलाश करोगे तुम

फिर कभी देखोगे
किसी उदास औरत को
बाजार से सब्जी लाते हुए
दवाइयों की दुकान पर खड़े
अंगुलियों पर हिसाब लगाते हुए

तुम पहचान भी नहीं पाओगे
यह वह लड़की है
जिसकी हँसी आज भी
गूंज रही है तुम्हारी स्मृति में
-------------


Post has attachment

Post has attachment
kavita
------------

Post has attachment
**
कविता  --------- छाया  -------- धूप  में  झुलसता  रहा  जीवन भर  छाया  कभी  मिली नहीं  भीगा  कुछ देर  बरसात  में भी  धूप  खिली  रही  छाया  तो  दूर  ही  रही  मुझ  से  यहाँ तक कि  अपनी  छाया  भी  कभी  दिखी  नहीं          ----------                 ( "परिकथा"  ...

Post has attachment
kavita
-----------

Post has attachment
**
कविता ------ आकाश  ------- हर व्यक्ति के सिर पर  एक आकाश होता है  चाहे बहुत दूर होता है  आकाश है ये महसूस करने पर  सहारा बना रहता है  होते तो और भी कई सहारे हैं  किन्तु वे कभी भी  छोड़ कर जा सकते हैं  जैसे पहाड़ टूट कर गिर सकते हैं  बिजली कड़क कर गिर सकती है  ...

Post has attachment
kavita
---------

Post has attachment
**
कविता  ------ नीला ------ मुझे नीला रंग  पहले भी अच्छा लगता था  आज भी मुझे नीला रंग  आकर्षित करता है  इसलिए नहीं कि  आकाश का रंग नीला होता है  इसलिए भी नहीं कि  झील का पानी नीला दीखता है  इसलिए तो बिलकुल नहीं कि  मुझे नीली आँखों से प्रेम है  मुझे नीला रंग इ...
Wait while more posts are being loaded