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Dr Amit Jain
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जब कई मित्रो ने इस साईंटिका दर्द के बारे में व्यक्तिगत पुछा तो फिर मन इसी व्याधि के विषय में लिखने के लिए तत्पर हो गयाऔर इस पोस्ट को लिखा गया
आप भी अपना ज्ञान वर्धन करे और दुसरे मित्रो को भी बताये
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एक निवेदन सभी से
आप भी समाज सेवा के इस कार्य में अपना योगदान दीजिये और इस पोस्ट और बाकि की पोस्ट को भी शेयर ,आप चाहे तो इसे cut ,copy paste भी कर सकते है ,इस page को सभी तक पहुचाये जिस से सभी तक ये ज्यादातर छुपा हुआ विज्ञानं सभी तक पहुच सके ,और सभी रोगी इस का लाभ ले सके ,उम्मीद है आप इस प्रार्थना को जरुर मानेगे
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किसी भी व्यक्ति को कटिस्नायु (कमर का स्नायु) या उरुस्नायु में जलन के कारण स्नायु-शूल की तरह का दर्द होता है तो उसी को साइटिका (गृधसी) रोग कहा जाता है। आमतौर पर लोग इसको कूल्हों का दर्द कहते हैं।
कारण-
किसी भी व्यक्ति को साइटिका (कूल्हों का दर्द) होने का कारण उसका ज्यादा ठण्डी, सूखी या तर हवा में रहना है। इसके अलावा किसी भारी सामान को उठाने से भी यह रोग पैदा हो जाता है। यह रोग ज्यादातर पेट में गैस बनने के कारण, जोड़ों के दर्द या स्नायुशूल के कारण हो जाता है। अगर इस रोग की समय रहते चिकित्सा न की जाए तो रोगी को मेरुमज्जा का क्षय (लोकोमोटोर एटेक्सी) जैसा रोग पैदा हो सकता है।
विभिन्न रोगों का उपचार
1. ऐमोन-म्यूर- अगर किसी व्यक्ति के ज्यादा देर तक एक ही जगह बैठने से साइटिका (कूल्हों का दर्द) बढ़ जाता है और दर्द चलने-फिरने से कम हो जाता है तथा सोने के बाद बिल्कुल नहीं होता तो इस प्रकार के लक्षणों में रोगी को ऐमोन-म्यूर औषधि की 3x मात्रा या 3 शक्ति देना लाभदायक रहती है।
2. कोलोसिन्थ- साइटिका (कूल्हों का दर्द) में अगर रोगी को अचानक दर्द उठता है या ठण्ड लगने के कारण यह रोग पैदा हुआ हो तो कोलोसिन्थ औषधि की 1 या 3 शक्ति उसे बहुत लाभ करती है।
3. लाइको- रोगी के दाएं अंग में गैस भर जाना, रोगी का रोग शाम के समय या दर्द वाले अंग को छूने से ही बढ़ जाता है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को लाइको औषधि की 12 शक्ति देना लाभकारी रहता है।
4. कार्बोनियम-सल्फ- किसी भी कमर के दर्द वाले रोगी का नया या पुराना कमर के दर्द में अगर किसी भी औषधि से आराम नहीं पड़ता तो उसे कार्बोनियम-सल्फ औषधि देने से जल्द आराम मिलता है।
5. आर्सेनिक- अगर ज्यादा बूढ़े और कमजोर व्यक्तियों को साइटिका (कूल्हों का दर्द) या लकवा रोग हो जाता है तो उन्हें आर्सेनिक औषधि की 3 शक्ति देना उचित रहता है। इसके अलावा दर्द वाले स्थान पर गर्म सिकाई करने से भी फायदा होता है।
6. रस-टाक्स- अगर ज्यादा गीलेपन के कारण व्यक्ति को साइटिका (कूल्हों का दर्द) हो जाता है तो उसे रस-टाक्स औषधि की 6 शक्ति देने से लाभ मिलता है।
7. ऐकोनाइट- अगर किसी व्यक्ति को ज्यादा तेज ठंडी हवा में रहने के कारण कमर के स्नायुओं में वात हो जाता है, उसके शरीर में सुन्नपन सा महसूस होता है तो इस प्रकार के लक्षणों में उसे ऐकोनाइट औषधि की 3x मात्रा लाभदायक रहती है।
8. लैकेसिस- अगर स्त्री के मासिकधर्म के बन्द होने के बाद या नींद खुलने पर साइटिका (कूल्हों का दर्द) का रोग बढ़ जाता है तो इस प्रकार के लक्षणों में रोगी को लैकेसिस औषधि की 3 या 30 शक्ति उपयोगी रहती है।
9. नैट्रम-सल्फ- अगर कोई व्यक्ति अचानक बैठे-बैठे से उठता है या कुबड़े होकर बैठता है तो उसको साइटिका (कूल्हों का दर्द) का दर्द बढ़ जाता है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को नेट्रम-सल्फ औषधि की 3x मात्रा का चूर्ण देना लाभकारी रहता है।
10. मैग्नेशिया-फास- अगर किसी साइटिका (कूल्हों का दर्द) के रोगी को बिजली की तरह का झटकेदार दर्द महसूस होता है तथा जो सिंकाई करने से कम हो जाता है।
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नोट -होमियोपैथी लक्षणों का बिज्ञान का है लक्षण मिलने पर ही दवा फ़ायदा करती है इसलिए अपने निकटतम स्थानीय पंजीकृत होमियोपैथी चिकित्सक से से सलाह लेकर ही औषधि का सेवन करें
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अमित जैन - आगे सेंसर है जी


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amit jain - sharat अमित जैन - शरारत


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छोटी सी प्रेम कहानी

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