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सारांश सागर
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ॐ नमः शिवाय
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एक शिक्षाप्रद कहानी - आप भी मेरे पापा जैसे ही है ! | Gyansagar ( ज्ञानसागर )

"मीनू ! इधर तो आओ जरा ." राकेश ने पुकारा !

"सर! आप मुझे मीनल ही कहा करें ! मीनू थोड़ा सा अजीब लगता है "

"ओ .के ." ऑफिस के लोग घरों की तरफ निकल रहे थे छुट्टी के बाद ,मगर निगाहें मीनल के केबिन पर टिकी हुईं थीं । कुछ दिन से अक्सर शाम को ही मीनू को बॉस बुलाते थे ।

"जी, सर ! कोई जरुरी काम है ?" मीनल ने सीने को फ़ाइल से छिपाते हुए पूछा ।

"अरे! नहीं , यू आर सो इफिशियेंट ! बस कुछ यूँ ही ...."

" थैंक्स , कहिये सर ! वो कुछ क्या कहना चाहते हैं आप !" मीनल बोली ।

"बात ये है कि मैं आपके लिए एक गिफ्ट लाया हूँ , यूँ तो ज्यादा खरीददारी मैं करता नहीं पर मैंने कुछ कोशिश की है ! " बॉस ने हिचकते हुए एक पैकेट निकालकर थमा दिया ।

मीनल ने उसे खोला जिसमे आसमानी रंग की बहुत सुन्दर साड़ी थी जिस पर बड़े-बड़े फूल थे ।

"ओह ! बहुत ही सुन्दर सर! आपकी पसंद बहुत अच्छी है ,

पूरी पोस्ट पढने के लिए लिंक पर क्लिक करे - http://bit.ly/2QjGfGC

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"सर! आप मुझे मीनल ही कहा करें ! मीनू थोड़ा सा अजीब लगता है "

"ओ .के ." ऑफिस के लोग घरों की तरफ निकल रहे थे छुट्टी के बाद ,मगर निगाहें मीनल के केबिन पर टिकी हुईं थीं । कुछ दिन से अक्सर शाम को ही मीनू को बॉस बुलाते थे ।

"जी, सर ! कोई जरुरी काम है ?" मीनल ने सीने को फ़ाइल से छिपाते हुए पूछा ।

"अरे! नहीं , यू आर सो इफिशियेंट ! बस कुछ यूँ ही ...."

" थैंक्स , कहिये सर ! वो कुछ क्या कहना चाहते हैं आप !" मीनल बोली ।

"बात ये है कि मैं आपके लिए एक गिफ्ट लाया हूँ , यूँ तो ज्यादा खरीददारी मैं करता नहीं पर मैंने कुछ कोशिश की है ! " बॉस ने हिचकते हुए एक पैकेट निकालकर थमा दिया ।

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"ओ .के ." ऑफिस के लोग घरों की तरफ निकल रहे थे छुट्टी के बाद ,मगर निगाहें मीनल के केबिन पर टिकी हुईं थीं । कुछ दिन से अक्सर शाम को ही मीनू को बॉस बुलाते थे ।

"जी, सर ! कोई जरुरी काम है ?" मीनल ने सीने को फ़ाइल से छिपाते हुए पूछा ।

"अरे! नहीं , यू आर सो इफिशियेंट ! बस कुछ यूँ ही ...."

" थैंक्स , कहिये सर ! वो कुछ क्या कहना चाहते हैं आप !" मीनल बोली ।

"बात ये है कि मैं आपके लिए एक गिफ्ट लाया हूँ , यूँ तो ज्यादा खरीददारी मैं करता नहीं पर मैंने कुछ कोशिश की है ! " बॉस ने हिचकते हुए एक पैकेट निकालकर थमा दिया ।

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