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rahul dev
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अतिथि देवो भव / सीताराम गुप्ता
यदि हम अच्छे मेहमान और अच्छे मेज़बान बन सकें तो जीवन
कितना आनंदपूर्ण हो जाए!      हमारी संस्कृति में आतिथ्य
को बड़ा महत्त्व प्रदान किया गया है। अतिथि को भगवान का दर्जा दिया गया है। कहा गया
है अतिथि देवोभव। इसी का पालन करते हुए अधिकांश लोग घर आए मेहमानों की से...

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दो ग़ज़लें / नज़्म सुभाष
===== गजल-१ ===== दफ्तर की शैतानी है हरदिन आनाकानी है मुद्दा इतना बड़ा नही जितनी गलतबयानी है तेरा स्वेद लहू जैसा खून हमारा पानी है आग लगाकर कम्बल दे धर्म- धुरन्धर दानी  है नजर मीन के जिस्मों पर बगुला बेहद ध्यानी है दिन बहुरेंगे दंगों के बस अफवाह उड़ानी है स...

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आशीष बिहानी की कविताएँ
११ मार्च १९९२ में बीकानेर , राजस्थान में जन्मे
युवा कवि आशीष बिहानी हिंदी साहित्य से गहरा लगाव रखते हैं. उन्होंने
"अन्धकार के धागे" नाम से एक कविता संकलन लिखा है जोकि हिन्द-युग्म
प्रकाशन , नई दिल्ली से
प्रकाशित हुआ है. उनकी कविताएँ यात्रा , गर्भनाल , समालोच...

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व्यंग्य के अलावा भी.....
उस दिन व्यंग्य पर चर्चा हो
रही थी | अजातशत्रु बोले... व्यंग्यकार अजातशत्रु   पर कैलाश मण्डलेकर का संस्मरण “व्यंग्य लिखता हूँ आज भी लिखता हूँ मगर एक  छोटे से अखबार में | यह काम 15-20  वर्षों से एक साप्ताहिक व्यंग्य स्तभ के रूप में
जारी है |बड़ी पत्रिकाओं में ...

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कोयला श्रृंखला की कवितायें
युवा कवि
विजय कुमार पिछले लगभग एक साल से झारखण्ड के “ कोयलांचल क्षेत्र “ पर “ कोयला “ सीरीज से चालीस कवितायें लिख
चुके हैं जोकि उनकी दो वर्षो के अथक शोध का परिणाम है | इस कविता सीरीज में
कोयलांचल क्षेत्र के भूभागों में जमीन के नीचे फैली आग , विस्थापन , पर्य...

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यथार्थ के भविष्य की आहट
            कलम
से कलाकार के  जीवन का संबंध किसी फार्मूला , नियम
या सिद्धांत के अनुसार नहीं होता। कलम से उत्पन्न तथ्य , सत्य , विचार
और वेदना के आधार पर रचनाकार के व्यक्तित्व का सम्पूर्ण मूल्यांकन कर लेना
मासूमियत भरी नादानी से भी ज्यादा घातक है। जीवन में र...

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नागार्जुन : एक लम्बी जिरह
नागार्जुन उर्फ़ ‘बाबा’ मैथिली और हिंदी के विकट
रचनाकार हैं । उन पर जिरह करने का साहस विष्णुचंद्र शर्मा जैसा विमर्शकार ही कर
सकता है जो उनके  लेखन और जीवन दोनों का 1957 से परस्पर गवाह रहे
हैं । विष्णुचंद्र शर्मा
की पुस्तक ‘नागार्जुन: एक लम्बी जिरह’ दो खण्डों ...

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आधुनिक हिंदी कविता को समृद्ध करती कविताएँ
                       इक्कीसवीं सदी के बीते डेढ़ दशक में
अपनी अलग पहचान बनाने वाले युवा कवियों में सुशांत सुप्रिय का नाम प्रमुख है । इस
डेढ़ दशक में आए सामाजिक बदलाव की बानगी इनकी कविताओं मे स्पष्ट दिखाई देती है ।
समाज के हाशिए पर खड़े आम आदमी के जीवन-संघर...

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जनकवि शील – कुछ अप्रासंगिक प्रसंग
[ २३ नवंबर
को शील जी की पुण्यतिथि थी । इस अवसर पर कुछ बातें जो अक्सर ऐसे अवसर पर नहीं कही
जातीं ।] शील का नाम आते ही उनकी जो तस्वीर उभरती है वह बहुत मनोरंजक है । दिल्ली
के मालरोड के पास के तिमारपुर इलाके में स्थित सत्यवती कालेज में जनवादी लेखक
सम्मेलन हो रह...

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दीपक शर्मा का व्यंग्य
कितना जताते हैं .. हर किसी की अपनी - अपनी समस्याएं हैं। अधिकतर लोगों को ये शिकायत है कि दुनियां उनसे हर चीज छुपाती है पर हमारी समस्या अधिकतर लोगों वाली नहीं है। हमारी समस्या भी हमारी तरह अजीब है। मैंने महसूस किया है कि आज कल लोग छुपा नहीं रहे हैं बल्की जता ...
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