Profile cover photo
Profile photo
Neetu Singhal
4,329 followers
4,329 followers
About
Neetu's posts

Post has attachment
----- ।। उत्तर-काण्ड ५६ ।। ---
मंगलवार,२५ अप्रेल,२०१७                                                                                        पुनि जलहि कर जोर जोहारे | सजिवनिहु जियन तुअहि निहारे ||  आरत जगत राम सुखदाता | त्रसित जीउ के रामहि त्राता ||  पापिहि घनतम राम तमोहर | अँधेरिया घर र...

Post has attachment
----- || चलो कविता बनाएँ || ---
हाथोँ हाथ सूझै नहि घन अँधियारी रैन |  अनहितु सीँउ भेद बढ़े सोइ रहे सबु सैन || १ ||  क्रमश:

>> प्रतिदिन छत पर थोड़े से दाने व कसोरे में पानी रखिए फिर देखिये,
आपके घर के आसपास, कौंवा,चिड़िया,कबूतर कोयल गाने लग जाएंगी



Post has attachment
----- ॥ टिप्पणी १० ॥ ---
>> प्रतिदिन छत पर थोड़े से दाने व कसोरे में पानी रखिए फिर देखिये, आपके घर के आसपास, कौंवा,चिड़िया,कबूतर कोयल गाने लग जाएंगी राजू : --हाँ और आप घर बैठे कवि बन जाएंगे वो भी बड़े वाले.....             किसी गधे की छोटे छोटे पॅकेज वाली नौकरी से तो येई ठीक है,      ...

Post has attachment
----- ॥ पाखंड-वाद ॥ ---
" मिथ्या द्वारा यथार्थ के स्वांग का सार्वजनिक प्रदर्शन पाखण्ड वाद है...." दूसरे शब्दों में आप जो नहीं हैं वह होने का प्रदर्शन करना पाखण्ड वाद है, सत्ता केर स्वाद हुँत प्रसरा पाखण्ड वाद ।   नव नूतन नहि होइया धर्म केर उन्माद ॥  भावार्थ :-- धार्मिक उन्माद फैला...

पोथि लिख लिख सबु कह मुए भयो न पंडत कोए ।
ढाई आखर कर्म का कियो सो पंडित.....?



Post has attachment
----- ॥ सेंदुरी रंग धूरि ॥ ----
उरियो रे सेंदुरी ऐ री रंग धूरि,  पलहिं उत्पलव नील नलिन नव जिमि जलहिं दीप लव रूरि ।  ललित भाल दए तिलक लाल तव तिमि सोहहि छबि अति भूरि ॥  हनत पनव गहन कहत प्रिया ते अजहूँ पिय दरस न दूरि ।  करिअ बिभावर नगर उजागर  सजि बेदि भवन भर पूरि ॥  तरहि पटतर परिहि अम्बारी म...

Post has attachment
----- ॥ सेंदुरी रंग धूरि ॥ ----
उनिहौ रे सेंदुरी ऐ री रंग धूरि  पलहि पलव नील नलिन नव नव जिमि जलहि दीप लव रूरि ।  तरु तमाल दए तिलक भाल तव तिमि सोहिहि छबि अति भूरि ॥  बिभौ बदन घन स्याम सुन्दर सिरौपर पँखी मयूरि ।  पहिरै सुरुचित पीत झगुरिया धरि मधुराधर बाँसूरि  ॥  बजति भली करधन छली करी कर कंक...

Post has attachment
----- ॥ रंग धूरि ॥ ----
उरियो नहि सेंदुरी ऐ री रंग धूरि  कुञ्ज गलिअ  कर कुसुम कलिअ यहु अजहूँ न पंखि अपूरि  ॥  कहइ बिसुर बल बल गल बहियाँ  ओहि  जोरे अंज अँजूरि ॥  अंक ही अंक गहि पलुहाई मैं कल परसोंहि अँकूरि  ॥  एहि मधुबन रे मोरे बाबुल इहँ बिहरिहु धरे अँगूरि ॥  चरनहि नुपूर सिरु बर बे...

Post has attachment
----- ॥ राग भैरवी ॥ ---
काहे न मानस जनम गवाए, जग नर नारि चारि बस करियो,भोगहि भूरि बिषय अधिकाए ।  हाटहि हाट बैस चौहाटे, बिचवइ कर कर बिकता जाए ।  नीची करनी नीच न करनी, उँच उँच ऊँचे मोल बिकाए ।  देह अमोली बहु समझायो, ओहि केहि बिधि समुझ न आए ।  करतब कारन कर गहे दोइ, रह बस रैन दिवस अल...
Wait while more posts are being loaded