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Sarved Suresh
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लोकतंत्र
चन्‍द्रेश कुमार छतलानी आम बजट के सत्र के बाद लोकतांत्रिक सरकार ने लोकतंत्र के एक नये तरीके इन्टरनेट से बजट पर एक सर्वे द्वारा जनता की राय मांगी। कोई भी उसे खोलता तो सबसे पहले लिखा मिलता - आपके अनुसार बजट कैसा है ? जिसके तीन विकल्प थे - सर्वमान्य, औसत - मान्...
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रिश्‍ते का भेडि़या
रिश्‍ते का भेडि़या प्रतिभा शुक्‍ला मै एक किराए के मकान में रहती थी। वर्मा जी हमारे मकान मालिक हुआ करते थे। उनकी पत्नी स्नेह की मूरत थी। दिन भर दूसरों के कार्यों में व्यस्त रहने वाली ऊपर से कड़क अन्दर से नरम। मेरा सारा समय वही गुजरता था। उनकी दो बेटियां थीं। ...
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हम नहीं सुधरेंगे
अम्‍बरीष श्रीवास्‍तव बिरादरी में ऊँची नाक रखने वाले, दौलतमंद पर स्वभावत: अत्यधिक कंजूस, सुलेमान भाई ने अपने प्लाट पर एक घर बनाने की ठानी। मौका देखकर इस कार्य हेतु उन्होंने एक परिचित के यहाँ सेवा दे रहे आर्कीटेक्ट से बात की। आर्कीटेक्ट नें उनके परिचित का ख्य...
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आत्‍मग्‍लानि
दीपक पाण्‍डेय सुलतान शहर का बड़ा व्यापारी है। पांच वक्त का नमाजी धार्मिक व्यक्ति। अबकी बार अपने पिता को हज भेजना चाहता है परन्तु वीज़ा मिलने में कुछ कठिनाई हो रही है, अत: वह शहर के नेता के पास गया, सिफारिश के लिए। नेता जी ने प्यार से घर बैठाया खैरियत पूछी कार...
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मई 2018 से जुलाई 2018
इस अंक के रचनाकार आलेख
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तनवीर का रंग संसार
  - महावीर अग्रवाल नाटक हमारे ‘स्व’ का विस्तार है, जो हमे
समूचे समाज से जोड़ता है। नाटक के दूसरे कलारूपो की तुलना मे अधिक समाजिक
माना जाता है। और फिर हबीब तनवीर के नाटको की तो बात ही अलग है। नाटक चाहे
संस्कृत (‘मृच्छकटिकम’, मुद्राराक्षस, उत्तररामचरितम, म...
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सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै एक
- प्रो. अश्विनी केशरवानी महानदी के तटवर्ती ग्राम्यांचलों में केवल राजा, जमींदार या किसान ही नहीं बल्कि समाज सुधारक, पथ प्रदर्शक, अंग्रेजी दासता से मुक्ति दिलाने में अग्रणी नेता और साहित्यकार भी थे। छत्तीसगढ़ अपने इन सपूतों का ऋणी है जिनके बलिदान से हमारा दे...
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खोखली बातें
नीतू सिंह ‘रेणुका’ कोच नंबर बी-१ के इंडिकेटर के आस-पास ज़्यादा लोग नहीं खड़े थे याने मुझे डिब्बे में चढऩे में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। माँ बेकार ङ्क्षचता कर रही थी। गाड़ी भले ही दो मिनट रुकती हो मगर भीड़ भी उतनी नहीं होती। याने सी एस टी न जाकर दादर...
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फलना जगह के डी.एम
  कुंदन कुमार “फलना जगह के डी.एम पैदल ऑफिस जाएगे। देश के गिरते रूपये को बचाने के
लिए और ईंधन की खपत को कम करने के लिए महाशय ने ये कदम उठाया है। श्रीमान
के भीतर ज्ञान की बत्ती तब जली जब उन्होंने एक अखबार के विशेषांक को पढ़ा।“
नेता जी ने इस ख़बर को ऊ...
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हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?
() रवीन्द्र प्रभात '' हो गयी हर घाट पर पूरी व्यवस्था , शौक़ से डूबें जिसे भी डूबना है ''
दुष्यंत ने आपातकाल के दौरान ये पंक्तियाँ कही थी , तब शायद उन्हें भी यह
एहसास नहीं रहा होगा कि आनेवाले समय में बिना किसी दबाब के लोग स्वर्ग या
फिर नरक लोक की यात...
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