Profile cover photo
Profile photo
Mukesh Srivastava
96 followers -
Live Life 200% People knows me as a Cor'guru
Live Life 200% People knows me as a Cor'guru

96 followers
About
Posts

Post has attachment
बाग़ की हवाएं चुगली कर रही है
बाग़ की हवाएं चुगली कर रही है भौरां कली से गुफ्तगू कर रही है आओ चलें दूर तक बहें चलें हम  रात  इश्क़ की नदी सा बह रही है आ तेरी बिखरी लटों को संवार दूँ खुली हुई ज़ुल्फ़ें तंग कर रही है मेरे सीने पे सर रख के सुनो तो क़ी मेरी धधकन क्या कह रही है  खाक होने के पहले ...
Add a comment...

Post has attachment
जाने कौन सी मज़बूरी होती जा रही हो
जाने  कौन सी  मज़बूरी होती जा रही हो आहिस्ता आहिस्ता मेरी होती जा रही हो वैसे तो तुम पहले से ही खूबसूरत हो पर ईश्क़ में आसमानी परी होती जा रही हो तुम्हारे इस तरह महकने का राज़ क्या है तुम रजनीगंधा रातरानी होती जा रही हो मुकेश इलाहाबादी ----------------------
Add a comment...

Post has attachment
शहर की गली गली छानी है
शहर की गली गली छानी है बहुत  दिनों आवारगी की है मेरे पास और  कुछ तो नहीं फ़क़त तज़ुर्बे मेरी कमाई है चले आओ यंहा कोई नहीं है सिर्फ मै हूँ,  मेरी तन्हाई है बीते हुए कल की बात न कर आज से ये ज़िंदगी तुम्हारी है न कोई चाँद न कोई चराग़ ज़िदंगी अँधेरे में बिताई है मुके...
Add a comment...

Post has attachment
प्रेम को, महसूस करना चाहता हूँ,
मै , प्रेम को, महसूस करना चाहता हूँ, बिना प्रेमी को छुए हुए , बिलकुल वैसे ही जैसे, कोई सौंदर्य प्रेमी गुलाब को महसूसता है उसकी सम्पूर्ण कोमलता और ख़ूबसूरती के साथ बिना उसे डाल से तोड़े हुए मै प्रेम को अपने समस्त रंगो के साथ महसूसना और जीना चाहता हूँ जैसे कोई,...
Add a comment...

Post has attachment
देखना जिस दिन मै चला जाऊंगा
देखना जिस दिन मै चला जाऊंगा लौट  कर फिर कभी नहीं आऊँगा ढूंढ लेना मुझको तुम गुलशन में  कि गुलों में खुश्बू बन के महकूँगा किसी कवि या शायर सा नहीं, हाँ  तेरी मुंडेर पे पंछी बन के चहकूँगा या फिर कोई लतीफ़ा बन कर के तेरे गुलाबी होंठो पे, मुस्कुराऊंगा  तू, कितना ...
Add a comment...

Post has attachment
काश तुमने मुस्कुरा दिया होता
काश तुमने मुस्कुरा दिया होता बदली में चाँद खिल गया होता अगर परिंदो की तरह पँख होते  मै उड़कर तुम तक पंहुचा होता तूने दरीचा खोला ही नहीं, वर्ना मै तेरी गली में रुक गया होता   मेरे पास जज़्बात हैं लफ़ज़ नहीं वर्ना मैंने,तुझे ख़त लिखा होता मुकेश इलाहाबादी -------...
Add a comment...

Post has attachment
सुबह से जो छत पे मुस्कुरा रही थी धूप
सुबह से जो छत पे मुस्कुरा रही थी धूप साँझ होते ही उदास हो उतर गयी धूप जब तक पिता थे सर पे घना साया था बाद उसके ज़िंदगी गर्म दोपहर की धूप सर्द मौसम में देती हैं अजब सी गर्मी इसी लिए सेंकता हूँ तेरी यादों की धूप मुकेश इलाहाबादी ----------------------
Add a comment...

Post has attachment
कई बार जी चाहता है तुम्हारे साथ बैठूँ ,
कई बार जी चाहता है तुम्हारे साथ बैठूँ , बात करूँ देर तक अपनी - तुम्हारी, दुनिया जहान की फिर, याद आती हैं, बहुत सारी बातें और फिर, मुल्तवी कर देता हूँ तुम्हारे साथ बैठ के बतियाने का इरादा मुकेश इलाहाबादी -------
Add a comment...

Post has attachment
था हमसे किसी बात पे ख़फ़ा बहुत
था हमसे किसी बात पे ख़फ़ा बहुत जब मिला तो, लिपट के रोया बहुत अपने किस्से सुनाए, कामियाबी के फिर मेरी हालत पे उदास हुआ बहुत एक एक कर याद आये पुराने मित्र बिछड़े दोस्तों को मिस किया बहुत वही हँसी, वही दिल्लगी वही अंदाज़ मुलकात का लुत्फ़ हमने लिया बहुत ज़माना गुज़र ग...
Add a comment...

Post has attachment
बहुत ही हसीन, बहुत ही प्यारे हैं
बहुत ही हसीन, बहुत ही प्यारे हैं मेरी आँखों में जो ख्वाब तुम्हारे हैं है फ़क़्त तेरी आँखों का पानी मीठा बाकी दरिया ताल तल्लैया खारे हैं मुकेश इलाहाबादी -------------------
Add a comment...
Wait while more posts are being loaded