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Pinky Mitra

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 मैं आपको अपने जीवन की रास लीला सुनाने जा रहा हूँ । दोस्तों मैं देव इंडिया के दिल मध्य प्रदेश के सागर का रहने वाला हूँ. मेरी उमर ३८ साल रंग गोरा मजबूत कद-काठी और ६"४" लम्बा हूँ. मुझे मजलूम की मदद करने मैं बड़ी राहत मिलती है और नर्म दिल हूँ।

जैसा की अक्सर कहानियो में होता है कि कहानी का कैरेक्टर के ऑफिस की दोस्त या पड़ोसन या रिश्तेदार वाली कोई बुर (जिसको मैं प्यार से मुनिया कहता हूँ ) मिल जाती है उसे तुरन्त चोदने लगता है, पर हकीकत इससे कही अधिक जुदा और कड़वी होती है एक चूत चोदने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है ऐसी एक कोशिश की यह कहानी है।

हमारा शहर सागर प्राकृतिक सुन्दरता और हिल्स से घिरा हुआ है। यह एक बहुत ही सुंदर लैक है और यहां के लोग बहुत ही संतुष्ट और सीधे सादे हैं। पर यहां की महिलायें बहुत चुदक्कड़ है यह मैंने बहुत बाद में जाना। मैं क्रिकेट और फुटबॉल का नेशनल प्लेयर रहा हूँ इस कारण से अपने एरिया में बहुत मशहूर था और सुंदर कद काठी और रूप रंग गोरा होने के कारण हैंडसम भी दीखता था. लेकिन मुझे अपने लन्ड की प्यास किसी न किसी के बारे मैं सोच कर और अपनी मुट्ठ मार कर या अपना तकिये को चोदकर बुझानी पड़ती थी मैं अपनी हेल्पिंग हब्बिट्स के कारण भी बहुत मशहूर था और सभी मुझे प्यार भी इसीलिए बहुत करते थे।

मेरे घर के सामने ग्राउंड है जहा मैं खेलते हुए बड़ा हुआ और अपने सभी सपने सन्जोए। एक दिन हम कुछ दोस्त मोर्निंग एक्सर्साईज करके आ रहे थे तभी सामने से आती हुई ३ लड़कियों पर नज़र पड़ी। उनमे से दो को मैं चेहरे से तो जानता था कि वो मेरे घर के आस पास रहती है। तीसरी से बिल्कुल अनजान था और वो कोई ख़ास भी नहीं थी.... हम दोस्त अपनी बातों में मस्त दौड़ लगाते हुए जैसे ही उनके पास पहुचे तो बीच वाली लड़की मेरे को बहुत पसंद आई. मै सिर्फ़ बनियान और नेक्कर मैं था तो मेरे सारे मस्सल्स दिखाई दे रहे थे जिससे शायद वो थोडी इम्प्रेस हुई उसने भी मुझे भरपूर नज़र देखा. मेरा ध्यान उस लड़की पर लगा होने से मैं नीचे पत्थर नही देख पाया और ठोकर खाकर गिर पड़ा वो तीनो लड़कियां बहुत जोरों से हंस पड़ी और भाग गई. मुझे घुटनों और सर में बहुत चोट लगी थी काफ़ी खून बहा था इस कारण मै कुछ दिन अपनी मोर्निंग एक्सर्साईज के लिए दोस्तों के पास नही जा पाया.

ठंडों का मौसम चल रहा था हमारे मोहल्ले मैं एक शादी थी. मेरी हर किसी से अच्छी पटती थी इसलिए मेरे बहुत सारे दोस्त हुआ करते थे. उस शादी में मैं अपने ऊपर एक जिम्मेदार पड़ोसी की भूमिका निभाते हुए बहुत काम कर रहा था.... और मै जयादातर महिलाओं के आस पास मंडराता कि शायद कोई पट जाए या कोई लिंक मिल जाए मुनिया रानी को चोदने या दर्शन करने के। पर किस्मत ख़राब. कोई नही मिली. मुझ से किसी खनकती आवाज ने कहा " सुनिए आप तो बहुत अच्छे लग रहे है आप और बहुत मेहनत भी कर रहे है यहां "

मैंने जैसे ही मुड़कर देखा तो वो ही बीच वाली लड़की जिसको देखकर मै गिरा था और जिसके कारण मेरे सर पर अभी भी पट्टी बंधी हुई थी जिसमे ३ टाँके लगे हुए थे और घुटने का भी हाल कुछ अच्छा नही था... मैंने देखा वो खड़ी मुस्कुरा रही थी. मैंने कहा "आ आप ........ आपने मेरे से कुछ कहा"

" नही यहां ऐसे बहुत सारे लोग है जो मेरे को देख कर रोड पर गिरकर अपना सर फ़ुड़वा बैठे" वो अपनी सहेलियों से घिरी चहकती हुई बोली।

" आप लोग तो हंस कर भाग गई.... मेरे सर और पैर दोनों मैं बहुत चोट लगी थी" मैंने कहा

मेरे ही मोहल्ले की एक लड़की ज्योति जिसे मै पहले पटाने की कोशि्श कर चुका था पर वो पटी नहीं थी बल्कि मेरी उससे लडाई हो गई थी. ज्योति ने मेरे से मुह चिड़ाते हुए कहा इनको " च्च्च च्च छक ...... अरे!! अरे!! बेचारा..... देव भैया अभी तक कोई मिली नही तो अब लड़कियों को देख कर सड़कों पर गिरने लगे " और खिल खिला कर हंस दी .....

मैंने ज्योति के कई सपने देखे मै ज्योति को अपनी गाड़ी पर बिठाकर कही ले जा रहा हूँ उसके दूध मेरी पीठ से छु रहे है वो मेरे लंड को पकड़ कर मोटरसाईकिल पर पीछे बैठी है उसके बूब्स टच होने से मेरा लंड खड़ा हो जाता है तो मै धामोनी रोड के जंगल मै गाड़ी ले जाता हूँ जहा उसको गाड़ी से उतार कर अपने गले से लिपटा लेता हूँ उसके लिप्स, गर्दन बूब्स पर किस कर रहा हूँ और उसके मम्मे दबा रहा हूँ साथ ही साथ उसकी मुनिया(बुर) को भी मसल रहा हूँ वो पहले तो न नुकर करती है लेकिन जब मै उसकी मुनिया और बूब्स उसके कपडों के ऊपर से किस करता हूँ और उसकी सलवार खोल कर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी पेशाब को चाटने लगा ज्योति भी सीई हीई येः क्या कर रहे हो........ मैं जल रही हूँ मुझे कुछ हो रहा है ....... कह रही है और मै ज्योति को वहीं झाडियों मैं जमीन पर लिटाकर चोदने लगता हूं। पहले ज्योति का पानी छूटता है फिर मेरा.. जब ख्वाब पूरा हुआ तो देखा लंड मेरा मेरे हाथ मैं झड़ चुका है और मुट्ठी मारने से लंड लाल हो गया है

मुझे बहुत बुरा लगा ज्योति के तानों से मेरी बे-इज्ज़ती हुई थी वहां से मैंने इन दोनों को सबक सिखाने का ठान लिया. मैंने गुलाब जामुन का शीरा उसकी बैठने वाली सीट पर लगा दिया जिससे उसकी सफ़ेद ड्रेस ख़राब हो गई और वो ऐन मौके पर गन्दी ड्रेस पहने यहां वहां घूमती रही और लोग उसे कुछ न कुछ कहते रहे .... पर उसका चेहरा ज्यों का त्यों था .. मैंने ज्योति को उसके हाल पर छोड़ कर अपने टारगेट पर कन्स्न्ट्रेट करनाउचित समझा

मै उससे जान पहचान करना चाहता था जब से उसको देखा था उसके भी नाम की कई मूठ मारी जा चुकी थी और तकिये का कोना चोदा जा चुका था.. मेरा तकिये के कोने मेरे स्पेर्म्स के कारण कड़क होना शुरू हो गई थे. पर कोई लड़की अभीतक पटी नहीं थी.

इसबार मैंने हिम्मत करके उसका नाम पूछ लिया. जहा वो खाना खा रही थी वहीं चला गया और पूछा "आप क्या लेंगी और..... कुछ लाऊँ स्वीट्स या स्पेशल आइटम आपके लिए...

भीड़ बहुत थी उस शादी मैं वो मेरे पास आ गई और चुपचाप खड़ी होकर खाना खाने लगी. मैंने उसको पूछा "आप इस ड्रेस मैं बहुत सुंदर लग रही है.. मेरा नाम देव है आपका नाम जान सकता हूँ..." फिर भी चुप रही वो और एक बार बड़े तीखे नैन करके देखा. हलके से मुस्कुराते हुए बोली" अभी नही सिर्फ़ हाल चाल जानना था सो जान लिया"

मैंने उसका नाम वहीँ उसकी सहेलियों से पता कर लिया और उसका एड्रेस भी पता कर लिया था. उसका नाम मीनू था. वो मेरे घर के ही पास रहती थी. पंजाबी फॅमिली की लड़की थी. सिंपल सोबर छरहरी दिखती थी. उसकी लम्बाई मेरे लायक फिट थी उसके बूब्स थोड़े छोटे ३२ के करीब होंगे और पतला छरहरा बदन तीखे नैन-नक्श थे उसके. वो मेरे मन को बहुत भा गई थी. शादी से लौट के मैंने उस रात मीनू के नाम के कई बार मुट्ठ मारी. मै उसको पटाने का बहुत अवसर खोजा करता था वो मेरे घर के सामने से रोज निकलती थी पर हम बात नही कर पाते थे. ऐसा होते होते करीबन १ साल बीत गया.

एक बार मै दिल्ली जा रहा था गोंडवाना एक्सप्रेस से. स्टेशन पर गाड़ी आने मैं कुछ देर बाकी थी शादियों का सीज़न चल रहा था काफ़ी भीड़ थी. मेरा रिज़र्वेशन स्लीपर में था. तभी मुझे मीनू दिखी, साथ में उसका भाई और सभी फॅमिली मेम्बेर्स भी थे। उसके भाई से मेरी जान पहचान थी सो हम दोनों बात करने लगे. मैंने पूछा "कहा जा रहे हो" तो बोले "मौसी के यहां शादी है दिल्ली मैं वहीँ जा रहे है".

मुझ से पूछा " देव जी आप कहा जा रहे हो"

मैंने कहा " दिल्ली जा रहा हूँ थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी अटेण्ड करनी है"

इतने में ट्रेन आने का अनौंसमेंट हो चुका था। उनके साथ बहुत सामान था, मेरे साथ सिर्फ़ एक एयर बैग था उन्होंने मेरे से सामान गाड़ी में चढाने की रेकुएस्ट करी गाड़ी प्लेटफोर्म पर आ चुकी थी यात्री इधर उधर अपनी सीट तलाशने के लिए बेतहाशा भाग रहे थे बहुत भीड़ थी. मीनू के भाई ने बताया की इसी कोच में चढना है तो हम फटाफट उनका सामान चढाने मैं बीजी हो गए. उनका सामान गाड़ी के अंदर करके उनकी सीट्स पर सामान एडजस्ट करने लगा मैंने अपना बैग भी उन्ही की सीट पर रख दिया था मुझे अपनी सीट पर जाने की कोई हड़बड़ी नही थी क्योंकि बीना जंक्शन तक तो गोंडवाना एक्सप्रेस मैं अपनी सीट का रिज़र्वेशन तो भूल जाना ही बेहतर होता है. क्योंकि डेली पैसेन्जर्स भी बहुत ट्रेवल करते है इस ट्रेन से सो मै उनका सामान एडजस्ट करता रहा.

गाड़ी सागर स्टेशन से रवाना हो चुकी थी. मै पसीने मैं तरबतर हो गया था.. अब तक गाड़ी ने अच्छी खासी स्पीड पकड़ ली थी. मीनू की पूरी फॅमिली सेट हो चुकी थी और उनका सामान भी. गाड़ी बीना 9 बजे रात को पहुचती थी और फिर वहा से दूसरी गोंडवाना मैं जुड़ कर दिल्ली जाती थी. इसलिए बीना मैं भीड़ कम हो जाती है. मै सबका सामान सेट करके थोड़ा चैन की साँस लेने कम्पार्ट्मेन्ट के गेट पर आ गया फिर साथ खड़े एक मुसाफिर से पूछा "यह कौन सा कोच है " उसने घमंडी सा रिप्लाई करते हुए कहा एस ४.... तुम्हें कौन सो छाने ( आपको कौन सा कोच चाहिए)" "अरे गुरु जोई चाने थो ....... जौन मैं हम ठाडे है ..... (बुन्देलखंडी) (यही चाहिए था जिसमे हम खड़े है)"

मैंने अपनी टिकेट पर सीट नम्बर और कोच देखा तो यही कोच था जिसमे मीनू थी बस मेरी बर्थ गेट के बगल वाली सबसे ऊपर की बर्थ थी. बीना मैं मैंने हल्का सा नाश्ता किया और घूमने फिरने लगा. मुझे अपने बैग का बिल्कुल भी ख्याल नही था. बिना से गाड़ी चली तो ठण्ड थोडी बढ गई थी मुझे अपने बैग का ख्याल आया. मै उनकी सीट के पास गया तो मैंने "पूछा मेरा बैग कहा रख दिया." मीनू की कजिन बोली " आप यहां कोई बैग नही छोड़ गए आप तो हमारा सामान चढवा रहे थे उस समय आपके पास कोई बैग नही था" जबकि मुझे ख्याल था की मैंने बैग मीनू की सीट पर रखा था. वो लोग बोली की आपका बैग सागर मैं ही छूट गया लगता है.

मैंने कहा कोई बात नही. उन्होंने पूछा कि आपकी कौन सी बर्थ है मैंने कहा इसी कोच मैं लास्ट वाली. मीनू की मम्मी बोली "बेटा अब जो हो गया तो हो गया जाने दो ठण्ड बहुत हो रही है ऐसा करो मेरे पास एक कम्बल एक्स्ट्रा है वो तुम ले लो"

मैंने कहा "जी कोई बात नहीं मै मैनेज कर लूँगा"

" ऐसे कैसे मनेज कर लोगे यहां कोई मार्केट या घर थोड़े ही किसी का जो तुमको मिल जाएगा ठण्ड बहुत है ले लो" मीनू की मम्मी ने कहा.

"मुझे नींद वैसे भी नहीं आना है रात तो ऐसे ही आंखों मैं ही कट जायेगी.." मैंने मीनू की ऑर देखते हुए कहा. मीनू बुरा सा मुह बनके दूसरे तरफ़ देखने लगी.

ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर दौडी जा रही थी. मुझे ठण्ड भी लग रही थी तभी मीनू की मम्मी ने कम्बल निकालना शुरू किया तो मीनू ने पहली बार बोला. रुको मम्मी मै अपना कम्बल दे देती हूँ और मै वो वाला ओढ लूंगी. मीनू ने अपना कम्बल और बिछा हुआ चादर दोनों दे दी..... मुझे बिन मांगे मुराद मिल गई क्योंकि मीनू के शरीर की खुशबू उस कम्बल और चादर मैं समां चुकी थी. मै फटाफट वो कम्बल लेकर अपनी सीट पर आ गया
... मुझे नींद तो आने वाली नहीं थी आँखों मैं मीनू की मुनिया और उसका चेहरा घूम रहा था. मै मीनू के कम्बल और चादर को सूंघ रहा था उसमे से काफी अच्छी सुंगंध आ रही थी. मैं मीनू का बदन अपने शरीर से लिपटा हुआ महसूस करने लगा और उसकी कल्पनों मैं खोने लगा.. मीनू और मै एक ही कम्बल मै नंगे लेटे हुए है मै मीनू के बूब्स चूस रहा हूँ और वो मेरे मस्त लौडे को खिला रही है. मेरा लंड मै जवानी आने लगी थी जिसको मै अपने हाथ से सहलाते हुए आँखे बंद किए गोंडवाना एक्सप्रेस की सीट पर लेटा हुआ मीनू के शरीर को महसूस कर रहा था.

जैसे जैसे मेरे लंड मै उत्तेजना बढती जा रही थी वैसे वैसे मै मीनू के शरीर को अपने कम्बल मैं अपने साथ महसूस कर रहा था. इधर ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर थी मै मीनू के बूब्स प्रेस करते हुए उसके क्लिटोरिस( चूत के दाने) को मसल रहा था और उसके लिप्स और गर्दन पर लिक करता हुआ मीनू के एक-एक निप्प्ल को बारी बारी चूस रहा था.. इधर मीनू भी कह रही थी अह्ह्ह हह सीईईई ओम्म्म मम् बहु्त अच्छा लग रहा है मै बहुत दिन से तुमको चाहती हूँ देव ....... जबसे तुमको देखा है मै रोज तुम्हारे नाम से अपनी चूत को ऊँगली या मोमबत्ती से ...... चोदती हूं ...उम् म ..... आ अ अ अ .... तुम्हारा लंड तुम्हारे जैसा मस्त है उम् म म म बिल्कुल लम्बा चोडा देव .... उम् म म आ अअ अआ जल्दी से मेरी चूत में अपना लन्ड घुसा दो अब सहन नही हो रहा उ मम म आया अ अ अ और मै एक झटके में मीनू की बुर मैं लंड पेल कर धक्के मारने लगा ट्रेन की रफ्तार की तरह के धक्के ... फटाफट जैसे मीनू झड़ रही हो उम् मम् देव ......मेरी बुर र ... सी पेशाब.... निकलने वाली ही तुम्हारे लंड ने मुझे मूता दिया मेरी पहली चुदाई बड़ी जबरदस्त हुई उम् म आ अ अ जैसे ही मीनू झडी मैं भी झड़ने लगा मै भूल गया की मै ट्रेन मै हूँ और सपने मै मीनू को चौद्ते हुए मुट्ठ मार रहा हूँ और मैं भी आ आया.... हा ह मीनू... ऊऊ मजा आ गया मै कब से तुमको चोदना चाहता था कहते हुई झड़ने लगा और बहुत सारा पानी अपने रुमाल मैं निकाल कुछ मीनू के चादर मैं भी गिर गया.

जब मै शांत हुआ तो मेरे होश वापिस आए और मैंने देखा कि मै तो अकेला ट्रेन मै सफर कर रहा हूँ.. शुक्र है सभी साथी यात्री अपनी अपनी बेर्थ्स पर कम्बल ओढ कर सो रहे थी. ठण्ड बहुत तेज़ थी उस पर गेट के पास की बर्थ बहुत ठंडी लगती है अब मुझे पेशाब जाने के लिए उठाना था मै हाफ पेंट में सफर करता हूँ तो मुझे ज्यादा दिक्कत नही हुई..... अब तक रात के १.३० बज चुके थे मै जैसे ही नीचे उतरा तो मुझे लगा जैसे मीनू की सीट से किसी ने मुझे रुकने का संकेत किया हो मीनू की सीट के पास कोच के सभी यात्री गहरी नींद मै सो रहे थे और ट्रेन अभी १ घंटे कही रुकने वाली नही थी. मैंने देखा मीनू हाथ मै कुछ लिए आ रही है.. मेरे पास आकर बोली "बुधू तुम अपना बैग नहीं देख सके मुझे क्या संभालोगे" ठंड मैं ठिठुरते हो ......"

मैंने उसकी बात पर ध्यान नही दिया उसने क्या मेसेज दे दिया मै रिप्लाई दिया " मैं तुम्हारे कम्बल मै तुम्हारी खुशबू लेकर मस्त हो रहा था" मै अपने लंड के पानी से भरा रुमाल अपने हाथ मै लिए था. जिसको देख कर वो बोली "यह क्या है" मैंने कहा " रुमाल है".

"यह गीला क्यों है" मीनू ने पूछा " ऐसे ही... तुम्हारे कारण ... कह कर मैंने टाल दिया......

मीनू ने पूछा "मेरे कारण कैसे......" फिर मुझे ध्यान आया की अभी अभी मीनू ने मुझे कुछ मेसेज दिया है....

मैंने मीनू को गेट के पास सटाया और उसकी आंखों मै देखते हुए उसको कहा मीनू आई लव यू और उसके लिप्स अपने लिप्स मैं भर लिए उसके मम्मे पर और गांड पर हाथ फेरने लगा. मीनू भी मेरा किस का जवाब दे रही थी.....

मै मीनू के दूधों की दरार मै चूसने लगा था और बूब्स को दबा रहा था... मेरा लंड जो आधा बैठा था फ़िर से ताकत भरने लगा और उसके पेट से टकराने लगा.. मीनू मेरे से बोली आई लव यू टू.. इधर कोई देख लेगा जल्दी से इंटर कनेक्ट कोच की और इशारा कर के कहने लगी उस कोच के टॉयलेट मैं चलो ......

हम दोनों टॉयलेट में घुस गए.... टॉयलेट को लाक करते ही मै उसको अपने से लिपटा लिया और पागलों की भाति चूमने लगा.. मीनू मै तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और तुमको दिलो जान से चाहता हूँ......

हां! मेरे राजा देव मै भी तुम्हारे बिना पागल हो रही थी..... जानते हो यह प्रोग्राम कैसे बना दिल्ली जाने का .....मेरे आने का मै तुम्हारे घर आई थी मम्मी के साथ तुम्हारी मम्मी और मेरी मम्मी संकट मोचन मन्दिर पर रामायण मंडल की मेंबर है.. तो उन्होंने बताया की देव को परसों दिल्ली जाना ही तो वो नही जा सकती उनके साथ. तब मैंने भी मम्मी को प्रोग्राम बनने को कह दिया मैंने कहा यह कहानी छोड़ो अभी तो मजा लो

मैंने उसको कमोड शीट पर बिठा दिया और उसके पैर से लेकर सर तक कपडों के ऊपर से ही चूसने चूमने लगा..... मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा वो "सी ई ईई आई वहां नही वहां कुछ कुछ होता है जब भी तुमको देखती हु मेरी अंदर से पेशाब निकल जाती है वहां नही" ऐसा कहने लगी

मैंने कहा "मुझे विश्वास नही होता मुझे दिखाओ " ऐसा कहकर मै सलवार के ऊपर से उसकी अंदरूनी जांघ और बूब्स पर हाथ से मालिश करने लगा

" हट बेशरम कभी देखते है लड़कियों की ऐसे वो शादी के बाद होता है " मीनू बोली

मैंने मीनू के बूब्स को सहलाते हुई और उसकी अंदरूनी जांघ पर चूमते हुए उसकी चूत की तरफ़ बदने लगा और कहा " ठीक है जैसा तुम कहो पर मै कपड़े के ऊपर से तो चेक कर लूंगा"'' मीनू भी अब गरमाने लगी थी उसकी चूत भी काफ़ी गर्म और गीली होने लगी थी. वो अपने दोनों पैरो को सिकोड़ कर मेरे को चूत तक पहुचने से रोक रही थी... " प्लीज़ वहां नही मैं कंट्रोल नहीं कर पाऊँगी अपने आप, को कुछ हो जायेगा .... मेरी कजिन के भरोसे आई हूं उसको पटा रखा है मैंने। यदि कोई जाग गया तो उसकी भी मुसीबत हो जायेगी प्लीज़ मुझे जाने दो अब..."

मैंने मीनू के दोनों पैर अपनी ताकत से फैलाये और उसकी सलवार की सिलाई को फाड़कर उसकी पिंक पैंटी जो की उसके चूत के रस मैं सराबोर थी अपने मुह में ले लिया... उसकी पैंटी से पेशाब की मिलीजुली स्मेल के साथ उसके पानी का भी स्वाद मिल रहा था.....

मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को जोरो से चूसना चालू कर दिया.. मीनू कहे जा रही थी" प्लीज़ नो ! मुझे जाने दो उई मा मैं कंट्रोल खो रही हूं उम् मम मम् मुझे जाने दो.... और.. जोर से चाटो मेरी पेशाब में कुछ हो रहा है बहुत अच्छा लग रहा है मेरे पेट में गुदगुदी हो रही है मीनू के निप्पल भी खड़े हो गए थी क्योंकि उसकी कुर्ती मै हाथ डाल कर उसके मम्मे मसल रहा था मीनू मेरे सर को अपनी चूत पर दबाये जा रही थी ... उम्म मै मीनू की पैन्टी को चूत से साइड में खिसका के उसकी चूत को चूत की लम्बाई में चूस रहा था।

मीनू अपने दोनों पैर टॉयलेट के विण्डो पर टिकाये मुझसे अपनी चूत चटवा रही थी मीनू की बुर बिल्कुल कुंवारी थी मैंने अपनी ऊँगली उसकी बुर मैं घुसेदी बुर बहुत टाइट और गीली थी मीनू हलके हलके से करह रही थी " उम्म्म आआ मर गई" मैं मीनू की बुर को ऊँगली से चोद रहा था और चूत के दाने को चाट और चूस रहा था.. सलवार पहने होने के कारण चूत चाटने मैं बहुत दिक्कत हो रही थी.

मीनू की चूत झड़ने के कगार पर थी'' आ आअ कुछ करो मेरा शरीर अकड़ रहा है पहले ऐसा कभी नही हुआ मेरी पेशाब निकलने वाली ही अपना मुह हटाओ और जोर से चूसो अपनी उंगली और घुसाओ आअ आ . उई माँ आअ अ .... उसकी जवानी का पहला झटका खाकर मेरे मुह को अपने चूत के अमृत से भरने लगी...... मीनू के मम्मे बहुत कड़क और फूल कर ३२ से ३४ होगये मालूम होते थे... इधर मेरी हालत ज्यादा ख़राब थी ... मैंने मीनू को बोला प्लीज़ एक बार इसमे डाल लेने दो मीनू ने कहा ' अभी नही राजा मै तो ख़ुद तड़प रही हूँ तुम्हारी पेशाब अपनी पेशाब मैं घुसवानेको.. उम्म्म सुना ही बहुत मजा आता है और दर्द भी होता है "

मैंने कहा "अपन दोनों के पेशाब के और भी नाम है " "मुझे शर्म आती है वो बोलते हुई" और वो खड़ी होने लगी मै कमोड शीट पर बैठा और अपनी नेक्कर नीचे खिसका दी मेरा हल्लाबी लंड देखकर उसका मुह खुला का खुला रह गया.

"हाय राम... ममम म इतना बड़ा और मोटा..........तो मैंने कभी किसी का नही देखा

मैंने पूछा "किसका देखा है तुमने... बताओ "

मेरे भैया जब भाभी की चुदाई करते है तो मै अपने कमरे से झाँक कर देखती हूँ.. भाभी भइया के इससे अद्धे से भी कम साइज़ के पेशाब में चिल्लाती है फ़िर इस जैसी पेशाब मै तो मेरा क्या हाल करेगी... मै कभी नही घुसवाउंगी"

मैंने कहा अछा "मत घुसवाना, पर अभी तो इसको शांत करो"

"मै कैसे शांत करू" मीनू ने कहा

मैंने कहा "टाइम बरबाद मत करो, जल्दी से इसे हाथ मैं लो और मेरी मुट्ठ मारो" मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर लगाया और आगे पीछे करवाया. पहले तो मीनू थोड़ा हिचकी फिर बोली " तुम्हारा लंड बहुत शानदार है मेरी चूत में फ़िर से खुजली होने लगी है.......हीई सीइई मैई इ इक्या करू ओम मम म फ्लिच्क कक्क " एक ही झटके मैं मेरा सुपाडा उसने किसी आइसक्रीम कोण की तरह चूस लिया मै जैसे स्वर्ग में पहुच गया मैंने उसके मुह में धक्के मारे मैंने कहा मेरा पानी निकलने वाला है.

" मेरी चूत फ़िर से गरम हो गई है इसका कुछ करो सी ई इ आअ आ अ ..........." मीनू सिसकारियां भर रही थी मैंने मीनू को फौरन कमोड शीट पर बैठाया और उसकी कुर्ती का कपड़ा उसके मुह मै भर दिया..... जिससे लंड घुसने पर वो चिल्लाये नही मैंने उसको समझाया भी थोड़ा दर्द होगा सहन करना .. मैंने उसकी दोनों टांगें फैली और चूत चाटी दो ऊँगली उसकी चूत मै भी घुसी उसकी चूत बहुत टाइट थी और बहुत गीली लिसलिसी सी गरम थी. मीनू कसमसा रही थी " हीई इ सी ई इ इ इ अब जल्दी करो.. मेरे बदन मैं करोड़ों चीटियाँ घूम रही है मेरी बुर को ना जाने क्या हो गया है" मीनू ने कुर्ती मुह से निकाल कर कहा.

मैंने अपने लन्ड पर बहुत सारा थूक लगाया और कुछ उसकी गीली चूत मै भी लगाया जिससे उसकी चूत के लिसलिसे रस से मेरा थूक मिलकर और चूत को चिकना कर दे..... मैंने लंड हाथ मैं लेकर सुपाडा मीनू की चूत मैं ऊपर नीचे रगडा .. मीनू अपनी गांड उठा कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी अब वो बिना लंड डलवाए नही रह सकती थी

उसने मेरे लन्ड को पकड़ा और अपनी बुर पर टिकाया मैंने पहले थोड़ा सा सुपाडा अंदर कर उसको अंदर बाहर कर एडजस्ट किया.... मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे लण्ड को किसी जलते हुए चमड़े के क्लंप मैं कस दिया हो. इतनी टाइट बुर थी मीनू की मैंने थोडी और लंड अंदर पेला मीनू की मुह मै यदि कुर्ती ना घुसाई होती तो पूरे कम्पार्टमेंट के यात्री हमें चुदाई करते हुए पकड़ लेते....

मीनू मेरे मोटे लंड के कारन अपना सिर इधर उधर हिलाकर और अपनी आंखों से आंसू निकाल कर बता रही थी की उसको कितना दर्द हो रहा है........ मैं थोडी देर रुक कर फाटक से एक गहरा और चूत फाड़ धक्का पेला जिससे मीनू की बुर की झिल्ली फटी और लौड़ा उसकी गहराई तक समां गया मीनू की तो हालत ख़राब हो गई थी.. मैंने थोड़ा रुक कर लंड बाहर खींचा तो उसके साथ खून भी बहर आया और फटा फट धक्के मारने लगा. मीनू की टाइट चूत के कारण मेरे गेंदों मै उबाल आना शुरू हो गया था.. मैंने मौके की नजाकत को ताड़ते हुए पहले लंड बाहर निकाला और गहरी साँस लेकर अपनी पोस्शन कंट्रोल करी और मीनू के मुह से कुर्ती हटी और फिर धीरे धीरे पूरा लंड घुसा कर शुरू मै हलके धक्के मारे फ़िर ताबड़ तोड़ धक्के लगाए.

मै अपनी स्पीड गोंडवाना एक्सप्रेस से मिला रहा था..." मीनू की बुर पानी छोड़ने वाली थी क्योंकि उसने अपनी कुर्ती वापिस अपने मुह में डाल ली थी और मीनू की बुर मेरे लौडे को कसने लगी थे मै मीनू के ३२ से ३४ साइज़ हुए मम्मे मसलता हुआ चुदाई कर रहा था.. मीनू बहुत जोरो से झडी तभी मेरे लण्ड ने भी आखिरी सांसे ली तो मैंने मीनू के दोनों मम्मे पूरी ताकत से भीचते हुए अपना लौड़ा मीनू की टाइट बुर मै आखिरी जड़ तक पेल दिया और मीनू की बूर को मैंने पहला वीर्य का स्वाद दिया मीनू भी बहुत खुश हो गई थी. जब साँस थमी तो मैंने लन्ड मीनू की बुर से बाहर निकाल जिससे मीनू की बुर से मेरे वीर्य के साथ मीनू की बुर से जवानी और कुंवारापन का सबूत भी बहकर बाहर आ रहा था.

मैंने मीनू को हटाया और कमोड में पेशाब करी मीनू बड़े गौर से मेरे लंड से पेशाब निकलते देखते रही और एक बार तो उसने मुह भी लगा दिया. उसका पूरा मुह मेरे पेशाब से गीला हो गया कुछ ही उसके मुह में जा पाया मैंने अपना लंड धोया नही उस पर मीनू की बुर का पानी और जवानी की सील लगी रहने दिया और नेक्कर के अंदर किया मीनू की बुर मै सुजन आ गई थी मै इंतज़ार कर रहा था की अब मीनू भी अपनी बुर साफ़ करेगी तो नंगी होगी तो उसने मुझे बाहर जाने को बोला. मै उसकी बात मानकर उसको अपना रुमाल बताकर आ गया. मैंने अपनी घड़ी मै टाइम देखा तो हम लोगो के सवा घंटा गुजर गया था टॉयलेट में... शुक्र है भगवन का कि ठंड के कारण कोई नही जागा था और ट्रेन भी नही रुकी थी. थोडी देर बाद मीनू अपनी बुर पर हा्थ फेरती हुई कुछ लड़खड़ाते हुए बाहर आई मैंने पूछा क्या हाल है जानेमन तुम्हारी बुर के " सुजन आ गई है पर चुदवाने मै बहुत मजा आया फ़िर से चुदवाने का मन कर रहा है

" ये लो यह रूमाल तुम वहां छोड़ आए थे। स फक्स....इसमे यह क्या लगा है लिसलिसा" यह वोही रुमाल था जिसमे मैंने मीनू के नाम की मुट्ठ मारी थी अपनी सीट पर लेते हुए वोही मुझे देने लगी. "इसमे वोही लिसलिसा है तो अभी तुम्हारी मुनिया मै मेरे लंड ने उडेला है.... और तुम क्या लिए हो" मैंने मीनू को कहा... उसने पहले सूंघा फूले कहने लगी " ये मेरी पैंटी ही... ख़राब हो गई थी तो मैंने निकाल ली.. और तुम्हारा रुमाल मै ले जा रही हूँ इसे अपने साथ रखूँगी और तुम्हारे पानी का स्वाद लेकर इसे सूंघकर सो जाउंगी.. तुम दिल्ली में कहां रुकोगे.. और किस काम से जा रहे हो" मीनू ने मेरे से पूछा . तुम अपनी पैंटी मुझे दो मैंने मीनू से कहा फिर बताउंगा कि मैं कहां और क्यों जा रहा हूँ. पहले तो मीनू मुझे घुड़की "तुम क्या करोगे मेरी गन्दी पैंटी का" मैंने कहा " वोही जो तुम मेरे रुमाल के साथ करोगी और मै तुम्हारी पैंटी अपने लंड पर लपेट कर मुट्ठ भी मारूंगा" उसने मेरे को चुम्मा देते हुए कहा "पागल" और अपनी पैंटी मुझे दे दी मैंने वहां जहां उसकी बुर रहती है उसको अपनी नाक से लगाया और जीभ से चाटा तो मीनू शर्मा गई

मैंने मीनू को बताया की मुझे दिल्ली में थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी है इतना सुनकर वो कुछ आश्वस्त हुई. मैंने कहा तुम मेरा सेल नम्बर ले लो मेरे को फ़ोन कर लेना मै बता दूँगा की कहा पर रुकुंगा और हम कैसे और कब मिलेंगे यह भी बता देंगे.

मीनू मेरा रुमाल लेकर अपनी सीट पर आ गई और मै अपनी सीट पर. अब मेरा बैग भी आ गया था सो मैंने बैग मै से एयर पिल्लो निकाल और अपने सिराहने रख कर मीनू को याद करने लगा मेरा मेरा लंड फ़िर से खडा होने लगा सो मैंने सीट पर लेटकर मीनू की पैंटी सूंघने लगा उसमे से मीनू की पेशाब और उसके पानी की स्मेल आ रही थी. उस स्मेल ने कमाल ही कर दिया मेरा लंड फंफनाकर बहुत कड़क हो गया मैंने मीनू की पैंटी का वो हिस्सा जो कि उसकी चूत से चिपका रहता था मैंने फाड़ लिया और बाकी की पैंटी लेटे लेटे ही लंड पर लपेट ली नेक्कर के अंदर मैंने मीनू को सपने में चोदते हुए और उसकी बुर की खुसबू सूंघते हुए उसकी पेशाब भरी पैंटी को चाटते हुए मुठ मारने लगा मैंने अपना सारा पानी मीनू की फटी हुई पैंटी और अपनी चड्डी मै निकाल दिया ३ बार झड़ने के कारण पता ही नही चला की कब मै सो गया"

सुबह मुझे एहसास हुआ की कोई मुझे जगा रहा है.. तो मैंने आँख खोलते हुए पुछा कौन है गाड़ी कौन से स्टेशन पर खड़ी है .... मुझे जगाने वाला मेरा साला मीनू का भाई था बोला " देव जी उठिए निजामुद्दीन पर गाड़ी खड़ी है पिछले १५ मिनिट से सभी आपने घर पहुच गए आप अभी तक सोये हुए हूँ" मै फटाफट उठा और अपना सामान बटोरा वैसे ही हाथ में लिया और प्लेटफोर्म पर उतर आया. वहा सबसे पहले मेरी नज़र मेरी नई चुदैल जानेमन मीनू पर पड़ी वो बिल्कुल फ्रेश लग रही थी. उसके चेहरे से कतई ऐसा नही लग रहा थी कल रात को मैंने इसी ट्रेन मै मीनू की बुर का अपने हल्लाबी लंड से उदघाटन किया था और उसकी सील तोडी थी

प्लेटफॉर्म पर बहुत ठण्ड थी। सुनहरी धूप खिली थी मै टीशर्ट और नेक्कर मै खड़ा था.... मैंने मीनू का कम्बल और चादर तह कर के उनको सौंपे और उनका धन्यवाद दिया मै अपने एयर पिल्लो की हवा ऐसे निकाल रहा था जैसे मीनू के दूध दबा रहा हूँ और यह मीनू को और उसकी कजिन को दिखा भी रहा था.

मैंने उन लोगों से पूछा कि आप कहा जायेंगे मीनू का भाई बोला हमको सरोजिनी नगर जाना है और आपको कहा जाना है. मुझे भी सरोजिनी नगर जाना था वहा पर मेरे दोस्त की शादी है... मैंने उन लोगों को जवाब दिया.
मैंने कहा मेरे साथ चलिए.... मुझे लेने गाड़ी आई होगी बाहर.....वो लोग बोले नही नहीं आप चलिए हम बहुत सारे लोग है और इतना सारा समान है, आप क्यों तकलीफ करते है.....

मैंने कहा इसमे तकलीफ जैसे कोई बात नही हम आखिर एक ही मोहल्ले के लोग है इसमे तकलीफ क्यों और किसे होने लगी फ़िर गाड़ी में अकेला ही तो जाउंगा यह मुझे अच्छा नही लगेगा. मीनू की कजिन धीमे से बोली रात की मेहनत सुबह रंग ला रही है... और मुझे मीनू को देखकर हलके से मुसकुरा पड़ी. हम सभी बाहर आए तो देखा कि एक टाटा सूमो पर मेरे नाम की स्लिप लगी हुई थी मैंने मीनू के भाई और मम्मी से कहा की देखिये किस्मत से मेरे दोस्त ने भी बड़ी गाड़ी भेजी है. इसमे हम सब और पूरा सामान भी आ जाएगा.

गाड़ी में सारा सामान लोड कर सभी को बैठा कर गाड़ी रिंग रोड पर निकलते ही मैंने गाड़ी साइड मै रुकवाई और एक पी सी ओ में घुस गया वहा से अपने दोस्त को फ़ोन किया कि यार मेरे लिए एक रूम का अलग अरेंजमेन्ट हो सकता है क्या... उसने पूछा क्यों.... मैंने कहा देखा तेरे लौडे का इन्तेजाम तो कल हो गया तू कल ही चूत मारेगा मै अपने लिए अपनी चूत का इन्तेजाम सागर से ही कर के लाया हूँ... रात में ट्रेन में मारी थी चूत पर मजा नही आया। तसल्ली से मारना चाहता हूँ.

मेरा दोस्त बोला " देव भाई तुमसे तो कोई लड़की पटती नही थी यह एक ही रात में तुमने कैसे तीर मार लिए और तुमने उसे चोद भी डाला!

मैंने कहा बोल तू कर सकता है तो ठीक नही तो मै होटल जा रहा हूं। मुझे मेरे दोस्त ने आश्वस्त करा दिया कि वो ऐसा इन्तेजाम कर देगा.

मै फ़ोन का बिल देकर गाड़ी मै बैठा और इंतज़ार कराने के लिए सभी को सॉरी बोला और ड्राईवर को चलने का हुकुम दिया ...मैंने पूछा आप लोग सरोजिनी नगर मै किसके यहां जायेंगे...मीनू की मम्मी बोली " बेटा मेरी बहिन के लड़के की शादी है... कल की मिस्टर कपूर... रोहन कपूर.....

" ओह फ़िर तो मजा ही आ गया भाई" मै उछलता हुआ बोला.. सब मेरे को आश्चर्य भरी निगाहों से देखने लगे सो मै आगे बोला " वो.. वो.. क्या है की मुझे भी कपूर साहब के बेटे यानि सुमित की शादी मै जाना है..

बातों बातों में कब सुमित का घर आ गया पता ही नही चला.... पर मै सुमित से आँख नही मिला पा रहा था.. जब सब घर के अंदर चले गए तो मैंने ड्राईवर को रुकने को बोला और अपना बैग गाड़ी मै छोड़ कर सुमित को बुलाने उसके घर मै गया.... सुमित आकर मेरे से लिपट गया.. बहुत खुश था सुमित पर मै उससे आँख नही मिला पा रहा था मैंने सुमित को एक तरफ़ ले जाकर बोला " देख यारा बुरा मत मानियो .. तुम्हारे यहां मेहमान बहुत है मै ऐसा करता हूँ कि मै और सुधीर मेरा एक और दोस्त दोनों होटल मै रुक जाते है.."

मेरा इतना कहते ही सुमीत के चेहरे के भाव बदल गए.. सुमित ने कहा " देख भाई देव मै जानता हूँ की तुम होटल क्यों जा रहे हो यार कोई बात नही तुमने रेखा (मीनू की कजिन) को चोद दिया तो क्या हुआ.. इससे कोई फर्क नही पड़ता.. यदि तुम मीनू को भी चोद देते तो इसमे कोई दिक्कत नही थी मै भी उसको चोदना चाहता था पर मौका नही मिला या मेरी हिम्मत नही हुई.. इसे दिल पे मत ले यार" मौज कर यारा मैंने तेरे लिए स्पेशल रूम का अरेंजमेन्ट किया है वो भी तुम्हारी डार्लिंग के साथ वाले रूम में।

यह सुनकर मेरी जान में जान आई. मै सुमित को क्लीयर कर देना चाहता था की मै रेखा नही मीनू को चोदना चाहता हूँ." सो मैंने कहा मैंने मीनू को चोदा है ट्रेन में.... और उसको ही तसल्ली से चोदना चाहता हूं..

सुमित बोला " सेक्सी तो रेखा थी पर तुमने मीनू को कैसे चोद लिया.. वो बधाई हो माई बोय...........तभी मीनू थोड़ा लंगडा के चल रही थी. तुमने तो ऑफिस में अपनी मैडम को भी तगड़ा चोदा था जबकि वो शादी शुदा थी वो तो २ दिन चल फ़िर भी नही सकी थी"

" तुम दोनों दरवाजे पर ही बातें करते रहोगे क्या? सुमित इसे इसके कमरे में पहुंचा दो .. कैसे हो देव बेटा" कहते हुए सुमित के पापा आ रहे थे.....

मैंने उनके पैर छुए और उनसे थोडी बातें करी. फ़िर सुमीत मेरे को अपने रूम मैं ले गया.. सुमीत के पिता बहुत बड़े बिज़नस मैंन थे। बहुत बड़ा बंगला था उनका सुमीत ने मुझे सेकंड फ़लूर पर जहा सिरफ़ ३ ही कमरे थे और मीनू वगैरह भी वहीं रुके थे रूम फिक्स किए थे.. रूम बहुत शानदार था एक डबल बेड, टी वी, वी सी डी प्लेयर, फ़ोन सब कुछ था।

सुमित बोला " क्यों देव कैसा लगा मेरा इन्तेजाम तुम्हारी चूत भी तुम्हारे बगल में है और एक खास बात बताऊ मैं- मीनू की बाथरूम तुम्हारी बाथरूम से अटैच्ड है बीच में दरवाजा है आओ मैं तुमको दिखा दू उसने मेरे को वो दूर दिखा दिया और कैसे खुलता है वो भी दिखा दिया मैं वहां से मीनू के बाथरूम मैं पहुच सकता था और वहां से उसके रूम मे. अच्छा चल तैयार होजा और फटाफट नीचे आजा साथ नाश्ता करेंगे ..

मैं सुमित को बोला " सुमित तो मीनू की चूत की खुशबू लेना चाहेगा ?"

सुमित ने कहा कैसे मैंने मीनू की पैंटी का वो फटा हिस्सा उसको दिखाया और उसको सूंघने को दे दिया.. मैं और सुमित पहले भी कई लड़कियां साथ मिलकर चोद चुके थे उसको चूत की स्मेल के बारे में पता था बहुत अच्छी है रे देव मीनू की बुर तो मैं तो उसकी बुर के नाम पर मुट्ठ ही मारता रह गया पर तुने मेरे लन्ड का बदला ले लिया.. यह सब बातें बात बाथरूम में ही हो रही थी... सुमित मेरे रूम से चला गया

घर में काफ़ी हो हल्ला हो रहा था सो मैंने रूम लाक करके टीवी ओं कर दिया और नंगा होकर फ्रेश होने और नहाने बाथरूम मैं घुस गया. बढ़िया गर्म पानी से नहाने लगा तभी मुझे दीवार पर कुछ टकराने की आवाज आई। मैंने शोवेर बंद किया तो उस तरफ़ मीनू नहा रही लगता महसूस हो रही थी.... मैंने …धीरे से दरवाजा खिसकाया जो की बिना किसी आवाज के सरकता था तो देखा एक बिल्कुल जवान नंगा जिस्म शोवेर में मेरी तरफ़ पीठ किया अपनी बुर मैं साबुन लगा रहा था मैं भी मादरजात नंगा था मेरे लंड को चूत का ठिकाना का एहसास होते ही उछाल भरने लगा मैंने आव देखा ना ताव सीधा जाकर उसके मुह पर हाथ रखा जिससे वो डरकर ना चिल्ला पाए और उसकी गांड के बीच मैं अपना हल्लाबी लौदा टिकते हुए उसकी पीठ से चिपक गया.

मेरी पकड़ जबरदस्त थी इसलिए वो हिल भी नही पाई मैंने शोवेर के नीचे ही उसके कानो में कहा कहो जानेमन अब क्या इरादा है चलो एक बार फिर से चुदाई हो जाए और मैं उसकी चूत पर हा्थ फिरने लगा उसने अपनी बुर मैं साबुन घुसा रखा था वो साबुन से अपनी चूत चोद रही थी मैंने कहा यह जगह साबुन रखने की नही लन्ड रखवाने की है और मैं उसके चूत के दाने को मसलने लगा.

पहले तो उसने टाँगे सिकोडी पर दाने को मसलने से वो गरमा गई थी उसने अपनी टाँगे ढीले छोड़ दी मैंने अभी तक उसका मुह ताकत से बंद कर रखा था मैंने कुछ देर इसकी पोसिशन मैं उसकी बुर का दाना मसला और फ़िर मैंने अपनी बीच वाली ऊँगली उसकी बुर के हौले मैं घुसा दी ... बहुत गरम और टाइट चूत थी.. मैंने अपनी ऊँगली से उसकी बुर को चोदने लगा था, वो मस्ताने लगी थी थी और उसकी बुर पनियाने लगी वो हिल रही थी अपनी गांड भी जोरो से हिला रही थी।

मैंने अपनी ऊँगली को उसकी बुर मैं तेज़ी से पेलना शुरू कर दिया यानि की स्पीड बड़ा दी इधर मेरा हल्लाबी लौड़ा जो की उसकी मदमाती गांड मैं फसा हुआ था फनफना रहा था उसकी भी बुर गरमा गई थी.. तभी उसने अपने एक हाथ मेरी उस हथेली पर रखा जिससे मैं उसकी बुर को चोद रहा था फ़िर उसने अपना हाथ मेरे लौडे को छूने के लिए नीचे लगाया वो सिर्फ़ मेरे सुपाडे को ही टच कर पाई वो छटपटा रही थी

बहुत गरम और टाइट चूत थी.. तभी वो अपने दोनों हाथो से मेरा हाथ अपने मुह से हटाने की नाकाम कोशिश करने लगी. मुझे उसकी यह हरकत ठीक नही लगी तो मै उसे बाथरूम से खीच कर अपने बेडरूम मै ले आया और उसको उल्टा ही बेड पर पटक दिया जैसे ही वो पलटी मेरे होश फ़ाखता हो गए वो रेखा थी...

मैंने उसको चुप रहने का इशारा किया और अपने टीवी की आवाज थोडी और बढा दी। रेखा का बदन बहुत सेक्सी था उसके कड़क बिल्कुल गोलाकार ३६ साइज़ के मम्मे सुराहीदार गर्दन, २ इंच गहरी नाभि हल्का सा सांवला रंग। रेखा की चूत डबलरोटी की तरह फूली हुई थी रेखा ने अपनी झांटे बड़ी ही कुशलता से सजा रखी थी मै तो रेखा को नंगी देख कर बेकाबू हो रहा था

रेखा अपनी चूत दोनों हाथों से ढक रही थी और मेरे से कहने लगी प्लीज़ मुझे जाने दो .. मीनू नहाकर आजायेगी तो मुझे दिक्कत हो जायेगी.. मैंने पूछा तुम्हारा रूम अंदर से तो लाक है बा.. बोली हां है मैंने कहा तो फ़िर क्या फिकर तुम जैसे सेक्सी लड़की को नहाने मै टाइम तो लगेगा ही. रेखा तुम बहुत सेक्सी और खूबुसूरत और तुम्हारी चूत तो बहुत गजब की है इसमे जबरदस्त रस भरा हुआ है मुझे यह रस पिला दो प्लीज़ और मै रेखा के ऊपर टूट पड़ा।

रेखा के होंठ बहुत ही रस भरे थे मैंने उसके होंठों को अपने ओठों में कस लिए और उसके लिप्स को चूसने लगा मै एक हाथ से रेखा की मस्त जवानी के मम्मे भी मसल रहा था और अपना लौड़ा उसकी बुर के ऊपर टिका कर रगड़ रहा था पहले तो रेखा छटपटाती रही पर जैसे ही मैंने उसके शरीर पर अपने शरीर के हिस्सों का दबाब बढाया तो वो भी कुछ ढीली पड़ने लगी. अब रेखा ने अपनी चूत से अपने हाथ हटा लिए थे मैंने रेखा के शरीर को सहलाना शुरू किया मै उसकी अंदरूनी जांघों और चूत पर ज्यादा ध्यान दे रहा था.

रेखा भी अब जवाब देने लगी थी और सिसियानी लगी थी रेखा का बदन बड़ा ही गुदाज़ बदन था और ऐसे ही फुद्दी वाली उसी बुर थी मै अब रेखा के निप्प्ल को चूसने के लिए उसके होंठों को चूमते और चाटते हुए नीचे मम्मो की घाटी की ओर चल पड़ा रेखा बहुत जोरो से सिसियाने लगी थी.. ...... मैंने जैसे ही उसके मस्त मामो की सहलाना और उनके किनारों से चूसना चालू किया रेखा छटपटाने लगी मै एक निप्प्ल हाथ से मसल रहा था और दूसरा नीपल की ओर अपनी जीभ ले जा रहा था

रेखा को रेखा को भी अब मजा आने लगा था उसने नीचे हाथ डाल कर मेरा हल्लाब लौड़ा पकड़ लिया और बोली हाय देव मीनू की बुर कितनी खुशनसीब है जिसको तुम्हारे लौडे जैसा चोदु लवर मिला कल रात में ट्रेन में तुमने उसकी बुर के चीथड़े उड़ा दिए मैंने देखा मीनू लंगडाकर चल रही थी

मैंने तुम दोनों की चुदाई के सपने देखते हुए ३ बार अपनी चूत ऊँगली से झाड़ डाली। हय राजा! बहुत मस्त लौड़ा है...

मैंने कहा रेखा तुम्हारी जवानी में तो आग है तुमहरा बदन बहुत गुदाज और सुंदर सेक्सी है तुम्हारी पाव रोटी जैसे फूली चूत मुझे बहुत अच्छी लगती है और मै तेजी से उसके निप्प्ल चूसने लगा और एक हाथ से उसकी चूत को नीबू की तरह मसलने लगा रेखा बहुत गरमा गई थी रेखा कहने लगी अब कंट्रोल नही होता अपना लौड़ा मेरी बुर में घुसा दो, फाड़ दो मेरी बुर, बहुत खुजली हो रही है, तुम्हारा लन्ड जो भी लड़की एक बार देख लेगी बिना चुदवाए नही रह सकती.. और जिसने एक बार चुदवा लिया उसके तो कहने ही क्या वो हमेशा अपनी चूत का दरवाजा तुम्हारे लौडे के लिए खोले रखेगी

मुझे जब मीनू ने तुम्हारे लौडे के पानी वाला रुमाल सुंघाया तो मेरी चूत ने अपने आप पानी छोड़ दिया मै समझ गई थी कि तुम्हारा लौड़ा तुम्हारे जैसा ही हल्लाबी होगा जो मेरी बुर की जी भर कर चुदाई करेगा और खुजली मिटाएगा पर यह नही जानती थी कुछ ही घंटो में मुझे मेरी मुराद पूरी होने का मौका मिल जायेगा...हाय अब सहन नही हो रहा जल्दी से अपना लौड़ा मेरी बुर में पेलो.......

मैं रेखा के माम्मे जबरदस्त तरीके से चूस रहा था और रेखा का तना चूत का दाना मसल रहा था रेखा की चूत बहुत पनियाई हुई थी रेखा बहुत चुदासी हो रही थी रेखा की बुर पर करीने से काटी गई बेल बूटेदार झांटें बहुत सुंदर लग रही थी रेखा की पाव रोटी पिचक और फूल रही थी ऐसी बुर को मै पुट्टी वाली बुर कहता हूँ इसको चूसने और चोदने में बहुत मजा आता है। मै रेखा की बुर को उसकी लम्बाई मै कुरेद रहा था और बीच बीच मै एक ऊँगली उसकी बुर मै घुसा कर ऊँगली से बुर भी चोद देता रेखा की बुर मै लिसलिसा सा पानी था मैंने ऊँगली बाहर निकाल कर सूंघी और चाट ली बहुत ही बढ़िया खुशबू थी और टेस्ट तो पूछो ही मत

मेरी चूत के पानी की प्यासी जीभ रेखा की बुर को चूसने के लिए तड़प उठी मैंने रेखा के पैर के अंगूठे से चूसना शुरू किया और उसकी अंदरूनी जांघ तक चूसते चूसते पहुच गया मै रेखा की काली सावली पाव रोटी जैसी पुट्टी वाली बुर के आस पास अपनी जीभ फिरने लगा वह जो उसका पानी लगा हुआ था उसको चाटने में बहुत मजा आ रहा था रेखा से रहा नही जा रहा था.. हाय देव यह क्या हो रहा ही मेरे को ऐसा पहले कभी नही हुआ। हाय मेरी बुर को चूसो इसे चबा जाओ इसे खा जाओ रेखा ने मेरा सर पकड़ कर अपनी बुर पर लगा दिया उसकी पुत्ती वाली बुर को वो अपनी गांड उठाकर मेरे मुह पर रगड़ रही थी

मैंने रेखा की दोनों टांगे फैलाई और उसकी बुर पर किस किया। सी हाई मर गैईईई आया ऐसा कह रही थी फ़िर मैंने रेखा की पाव रोटी को उंगलियों से खोला और जीभ से जबरदस्त चाटनी शुरू कर दी ऊऊम्म्म्म हीईई सीईई बहुत अच्छा लग रहा है देव उम्म्म्म और चूसो और चाटो, अपनी जीभ पूरी घुमा दो, पहले किसी ने ऐसा मजा नही दिया ओम्म्म मेरी चूत झरने वाली है ई अईई जल्दी से कुछ करो। मैंने अपनी जीभ की रफ़्तार बड़ा दी

रेखा अपनी दोनों टांगो से मेरे सर को दबा लिया मैंने अपनी जीभ रेखा की गरम और लिसलिसी बुर की गुफा में घुसा कर जैसे ही गोल गोल घुमाया अरे यार यह क्या कर दिया मेरी बुर तो पानी छोड़ रही है, और जोर से चू्सो और पिच पिच कर के उसकी बुर ने तेज़ी से पुचकारी मारना चालु कर दिया मै तेज़ी से जीभ चलता हुआ उसका पानी पी गया और चूत का दाना फ़िर से अपनी जीभ में भर लिया रेखा मेरा लंड को प्यार करना चाहती थी सो उसने मेरे कहा तुम अपना लौड़ा मेरी ओर करो हम दोनों ६९ में हो गए

रेखा मेरा लौड़ा बहुत तेज़ी से और अच्छे से चूस रही थी ऐसा लग रहा था की रेखा पहली बार नही चुदवा रही वो पहले भी चुदवा चुकी थी मै रेखा की बुर के दाने को तेज़ी से चूस रहा था रेखा मेरे नीचे थी और मेरा लौड़ा चूस रही थी मै जितना प्रेशर उसकी बुर पर अपनी जीभ से डालता उतनी ही प्रेशर से रेखा भी मेरे लौडे को चूसती मुझे ऐसा लग रहा था की मैंने अपना लंड यदि जल्दी रेखा के मुह से न निकाला तो यह झड़ जाएगा मै रेखा के मुह से लंड निकाल कर रेखा की बुर को और गहराई से चूसने लगा।

रेखा फ़िर से तैयार थी.. हाय मेरे चोदु राजा आज लगता है मेरी बुर की खुजली पूरी तरह से शांत होगी। मेरी पाव रोटी में कई लौडे अपने जान गवा चुके है घुसते ही दम तोड़ देते है। आज तुम मेरी बुर की जान निकल दो मेरे राजा..... मैंने रेखा की गांड के नीचे तकिया लगे उसकी पाव रोटी जैसे पुत्ती वाली बुर जैसे घमंड मै और फूल गई उस गुदाज पुत्ती वाली बुर से लिसलिसा सा कुछ निकल रहा था मुझे सहन नही हुआ तो मैंने फ़िर से अपनी जीभ उसकी बुर से लगा दी.. अरे तुम भी डर रहे हो क्या मेरी पाव रोटी में दम तोड़ने से ? सी हीईई कोई तो मेरी बुर की खुजली शांत कर दे मैंने अपना लौड़ा उसकी बुर पर रखा और थोड़ा उसे क्लिटोरिस से बुर के एंड तक रगडा साथ में मै उसके माम्मे बुरी तरह से रगड़ मसल रहा था रेखा अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लन्ड को अपनी बुर मै घुसाने के लिए तड़प उठी मेरे राजा मत तड़पाओ मै मीनू नही रेखा हूँ मै चूत की खुजली से मर जाऊंगी मेरी बुर को चोदो… फाड़ो…

उसने मेरा लन्ड पकड़ा और अपनी बुर के छेद पर टिका लिया और थोडी गांड उठाई तो पुक्क की आवाज के साथ सुपाडा उसकी बुर में घुस गया सुपाडा का गुदाज बुर में घुसना और रेखा के मुह से दर्द की कराह निकलना शुरू हो गई। उई मीनू मेरी बुर में पहली बार किसी ने जलता हुआ लोहा डाला। हाय मेरी बुर चिर गई, फ़ट गई, कोई तो बचा ले मुझे, बहुत मजा आ रहा था मैंने रेखा से कहा रेखा जानेमन पुट्टी वाली गुदाज बुर बहुत कम औरतों को नसीब होती है इनको बड़ी तसल्ली से चुदवाना चाहिए। तुम्हारी चूत की तो मै आज बैन्ड बजा दूँगा

और मैंने रेखा के दोनों मम्मे अपने हाथ में लिए और अपना होंठ उसके होंट से चिपका दिया और पूरा लन्ड एक ही झटके में पेलने के लिए जोरदार धक्का मारा एक झटके में रेखा की बुर की दीवारों से रगड़ खाता हुआ मेरा लंड आधी से ज्यादा रेखा की पाव रोटी वाली बुर मै धस चुका था

मै कुछ देर रुका और लन्ड बाहर खीचा सुपाडा को बुर में रहने दिया और फिर से बुर फाड़ धक्का लगाया। इस बार मेरा लन्ड रेखा की बुर की गहराई में जाकर धस गया मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी गरम मक्खन वाली किसी चीज को मेरे लंड पर बहुत कस कर बाँध दिया हो. उसकी बुर बहुत लिसलिसी और गरम थी मै रेखा को हलके हलके धक्के देकर चोदने लगा रेखा को अब मजा आ रहा था

वो हाय! सी! राजा औरर मारो, यह बुर तुम्हारे लिए है मेरी बुर को चोदने के इनाम में मै तुम्हारी मीनू के साथ सुहागरात मनवाऊंगी। बहुत मजा आ रहा है पहले किसी ने ऐसे नही चोदा, चोदते रहो, मुझे लगता है कि तुम्हारा लन्ड मेरे पेट से भी आगे तक घुसा हुआ है मेरी चूत की तो आज बैन्ड बज गई। अरे देखो सालो ऐसे चुदवाई और चोदी जाती है चूत उम्म्म मेरे राजा बहुत मजा आ रहा ही उई मा मेरी पेट में खलबली हो रही है यह मैं तो झरने वाली हूँ मैं जाने वाली हूँ सो मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी रेखा ने मेरे से कहा देव तुम लेटो मुझे तुम्हारे लौडे की सवारी करने दो मै तुंरत लेट गया रेखा ने लौड़ा को ठिकाने पर रखा और ठप्प से मेरे लौडे पर बैठ गई और फटाफट उचकने लगी रेखा के ३६ साइज़ के मम्मे हवा में उछाल मार रहे थे। रेखा बहुत तेजी से झड़ी पर मै अभी नही झरने वाला था क्योंकि पीछे ६-८ घंटो में ३ बार झर चुका था सो मैंने रेखा को कुतिया बनाया और बहुत बेरहमी से चोदा. रेखा कहने लगी देव बहुत देरी हो जायेगी जल्दी से खाली करो अपना लौड़ा मेरी बुर। मैं फ़िर मैंने और तेज़ी से धक्के मारे और रेखा की बुर की गहराई में झड़ गया रेखा ने मेरा लौड़ा चाट कर साफ़ किया और फ़िर चुदवाने के वादे के साथ विदा हो गई ....

मैंने दिल्ली में सुमित के घर पर ही सुमित की सुहाग रात वाले कमरे में मीनू के साथ भी सुहाग रात मनाई और रेखा और मीनू दोनों को चोदा पर यह सब बाद में
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yusie khatri's profile photoPuzhamoola Villas's profile photoNarayana Babjee's profile photorite gbd's profile photo
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DROP THE TOWEL
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Pinky Mitra

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Kamesh foru's profile photozakir husain's profile photoRaj Jain's profile photoNarayana Babjee's profile photo
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NICE THIGHS PINKY
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Pinky Mitra

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shashi bhusan parida's profile photopindoriya devshi's profile photoprakash angoth's profile photoNarayana Babjee's profile photo
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HOW IS THE TASTE OF ICE FRUIT
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Pinky Mitra

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विनोद बहुत दिनों से अपनी छोटी बहन विनिता को भोगने की ताक में था। विनोद एक जवान हट्टा कट्टा युवक था और अपनी पत्नी सुषमा और बहन विनिता के साथ रहता था। विनिता पढ़ाई के लिये शहर आई हुई थी और अपने भैया और भाभी के साथ ही रहती थी.
वह एक कमसिन सुंदर किशोरी थी। जवानी में कदम रखती हुई वह बाला दिखने में साधारण सुंदर तो थी ही पर लड़कपन ने उसके सौन्दर्य को और भी निखार दिया था। उसके उरोज उभरना शुरू हो गये थे और उसके टाप या कुर्ते में से उनका उभार साफ़ दिखता था। उसकी स्कूल की ड्रेस की स्कर्ट के नीचे दिखतीं गोरी गोरी चिकनी टांगें विनोद को दीवाना बना देती थी। विनिता थी भी बड़ी शोख और चंचल। उसकी हर अदा पर विनोद मर मिटता था.
विनोद जानता था कि अपनी ही छोटी कुंवारी बहन को भोगने की इच्छा करना ठीक नहीं है पर विवश था। विनिता के मादक लड़कपन ने उसे दीवाना बना दिया था। वह उसकी कच्ची जवानी का रस लेने को कब से बेताब था पर ठीक मौका न मिलने से परेशान था। उसे लगने लगा था कि वह अपने आप पर ज्यादा दिन काबू नही रख पायेगा। चाहे जोर जबरदस्ती करनी पड़े, पर विनिता को चोदने का वह निश्चय कर चुका था. एक बात और थी। अह अपनी बीवी सुषमा से छुपा कर यह काम करना चाहता था क्योंकि वह सुषमा का पूरा दीवाना था और उससे दबता था। सुषमा जैसी हरामी और चुदैल युवती उसने कभी नहीं देखी थी। बेडरूम में अपने रन्डियों जैसे अन्दाज से शादी के तीन माह के अन्दर ही उसने अपने पति को अपनी चूत और गांड का दीवाना बना लिया था। विनोद को डर था कि सुषमा को यह बात पता चल गई तो न जाने वह गुस्से में क्या कर बैठे.
असल में उसका यह डर व्यर्थ था क्योंकि सुषमा अपने पति की मनोकामना खूब अच्छे से पहचानती थी। विनिता को घूरते हुए विनोद के चेहरे पर झलकती प्रखर वासना उसने कब की पहचान ली थी। सच तो यह था कि वह खुद इतनी कामुक थी कि विनोद हर रात चोद कर भी उसकी वासना ठीक से तृप्त नहीं कर पाता था। दोपहर को वह बेचैन हो जाती थी और हस्तमैथुन से अपनी आग शांत करती थी। उसने अपने स्कूल के दिनों में अपनी कुछ खास सह्लियों के साथ सम्बम्ध बना लिये थे और उसे इन लेस्बियन रतिक्रीड़ाओं में बड़ा मजा आता था। अपनी मां की उमर की स्कूल प्रिन्सिपल के साथ तो उसके बहुत गहरे काम सम्बन्ध हो गये थे.
शादी के बाद वह और किसी पुरुष से सम्बन्ध नहीं रखना चाहती थी क्योंकि विनोद की जवानी और मजबूत लंड उसके पुरुष सुख के लिये पर्याप्त था। वह भूखी थी तो स्त्री सम्बन्ध की। वैसे तो उसे अपनी सास याने विनोद की मां भी बहुत अच्छी लगी थी। वह उसके स्कूल प्रिंसीपल जैसी ही दिखती थी। पर सास के साथ कुछ करने की इच्छा उसके मन में ही दबी रह गई। मौका भी नहीं मिला क्योंकि विनोद शहर में रहता था और मां गांव में.
अब उसकी इच्छा यही थी कि कोई उसके जैसी चुदैल नारी, छोटी या बड़ी, समलिग सम्भोग के लिये मिल जाये तो मजा आ जाये। पिछले दो माह में वह विनिता की कच्ची जवानी की ओर बहुत आकर्षित होने लगी थी। विनिता उसे अपने बचपन की प्यारी सहेली अन्जू की याद दिलाती थी। अब सुषमा मौका ढूंढ रही थी कि कैसे विनिता को अपने चन्गुल में फ़न्साया जाये। विनोद के दिल का हाल पहचानने पर उसका यह काम थोड़ा आसान हो गया.
एक दिन उसने जब विनोद को स्कूल के ड्रेस को ठीक करती विनिता को वासना भरी नजरों से घूरते देखा तो विनिता के स्कूल जाने के बाद विनोद को ताना मारते हुए बोल पड़ी "क्योंजी, मुझसे मन भर गया क्या जो अब इस कच्ची कली को घूरते रहते हो। और वह भी अपनी सगी छोटी कमसिन बहन को?" विनोद के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं कि वह आखिर पकड़ा गया। कुछ न बोल पाया। उसे एक दो कड़वे ताने और मारकर फ़िर सुषमा से न रहा गया और अपने पति का चुम्बन लेते हुए वह खिलखिलाकर हंस पड़ी। जब उसने विनोद से कहा कि वह भी इस गुड़िया की दीवानी है तो विनोद खुशी से उछल पड़ा.

सुषमा ने विनोद से कहा कि दोपहर को अपनी वासना शांत करने में उसे बड़ी तकलीफ़ होती है। "तुम तो काम पर चले जाते हो और इधर मैं मुठ्ठ मार मार कर परेशान हो जाती हूं। इस बुर की आग शांत ही नहीं होती। तुम ही बताओ मैं क्या करूं." और उसने अपने बचपन की सारी लेस्बियन कथा विनोद को बता दी.

विनोद उसे चूंमते हुए बोला। "पर रानी, दो बार हर रात तुझे चोदता हूं, तेरी गांड भी मारता हूं, बुर चूसता हूं, और मैं क्या करूं." सुषमा उसे दिलासा देते हुए बोली। "तुम तो लाखों में एक जवान हो मेरे राजा। इतना मस्त लंड तो भाग्य से मिलता है। पर मैं ही ज्यादा गरम हूं, हर समय रति करना चाहती हूं। लगता है किसी से चुसवाऊं। तुम रात को खूब चूसते हो और मुझे बहुत मजा आता है। पर किसी स्त्री से चुसवाने की बात ही और है। और मुझे भी किसी की प्यारी रसीली बुर चाटने का मन होता है। विनिता पर मेरी नजर बहुत दिनों से है। क्या रसीली छोकरी है, दोपहर को मेरी यह नन्ही ननद मेरी बाहों में आ जाये तो मेरे भाग खुल जायें."

सुषमा ने विनोद से कहा को वह विनिता पर चढ़ने में विनोद की सहायता करेगी। पर इसी शर्त पर कि फ़िर दोपहर को वह विनिता के साथ जो चाहे करेगी और विनोद कुछ नहीं कहेगा। रोज वह खुद दिन में विनिता को जैसे चाहे भोगेगी और रात में दोनो पति - पत्नी मिलकर उस बच्ची के कमसिन शरीर का मन चाहा आनन्द लेंगे. विनोद तुरंत मान गया। सुषमा और विनिता के आपस में सम्भोग की कल्पना से ही उसका खड़ा होने लगा। दोनों सोचने लगे कि कैसे विनिता को चोदा जाये। विनोद ने कहा कि धीरे धीरे प्यार से उसे फ़ुसलाया जाय। सुषमा ने कहा कि उसमें यह खतरा है कि अगर नहीं मानी तो अपनी मां से सारा भाण्डा फ़ोड़ देगी। एक बार विनिता के चुद जाने के बाद फ़िर कुछ नहीं कर पायेगी। चाहे यह जबरदस्ती करना पड़े

सुषमा ने उसे कहा कि कल वह विनिता को स्कूल नहीं जाने देगी। आफिस जाने के पहले वह विनिता को किसी बहाने से विनोद के कमरे में भेज देगी और खुद दो घन्टे को काम का बहाना करके घर के बाहर चली जायेगी। विनिता बेडरूम में चुदाई के चित्रों की किताब देख कर उसे जरूर पढ़ेगी। विनोद उसे पकड़ कर उसे डांटने के बहाने से उसे दबोच लेगा और फिर दे घचाघच चोद मारेगा। मन भर उस सुंदर लड़की को ठोकने के बाद वह आफिस निकल जायेगा और फ़िर सुषमा आ कर रोती बिलखती विनिता को संम्भालने के बहाने खुद उसे दोपहर भर भोग लेगी.

रात को तो मानों चुदाई का स्वर्ग उमड़ पड़ेगा। उसके बाद तो दिन रात उस किशोरी की चुदाई होती रहेगी। सिर्फ़ सुबह स्कूल जाने के समय उसे आराम दिया जायेगा। बाकी समय दिन भर काम क्रीड़ा होगी। उसने यह भी कहा कि शुरू में भले विनिता रोये धोये, जल्द ही उसे भी अपने सुंदर भैया भाभी के साथ मजा आने लगेगा और फ़िर वह खुद हर समय चुदवाने को तैयार रहेगी। विनोद को भी यह प्लान पसन्द आया। रात बड़ी मुश्किल से निकली क्योंकि सुषमा ने उसे उस रात चोदने नहीं दिया, उसके लंड का जोर तेज करने को जान बूझ कर उसे प्यासा रखा। विनिता को देख देख कर विनोद यही सोच रहा था कि कल जब यह बच्ची बाहों में होगी तब वह क्या करेगा.

सुबह विनोद ने नहा धोकर आफिस में फोन करके बताया कि वह लेट आयेगा। उधर सुषमा ने विनिता को नीन्द से ही नहीं उठाया और उसके स्कूल का टाइम मिस होने जाने पर उसे कहा कि आज गोल मार दे। विनिता खुशी खुशी मान गई। विनोद ने एक अश्लील किताब अपने बेडरूम में तकिये के नीचे रख दी। फ़िर बाहर जा कर पेपर पढ़ने लगा। सुषमा ने विनिता से कहा कि अन्दर जाकर बेडरूम जरा जमा दे क्योंकि वह खुद बाहर जा रही है और दोपहर तक वापस आयेगी.

जब विनिता अन्दर चली गई तो सुषमा ने विनोद से कहा। "डार्लिन्ग, जाओ, मजा करो। रोये चिलाये तो परवाह नहीं करना, मैं दरवाजा लगा दून्गी। पर अपनी बहन को अभी सिर्फ़ चोदना। गांड मत मारना। उसकी गांड बड़ी कोमल और सकरी होगी। इसलिये लंड गांड में घुसते समय वह बहुत रोएगी और चीखेगी। मै भी उसकी गांड चुदने का मजा लेने के लिये और उसे संभालने के लिये वहां रहना चाहती हूं। इसलिये उसकी गांड हम दोनों मिलकर रात को मारेन्गे."

विनोद को आंख मार कर वह दरवाजा बन्द करके चली गई। पांच मिनिट बाद विनोद ने चुपचाप जा कर देखा तो प्लान के अनुसार विनिता को तकिये के नीचे वह किताब मिलने पर उसे पढ़ने का लोभ वह नहीं सहन कर पाई थी और बिस्तर पर बैठ कर किताब देख रही थी। उन नग्न सम्भोग चित्रों को देख देख कर वह किशोरी अपनी गोरी गोरी टांगें आपस में रगड़ रही थी. उसका चेहरा कामवासना से गुलाबी हो गया था.

मौका देख कर विनोद बेडरूम में घुस गौर बोला. "देखू, मेरी प्यारी बहना क्या पढ़ रही है?" विनिता सकपका गई और किताब छुपाने लगी. विनोद ने छीन कर देखा तो फोटो में एक औरत को तीन तीन जवान पुरुष चूत, गांड और मुंह में चोदते दिखे. विनोद ने विनिता को एक तमाचा रसीद किया और चिल्लाया "तो तू आज कल ऐसी किताबें पढ़ती है बेशर्म लड़की. तू भी ऐसे ही मरवाना चाहती है? तेरी हिम्मत कैसे हुई यह किताब देखने की? देख आज तेरा क्या हाल करता हूं."

विनिता रोने लगी और बोली कि उसने पहली बार किताब देखी है और वह भी इसलिये कि उसे वह तकिये के नीचे पड़ी मिली थी. विनोद एक न माना और जाकर दरवाजा बन्द कर के विनिता की ओर बढ़ा. उसकी आंखो में काम वासना की झलक देख कर विनिता घबरा कर कमरे में रोती हुई इधर उधर भागने लगी पर विनोद ने उसे एक मिनट में धर दबोचा और उसके कपड़े उतारना चालू कर दिये. पहले स्कर्ट खींच कर उतार दी और फिर ब्लाउज. फाड़ कर निकाल दिया. अब लड़की के चिकने गोरे शरीर पर सिर्फ़ एक छोटी सफ़ेद ब्रा और एक पैन्टी बची. वह अभी अभी दो माह पहले ही ब्रेसियर पहनने लगी थी.

उसके अर्धनग्न कोमल कमसिन शरीर को देखकर विनोद का लंड अब बुरी तरह तन्ना कर खड़ा हो गया था. उसने अपने कपड़े भी उतार दिये और नंगा हो गया. उसके मस्त मोटे ताजे कस कर खड़े लंड को देख कर विनिता के चेहरे पर दो भाव उमड़ पड़े. एक घबराहट का और एक वासना का. वह भी सहेलियों के साथ ऐसी किताबें अक्सर देखती थी. उनमें दिखते मस्त लण्डों को याद करके रात को हस्तमैथुन भी करती थी. कुछ दिनों से बार बार उसके दिमाग में आता था कि उसके हैम्डसम भैया का कैसा होगा. आज सच में उस मस्ताने लौड़े को देखकर उसे डर के साथ एक अजीब सिहरन भी हुई.

"चल मेरी नटखट बहना, नंगी हो जा, अपनी सजा भुगतने को आ जा" कहते हुए विनोद ने जबरदस्ती उसके अन्तर्वस्त्र भी उतार दिये. विनिता छूटने को हाथ पैर मारती रह गई पर विनोद की शक्ति के सामने उसकी एक न चली. वह अब पूरी नंगी थी. उसका गोरा गेहुवा चिकना कमसिन शरीर अपनी पूरी सुन्दरता के साथ विनोद के सामने था. विनिता को बाहों में भर कर विनोद ने अपनी ओर खीन्चा और अपने दोनो हाथों में विनिता के मुलायम जरा जरा से स्तन पकड़ कर सहलाने लगा. चाहता तो नहीं था पर उससे न रहा गया और उन्हें जोर से दबाने लगा. वह दर्द से कराह उठी और रोते हुए बोली "भैया, दर्द होता है, इतनी बेरहमी से मत मसलो मेरी चूचियों को".

विनोद तो वासना से पागल था. विनिता का रोना उसे और उत्तेजित करने लगा. उसने अपना मुंह खोल कर विनिता के कोमल रसीले होंठ अपने होंठों में दबा लिये और उन्हें चूसते हुए अपनी बहन के मीठे मुख रस का पान करने लगा. साथ ही वह उसे धकेलता हुआ पलंग तक ले गया और उसे पटक कर उसपर चढ़ बैठा. झुक कर उसने विनिता के गोरे स्तन के काले चूचुक को मुंह में ले लिया और चूसने लगा. उसके दोनों हाथ लगातार अपनी बहन के बदन पर घूंम रहे थे. उसका हर अन्ग उसने खूब टटोला.

मन भर कर मुलायम मीठी चूचियां पीने के बाद वह बोला. "बोल विनिता रानी, पहले चुदवाएगी, या सीधे गांड मरवाएगी?" आठ इम्च का तन्नाया हुआ मोटी ककड़ी जैसा लम्ड उछलता हुआ देख कर विनिता घबरा गई और बिलखते हुए उससे याचना करने लगी. "भैया, यह लंड मेरी नाजुक चूत फ़ाड़ डालेगा, मै मर जाऊंगी, मत चोदो मुझे प्लीऽऽऽज़ . मैं आपकी मुठ्ठ मार देती हूं"

विनोद को अपनी नाज़ुक किशोरी बहन पर आखिर तरस आ गया. इतना अब पक्का था कि विनिता छूट कर भागने की कोशिश अब नहीं कर रही थी और शायद चुदने को मन ही मन तैयार थी भले ही घबरा रही थी. उसे प्यार से चूमता हुआ विनोद बोला. "इतनी मस्त कच्ची कली को तो मैं नहीं छोड़ने वाला. और वह भी मेरी प्यारी नन्ही बहना ! चोदूंगा भी और गांड भी मारून्गा. पर चल, पहले तेरी प्यारी रसीली चूत को चूस लूं मन भर कर, कब से इस रस को पीने को मै मरा जा रहा था।

विनिता की गोरी गोरी चिकनी जान्घे अपने हाथों से विनोद ने फ़ैला दीं और झुक कर अपना मुंह बच्ची की लाल लाल कोमल गुलाब की कली सी चूत पर जमा कर चूसने लगा. अपनी जीभ से वह उस मस्त बुर की लकीर को चाटने लगा.

बचकानी चूत पर बस जरा से रेशम जैसे कोमल बाल थे. बाकी वह एकदम साफ़ थी. उसकी बुर को उंगलियों से फ़ैला कर बीच की लाल लाल म्यान को विनोद चाटने लगा. चाटने के साथ विनोद उसकी चिकनी माल बुर का चुंबन लेता जाता. धीरे धीरे विनिता का सिसकना बम्द हो गया. उसकी बुर पसीजने लगी और एक अत्यन्त सुख भरी मादक लहर उसके जवान तन में दौड़ गई. उसने अपने भाई का सिर पकड़ कर अपनी चूत पर दबा लिया और एक मद भरा सीत्कार छोड़कर वह चहक उठी. "चूसो भैया, मेरी चूत और जोर से चूसो. जीभ डाल दो मेरी बुर के अन्दर."

विनोद ने देखा कि उसकी छोटी बहन की जवान बुर से मादक सुगन्ध वाला चिपचिपा पानी बह रहा है जैसे कि अमृत का झरना हो. उस शहद को वह प्यार से चाटने लगा. उसकी जीभ जब विनिता के कड़े लाल मणि जैसे क्लाईटोरिस पर से गुजरती तो विनिता मस्ती से हुमक कर अपनी जान्घे अपने भाई के सिर के दोनों ओर जकड़ कर धक्के मारने लगती. कुछ ही देर में विनिता एक मीठी चीख के साथ झड़ गई. उसकी बुर से शहद की मानों नदी बह उठी जिसे विनोद बड़ी बेताबी से चाटने लगा. उसे विनिता की बुर का पानी इतना अच्छा लगा कि अपनी छोटी बहन को झड़ने के बाद भी वह उसकी चूत चाटता रहा और जल्दी ही विनिता फ़िर से मस्त हो गई.

कामवासना से सिसकते हुए वह फ़िर अपने बड़े भाई के मुंह को चोदने लगी. उसे इतना मजा आ रहा था जैसा कभी हस्तमैथुन में भी नहीं आया था. विनोद अपनी जीभ उसकी गीली प्यारी चूत में डालकर चोदने लगा और कुछ ही मिनटों में विनिता दूसरी बार झड़ गई. विनोद उस अमृत को भूखे की तरह चाटता रहा. पूरा झड़ने के बाद एक तृप्ति की सांस लेकर वह कमसिन बच्ची सिमटकर विनोद से अलग हो गई क्योंकि अब मस्ती उतरने के बाद उसे अपनी झड़ी हुई बुर पर विनोद की जीभ का स्पर्श सहन नहीं हो रहा था.

विनोद अब विनिता को चोदने के लिये बेताब था. वह उठा और रसोई से मक्खन का डिब्बा ले आया. थोड़ा सा मक्खन उसने अपने सुपाड़े पर लगया और विनिता को सीधा करते हुए बोला. "चल छोटी, चुदाने का समय आ गया." विनिता घबरा कर उठ बैठी. उसे लगा था कि अब शायद भैया छोड़ देंगे पर विनोद को अपने बुरी तरह सूजे हुए लंड पर मक्खन लगाते देख उसका दिल डर से धड़कने लगा. वह पलंग से उतर कर भागने की कोशिश कर रही थी तभी विनोद ने उसे दबोच कर पलंग पर पटक दिया और उस पर चढ़ बैठा. उसने उस गिड़गिड़ाती रोती किशोरी की एक न सुनी और उस की टांगें फ़ैला कर उन के बीच बैठ गया. थोड़ा मक्खन विनिता की कोमल चूत में भी चुपड़ा. फिर अपना टमाटर जैसा सुपाड़ा उसने अपनी बहन की कोरी चूत पर रखा और अपने लंड को एक हाथ से थाम लिया.

विनोद को पता था कि चूत में इतना मोटा लंड जाने पर विनिता दर्द से जोर से चिल्लाएगी. इसलिये उसने अपने दूसरे हाथ से उसका मुंह बन्द कर दिया. वासना से थरथराते हुए फिर वह अपना लंड अपनी बहन की चूत में पेलने लगा. सकरी कुंवारी चूत धीरे धीरे खुलने लगी और विनिता ने अपने दबे मुंह में से दर्द से रोना शुरु कर दिया. कमसिन छोकरी को चोदने में इतना आनन्द आ रहा था कि विनोद से रहा ना गया और उसने कस कर एक धक्का लगाया. सुपाड़ा कोमल चूत में फच्च से घुस गया और विनिता छटपटाने लगी.

विनोद अपनी बहन की कपकपाती बुर का मजा लेते हुए उसकी आंसू भरी आंखो में झांकता उसके मुंह को दबोचा हुआ कुछ देर वैसे ही बैठा रहा. विनिता के बन्द मुंह से निकलती यातना की दबी चीख सुनकर भी उसे बहुत मजा आ रहा था. उसे लग रहा था कि जैसे वह एक शेर है जो हिरन के बच्चे का शिकार कर रहा है.

कुछ देर बाद जब लंड बहुत मस्ती से उछलने लगा तो एक धक्का उसने और लगाया. आधा लंड उस किशोरी की चूत में समा गया और विनिता दर्द के मारे ऐसे उछली जैसे किसी ने लात मारी हो. चूत में होते असहनीय दर्द को वह बेचारी सह न सकी और बेहोश हो गई. विनोद ने उसकी कोई परवाह नहीं की और धक्के मार मार कर अपना मूसल जैसा लंड उस नाजुक चूत में घुसेड़ना चालू रखा. अन्त में जड़ तक लवड़ा उस कुंवारी बुर में उतारकर एक गहरी सांस लेकर वह अपनी बहन के ऊपर लेट गया. विनिता के कमसिन उरोज उसकी छाती से दबकर रह गये और छोटे छोटे कड़े चूचुक उसे गड़ कर मस्त करने लगे.

विनोद एक स्वर्गिक आनन्द में डूबा हुआ था क्योंकि उसकी छोटी बहन की सकरी कोमल मखमल जैसी मुलायम बुर ने उसके लंड को ऐसे जकड़ा हुआ था जैसे कि किसीने अपने हाथों में उसे भींच कर पकड़ा हो. विनिता के मुंह से अपना हाथ हटाकर उसके गुलाबी होंठों को चूमता हुआ विनोद धीरे धीरे उसे बेहोशी में ही चोदने लगा. बुर में चलते उस सूजे हुए लंड के दर्द से विनिता होश में आई. उसने दर्द से कराहते हुए अपनी आन्खे खोलीं और सिसक सिसक कर रोने लगी. "विनोद भैया, मैं मर जाऊंगी, उई मां, बहुत दर्द हो रहा है, मेरी चूत फटी जा रही है, मुझपर दया करो, आपके पैर पड़ती हूं."

विनोद ने झुक कर देखा तो उसका मोटा ताजा लंड विनिता की फैली हुई चूत से पिस्टन की तरह अन्दर बाहर हो रहा था. बुर का लाल छेद बुरी तरह खिंचा हुआ था पर खून बिल्कुल नहीं निकला था. विनोद ने चैन की साम्स ली कि बच्ची को कुछ नहीं हुआ है, सिर्फ़ दर्द से बिलबिला रही है. वह मस्त होकर अपनी बहन को और जोर से चोदने लगा. साथ ही उसने विनिता के गालों पर बहते आंसू अपने होंठों से समेटन शुरू कर दिया. विनिता के चीखने की परवाह न करके वह जोर जोर से उस कोरी मस्त बुर में लंड पेलने लगा. "हाय क्या मस्त चिकनी और मखमल जैसी चूत है तेरी विनिता, सालों पहले चोद डालना था तुझे. चल अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है, रोज तुझे देख कैसे तड़पा तड़पा कर चोदता हूं."

टाइट बुर में लंड चलने से 'फच फच फच' ऐसी मस्त आवाज होने लगी. जब विनिता और जोर से रोने लगी तो विनोद ने विनिता के कोमल गुलाबी होंठ अपने मुंह मे दबा लिये और उन्हें चूसते हुए धक्के मारने लगा. जब आनन्द सहन न होने से वह झड़ने के करीब आ गया तो विनिता को लगा कि शायद वह झड़ने वाला है इसलिये बेचारी बड़ी आशा से अपनी बुर को फ़ाड़ते लंड के सिकुड़ने का इन्तजार करने लगी. पर विनोद अभी और मजा लेना चाहता था; पूरी इच्छाशक्ति लगा कर वह रुक गया जब तक उसका उछलता लंड थोड़ा शान्त न हो गया.

सम्हलने के बाद उसने विनिता से कहा "मेरी प्यारी बहन, इतनी जल्दी थोड़े ही छोड़ूंगा तुझे. मेहनत से लंड घुसाया है तेरी कुंवारी चूत में तो मां-कसम, कम से कम घन्टे भर तो जरूर चोदूंगा." और फ़िर चोदने के काम में लग गया.

दस मिनिट बाद विनिता की चुदती बुर का दर्द भी थोड़ा कम हो गया था. वह भी आखिर एक मस्त यौन-प्यासी लड़की थी और अब चुदते चुदते उसे दर्द के साथ साथ थोड़ा मजा भी आने लगा था. विनोद जैसे खूबसूरत जवान से चुदने में उसे मन ही मन एक अजीब खुशी हो रही थी, और ऊपर से अपने बड़े भाई से चुदना उसे ज्यादा उत्तेजित कर रहा था. जब उसने चित्र में देखी हुई चुदती औरत को याद किया तो एक सनसनाहट उसके शरीर में दौड़ गई. चूत में से पानी बहने लगा और मस्त हुई चूत चिकने चिपचिपे रस से गीली हो गई. इससे लंड और आसानी से अन्दर बाहर होने लगा और चोदने की आवाज भी तेज होकर 'पकाक पकाक पकाक' जैसी निकलने लगी.

रोना बन्द कर के विनिता ने अपनी बांहे विनोद के गले में डाल दीं और अपनी छरहरी नाजुक टांगें खोलकर विनोद के शरीर को उनमें जकड़ लिया. वह विनोद को बेतहाशा चूंमने लगी और खुद भी अपने चूतड़ उछाल उछाल के चुदवाने लगी. "चोदिये मुझे भैया, जोर जोर से चोदिये. हाःय, बहुत मजा आ रहा है. मैने आपको रो रो कर बहुत तकलीफ़ दी, अब चोद चोद कर मेरी बुर फाड़ दीजिये, मैं इसी लायक हूं।"

विनोद हंस पड़ा. "है आखिर मेरी ही बहन, मेरे जैसी चोदू. पर यह तो बता विनिता, तेरी चूत में से खून नहीं निकला, लगता है बहुत मुठ्ठ मारती है, सच बोल, क्या डालती है? मोमबत्ती या ककड़ी?" विनिता ने शरमाते हुए बताया कि गाजर से मुठ्ठ मारनी की उसे आदत है. इसलिये शायद बुर की झिल्ली कब की फ़ट चुकी थी.

भाई बहन अब हचक हचक कर एक दूसरे को चोदने लगे. विनोद तो अपनी नन्ही नाजुक किशोरी बहन पर ऐसा चढ़ गया जैसे कि किसी चुदैल रन्डी पर चढ़ कर चोदा जाता है. विनिता को मजा तो आ रहा था पर विनोद के लंड के बार अंदर बाहर होने से उसकी चूत में भयानक दर्द भी हो रहा था. अपने आनन्द के लिये वह किसी तरह दर्द सहन करती रही और मजा लेती हुई चुदती भी रही पर विनोद के हर वार से उसकी सिसकी निकल आती.

काफ़ी देर यह सम्भोग चला. विनोद पूरे ताव में था और मजे ले लेकर लंड को झड़ने से बचाता हुआ उस नन्ही जवानी को भोग रहा था. विनिता कई बार झड़ी और आखिर लस्त हो कर निढाल पलंग पर पड़ गई. चुदासी उतरने पर अब वह फ़िर रोने लगी. जल्द ही दर्द से सिसक सिसक कर उसका बुरा हाल हो गया क्योंकि विनोद का मोटा लंड अभी भी बुरी तरह से उसकी बुर को चौड़ा कर रहा था.

विनोद तो अब पूरे जोश से विनिता पर चढ़ कर उसे भोग रहा था जैसे वह इन्सान नही, कोई खिलौना हो. उसके कोमल गुप्तान्ग को इतनी जोर की चुदाई सहन नहीं हुई और सात आठ जोरदार झटकों के बाद वह एक हल्की चीख के साथ विनिता फिर बेहोश हो गई. विनोद उस पर चढ़ा रहा और उसे हचक हचक कर चोदता रहा. चुदाई और लम्बी खींचने की उसने भरसक कोशिश की पर आखिर उससे रहा नहीं गया और वह जोर से हुमकता हुआ झड़ गया.

गरम गरम गाढ़े वीर्य का फ़ुहारा जब विनिता की बुर में छूटा तो वह होश में आई और अपने भैया को झड़ता देख कर उसने रोना बन्द करके राहत की एक सांस ली. उसे लगा कि अब विनोद उसे छोड़ देगा पर विनोद उसे बाहों में लेकर पड़ा रहा. विनिता रोनी आवाज में उससे बोली. "भैया, अब तो छोड़ दीजिये, मेरा पूरा शरीर दुख रहा है आप से चुद कर." विनोद हंसकर बेदर्दी से उसे डराता हुआ बोला. "अभी क्या हुआ है विनिता रानी. अभी तो तेरी गांड भी मारनी है."

विनिता के होश हवास यह सुनकर उड़ गये और घबरा कर वह फिर रोने लगी. विनोद हंसने लगा और उसे चूमते हुए बोला. "रो मत, चल तेरी गांड अभी नहीं मारता पर एक बार और चोदूंगा जरूर और फिर आफिस जाऊंगा." उसने अब प्यार से अपनी बहन के चेहरे , गाल और आंखो को चूमना शुरू कर दिया. उसने विनिता से उसकी जीभ बाहर निकालने को कहा और उसे मुंह में लेकर विनिता के मुख रस का पान करता हुआ कैन्डी की तरह उस कोमल लाल लाल जीभ को चूसने लगा.

थोड़ी ही देर में उसका लंड फ़िर खड़ा हो गया और उसने विनिता की दूसरी बार चुदाई शुरू कर दी. चिपचिपे वीर्य से विनिता की बुर अब एकदम चिकनी हो गई थी इसलिये अब उसे ज्यादा तकलीफ़ नहीं हुई. 'पुचुक पुचुक पुचुक' की आवाज के साथ यह चुदाई करीब आधा घन्टा चली. विनिता बहुत देर तक चुपचाप यह चुदाई सहन करती रही पर आखिर चुद चुद कर बिल्कुल लस्त होकर वह दर्द से सिसकने लगी. आखिर विनोद ने जोर जोर से धक्के लगाने शुरू किये और पांच मिनट में झड़ गया.

झड़ने के बाद कुछ देर तो विनोद मजा लेता हुआ अपनी कमसिन बहन के निस्तेज शरीर पर पड़ा रहा. फिर उठ कर उसने अपना लंड बाहर निकला. वह 'पुक्क' की आवाज से बाहर निकला. लंड पर वीर्य और बुर के रस का मिला जुला मिश्रण लगा था. विनिता बेहोश पड़ी थी. विनोद उसे पलंग पर छोड़ कर बाहर आया और दरवाजा लगा लिया. सुषमा वापस आ गई थी और बाहर बड़ी अधीरता से उसका इन्तजार कर रही थी. पति की तृप्त आंखे देखकर वह समझ गई कि चुदाई मस्त हुई है. "चोद आये मेरी गुड़िया जैसी प्यारी ननद को ?"

विनोद तॄप्त होकर उसे चूमता हुआ बोला. "हां मेरी जान, चोद चोद कर बेहोश कर दिया साली को, बहुत रो रही थी, दर्द का नाटक खूब किया पर मैने नहीं सुना. क्या मजा आया उस नन्ही चूत को चोदकर." सुषमा वासना के जोश में घुटने के बल विनोद के सामने बैठ गई और उसका रस भरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. लंड पर विनिता की बुर का पानी और विनोद के वीर्य का मिलाजुला मिश्रण लगा था. पूरा साफ़ करके ही वह उठी.

विनोद कपड़े पहन कर ऑफ़िस जाने को तैयार हुआ. उसने अपनी कामुक बीवी से पुछा कि अब वह क्या करेगी? सुषमा बोली "इस बच्ची की रसीली बुर पहले चूसूंगी जिसमें तुंहारा यह मस्त रस भरा हुआ है. फिर उससे अपनी चूत चुसवाऊंगी. हम लड़कियों के पास मजा करने के लिये बहुत से प्यारे प्यारे अंग है. आज ही सब सिखा दूंगी उसे"

विनोद ने पूछा. "आज रात का क्या प्रोग्राम है रानी?" सुषमा उसे कसकर चूमते हुए बोली. " जल्दी आना, आज एक ही प्रोग्राम है. तुंहारी बहन की रात भर गांड मारने का. खूब सता सता कर, रुला रुला कर गांड मारेम्गे साली की, जितना वह रोयेगी उतना मजा आयेगा. मै कब से इस घड़ी की प्रतीक्षा कर रही हूं"

विनोद मुस्कराके बोला "बड़ी दुष्ट हो. लड़की को तड़पा तड़पा कर भोगना चाहती हो." सुषमा बोली. "तो क्या हुआ, शिकार करने का मजा अलग ही है. बाद में उतना ही प्यार करूम्गी अपनी लाड़ली ननद को. ऐसा यौन सुख दूम्गी कि वह मेरी दासी हो जायेगी. हफ़्ते भर में चुद चुद कर फ़ुकला हो जायेगी तुंहारी बहन, फ़िर दर्द भी नहीं होगा और खुद ही चुदैल हमसे चोदने की माम्ग करेगी. पर आज तो उसकी कुम्वारी गांड मारने का मजा ले लेम." विनोद हम्स कर चला गया और सुषमा ने बड़ी बेताबी से कमरे में घुस कर दरवाजा लगा लिया.

विनिता होश में आ गई थी और पलंग पर लेट कर दर्द से सिसक रही थी. चुदासी की प्यास खत्म होने पर अब उसकी चुदी और भोगी हुई बुर में खूब दर्द हो रहा था. सुषमा उसके पास बैठ कर उसके नंगे बदन को प्यार से सहलाने लगी. "क्या हुआ मेरी विनिता रानी को? नंगी क्यों पड़ी है और यह तेरी टांगों के बीच से चिपचिपा क्या बह रहा है?" बेचारी विनिता शर्म से रो दी. "भाभी, भैया ने आज मुझे चोद डाला."

सुषमा आश्चर्य का नाटक करते हुए बोली. "चोद डाला, अपनी ही नन्हीं बहन को? कैसे?" विनिता सिसकती हुई बोली. "मै गंदी किताब देखती हुई पकड़ी गई तो मुझे सजा देने के लिये भैया ने मेरे कपड़े जबर्दस्ती निकाल दिये, मेरी चूत चूसी और फ़िर खूब चोदा. मेरी बुर फाड़ कर रख दी. गांड भी मारना चाहते थे पर मैने जब खूब मिन्नत की तो छोड़ दिया" सुषमा ने पलंग पर चढ कर उसे पहले प्यार से चूमा और बोली. "ऐसा? देखूं जरा" विनिता ने अपनी नाजुक टांगें फैला दी. सुषमा झुक कर चूत को पास से देखने लगी. कच्ची कमसिन की तरह चुदी हुई लाल लाल कुन्वारी बुर देख कर उसके मुह में पानी भर आया और उसकी खुद की चूत मचल कर गीली होने लगी. वह बोली "विनिता, डर मत, चूत फ़टी नहीं है, बस थोड़ी खुल गई है. दर्द हो रहा होगा, अगन भी हो रही होगी. फ़ूंक मार कर अभी ठण्डी कर देती हूं तेरी चूत." बिल्कुल पास में मुंह ले जा कर वह फ़ूंकने लगी. विनिता को थोड़ी राहत मिली तो उसका रोना बन्द हो गया.

फ़ूंकते फ़ूंकते सुषमा ने झुक कर उस प्यारी चूत को चूम लिया. फ़िर जीभ से उसे दो तीन बार चाटा, खासकर लाल लाल अनार जैसे दाने पर जीभ फ़ेरी. विनिता चहक उठी. "भाभी, क्या कर रही हो?"

"रहा नहीं गया रानी, इतनी प्यारी जवान बुर देखकर, ऐसे माल को कौन नहीं चूमना और चूसना चाहेगा? क्यों, तुझे अच्छा नहीं लगा?" सुषमा ने उस की चिकनी छरहरी रानों को सहलाते हुए कहा.

"बहुत अच्छा लगा भाभी, और करो ना." विनिता ने मचल कर कहा. सुषमा चूत चूसने के लिये झुकती हुई बोली. "असल में तुंम्हारे भैया का कोई कुसूर नहीं है. तुम हो ही इतनी प्यारी कि औरत होकर मुझे भी तुम पर चढ़ जाने का मन होता है तो तेरे भैया तो आखिर मस्त जवान है." अब तक विनिता काफ़ी गरम हो चुकी थी और अपने चूतड़ उचका उचका कर अपनी बुर सुषमा के मुंह पर रगड़ने की कोशिश कर रही थी. विनिता की अधीरता देखकर सुषमा बिना किसी हिचकिचाहट से उस कोमल बुर पर टूट पड़ी और उसे बेतहाशा चाटने लगी. चाटते चाटते वह उस मादक स्वाद से इतनी उत्तेजित हो गई कि अपने दोनो हाथों से विनिता की चुदी चूत के सूजे पपोटे फ़ैला कर उस गुलाबी छेद में जीभ अन्दर डालकर आगे पीछे करने लगी. अपनी भाभी की लम्बी गीली मुलायम जीभ से चुदना विनिता को इतना भाया कि वह तुरन्त एक किलकारी मारकर झड़ गई.

बात यह थी कि विनिता को भी अपनी सुंदर भाभी बहुत अच्छी लगती थी. अपनी एक दो सहेलियों से उसने स्त्री और स्त्री सम्बन्धो के बारे में सुन रखा था. उसकी एक सहेली तो अपनी मौसी के साथ काफ़ी करम करती थी. विनिता भी ये किसी सुन सुन कर अपने भाभी के प्रति आकर्षित होकर कब से यह चाहती थी कि भाभी उसे बाहों में लेकर प्यार करे.

अब जब कल्पनानुसार उसकी प्यारी भाभी अपने मोहक लाल ओठों से सीधे उसकी चूत चूस रही थी तो विनिता जैसे स्वर्ग में पहुंच गई. उसकी चूत का रस सुषमा की जीभ पर लिपटने लगा और सुषमा मस्ती से उसे निगलने लगी. बुर के रस और विनोद के वीर्य का मिलाजुला स्वाद सुषमा को अमृत जैसा लगा और वह उसे स्वाद ले लेकर पीने लगी.

अब सुषमा भी बहुत कामातुर हो चुकी थी और अपनी जांघे रगड़ रगड़ कर स्खलित होने की कोशिश कर रही थी. विनिता ने हाथो में सुषमा भाभी के सिर को पकड़ कर अपनी बुर पर दबा लिया और उसके घने लम्बे केशों में प्यार से अपनी उंगलियां चलाते हुए कहा. "भाभी, तुम भी नंगी हो जाओ ना, मुझे भी तुंम्हारी चूचियां और चूत देखनी है." सुषमा उठ कर खड़ी हो गई और अपने कपड़े उतारने लगी. उसकी किशोरी ननद अपनी ही बुर को रगड़ते हुए बड़ी बड़ी आंखो से अपनी भाभी की ओर देखने लगी. उसकी खूबसूरत भाभी उसके सामने नंगी होने जा रही थी.

सुषमा ने साड़ी उतार फ़ेकी और नाड़ा खोल कर पेटीकोट भी उतार दिया. ब्लाउज के बटन खोल कर हाथ ऊपर कर के जब उसने ब्लाउज उतारा तो उसकी स्ट्रैप्लेस ब्रा में कसे हुए उभरे स्तन देखकर विनिता की चूत में एक बिजली सी दौड़ गई. भाभी कई बार उसके सामने कपड़े बदलती थी पर इतने पास से उसके मचलते हुए मम्मों की गोलाई उसने पहली बार देखी थी. और यह मादक ब्रेसियर भी उसने पहले कभी नहीं देखी थी.

अब सुषमा के गदराये बदन पर सिर्फ़ सफ़ेद जांघिया और वह टाइट सफ़ेद ब्रा बची थी. "भाभी यह कन्चुकी जैसी ब्रा तू कहां से लाई? तू तो साक्षात अप्सरा दिखती है इसमे." सुषमा ने मुस्करा कर कहा "एक फ़ैशन मेगेज़ीन में देखकर बनवाई है, तेरे भैया यह देखकर इतने मस्त हो जाते है कि रात भर मुझे चोद लेते है."

"भाभी रुको, इन्हें मै निकालूंगी." कहकर विनिता सुषमा के पीछे आकर खड़ी हो गई और उसकी मान्सल पीठ को प्यार से चूमने लगी. फिर उसने ब्रा के हुक खोल दिये और ब्रा उछल कर उन मोटे मोटे स्तनों से अलग होकर गिर पड़ी. उन मस्त पपीते जैसे उरोजों को देख्कर विनिता अधीर होकर उन्हें चूमने लगी. "भाभी, कितनी मस्त चूचियां है तुंम्हारी. तभी भैया तुंहारी तरफ़ ऐसे भूखों की तरह देखते है." सुषमा के चूचुक भी मस्त होकर मोटे मोटे काले कड़क जामुन जैसे खड़े हो गये थे. उसने विनिता के मुंह मे एक निपल दे दिया और उस उत्तेजित किशोरी को भींच कर सीने से लगा लिया. विनिता आखे बन्द कर के बच्चे की तरह चूची चूसने लगी.

सुषमा के मुंह से वासना की सिसकारियां निकलने लगीं और वह अपनी ननद को बाहों में भर कर पलंग पर लेट गई. "हाय मेरी प्यारी बच्ची, चूस ले मेरे निपल, पी जा मेरी चूची, तुझे तो मै अब अपनी चूत का पानी भी पिलाऊंगी."

विनिता ने मन भर कर भाभी की चूचियां चूसीं और बीच में ही मुंह से निकाल कर बोली. "भाभी अब जल्दी से मां बन जाओ, जब इनमें दूध आएगा तो मै ही पिया करूंगी, अपने बच्चे के लिये और कोई इन्तजाम कर लेना." और फ़िर मन लगा कर उन मुलायम स्तनों का पान करने लगी. "जरूर पिलाऊंगी मेरी रानी, तेरे भैया भी यही कहते है. एक चूची से तू पीना और एक से तेरे भैया." सुषमा विनिता के मुंह को अपने स्तन पर दबाते हुए बोली.

अपने निपल में उठती मीठी चुभन से सुषमा निहाल हो गई थी. अपनी पैंटी उसने उतार फ़ेकी और फ़िर दोनों जांघो में विनिता के शरीर को जकड़कर उसे हचकते हुए सुषमा अपनी बुर उस की कोमल जांघो पर रगड़ने लगी. सुषमा के कड़े मदनमणि को अपनी जांघ पर रगड़ता महसूस करके विनिता अधीर हो उठी. "भाभी, मुझे अपनी चूत चूसने दो ना प्लीज़"

"तो चल आजा मेरी प्यारी बहन, जी भर के चूस अपनी भाभी की बुर, पी जा उसका नमकीन पानी" कहकर सुषमा अपनी मांसल जांघे फैला कर पलंग पर लेट गई. एक तकिया उसने अपने नितम्बों के नीचे रख लिया जिससे उसकी बुर ऊपर उठ कर साफ़ दिखने लगी.

वासना से तड़पती वह कमसिन लड़की अपनी भाभी की टांगों के बीच लेट गई. सुषमा की रसीली बुर ठीक उसकी आंखो के सामने थी. घनी काली झांटो के बीच की गहरी लकीर में से लाल लाल बुर का छेद दिख रहा था. "हाय भाभी, कितनी घनी और रेशम जैसी झांटे हैं तुम्हारी, काटती नहीं कभी?" उसने बालों में उंगलियां डालते हुए पूछा.

"नहीं री, तेरे भैया मना करते हैं, उन्हें घनी झांटे बहुत अच्छी लगती हैं." सुषमा मुस्कराती हुई बोली. "हां भाभी, बहुत प्यारी हैं, मत काटा करो, मेरी भी बढ़ जाएं तो मैं भी नहीं काटूंगी." विनिता बोली. उससे अब और न रहा गया. अपने सामने लेटी जवान भरी पूरी औरत की गीली रिसती बुर में उसने मुंह छुपा लिया और चाटने लगी. सुषमा वासना से कराह उठी और विनिता का मुंह अपनी झांटो पर दबा कर रगड़ने लगी. वह इतनी गरम हो गई थी कि तुरन्त झड़ गई.

"हाय मर गई रे विनिता बिटिया, तेरे प्यारे मुंह को चोदूं, साली क्या चूसती है तू, इतनी सी बच्ची है फ़िर भी पुरानी रंडी जैसी चूसती है. पैदाइशी चुदैल है तू" दो मिनट तक वह सिर्फ़ हांफ़ते हुए झड़ने का मजा लेती रही. फ़िर मुस्कराकर उसने विनिता को बुर चूसने का सही अन्दाज सिखाना शुरू किया. उसे सिखाया कि पपोटे कैसे अलग किये जाते हैं, जीभ का प्रयोग कैसे एक चम्मच की तरह रस पीने को किया जाता है और बुर को मस्त करके उसमे से और अमृत निकलने के लिये कैसे क्लाईटोरिस को जीभ से रगड़ा जाता है.

थोड़ी ही देर में विनिता को चूत का सही ढंग से पान करना आ गया और वह इतनी मस्त चूत चूसने लगी जैसे बरसों का ज्ञान हो. सुषमा पड़ी रही और सिसक सिसक कर बुर चुसवाने का पूरा मजा लेती रही. "चूस मेरी प्यारी बहना, और चूस अपनी भाभी की बुर, जीभ से चोद मुझे, आ ऽ ह ऽ , ऐसे ही रानी बिटिया ऽ , शा ऽ बा ऽ श."

काफ़ी झड़ने के बाद उसने विनिता को अपनी बाहों में समेट लिया और उसे चूम चूम कर प्यार करने लगी. विनिता ने भी भाभी के गले में बाहें डाल दीं और चुम्बन देने लगी. एक दूसरे के होंठ दोनों चुदैलें अपने अपने मुंह में दबा कर चूसने लगीं. सुषमा ने अपनी जीभ विनिता के मुंह में डाल दी और विनिता उसे बेतहाशा चूसने लगी. भाभी के मुख का रसपान उसे बहुत अच्छा लग रहा था.

सुषमा अपनी जीभ से विनिता के मुंह के अन्दर के हर हिस्से को चाट रही थी, उस बच्ची के गाल, मसूड़े, तालू, गला कुछ भी नहीं छोड़ा सुषमा ने. शैतानी से उसने विनिता के हलक में अपनी लंबी जीभ उतार दी और गले को अन्दर से चाटने और गुदगुदाने लगी. उस बच्ची को यह गुदगुदी सहन नहीं हुई और वह खांस पड़ी. सुषमा ने उसके खांसते हुए मुंह को अपने होंठों में कस कर दबाये रखा और विनिता की अपने मुंह में उड़ती रसीली लार का मजा लेती रही.

आखिर जब सुषमा ने उसे छोड़ा तो विनिता का चेहरा लाल हो गया थी. "क्या भाभी, तुम बड़ी हरामी हो, जान बूझ कर ऐसा करती हो." सुषमा उसका मुंह चूमते हुए हंस कर बोली. "तो क्या हुआ रानी? तेरा मुखरस चूसने का यह सबसे आसान उपाय है. मैने एक ब्लू फ़िल्म में देखा था."

फ़िर उस जवान नारी ने उस किशोरी के पूरे कमसिन बदन को सहलाया और खास कर उसके कोमल छोटे छोटे उरोजों को प्यार से हौले हौले मसला. फिर उसने विनिता को सिखाया कि कैसे निपलों को मुंह में लेकर चूसा जाता है. बीच में ही वह हौले से उन कोमल निपलों को दांत से काट लेती थी तो विनिता दर्द और सुख से हुमक उठती थी. "निपल काटो मत ना भाभी, दुखता है, नहीं , रुको मत, हा ऽ य, और काटो, अच्छा लगता है."

अन्त में उसने विनिता को हाथ से हस्तमैथुन करना सिखाया."देख विनिता बहन, हम औरतों को अपनी वासना पूरी करने के लिये लंड की कोई जरूरत नहीं है. लंड हो तो बड़ा मजा आता है पर अगर अकेले हो, तो कोई बात नहीं."

विनिता भाभी की ओर अपनी बड़ी बड़ी आंखो से देखती हुई बोली "भाभी उस किताब में एक औरत ने एक मोटी ककड़ी अपनी चूत में घुसेड़ रखी थी." सुषमा हंस कर बोली "हां मेरी रानी बिटिया, ककड़ी, केले, गाजर, मूली, लम्बे वाले बैंगन, इन सब से मुट्ठ मारी जा सकती है. मोटी मोमबत्ती से भी बहुत मजा आता है. धीरे धीरे सब सिखा दूंगी पर आज नहीं. आज तुझे उंगली करना सिखाती हूं. मेरी तरफ़ देख."

सुषमा रण्डियों जैसी टांगें फ़ैलाकर बैठ गई और अपनी अंगूठे से अपने क्लाईटोरिस को सहलाना शुरू कर दिया. विनिता ने भी ऐसा ही किया और आनन्द की एक लहर उसकी बुर में दौड़ गई. सुषमा ने फ़िर बीच की एक उंगली अपनी खुली लाल चूत में डाल ली और अन्दर बाहर करने लगी.

भाभी की देखा देखी विनिता भी उंगली से हस्तमैथुन करने लगी. पर उसका अंगूठा अपने क्लिट पर से हट गया. सुषमा ने उसे समझाया. "रानी, उंगली से मुट्ठ मारो तो अंगूठा चलता ही रहना चाहिये अपने मणि पर." धीरे धीरे सुषमा ने दो उंगली घुसेड़ लीं और अन्त में वह तीन उंगली से मुट्ठ मारने लगी. फ़चाफ़च फ़चाफ़च ऐसी आवाज उसकी गीली चूत में से निकल रही थी.

विनिता को लगा कि वह तीन उंगली नहीं घुसेड़ पायेगी पर आराम से उसकी तीनों उंगलियां जब खुद की कोमल बुर में चली गईं तो उसके मुंह से आश्चर्य भरी एक किलकारी निकल पड़ी. सुषमा हंसने लगी. "अभी अभी भैया के मोटे लंड से चुदी है इसलिये अब तेरी चारों उंगलियां चली जायेंगी अन्दर. वैसे मजा दो उंगली से सबसे ज्यादा आता है."

दोनों अब एक दूसरे को देख कर अपनी अपनी मुट्ठ मारने लगीं. सुषमा अपने दूसरे हाथ से अपने उरोज दबाने लगी और निपलों को अंगूठे और एक उंगली में लेकर मसलने लगी. विनिता ने भी ऐसा ही किया और मस्ती में झूंम उठी. अपनी चूचियां खुद ही दबाते हुए दोनों अब लगातार सड़का लगा रही थी.

सुषमा बीच बीच में अपनी उंगली अपने मुंह में डालकर अपना ही चिपचिपा रस चाट कर देखती और फिर मुट्ठ मारने लगती. विनिता ने भी ऐसा ही किया तो उसे अपनी खुद की चूत का स्वाद बहुत प्यारा लगा. सुषमा ने शैतानी से मुस्कराते हुए उसे पास खिसकने और मुंह खोलने को कहा. जैसे ही विनिता ने अपना मुंह खोला, सुषमा ने अपने चूत रस से भरी चिपचिपी उंगलियां उसके मुंह में दे दी.

सुषमा ने भी विनिता का हाथ खींच कर उसकी उंगलियां मुंह में दबा लीं और चाटने लगी. "यही तो अमृत है जिसके लिये यह सारे मर्द दीवाने रहते हैं. बुर का रस चूसने के लिये साले हरामी मादरचोद मरे जाते हैं. बुर के रस का लालच दे कर तुम इनसे कुछ भी करवा सकती हो. तेरे भैया तो रात रात भर मेरी बुर चूसकर भी नहीं थकते."

कई बार मुट्ठ मारने के बाद सुषमा बोली. "चल छोटी अब नहीं रहा जाता. अब तुझे सिक्सटी - नाईन का आसन सिखाती हूं. दो औरतों को आपस में सम्भोग करने के लिये यह सबसे मस्त आसन है. इसमें चूत और मुंह दोनों को बड़ा सुख मिलता है." सुषमा अपनी बांई करवट पर लेट गई और अपनी मांसल दाहिनी जांघ उठा कर बोली. "आ मेरी प्यारी बच्ची, भाभी की टांगों में आ जा." विनिता उल्टी तरफ़ से सुषमा की निचली जांघ पर सिर रख कर लेट गई. पास से सुषमा की बुर से बहता सफ़ेद चिपचिपा स्त्राव उसे बिल्कुल साफ़ दिख रहा था और उसमें से बड़ी मादक खुशबू आ रही थी.

सुषमा ने उसका सिर पकड़ कर उसे अपनी चूत में खींच लिया और अपनी बुर के पपोटे विनिता के मुंह पर रख दिये. "चुम्बन ले मेरे निचले होंठों को जैसे कि मेरे मुंह का रस ले रही थी." जब विनिता ने सुषमा की चूत चूमना शुरू कर दिया तो सुषमा बोली. "अब जीभ अन्दर डाल रानी बिटिया" विनिता अपनी जीभ से भाभी को चोदने लगी और उसके रिसते रस का पान करने लगी. सुषमा ने अब अपनी उठी जांघ को नीचे करके विनिता का सिर अपनी जांघों मे जकड़ लिया और टांगें साइकिल की तरह चला के उसके कोमल मुंह को सीट बनाकर उसपर मुट्ठ मारने लगी.

भाभी की मांसल जांघों में सिमट कर विनिता को मानो स्वर्ग मिल गया. विनिता मन लगा कर भाभी की चूत चूसने लगी. सुषमा ने बच्ची की गोरी कमसिन टांगें फैला कर अपना मुंह उस नन्ही चूत पर जमा दिया और जीभ घुसेड़ घुसेड़ कर रसपान करने लगी. विनिता ने भी अपनी टांगों के बीच भाभी का सिर जकड़ लिया और टांगें कैंची की तरह चलाती हुई भाभी के मुंह पर हस्तमैथुन करने लगी.

दस मिनट तक कमरे में सिर्फ़ चूसने, चूमने और कराहने की अवाजें उठ रही थी. सुषमा ने बीच में विनिता की बुर में से मुंह निकालकर कहा. "रानी मेरा क्लाईटोरिस दिखता है ना?" विनिता ने हामी भरी. "हां भाभी, बेर जितना बड़ा हो गया है, लाल लाल है." "तो उसे मुंह में ले और चाकलेट जैसा चूस, उसपर जीभ रगड़, मुझे बहुत अच्छा लगता है मेरी बहना, तेरे भैया तो माहिर हैं इसमे."

सुषमा ने जोर जोर से साइकिल चला कर आखिर अपनी चूत झड़ा ली और आनन्द की सीत्कारियां भरती हुई विनिता के रेशमी बालों में अपनी उंगलियां चलाने लगी. विनिता को भाभी की चूत मे से रिसते पानी को चाटने में दस मिनट लग गये. तब तक वह खुद भी सुषमा की जीभ से चुदती रही. सुषमा ने उसका जरा सा मटर के दाने जैसा क्लाईटोरिस मुंह में लेके ऐसा चूसा कि वह किशोरी भी तड़प कर झड़ गई. विनिता का दिल अपनी भाभी के प्रति प्यार और कामना से भर उठा क्योंकि उसकी प्यारी भाभी अपनी जीभ से उसे दो बार झड़ा चुकी थी. एक दूसरे की बुर को चाट चाट कर साफ़ करने के बाद ही दोनों चुदैल भाभी ननद कुछ शांत हुई.

थोड़ा सुस्ताने के लिये दोनों रुकीं तब सुषमा ने पूछा. "विनिता बेटी, मजा आया?" विनिता हुमक कर बोली "हाय भाभी कितना अच्छा लगता है बुर चूसने और चुसवाने मे." सुषमा बोली "अपनी प्यारी प्रेमिका के साथ सिक्सटी - नाइन करने से बढ़कर कोई सुख नहीं है हम जैसी चुदैलों के लिये, कितना मजा आता है एक दूसरे की बुर चूस कर. आह ! क्रीड़ा हम अब घन्टों तक कर सकते हैं."

"भाभी चलो और करते हैं ना" विनिता ने अधीरता से फ़रमाइश की और सुषमा मान गई. ननद भाभी का चूत चूसने का यह कार्यक्रम दो तीन घन्टे तक लगातार चला जब तक दोनों थक कर चूर नहीं हो गई. विनिता कभी इतनी नहीं झड़ी थी. आखिर लस्त होकर बिस्तर पर निश्चल पड़ गई. दोनों एक दूसरे की बाहों में लिपटकर प्रेमियों जैसे सो गई.

शाम को सुषमा ने चूम कर बच्ची को उठाया. "चल विनिता, उठ, तेरे भैया के आने का समय हो गया. कपड़े पहन ले नहीं तो नंगा देखकर फ़िर तुझ पर चढ़ पढ़ेंगे" विनिता घबरा कर उठ बैठी. "भाभी मुझे बचा लो, भैया को मुझे चोदने मत देना, बहुत दुखता है."

सुषमा ने उसे डांटा "पर मजे से हचक के हचक के चुदा भी तो रही थी बाद मे, 'हाय भैया, चोदो मुझे' कह कह के". विनिता शरमा कर बोली. "भाभी बस आज रात छोड़ दो, मेरी बुर को थोड़ा आराम मिल जाये, कल से जो तुम कहोगी, वह करूंगी". "चल अच्छा, आज तेरी चूत नहीं चुदने दूंगी." सुषमा ने वादा किया और विनिता खुश होकर उससे लिपट गई.

विनोद वापस आया तो तन्नाया हुआ लंड लेकर. उसके पैन्ट में से भी उसका आकार साफ़ दिख रहा था. विनिता उसे देख कर शरमाती हुई और कुछ घबरा कर सुषमा के पीछे छुप गई. दोपहर की चुदाई की पीड़ा याद कर उसका दिल भय से बैठा जा रहा था. "भाभी, भैया से कहो ना कि अब मुझे ना चोदे, मेरी बुर अभी तक दुख रही है. अब चोदा तो जरूर फ़ट जायेगी!" सुषमा ने आंख मारते हुए विनोद को झूठा डांटते हुए कहा कि वह विनिता की बुर आज न चोदे.

विनोद समझ गया कि सिर्फ़ बुर न चोदने का वादा है, गांड के बारे में तो कुछ बातें ही नहीं हुई. वह बोला "चलो, आज तुम्हारी चूत नहीं चोदूंगा मेरी नन्ही बहन, पर आज से तू हमारे साथ हमारे पलंग पर सोयेगी और मै और तेरी भाभी जैसा कहेंगे वैसे खुद को चुदवाएगी और हमें अपनी यह कमसिन जवानी हर तरीके से भोगने देगी."

विनोद के कहने पर सुषमा ने विनिता की मदद से जल्दी जल्दी खाना बनाया और भोजन कर किचन की साफ़ सफ़ाई कर तीनों नौ बजे ही बेडरूम में घुस गये. विनोद ने अपने सारे कपड़े उतार दिये और अपना खड़ा लंड हाथ में लेकर उसे पुचकारता हुआ खुद कुर्सी में बैठ गया और भाभी ननद को एक दूसरे को नंगा करने को कहकर मजा देखने लगा.

दोनों चुदैलों के मुंह में उस रसीले लंड को देखकर पानी भर आया. विनिता फ़िर थोड़ी डर भी गई थी क्योंकि वह कुछ देर के लिये भूल ही गई थी कि विनोद का लंड कितना महाकाय है. पर उसके मन में एक अजीब वासना भी जाग उठी. वह मन ही मन सोचने लगी कि अगर भैया फ़िर से उसे जबरदस्ती चोद भी डालें तो दर्द तो होगा पर मजा भी आयेगा.

सुषमा ने पहले अपने कपड़े उतारे. ब्रेसियर और पैंटी विनिता से उतरवाई जिससे विनिता भी भाभी के नंगे शरीर को पास से देखकर फ़िर उत्तेजित हो गई. फ़िर सुषमा ने हंसते हुए शरमाती हुई उस किशोरी की स्कर्ट और पैन्टी उतारी. ब्रेसियर उसने दोपहर की चुदाई के बाद पहनी ही नहीं थी. सुषमा उस खूबसूरत छोकरी के नग्न शरीर को बाहों में भरकर बिस्तर पर लेट गई और चूमने लगी. सुषमा की बुर विनिता का कमसिन शरीर बाहों में पाकर गीली हो गई थी. साथ ही सुषमा जानती थी कि आज रात विनिता की कैसी चुदाई होने वाली है और इसलिये उसे विनिता की होने वाले ठुकाई की कल्पना कर कर के और मजा आ रहा था.

वह विनोद को बोली. "क्योंजी, वहां लंड को पकड़कर बैठने से कुछ नहीं होगा, यहां आओ और इस मस्त चीज़ को लूटना शुरू करो." विनोद उठ कर पलंग पर आ गया और फ़िर दोनों पति पत्नी मिलकर उस कोमल सकुचाती किशोरी को प्यार करने के लिये उसपर चढ़ गये.

सुषमा विनिता का प्यारा मीठा मुखड़ा चूमने लगी और विनोद ने अपना ध्यान उसके नन्हें उरोजों पर लगाया. झुक कर उन छोटे गुलाब की कलियों जैसे निपलों को मुंह में लिया और चूसने लगा. विनिता को इतना अच्छा लगा कि उसने अपनी बांहे अपने बड़े भाई के गले में डाल दीं और उसका मुंह अपनी छाती पर भींच लिया कि और जोर से निपल चूसे.

उधर सुषमा ने विनिता की रसीली जीभ अपने मुंह में ले ली और उसे चूसते हुए अपने हाथों से धीरे धीरे उसकी कमसिन बुर की मालिश करने लगी. अपनी उंगली से उसने विनिता के क्लाईटोरिस को सहलाया और चूत के पपोटों को दबाया और खोलकर उममें उंगली करनी लगी.

उधर विनोद भी बारी बारी से विनिता के चूचुक चूस रहा था और हाथों में उन मुलायम चूचियों को लेकर प्यार से सहला रहा था. असल में उसका मन तो हो रहा था कि दोपहर की तरह उन्हें जोर जोर से बेरहमी के साथ मसले और विनिता को रुला दे पर उसने खुद को काबू में रखा. गांड मारने में अभी समय था और वह अभी से अपनी छोटी बहन को डराना नहीं चाहता था. उसने मन ही मन सोचा कि गांड मारते समय वह उस खूबसूरत कमसिन गुड़िया के मम्मे मन भर कर भोम्पू जैसे दबाएगा.

विनिता अब तक मस्त हो चुकी थी और भाभी के मुंह को मन लगा कर चूस रही थी. उसकी कच्ची जवान बुर से अब पानी बहने लगा था. सुषमा ने विनोद से कहा. "लड़की मस्त हो गई है, बुर तो देखो क्या चू रही है, अब इस अमृत को तुम चूसते हो या मैं चूस लू?"

विनोद ने उठ कर विनिता के सिर को अपनी ओर खींचते हुआ कहा "मेरी रानी, पहले तुम चूस लो अपनी ननद को, मैं तब तक थोड़ा इसके मुंह का स्वाद ले लूम, फ़िर इसे अपना लंड चुसवाता हूं. दोपहर को रह ही गया, यह भी बोल रही होगी कि भैया ने लंड का स्वाद भी नहीं चखाया"

विनोद ने अपने होंठ विनिता के कोमल होंठों पर जमा दिये और चूस चूस कर उसे चूमता हुआ अपनी छोटी बहन के मुंह का रस पीने लगा. उधर सुषमा ने विनिता की टांगें फ़ैलाईं और झुक कर उसकी बुर चाटने लगी. उसकी जीभ जब जब बच्ची के क्लाईटोरिस पर से गुजरती तो एक धीमी सिसकी विनिता के विनोद के होंठों के बीच दबे मुंह से निकल जाती. उस कमसिन चूत से अब रस की धार बह रही थी और उसका पूरा फ़ायदा उठा कर सुषमा बुर में जीभ घुसेड़ घुसेड़ कर उस अमृत का पान करने लगी.

विनोद ने विनिता को एक आखरी बार चूम कर उसका सिर अपनी गोद में ले लिया. फ़िर अपना बड़ा टमाटर जैसा सुपाड़ा उसके गालों और होंठों पर रगड़ने लगा."ले विनिता, जरा अपने भैया के लंड का मजा ले, चूस कर देख क्या मजा आयेगा. डालू तेरे मुंह मे?" उसने पूछा.

विनिता को भी सुपाड़े की रेशमी मुलायम चमड़ी का स्पर्श बड़ा अच्छा लग रहा था. " हाय भैया, बिलकुल मखमल जैसा चिकना और मुलायम है." वह किलकारी भरती हुई बोली. विनोद ने उसका उत्साह बढ़ाया और लंड को विनिता के मुंह में पेलने लगा.

"चूस कर तो देख, स्वाद भी उतना ही अच्छा है." सुषमा ने विनिता की जांघों में से जरा मुंह उठाकर कहा और फ़िर बुर का पानी चूसने में लग गई. विनिता अब मस्ती में चूर थी. वह अपनी जीभ निकालकर इस लंड और सुपाड़े को चाटने लगी. विनोद ने काफ़ी देर उसका मजा लिया और फ़िर विनिता के गाल दबाता हुआ बोला. "चल बहुत खेल हो गया, अब मुंह में ले और चूस."

गाल दबाने से विनिता का मुंह खुल गया और विनोद ने उसमें अपना सुपाड़ा घुसेड़ दिया. सुपाड़ा बड़ा था इस लिये विनिता को अपना मुंह पूरी तरह खोलना पड़ा. पर सुपाड़ा अन्दर जाते ही उसे इतना मजा आया कि मुंह बंद कर के वह उसे एक बड़े लॉलीपॉप जैसे चूसने लगी. विनोद ने एक सुख की आह भरी, अपनी छोटी बहन के प्यारे मुंह का स्पर्श उसके लंड को सहन नहीं हो रहा था. "हाय सुषमा, मैं झड़ने वाला हूं इस छोकरी के मुंह मे. निकाल लू लौड़ा? आगे का काम शुरू करते हैं."

सुषमा को मालूम था कि विनोद अपनी छोटी बहन की गांड मारने को लालायित है. उसने जब लंड का साइज़ देखा तो समझ गई कि अगर झड़ाया नहीं गया और इसी लंड से बच्ची की गांड मारी गई तो जरूर फ़ट जाएगी. इसलिये वह भी बोली. "ऐसा करो, मुट्ठ मार लो विनिता के मुंह मे, उसे भी जरा इस गाढ़े गाढ़े वीर्य का स्वाद चखने दो. मै तो रोज ही पीती हूं, आज मेरी ननद को पाने दो यह प्रसाद."

विनोद दीवाना हुआ जा रहा था. उसने एक हाथ से विनिता के सिर को पकड़ कर सहारा दिया कि धक्कों से आगे पीछे न हो और दूसरे हाथ से लंड का डण्डा मुट्ठी में लेकर जोर जोर से आगे पीछे करता हुआ हस्तमैथुन करने लगा. मुंह में फ़ूलता सिकुड़ता लज़ीज़ सुपाड़ा उस किशोरी को इतना भाया कि जीभ रगड़ रगड़ कर आंखे बन्द कर के वह उस रसीले फ़ल को चूसने लगी.

विनोद को इतना सुख सहन नहीं हुआ और पांच ही मिनिट में वह एकदम स्खलित हो गया. "हा ऽ य री ऽ प्यारी बच्ची, तूने मुझे मार डाला, सुषमा रानी, यह तो चूसने में उस्ताद है, ऊ ऽ आह ऽ ऽ " विनिता मलाई जैसा गाढ़ा गरम गरम वीर्य बड़े स्वाद से निगल रही थी. पहली बार वीर्य निगला और वह भी बड़े भाई का! विनोद का उछलता लंड उसने आखरी बूंद निकलने तक अपने मुंह में दबाए रखा जब तक वह सिकुड़ नहीं गया.

विनिता भी अबतक सुषमा के चूसने से कई बार झड़ गई थी. सुषमा चटखारे ले लेकर उसकी बुर का पानी चूस रही थी. विनोद बोला "चलो, बाजू हटो, मुझे भी अपनी बहन की चूत चूसने दो." विनिता मस्ती में बोली "हां भाभी, भैया को मेरी बुर का शरबत पीने दो, तुम अब जरा मुझे अपनी चूत चटाओ भाभी, जल्दी करो ऽ ना ऽ" वह मचल उठी.

सुषमा उठी और उठ कर कुर्सी में बैठ गई. अपनी भरी पूरी गुदाज टांगें फ़ैला कर बोली "आ मेरी रानी, अपनी भाभी की बुर में आ जा, देख भाभी की चूत ने क्या रस बनाया है अपनी लाड़ली ननद के लिये."

विनिता उठकर तुरंत सुषमा के सामने फ़र्श पर बैठ गई और भाभी की बुर अपने हाथों से खोलते हुए उसे चाटने लगी. उस कोमल जीभ का स्पर्श होते ही सुषमा मस्ती से सिसक उठी और विनिता के रेशमी बालों में अपनी उंगलियां घुमाती हुई उसे पास खींच कर और ठीक से चूसने को कहने लगी. "हाय मेरी गुड़िया, क्या जीभ है तेरी, चाट ना, और मन भर कर चाट, जीभ अन्दर भी डाल ननद रानी, असली माल तो अन्दर है." विनिता के अधर चाटने से सुषमा कुछ ही देर में झड़ गई और चुदासी की प्यासी विनिता के लिये तो मानों रस की धार उसकी भाभी की बुर से फ़ूट पड़ी.

विनोद अब तक विनिता के पीछे लेट गया था. सरककर उसने विनिता के नितम्ब फ़र्श पर से उठाये और अपना सिर उसके नीचे लाकर फ़िर से विनिता को अपने मुंह पर ही बिठा लिया. उसकी रसीली चूत चूसते हुए वह अपनी छोटी बहन के नितम्ब प्यार से सहलाने लगा. विनिता तो अब मानों काम सुख के सागर में गोते लगा रही थी. एक तरफ़ उसे अपनी भाभी की बुर का रस चूसने मिल रहा था और दूसरी ओर उसके भैया उसकी चूत चूस रहे थे. वह तुरंत झड़ गई और मस्ती में ऊपर नीचे होते हुए विनोद को अपनी बुर का रस पिलाते हुए उसका मुंह चोदने लगी.

विनोद ने अपनी जीभ कड़ी करके उसकी चूत में एक लंड की तरह डाल दी और उस कमसिन चूत को चोदने लगा. साथ ही अब वह धीरे धीरे विनिता के कसे हुई मुलायम चूतड़ों को प्यार से सहलाने लगा. सहलाते सहलाते उसने नितम्बों के बीच की लकीर में उंगली चलाना शुरू कर दी और हौले हौले उस कोमल गांड का जरा सा छेद टटोलने लगा.

विनोद अब यह सोच कर दीवाना हुआ जा रहा था कि जब उस नन्ही गांड में उसका भारी भरकम लंड जायेगा तो कितना मजा आयेगा पर बेचारी विनिता जो अपने भाई के इस इरादे से अनभिज्ञ थी, मस्ती से चहक उठी. गांड को टटोलती उंगली ने उसे ऐसा मस्त किया कि वह और उछल उछल कर अपने भाई का मुंह चोदने लगी और झड़कर उसे अपनी बुर से बहते अमृत का प्रसाद पिलाने लगी.

विनिता आखिर बार बार झड़कर लस्त पड़ने लगी. विनिता के मुंह में झड़ने के बावजूद सुषमा की बुर अब बुरी तरह से चू रही थी क्योंकि वह समझ गई थी कि बच्ची की गांड मारने का समय नजदीक आता जा रहा है. विनिता अब पूरी तरह से तृप्त होकर हार मान चुकी थी और अपने भाई से प्रार्थना कर रही थी कि अब वह उसकी बुर न चूसे. "भैया, छोड़ दो अब, अब नहीं रहा जाता, बुर दुखती है तुम चूसते हो तो, प्लीज़ भैया, मेरी चूत मत चाटो अब."

सुषमा ने विनिता का सिर अपनी झांटो में खींच कर अपनी चूत से उसका मुंह बंद कर दिया और जांघों से उसके सिर को दबा लिया. फ़िर बोली "डार्लिंग, तुम चूसते रहो जब तक मन करे, यह छोकरी तो नादान है, और उसकी गांड भी चूसो जरा, स्वाद बदल बदल कर चूसोगे तो मजा आयेगा"

अगले दस मिनट विनोद विनिता की बुर और गांड बारी बारी से चूसता रहा. बच्ची की झड़ी चूत पर और नन्हे से क्लिट पर अब जब विनोद की जीभ चलती तो वह अजीब से सम्वेदन से तड़प उटती. उसे यह सहन नहीं हो रहा था और बेचारी रोने को आ गई कि कब भैया उस पर तरस खाकर उसकी यह मीठी यातना समाप्त करे्गा. वह कमसिन छोकरी मुंह बन्द होने से कुछ नहीं कर सकी, सिर्फ़ सुषमा की बुर में घिगियाकर रह गई.
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WHERE ARE YOU PINKY, ENJOYING THE FUN DEAR
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**** originally shared to अन्तर्वासना ANTARVASNA (Hindi Sex Stories):
 
हमेशा की तरह माँ पापा के कमरे से जोर जोर से चिल्लाने की आवाजें आ रही थी... मेरे कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई, मैंने दरवाजा खोला तो मेरी छोटी बहन थी। हमारे घर में हम चार लोग थे माँ, पिताजी, मैं और मेरी छोटी बहन। मैं तब कॉलेज में पढ़ रहा था और मेरी छोटी बहन सोनिया बारहवीं में थी। 
मैंने उसे पूछा- क्या हुआ? 
तो उसकी आँखों में आँसू थे, और वो मुझसे लिपट गई, कहने लगी- भैया, आज भी माँ और पिताजी झगड़ रहे हैं, मुझे डर लग रहा है, मैं आपके कमरे में रुक सकती हूँ? 
मैंने उसे कमरे के अंदर कर लिया। मेरी बहन सोनिया बहुत प्यारी है, गोरा रंग, दिखने में बेहद खूबसूरत, उसके वक्ष के उभार बहुत ज्यादा नहीं हैं। 
वो आकर मेरे बिस्तर पर लेट गई, मैंने तकिया लिया और जमीं पर सोने ही वाला था कि सोनिया ने कहा- भैया, आप भी ऊपर सो जाओ, बचपन में तो हम साथ में ही सोते थे ! 
और तभी लाइट चली गई, मैंने मोमबत्ती जला दी। मैंने अपनी बहन को मोमबत्ती की रोशनी में देखा उसने सफ़ेद नाइटी पहनी थी और वो परी जैसी लग रही थी। 
मैं बिस्तर पर लेट गया और सोनिया मेरी बगल में थी। मैंने उसे कहा- तुझे तो अब आदत हो जानी चाहिए माँ-पिताजी के झगड़े की ! तुम इस बात से डरा मत कर और वे लोग बिना लड़े एक दिन भी नहीं रह सकते। यह उनके प्यार करने का तरीका समझ ले। 
वो मुस्कुराई और फिर उसने कहा- भैया लाइट नहीं है, बहुत गर्मी हो रही है, क्या मैं नाईटी उतार दूँ? 
मैं कुछ समझ नहीं पाया कि क्या कहूँ, मैंने कहा- हाँ उतार दे अगर तुझे तकलीफ हो रही है तो ! 
"आप भी अपना शर्ट-पजामा निकाल दो, वर्ना आप पसीने से नहा जाओगे और बिस्तर गीला हो जायेगा।" उसने शरारत भरी मुस्कराहट के साथ कहा। 
मैंने कहा- नहीं, मुझे कोई परेशानी नहीं है ! 
वो तपाक से बोली- ठीक है, फिर मैं भी नहीं निकालती, आपकी छोटी प्यारी बहन गर्मी से परेशान हो तो आपको क्या? 
"ठीक है, निकालता हूँ मैं भी !" कह कर मैंने अपने कपड़े उतारे और फिर देखा तो वो मुझे मुस्कुराते हुई देख रही थी- अब मेरे कपड़े उतारो ! 
मैं भाई होने के नाते उसके कपड़े उतारने लगा, यह एक भाई बहन का प्यार ही था, एक भाई जो अपनी बहन को गर्मी से परेशान होते हुए नहीं देख सकता था, मगर में हैरान हुआ जब देखा उसने अंदर कुछ भी नहीं पहना था। 
"सोनिया यह क्या? तुमने ब्रा और नीचे भी कुछ नहीं पहन रखा?" 
"भैया, आपको तो पता ही है मुझे ब्रा की जरुरत नहीं और रात को नीचे कुछ पहन कर क्या फायदा है, और आप कौन सा मेरे साथ कुछ शरारत करने वाले हो। मैं आपको बहन हूँ, आपका मुझ पर पूरा हक है, अगर आपका जी करे तो आप मुझे प्यार भी कर सकते हो !" 
वो मेरा अंडरवीयर उतारने लगी, मैंने उसे रोका तो बोली- भैया, चलो भी, मैंने कुछ नहीं पहना और आप पहन कर बैठे हो? उतार भी लो ! वैसे भी गर्मी बहुत हैम आपको तकलीफ होगी। और आपका शेर भी अंदर अकेला होगा उसे मेरी गुफ़ा देखने दो, मैंने भी आपका शेर कभी देखा नहीं है। अब छोटी प्यारी बहन से भला क्या शरमाना?" 
मैं उसकी बातें सुन कर हतप्रभ रह गया कि यह आज कैसी कैसी बातें बोल रही है, पर मैंने उसे मदद की मेरा अंडरवीयर उतारने में... 
फिर हम बिस्तर पर लेट गए आजू बाजु नंगे, उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने बदन पर रखा और बोली- भैया, आप सो गए क्या? 
"नहीं तो, क्यों?" 
उसने मेरे तरफ देखते हुए कहा- मुझे आपकी मदद चाहिए थी ! 
"कैसी मदद?" मैंने कहा। 
मेरी प्यारी बहन मेरे ऊपर आ गई, मेरे ऊपर लेट कर मेरी आँखों में देख रही थी। 
अब मेरे लंड को कौन बताये कि भाई बहन का रिश्ता कितना पवित्र होता है, वो खड़ा होने लगा था बेशरम की तरह ! 
उसने मेरे लंड को देखा, उसको हाथ में पकड़ा और अपने चूत को निशाना लगा कर मेरे ऊपर बैठ गई.. उसने कहा- आप मेरे बूब्स चूसो ताकि यह बड़े हो जाये और फ़िर मुझे चोदना ! 
मेरा दिमाग काम करना बंद कर रहा था, फिर भी मैंने जैसे तैसे कहा- तू मेरी बहन है, यह सब गलत हो रहा है, तू अभी अपने कमरे में जा ! 
"चलिए भी ! आप चाहते हो कि आपकी बहन की इज्जत कोई और लूटे? आप मेरे भाई हो और मैं अपनी इज्जत आपको दे रही हूँ ताकि आप इसकी रक्षा कर सकें, एक भाई जब बहन को चोदता है तो उन दोनों का रिश्ता और भी मजबूत होता है। मैं हमेशा से आप में अपना रक्षक देखती आई हूँ। अगर आप मुझे चोदोगे तो मुझे किसी गैर से नहीं चुदना पड़ेगा। आप दिमाग की नहीं, अपने लंड की सुनो, वो सिर्फ चूत देखता है, आपका लंड मेरी चूत में मजे करेगा। प्लीज़, बहनचोद बन जाओ ! 
मेरी छोटी बहन मुझे भाई का फ़र्ज़ सिखा रही थी, मोमबती के प्रकाश में उसका पसीने से भीगा हुआ बदन चमक रहा था और मेरा लंड उसकी चूत में अटका हुआ था। 
मैं मुस्कुराया और उसे गले लगाते हुए कहा- मैं अपनी बहन की हर ख्वाहिश पूरी करूँगा, तूने आज मुझे मेरा फ़र्ज़ याद दिलाया है, बहन आज से तेरी इज्जत मेरी इज्जत है, मैं तुझे चोद कर तुझे किसी गैर के हाथों का खिलौना नहीं बनने दूंगा। 
मैंने उसके एक चुचूक को मुँह में लिया और लंड को धक्का मारना शुरू किया, वो आहें भरने लगी। 
सोनिया ने कहा- भैया और जोर से करो और मेरे बूब्स को काटो ! 
उसने मेरे बालों को पकड़ा, उसने अपने चूतड़ों को हिलाना शुरू किया जिससे मुझे उसे चोदने में मदद मिलने लगी। 
अब उसने मुझे दूर धकेला और चूत को लंड से अलग किया। मैं पागल हो रहा था कि वो ऐसा क्यों कर रही है.. 
"भैया अब आप अपनी बहन का पेशाब पियोगे, आपके लिए स्पेशल !" कहते हुए उसने चूत मेरे मुँह पर लगाई। 
मैं 'छीः' कहते हुए दूर हटा, तो उसने मेरा सर पकड़ा और कहा- भाई जब हमने सोच ही लिया है कि दो जिस्म एक जान हो जायें तो मेरा पेशाब क्या और आपका पेशाब क्या, आप मेरा पेशाब पी लीजिये, आपको पसंद आयेगा ! 
मैंने कहा- पर छोटी, मुझे घिन आ रही है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं। 
"भैया भैया मेरे प्यारे भैया, पेशाब से कैसी घिन, याद है आपको दूध नहीं पसंद, फिर भी आप दूध पीते ही हो ना बॉडी बनाने के लिए, वैसे ही पेशाब पी लीजिये, मैं और नहीं रोक सकती जल्दी से मुँह लगाओ, फिर हमें चुदाई भी पूरी करनी है।" 
मैं नीचे लेटा और छोटी मेरे मुँह में मूतने लगी। झूठ नहीं कहूँगा, बहुत अजीब सा स्वाद था, पर मुझे पसंद आया। 
उसने मुझे गले लगाया- बहनचोद भाई हो आप, बहन की खुशी के लिए उसका पेशाब भी पी डाला ! आओ हम चुदाई पूरी करें। और याद रखो अपना पूरा माल मेरे अंदर डालना भैया, मैं आपके लिए ऐसा कर रही हूँ ताकि आप सिर्फ घर में रह कर मुझे चोदें और बाहर मुँह ना मारें। जिसकी बहन इतनी खूबसूरत हो, उसका भाई किसी और लड़की को चोदे तो अच्छा नहीं लगता ! 
मेरी आँखों में आँसू आ गए, मेरी बहन मुझे इतना प्यार करती है- सोनिया, आई लव यू बहना ! उसकी चूत में फिर से लंड डालते हुए मैंने कहा। 
"भैया, आई आल्सो लव यू !" और मुझे आराम से लेटने को कह कर खुद ऊपर नीचे होने लगी, पूरी मेहनत वो कर रही थी, उसका पसीना मेरे बदन पर गिर रहा था, वो चिल्लाना चाहती थी पर घर के लोग ना जाग जायें इसलिए चुपचाप सब दर्द सहन करके चुद रही थी। 
मैंने कहा- मैं आने वाला हूँ। 
उसकी आँखों में चमक थी- भैया, आ जाओ, रास्ता साफ़ है ! 
पचक पचक की आवाज आनी शुरू हुई और उसका रस और मेरा रस एक हो गया, वो मुझ पर गिर गई, मैंने उसे लेटाया और उसकी चूत को चाटने लगा, उसने मेरे बालों में हाथ फेरना शुरू किया, मैं उसे चाट रहा था और वो सिसकारियां ले रही थी। थोड़ी देर में उसकी चूत मैंने चाट के पूरी साफ कर दी। 
फिर उसने मेरे लंड को मुँह में लेकर पूरा साफ़ किया। 
"भैया आपने मुझे आज सबसे बड़ा तोहफा दिया है !" ऐसा कह कर वो मेरे लंड को सहलाने लगी। 
"पर छोटी, दुनिया क्या कहेगी, मैं तुम्हारा भाई हूँ और मुझे तुम प्यारी हो, मगर यह सब गलत है, मैं अपने आप को रोक नहीं पाया अपने लंड की बातों में आकर !" 
"भैया, बुरा ना मानो, दिमाग और लंड की जंग में हमेशा लंड ही जीतता है, यह सृष्टि का नियम है, भाई के लिए बहन इसी लिए बनाई गई है ताकि बहन भाई की और भाई बहन की जरूरतें पूरी कर सके, अपनी बहन होते हुए दूसरों की बहन को चोदना पाप है। चूत तो हर एक की होती है फिर बहन की और दूसरी लड़की की चूत में क्या फर्क है?" 
मेरी बहन जो कह रही थी, मुझे कुछ कुछ सही लग रहा था फिर भी मैं अज्ञानी उससे पूछ बैठा- फिर लोग शादी क्यों करते अगर बहन चोदना सही होता..? 
"भैया आप भी ना बुद्धू हो, अरे हर एक को बहन नहीं होती उसके लिए पुराने ज़माने में लोगों ने शादी करना शुरू की, पहले किसको पता था कि बहन और भाई कैसे रहते थे। सभी भाई अपनी बहन को चोदते थे और सभी बहने अपने भाई का लण्ड लेती थी, पर इस जालिम समाज ने ऐसा होने नहीं दिया। आपका लंड इतना बड़ा और प्यारा है और वीर्य भी इतना मीठा है, अब आप ही बताओ, इस पर पहला हक़ आपकी बहन का ही होना चाहिए ना? अरे लीजिये आपका लंड खड़ा हो गया, डालिए फिर से इसे चूत में !" 
मैंने उसकी चूत में लंड डाला और धक्के मारने लगा, मुझे अपनी बहन की शिक्षाप्रद बातें भाने लगी। 
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GOOD CATCH
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 मैं अपनी इज्जत आपको दे रही हूँ ताकि आप इसकी रक्षा कर सकें, एक भाई जब बहन को चोदता है तो उन दोनों का रिश्ता और भी मजबूत होता है।
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Baskar R (karan)'s profile photoKAMBI KUNNA's profile photorite gbd's profile photoMora Reddy's profile photo
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Pink open the door I like it 
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shashi bhusan parida's profile photopindoriya devshi's profile photoNarayana Babjee's profile photo
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NICE BACK
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Pinky Mitra

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Golden Retriever
The temperament of the Golden Retriever is a hallmark of the breed and is described in the standard as kindly, friendly and confident. They are not one man dogs and are generally equally amiable with both strangers and those familiar to them. Their trusting, gentle disposition therefore makes them a poor guard dog.
Any form of unprovoked aggression or hostility towards either people, dogs or other animals, whether in the show ring or community, is completely unacceptable in a Golden Retriever and is not in keeping with the character of the breed and as such is considered a serious fault. Nor should a Golden Retriever be unduly timid or nervous.
The typical Golden Retriever is calm, naturally intelligent and biddable, with an exceptional eagerness to please. They love pleasing their owners as well as getting along with strangers.
#Dog   #GoldenRetriever   #dogsareawesome   #doglovers   #Animal
#Animallovers   #Mammal  
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how r u
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