Profile cover photo
Profile photo
VishwaHindijan org
52 followers
52 followers
About
VishwaHindijan org's posts

Post has attachment
'माफ़ करें मुझे किसानों के पक्ष का कोई समकालीन भारतीय साहित्य दिखता नहीं'..: पलाश बिस्वास

'सारस' पत्रिका के प्रवेशांक- 'साहित्य में किसान' विषय पर बात करते हुए आदरणीय पलाश विश्वास जी के मंतव्यों पर गंभीरता पूर्वक बहस के लिए मैं आप सभी साहित्यकारों, आलोचकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों को इस बहस के लिए आमंत्रित करता हूँ. जुलाई में 'सारस' पत्रिका के प्रथम अंक में इस बहस के लिए मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूँ.
यह प्रश्न सिर्फ़ साहित्य-लेखन के स्तर पर ही नहीं बल्कि पत्रकारिता, राजनीति और सिनेमा के स्तर पर भी सोचने को मजबूर करता है. इसलिए सभी पत्रकार और फिल्म समीक्षक विद्वानों से भी अनुरोध है कि इस बहस में जो 'सारस' पत्रिका के माध्यम से जुलाई से आरंभ हो रही है उसमें अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें.....
इमेल- saaraspatrika@gmail.com
संपादक.
संजीव कुमार...

साभार: हस्तक्षेप 

Post has attachment

'माफ़ करें मुझे किसानों के पक्ष का कोई समकालीन भारतीय साहित्य दीखता नहीं'..: पलाश बिस्वास

'सारस' पत्रिका के प्रवेशांक- 'साहित्य में किसान' विषय पर बात करते हुए आदरणीय पलाश विश्वास जी के मंतव्यों पर गंभीरता पूर्वक बहस के लिए मैं आप सभी साहित्यकारों, आलोचकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों को इस बहस के लिए आमंत्रित करता हूँ. जुलाई में 'सारस' पत्रिका के प्रथम अंक में इस बहस के लिए मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूँ.
यह प्रश्न सिर्फ़ साहित्य-लेखन के स्तर पर ही नहीं बल्कि पत्रकारिता, राजनीति और सिनेमा के स्तर पर भी सोचने को मजबूर करता है. इसलिए सभी पत्रकार और फिल्म समीक्षक विद्वानों से भी अनुरोध है कि इस बहस में जो 'सारस' पत्रिका के माध्यम से जुलाई से आरंभ हो रही है उसमें अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें.....
इमेल- saaraspatrika@gmail.com
संपादक.
संजीव कुमार...

साभार: हस्तक्षेप

Post has attachment
'माफ़ करें मुझे किसानों के पक्ष का कोई समकालीन भारतीय साहित्य दीखता नहीं'..: पलाश बिस्वास
'माफ़ करें मुझे किसानों के पक्ष का कोई समकालीन भारतीय साहित्य दीखता नहीं'..: पलाश बिस्वास 'सारस' पत्रिका के प्रवेशांक- 'साहित्य में किसान' विषय पर बात करते हुए आदरणीय पलाश विश्वास जी के मंतव्यों पर गंभीरता पूर्वक बहस के लिए मैं आप सभी साहित्यकारों, आलोचकों, ...

Post has attachment
#जनकृति_का_नवीन_अंक_आप_सभी_के_समक्ष_प्रस्तुत_है-

जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका का मई-जून 2017 सयुंक्त अंक (अंक 25-26) आप सभी पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है। यह अंक आप पत्रिका की वेबसाईट www.jankritipatrika.in पर पढ़ सकते हैं। इस अंक के साथ ही जनकृति ने तीसरे वर्ष में प्रवेश किया है. जनकृति का यह अंक अपने नए स्वरुप के साथ आपके समक्ष प्रस्तुत है. विविध क्षेत्रों से विषय विविधता को ध्यान में रखते हुए रचनाओं, लेख, शोध आलेखों का चयन किया गया है. साहित्य, राजनीति, कला, समाज, पत्रकारिता, इतिहास, इत्यादि क्षेत्रों के विविध विषयों के साथ प्रस्तुत इस अंक पर आपके विचार आमंत्रित हैं...

आप पत्रिका में साहित्य की किसी भी विधा में रचनाएँ भेज सकते हैं. आप पत्रिका के विभिन्न स्तंभों हेतु लेख भेज सकते हैं. आप साहित्य, राजनीति, कला, समाज, पत्रकारिता, इतिहास, इत्यादि क्षेत्रों से संबंधित विषयों पर शोध आलेख भेज सकते हैं. शोध आलेख का प्रारूप एवं भेजने के नियम आप वेबसाईट पर अवश्य देखें.

जनकृति एक बहुभाषी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका है, जिसके 6 विषेशांक समेत कुल 26 अंक प्रकाशित हुए है। इसके साथ ही जनकृति की विविध इकाई विश्वहिंदीजन, कला संवाद, सिने विमर्श से सृजनात्मक कार्यों का संकलन एवं प्रचार-प्रसार किया जाता है। जनकृति पत्रिका एवं विविध इकाइयों से देश-विदेश के लाखों पाठक जुड़े हैं।


#पत्रिका_में_लेख_एवं_शोध_आलेख_हेतु_नियम
जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में साहित्य की विभिन्न विधाओं में रचना प्रकाशन के साथ लेख, शोध आलेख भी प्रकाशित किये जाते हैं। शोध आलेखों की गुणवत्ता को लेकर जनकृति में पाठकों के सुझाव एवं मानकों के अनुरूप कुछ नियम निर्धारित किये गए हैं उन नियमों के आधार पर ही शोध आलेख स्वीकृत किये जाएंगे।
1. पत्रिका में शोध आलेख एवं शोध सार प्रत्येक माह के 10 तारीख तक मंगवाए जाएंगे।
2. प्राप्त शोध आलेखों को शोध प्रारूप एवं कंटेंट के आधार पर सम्पादन मंडल द्वारा जांचा जाएगा।
3. सम्पादन मंडल द्वारा शोध आलेखों के विषय, शोध आलेख में दिए गए तथ्यों, वर्णन इत्यादि की मौलिकता को जांचा जाएगा कि वह कहीं से कॉपी न हो।
4. बिंदु 3 की प्रक्रिया के पश्चात शोध आलेख को शोध विषय के अनुरूप विषय विशेषज्ञ द्वारा जांचा जाएगा, जिसमें शोध आलेख की स्वीकृति एवं अस्वीकृति तय होगी।
5. अस्वीकृत होने की स्थिति में शोध आलेख पर कारण के साथ नोट दिया जाएगा और लेखक को आलेख दुरुस्त करने के लिए 10 दिन का समय दिया जाएगा
6. शोध आलेख के पास मौलिकता का पत्र लेखक द्वारा दिया जाना अनिवार्य है।
7. शोध आलेख में प्रूफ संबंधी, फॉन्ट संबंधी मामलों को जांच कर ही शोध आलेख भेजें।
(शोध प्रारूप एवं शोध आलेख लिखने के नियम शीघ्र ही पत्रिका की वेबसाईट पर जारी होंगे)(पत्रिका में रचनाओं, लेख, शोध आलेख के प्रकाशन हेतु पूर्व की तरह ही किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं है)

[पत्रिका यूजीसी की लिस्ट समेत विश्व की 9 से अधिक रिसर्च इंडेक्स में शामिल है. पत्रिका शीघ्र ही इम्पेक्ट फेक्टर नंबर के साथ प्रकाशित होगी]

Post has attachment
जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका का मई-जून 2017 सयुंक्त अंक प्रकाशित

Post has attachment
जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका का नवीन अंक प्रकाशित
#जनकृति_का_नवीन_अंक_आप_सभी_के_समक्ष_प्रस्तुत_है - जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका का मई-जून 2017 सयुंक्त अंक (अंक 25-26) आप सभी पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है। यह अंक आप पत्रिका की वेबसाईट www.jankritipatrika.in पर पढ़ सकते हैं। इस अंक के साथ ही जनकृति ने तीसरे वर...

Post has attachment
'एक और अंतरीप' (अप्रैल-जून, 2017): अंक समीक्षा- भगवानदास मोरवाल

Post has attachment
'एक और अंतरीप' (अप्रैल-जून, 2017): अंक समीक्षा- भगवानदास मोरवाल
जो समझते हैं कि मैं, दुनिया के लायक हूँ नहीं l वे कहेंगे बाद में, दुनिया मेरे काबिल नहीं ll  (हेतु भारद्वाज) इन दिनों जिस तरह एक के बाद हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकारों पर केन्द्रित पत्रिकाओं के अंक आ रहे हैं, वे यह दर्शाते हैं कि हिंदी समाज अपने लक्षित और अलक्...

Post has attachment
जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका के 'संपादक एवं संपादकीय विशेषांक' हेतु सूचना
#संपादक_संपादकीय_विशेषांक 2017 आप सभी को सूचित किया जाता है कि जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका का आगामी विशेषांक पत्रिकाओं के संपादकों, संपादकीय एवं पत्रिकाओं की समीक्षा पर केंद्रित होगा। इस अंक हेतु निम्न विषय आमंत्रित है- 1. संपादकों के व्यक्तित्व उनकी वैचार...

Post has attachment
‘सारस’ पत्रिका के प्रवेशांक ‘साहित्य में किसान' पर केंद्रित. अंक हेतु (रचनाएँ एवं लेख आमंत्रित)
इस विषय के तहत भारतीय समाज में किसानों की स्थिति तथा भारतीय अर्थव्यवस्था में किसानों की भूमिका को खत्म करने के प्रयास से संबंधित समस्याओं के बावजूद किसान आधारित रचनात्मकता (सृजन के सभी क्षेत्रों) के ह्रास के कारणों को जानने का प्रयास करेंगे. लगभग भारतीय भाष...
Wait while more posts are being loaded