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Gokul Patel
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मम्मी मुझे स्कूल जाना है
"मम्मी मुझे स्कूल जाना है" मम्मी सुबह जल्दी जगा देना, मुझे स्कूल जाना है। मम्मी सुबह जल्दी नहला देना, मुझे स्कूल जाना है। मम्मी कपड़ा पहना देना, मुझे स्कूल जाना है। मम्मी रोटी जल्दी बना देना, मुझे स्कूल जाना है। मम्मी पुस्तक पेन दिला देना, मुझे स्कूल जाना है...

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होली कैसे मनाएँ
होली कैसे मनाएँ जैसा की हम
सभी जानते है प्राचीन काल में अत्याचारी राक्षस राज हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को आदेश
दिया कि वह उसके अतिरिक्त किसी अन्य की स्तुति न करे। प्रहलाद के न मानने पर हिरण्यकश्यप
ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रहलाद को आग में जलाकर मारने क...

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फिल्मों की दुनिया तो वेश्यालय है
फिल्मों की
दुनिया तो वेश्यालय है मंजिल
के तलाश में, झूटी शान के आस में, देखकर
चकाचौंध को पास में। खींचे चले आते है लोग मिथ्याभास में।        जैसे
वहां कोई देवालय है। सच
मानिये फिल्मों की दुनिया तो वेश्यालय है।   जहाँ
कला कब की मर चुकी है जहाँ
अब मन से न कोई...

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हमें एक Miss Call कर दो
"हमें एक Miss
Call कर दो" कभी
तन्हा अकेली हो अगर, या
गुजर न रही हो कोई लम्बी सफर । बेचैन
सा मन हो या लेनी हो कोई खबर तो, हमें
एक Miss Call कर दो। चाह
कर भी कुछ सोच न सको, याद
भी कुछ न आये कभी । भूल
जाना सब कुछ, बस हमारा नंबर याद कर लो, याद
आ ही गया जब हमारा...

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लघु संदेश सेवा SMS
लघु संदेश सेवा SMS (Short Message Service) 1.      दिल में बसने वालों की कोई सूरत नहीं होती , और सांसों
में जो बसते है उनकी कोई मूरत नहीं होती।  जो पढ़ लेते
है आँखों से ही दिल ऐ बयां, उन्हें शब्दों
से कुछ भी कहने की जरुरत नहीं होती। 2.     मद मस्त आँखों से प...

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“दहशत भरी रातें”
“दहशत भरी रातें” अफवाह
नहीं, है ये सत्य कहानी, २०१५
में अप्रैल मई का माह । घटनाएँ
ऐसी जो सबके लवों पर, ला
देती है करुणा भरी आह। दहशत
भरी रातें, तरह तरह की बातें। खौफनाक
रातों में, निकाल
ली जाती है किडनी, निकाल
ली जाती है आँखें। दहशतगर्दी
बेखौफ घूमते है, हर
...

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विचार-मंथन
विचार-मंथन हिंदुत्व
को जिसने अब तक नहीं जाना है उन्होंने
ही दूसरे धर्म को अपना माना है।  वे
ही भूल कर अपने सारे रस्मों रिवाज, संस्कृति
का अर्थ बताने चले है।  अपनों
से नाता तोड़कर,  गैरों
पर हक़ जताने चले है।  वादों
की जिनकों क़द्र नहीं, देखों
आज वे वादा निभाने...

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शिष्टाचार के नियम - I
शिष्टाचार
के नियम - I हम सभी ही जानते है की मनुष्य एक सामाजिक
प्राणी है और समाज में रहकर सदाचार और शालीनता को अपनाते हुए विकास करता है इसकी यह
गुण ही मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग कर बुद्धिमता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाती
है। मनुष्य इस गुण को देखकर और सुन...

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ध्यान
ध्यान परिवर्तन
का है, एक विकल्प । कर
ले तू, अपना कायाकल्प ।। तन
को साध, ध्यान कर । मन
को साध, ध्यान कर ।। सबसे
पहले, बिंदु बना । आभा
जिसके, हो घना ।। त्राटक
कर, बैठ सीधा । बीच
में न आये, कोई दुविधा ।। भूलकर,
चहुँ दीवारों को । शून्य
कर, विचारों को ।। केंद्रि...

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