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Shambhu Nath
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बुढ़वन उनके बारात न जइहै ||
जे डीजे लय जाये ||
भोजपुरी कै फूहड़ गाना ||
दुवारे पय बजवाये ||
बिना मतलब का होय लड़ाई ||
जब करय गवाहियाँ डाँस ||
गर्दा उड़ै कइव बिगहा तक ||
फूलय लागय साँस ||
खोपड़ी फूटय बराती भागय ||
ई आफत के लाये ||
भोजपुरी कै फूहड़ गाना ||
दुवारे पय बजवाये ||
साधारण से जब चलबेया तौ ||
चलिहै दादा नाना ||
बिंजो बाजे जब मुन्ना कै ||
गइहै गजब तराना ||
मार धाड़ से बच के रहबेया ||
इज्जत बच के आये ||
भोजपुरी कै फूहड़ गाना ||
दुवारे पय बजवाये ||


मत बनवाओ शौचालय ऐसा |
जिसका प्रयोग न कर पाये ||
सुबह शाम फिर लोटा ले कर |
शौच के खातिर बाहर जाये ||
दस बारह हजार की लागत में |
कैसे बनना अब सम्भव है ||
प्रधान वीडियो सेक्रेटरी कहते |
कुछ भी नहीं अब असम्भव है||
घपलेबाजी इसमें खूब हो रही |
सच को अब कौन छुपाये ||
सुबह शाम फिर लोटा ले कर |
शौच के खातिर बाहर जाये ||
दो दिन में जब भरे गे गड्ढे |
बहुत ही बदबू आयेगी ||
वातारण फिर दूषित होगा |
बिमारी बहुत सतायेगी ||
इस बला से दूर रहो सब ||
बिन मतलब संकट कौन बुलाये ||

गाँव में जिला प्रतापगढ़ के लालगंज ब्लॉक में शौचालय दस बारह हजार की लागत से बनाये जा रहे है ||


आंधी पानी रोज बा आवत
उड़ै दुवारे भूसा ||
चला उठावा खैजी जल्दी ||
भितरेम एहका ठूंसा ||
दस दिन से बा पड़ा दुवारे ||
तनिकव करा न चिंता ||
एक चौथईया फ़ोकट म उड़िगा ||
खूब खेला घूम के गेंता ||
दुइ बेड़ना बांधै के खातिर
गाड़ा दुइ ठू खूँटा ||
चला उठावा खैजी जल्दी ||
भितरेम एहका ठूंसा ||
मनई मजूर का लखत रहब तौ ||
होये पूरा बरबाद ||
भर भर बोरिया रखी अहा हिया ||
मूस मचावै गोहार ||
आज काम जब पूरा न होये ||
तौ खोपड़ी पय परिहै जूता ||
चला उठावा खैजी जल्दी ||
भितरेम एहका ठूंसा ||

शम्भू नाथ कैलाशी


पहिली बार गए ससुरे म ||
पकड़ लिहिस है सर्दी ||
अवसर गांठ के बात करय न ||
सइया अहइ बेदर्दी ||
दुःख तकलीफ साथ दिहिस नहीं ||
लाइस नहीं दवाई ||
अंधविश्वासी सास मिली बा ||
करावा करय ओझाई ||
ननद निकम्मी हंसी उड़ावै ||
कहय लगावा हरदी ||
अवसर गांठ के बात करय न ||
सइया अहइ बेदर्दी ||
जब से आय गये नइहर का ||
सुई दवाई कराये ||
हरदी तेल गरम खूब कय के ||
मालिश तक करवाये ||
चार महीना जाब न ससुरे
न करय देब मन मर्जी ||
अवसर गांठ के बात करय न ||
सइया अहइ बेदर्दी ||

शम्भू नाथ कैलाशी 

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लूक बहत बा ज्येष्ठ तपत बा ||
आम बिनय अब जाया जिन ||
गलती से हुवा देखाया जिन ||
येह दुपहरिया जब घुमबेया तो ||
पकड़ लिये बिमारी ||
रुपिया खूब डाक्टर लेइहै ||
रहे दवाई जारी ||
बिन मतलब का आफत फिर से ||
बेटवा घर बोलाया जिन ||
गलती से हुवा देखाया जिन ||
गर्मी जान लेत बा अबकी ||
देत बहुत बा पीड़ा||
बइठ घरे म सोवा जागा ||
खा नून संग खीरा ||
वक़्त बुरा बा चला संभल के ||
वैरी से टकराया जिन ||
गलती से हुवा देखाया जिन ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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आवत अही घरे हम अम्मा ||
सेतुवा लिहिव भुजाय ||
खटऊ अमवा कै चटनी ||
महतारी दिहिव बनाय ||
कइव साल पय सेतुवा खाबय ||
घुमब गाँव गिराव ||
चार पांच दिन रहब घरे म ||
फिर ससुरारी जाब ||
चना मटर जौ बेर्रा सब कुछ ||
पिस वाऊ सबय मिलाय ||
खटऊ अमवा कै चटनी ||
महतारी दिहिव बनाय ||
फिर कटहर कै बरिया बनाऊ ||
खाबय भर के पेट ||
महुवा कै गुलगुला हम खाबय ||
जेहमा रहत है छेद ||
जब प्रदेस फिर लौटी तो ||
देहिया बनी देखाय ||
खटऊ अमवा कै चटनी ||
महतारी दिहिव बनाय ||

शम्भू नाथ कैलाशी


अपयश लाग चुनर भय दागी ||
मचा गाँव म हाहाकार ||
रात रतौंधी के चक्कर म ||
धोखा दय गा पट्टीदार ||
आँगन समझ घुसे कोलिया म ||
रही अंधेरिया रात ||
पहिलेन ताकत खड़ा रहन ऊ ||
करय के खातिर घात ||
कहिस की भौजी डगर भूल गऊ ||
फादिस लय के हमें दिवार ||
रात रतौंधी के चक्कर म ||
धोखा दय गा पट्टीदार ||


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आज रात मोहे नींद न आयी ॥ 
मच्छरों ने बैण्ड बजायी ॥ 
एक और चौपट भय  खेती ॥ 
अब डस रही महगाई ॥ 
बड़की बिटिया की शादी है ॥ 
मांग रहे है कार ॥ 
बैंकः का चक्कर काट रहे है ॥ 
मिल नहीं रहा उधार ॥ 
घर का छप्पर उड़ा पड़ा है ॥ 
आंधी ने ऊधम मचायी ॥ 
एक और चौपट भय  खेती ॥ 
अब डस रही महगाई ॥ 
ऊब सांस म जिव अटका है ।। 
फाटा जात कपार ॥ 
सारी पूँजी बही पानी म ॥ 
चला नहीं ब्यापार ॥ 
कौनव तिकड़म सूझय नाही ॥ 
हाय हाय चिल्लायी ॥ 
एक और चौपट भय  खेती ॥ 
अब डस रही महगाई ॥ 
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आज रात मोहे नींद न आयी ॥ 
मच्छरों ने बैण्ड बजायी ॥ 
एक और चौपट भय  खेती ॥ 
अब डस रही महगाई ॥ 
बड़की बिटिया की शादी है ॥ 
मांग रहे है कार ॥ 
बैंकः का चक्कर काट रहे है ॥ 
मिल नहीं रहा उधार ॥ 
घर का छप्पर उड़ा पड़ा है ॥ 
आंधी ने ऊधम मचायी ॥ 
एक और चौपट भय  खेती ॥ 
अब डस रही महगाई ॥ 
ऊब सांस म जिव अटका है ।। 
फाटा जात कपार ॥ 
सारी पूँजी बही पानी म ॥ 
चला नहीं ब्यापार ॥ 
कौनव तिकड़म सूझय नाही ॥ 
हाय हाय चिल्लायी ॥ 
एक और चौपट भय  खेती ॥ 
अब डस रही महगाई ॥ 

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जल रही जवानी ॥ 
मै प्यासी तड़प रही हूँ  ॥
बरसात आके कर दो ॥ 
मै कब  से मचल रही हूँ ॥ 
फूलो से सजी सेज है ।। 
करके श्रृंगार आयी हूँ ॥ 
नाम की तेरे मेहदी ॥ 
हाथो में मै लगायी हूँ ॥ 
 तेरे वियोग में मै ॥ 
सदियों से भटक रही हूँ ॥  
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