Shared publicly  - 
 
**
जल है तो जीवन है घट-घट पर्वत के
ह्रदय से, कलरव बहती निर्मल धारा, शिशिर,
ग्रीष्म,बसंत, हेमंत, हर ऋतु सुनाती अनुराग निराला | उपनिषद, पुराणों में
वार्णित है, जल जीवन ही उजियारा, घट-घट पर्वत के
ह्रदय से, कलरव बहती निर्मल धारा || लता, पौधे, वृक्ष
पनपते इससे, बरस...
Translate
1
Add a comment...