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सच्चा पथिक कर्म को जो पहचान ले, है
योगी सच्चा वही, पल पल चले, ठहरे नहीं, है
बटोही सच्चा वही| जो लक्ष्य को साधे चले,
अवरोध से भी ना रुके, जीवन पथ पर, हे मनुज! है
पथिक सच्चा वही|| ग्रीष्म में मुरझाये
जो, शरद में गल जाय जो, मझधार देख मुड़ता
रहे, वह बटोही सच्चा ...
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