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वह पेड़ मोड़ पर खड़ा
रहता था, आते-जाते, हर राही
को तांकता था, पर कभी कुछ न किसी
से कहता था | वर्षा-धूप से बचाया,
उसने जाने कितनों को, ना कभी जाति पूछी
किसी की उसने, ना कभी रंग-भेद से
किसी को छाया दी | कई लोग हंसकर देखते
थे उसकी ओर, जो कोई ज़ोर से हथेली
मारकर अप...
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