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paramprakash semwal
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सच्चा पथिक

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सच्चा पथिक कर्म को जो पहचान ले, है
योगी सच्चा वही, पल पल चले, ठहरे नहीं, है
बटोही सच्चा वही| जो लक्ष्य को साधे चले,
अवरोध से भी ना रुके, जीवन पथ पर, हे मनुज! है
पथिक सच्चा वही|| ग्रीष्म में मुरझाये
जो, शरद में गल जाय जो, मझधार देख मुड़ता
रहे, वह बटोही सच्चा ...

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जल है तो जीवन है

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जल है तो जीवन है घट-घट पर्वत के
ह्रदय से, कलरव बहती निर्मल धारा, शिशिर,
ग्रीष्म,बसंत, हेमंत, हर ऋतु सुनाती अनुराग निराला | उपनिषद, पुराणों में
वार्णित है, जल जीवन ही उजियारा, घट-घट पर्वत के
ह्रदय से, कलरव बहती निर्मल धारा || लता, पौधे, वृक्ष
पनपते इससे, बरस...

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जल है तो जीवन है घट-घट पर्वत के
ह्रदय से, कलरव बहती निर्मल धारा, शिशिर,
ग्रीष्म,बसंत, हेमंत, हर ऋतु सुनाती अनुराग निराला | उपनिषद, पुराणों में
वार्णित है, जल जीवन ही उजियारा, घट-घट पर्वत के
ह्रदय से, कलरव बहती निर्मल धारा || लता, पौधे, वृक्ष
पनपते इससे, बरस...

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मैं प्रकृति हूँ
                            मैं प्रकृति हूँ मैं प्रकृति हूँ ! मैं तो आँचल बनकर आई थी इस ब्रह्माण्ड पर, मगर बुद्धिजीवियों ने मुझे विभाजित कर दिया | क्या कमी रह गई थी मेरी ममता में? सब कुछ तो अर्पित कर दिया है मैंने अपना ! कहीं धाराओं में बहती हूँ नदी बनकर, त...

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वह पेड़ मोड़ पर खड़ा
रहता था, आते-जाते, हर राही
को तांकता था, पर कभी कुछ न किसी
से कहता था | वर्षा-धूप से बचाया,
उसने जाने कितनों को, ना कभी जाति पूछी
किसी की उसने, ना कभी रंग-भेद से
किसी को छाया दी | कई लोग हंसकर देखते
थे उसकी ओर, जो कोई ज़ोर से हथेली
मारकर अप...

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                     छंद
मेरे तेरे लिये              तेरे लिए लिखे मैंने, छंद हैं ये छंद मेरे,              नैनों को जो है भाती, वो सूरत जो तेरी है |              जपती हैं सांसें अब दिन-रात माला तेरी,              मन में जो मुस्काई, मूरत जो तेरी है |       ...

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