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shikha kaushik
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shikha kaushik

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दीप जलाना सीखा है!
जब जब कंटक चुभे हैं पग में, मैंने चलना सीखा है,   अंधियारों से लड़कर मैंने, दीप जलाना सीखा है! .......................... अपनों की गद्दारी देखी, गैरों की हमदर्दी भी, पत्थर की नरमाई देखी, फूलों की बेदर्दी भी, सूखे रेगिस्तानों से प्यास बुझाना सीखा है!  अंधिया...
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santosh kumar prajapati's profile photoJag Gupta's profile photo
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वाह
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shikha kaushik

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'आइटम' कहते हुए लज्जा तो आनी चाहिए !
कोख में ही क़त्ल होने से बची कलियाँ हैं हम  , खिल गयी हैं इस जगत में झेलकर ज़ुल्मो सितम , मांगती अधिकार  स्त्री भीख नहीं चाहिए , अपने हिस्से की हमें भी अब इमरती चाहिए ! .............................................................. पितृसत्ता ने इशारों पर नचाई...
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shikha kaushik

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मैं ऐसे मित्र नहीं चाहता !
देख दुःखों में डूबा मुझको ; जिनके उर आनंद मनें , किन्तु मेरे रह समीप ; मेरे जो हमदर्द बनें , ढोंग मित्रता का किंचिंत ऐसा न मुझको भाता ! मैं ऐसे मित्र नहीं चाहता !  सुन्दर -मँहगे उपहारों से ; भर दें जो झोली मेरी ,, पर संकट के क्षण में जो ; आने में करते देरी ...
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shikha kaushik

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'वो' भयभीत नहीं होने देता '
बसा हुआ हर उर में है 'वो' ; भयभीत नहीं होने देता , विषम घड़ी में भी शत्रु की जीत नहीं होने देता ! ...................................... रुको नहीं बढ़ते जाओ ; चीर अंधेरों के चीरो , बलिदानों की झड़ी लगा दो , किंचित नहीं झुको वीरों , वीर-प्रसूता के मस्तक को ल...
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shikha kaushik

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लिबास-कहानी
लिबास-कहानी  मंजू ने लम्बी साँस लेते हुए मन में सोचा -''आज सासू माँ की तेरहवीं भी निपट गयी .माँ ने तो केवल इक्कीस साल संभाल कर रखा मुझे पर सासू माँ ने अपने मरते दम तक मेरे सम्मान ,मेरी गरिमा और सबसे बढ़कर मेरी इस देह की पवित्रता की रक्षा की . ससुराल आते ही ...
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shikha kaushik

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A KILLER CAN NOT BE WORSHIPED  
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मुंबई में मना गोडसे का 'बलिदान दिवस' जो गांधी के हत्यारे ; गोडसे को पूजते हैं , आतंक के चेहरे पर ; किस मुंह से थूकते हैं ! ....................................... गोडसे था मोहरा ; पीछे थे लोग शातिर , जो रच रहे थे साज़िश ; छद्...
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Have her in circles
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shikha kaushik

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हिंदी ब्लॉगिंग और महिला सरोकार : ['भारतीय -नारी ' सामूहिक ब्लॉग के सन्दर्भ में ]
I HAVE PRESENTED THIS RESEARCH PAPER 0N 30TH MARCH 2016 AT MALVIYA BHAVAN DELHI  IN A SEMINAR -DR.SHIKHA KAUSHIK भारतीय समाज विभिन्न धर्मों , समूहों और जातियों से मिलकर बना है ,जिसमें char वर्णों के अतिरिक्त एक एक और जाती भी है .वह जाति है -स्त्री की . आज इ...
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shikha kaushik

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मैं ऐसे मित्र नहीं चाहता !
देख दुःखों में डूबा मुझको ; जिनके उर आनंद मनें , किन्तु मेरे रह समीप ; मेरे जो हमदर्द बनें , ढोंग मित्रता का किंचिंत ऐसा न मुझको भाता ! मैं ऐसे मित्र नहीं चाहता !  सुन्दर -मँहगे उपहारों से ; भर दें जो झोली मेरी ,, पर संकट के क्षण में जो ; आने में करते देरी ...
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v . nice
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समीक्षक- आरिफा एविस
समीक्षक- आरिफा एविस ‘क्योंकि औरत कट्टर नहीं होती’ डॉ. शिखा कौशिक ‘नूतन’ द्वारा लिखा गया लघु कथा संग्रह है जिसमें स्त्री और पुरुष की गैर बराबरी के विभिन्न पहलुओं को छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से सशक्त रूप में उजागर किया है. इस संग्रह में हमारे समाज की सामं...
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समीक्षक- आरिफा एविस ‘क्योंकि औरत कट्टर नहीं होती’ डॉ. शिखा कौशिक ‘नूतन’ द्वारा लिखा गया लघु कथा संग्रह है जिसमें स्त्री और पुरुष की गैर बराबरी के विभिन्न पहलुओं को छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से सशक्त रूप में उजागर किया है...
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shikha kaushik

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''हैं बहुत गहरे मेरे,ज़ख्म न भर पायेंगें !''
मरहम तसल्ली के लगा लो ,राहत नहीं कर पायेंगें , हैं  बहुत  गहरे  मेरे ,   ज़ख्म  न  भर  पायेंगें ! ............................................................... टूटा है टुकड़े-टुकड़े  दिल ,कैसे ये जुड़ जायेगा , जोड़ पाने की जुगत में और चोट खायेगा , दर्द के...
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shikha kaushik

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''दर्द दिल में है तेरे हम जानते हैं !''
दर्द दिल में है तेरे हम जानते हैं ! ज़ख्म गहरे हैं तेरे हम जानते हैं ! .......................................... ग़मों की आग में तपकर मासूम सा ये दिल , धधकता सीने में तेरे हम जानते हैं ! ............................................. छलक आते हैं आसूँ  आँखों...
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shikha kaushik

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''इस अमावस को बदल दें चांदनी की रात में ''
इस बार दीपक वे जगें ,फैले उजाला प्यार का , अंत हो इस मुल्क में मज़हबी तकरार का ! ................................................................. हो मिठाई से भी मीठा , मुंह से निकले बोल जो , ये ही मौका है मोहब्बत के खुले इक़रार का ! ..........................
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kamlesh kumar diwan's profile photo
 
sundar bhav hai 
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