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shikha kaushik
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शर्मिंदा-लघुकथा...
शर्मिंदा-लघुकथा... ''अरे चेयरमैन साब ! आपको क्या जरूरत थी आने की ......चपरासी को भेज देते ...मैं आपकी पसंद का सामान घर ही पहुंचवा देता .''  जनरल स्टोर पर पधारे विशिष्ठ अतिथि को देख स्टोर मालिक सोनू गदगद हो उठा . चेयरमैन साब मुस्कुराते हुए बोले ' अरे नहीं नह...

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घाटी अलगाव भूल जा
देर न हो जाये घाटी आज जाग जा , मेरी वफ़ा का दे सिला अलगाव भूल जा ! हिंदुस्तान जैसा आशिक न मिलेगा , गुमराह न हो सैय्याद की चाल जान जा ! ....................... जो हाथ थाम मेरा साथ चलेगी , मंजिल तरक्की की तुझे रोज़ मिलेगी , खामोश न रह मेरे संग चीख कर दिखा ! मेर...

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देर न हो जाये घाटी आज जाग जा , मेरी वफ़ा का दे सिला अलगाव भूल जा ! हिंदुस्तान जैसा आशिक न मिलेगा , गुमराह न हो सैय्याद की चाल जान जा ! ....................... जो हाथ थाम मेरा साथ चलेगी , मंजिल तरक्की की तुझे रोज़ मिलेगी , खामोश न रह मेरे संग चीख कर दिखा ! मेर...

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मैं तुम्हारे काव्य की नायिका नहीं हूँ
मैं नहीं कोमल कली सी, ना गरजती   दामिनी, हूं नहीं तितली सी चंचल, ना ही मैं गजगामिनी, ना मैं देवी, ना परी, ना ही हूं मैं दानवी, मैं सरल साक्षात नारी,  मात्र हूं मैं मानवी, मैं गगन में नित चमकती तारिका नहीं हूँ ! मैं तुम्हारे काव्य की नायिका नहीं हूँ ! है नही...

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रंग लाई बेटियों की जंग - BHASKAR. COM से साभार
... पर एक सवाल कचोटता है.... छेड़छाड़ का क्या इलाज किया जाये या इसे लाइलाज बीमारी मान लिया जाये......  हरियाणा में छेड़छाड़ से तंग लड़कियों का अनशन, अपग्रेड करना पड़ा स्कूल Ajay Bhatia | May 17,2017 16:15 I रेवाडी -स्कूल शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने सोमव...

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तुमने मुझे आंसू दिये
हो व्यथित नारी ने नर से दो टूक ये वचन कहे, मैंने तुमको दिल दिया तुमने मुझे आंसू दिये! जिंदगी के तुम मेरे बन के मालिक तन गये, छीनकर हक मेरे सारे खुद खुदा तुम बन गये, टूट कर बिखर गयी जुल़म  इतने क्यूं किये! मैंने तुमको दिल दिया तुमने मुझे आंसू दिये! रोज़ दे द...

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मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
मां तेरी तस्वीर के आगे ठहर जाती हूँ मैं,  टूट कर माला के मोती सी बिखर जाती हूँ मैं!  है नहीं मालूम कैसे जी रही तेरे बिना,  जिंदगी के सब गमों का पी जहर जाती हूँ मैं!  गौर से मैं देखती हूँ जब कभी मां आईना,  हूबहू तब तेरे जैसी ही नजर आती हूँ मैं!  अब नहीं मिल ...

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जी उठे पुन:निर्भया
मिले न्याय हर निर्भया को, फांसी चढे़ हर अन्यायी कामी! घाव भर जाये हर क्षत - विक्षत  स्त्री योनि के और न रहे अधूरी ये आस "मैं जीना चाहती हूँ " जी उठे पुन : प्रफुल्ल ह्रदय से सम्मान के साथ हर निर्भया! शिखा कौशिक नूतन

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सूजी हुई आँखें-कहानी
''...बहू अगर चाहती है तो बेशक तुम अलग घर ले लो ..लेकिन याद रखना एक दिन तुम्हें मेरे पास वापस आना ही होगा .'' माँ ने गंभीर स्वर में अपना निर्णय सुना दिया . सच कहूँ तो मेरी माँ से दूर जाकर रहने की रत्ती भर भी इच्छा नहीं थी लेकिन अनुभा के जिद करने के कारण  मैं...

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