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shikha kaushik
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shikha kaushik

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बलात्कार तब तक नहीं रुकेंगें
बलात्कार तब तक नहीं रुक सकते जब तक नहीं रुकेगा स्त्री को जिम्मेदार ठहराना  और पुरुष का अपने ही कुकृत्य पर ठहाका लगाना ! ************************ बलात्कार तब तक नहीं रुक सकते जब तक नहीं रुकेगा धर्म गुरु  द्वारा जनता को  भटकाना और नेताओं का राजनीति चमकाना ....
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Vinod Gitala's profile photo
 
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shikha kaushik

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charcha manch ka koi vikalp nahi .sundar links se saza yah manch blog-jagat kee shobha yun hi badhata rahe .shubhkamnayen 
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मित्रों। शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) -- दोहे "जग के नियम-विधान"  उच्चारण  -- ग्रहण  उन्नति को ग्रहण लगा तम और गहराया जिससे उभर न पाया रात दिन भयभीत रहता कौन बैरी ...
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shikha kaushik

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वैदेही सोच रही मन में
वैदेही सोच रही मन  में यदि प्रभु यहाँ मेरे होते !! वैदेही सोच रही मन  में यदि प्रभु यहाँ मेरे होते , लव-कुश की बाल -लीलाओं  का आनंद प्रभु संग में लेते . जब प्रभु बुलाते लव -कुश को आओ पुत्रों समीप जरा , घुटने के बल चलकर जाते हर्षित हो जाता ह्रदय मेरा , फैलाक...
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shikha kaushik

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वीरोगति रूप मृत्यु का कहलाता सुन्दरतम !
घाव  लगें जितनें भी तन पर कहलाते आभूषण , वीर का लक्ष्य  करो शीघ्र ही शत्रु -दल  का मर्दन , अडिग -अटल हो करते रहते युद्ध -धर्म का पालन , समर -भूमि से वीर नहीं करते हैं कभी पलायन ! ................................................................ युद्ध सदा लड़...
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घाव  लगें जितनें भी तन पर कहलाते आभूषण , वीर का लक्ष्य  करो शीघ्र ही शत्रु -दल  का मर्दन , अडिग -अटल हो करते रहते युद्ध -धर्म का पालन , समर -भूमि से वीर नहीं करते हैं कभी पलायन ! ..........................................
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बलात्कारी..पति ?-कहानी
पंचायत अपना फैसला सुना चुकी थी .नीला के बापू -अम्मा , छोटे भाई-बहन बिरादरी के आगे घुटने टेककर पंचायत का निर्णय मानने को विवश हो चुके थे .निर्णय की जानकारी होते ही नीला ने उस बंद -दमघोंटू कोठरी की दीवार पर अपना सिर दे मारा था और फिर तड़प उठी थी उसके असहनीय द...
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बलात्कारी..पति ?-कहानी
पंचायत अपना फैसला सुना चुकी थी .नीला के बापू -अम्मा , छोटे भाई-बहन बिरादरी के आगे घुटने टेककर पंचायत का निर्णय मानने को विवश हो चुके थे .निर्णय की जानकारी होते ही नीला ने उस बंद -दमघोंटू कोठरी की दीवार पर अपना सिर दे मारा था और फिर तड़प उठी थी उसके असहनीय द...
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पंचायत अपना फैसला सुना चुकी थी .नीला के बापू -अम्मा , छोटे भाई-बहन बिरादरी के आगे घुटने टेककर पंचायत का निर्णय मानने को विवश हो चुके थे .निर्णय की जानकारी होते ही नीला ने उस बंद -दमघोंटू कोठरी की दीवार पर अपना सिर दे मारा था ...
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sangharsh hi jeevan hai . aapke  sangharsh sheel jeevan se sabhi ko prerna milegi aisa mera vishvas hai .
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   ख़ास-मुलाक़ात               प्रीति अज्ञात                   के साथ जीवन को बहुत संघर्षों के साथ जिया है, कभी मौका नहीं मिला अपने जीवन के बिताएं दिनों को  साझा करने का,एक दिन प्रीति अज्ञात जी का फोन आया कि...
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jyoti khare's profile photo
 
आभार आपका
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shikha kaushik

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शुभकामनाओं की प्रबल आकांक्षा है !
मेरी लघु-कथाओं का प्रथम संग्रह अंजुमन प्रकाशन [इलाहाबाद ] से शीघ्र ही प्रकाशित हो रहा है .आप सभी की शुभकामनाओं की प्रबल आकांक्षा है ! https://www.facebook.com/anjumanpublication?pnref=lhc -डॉ. शिखा कौशिक 'नूतन'
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मेरी लघु-कथाओं का प्रथम संग्रह अंजुमन प्रकाशन [इलाहाबाद ] से शीघ्र ही प्रकाशित हो रहा है .आप सभी की शुभकामनाओं की प्रबल आकांक्षा है ! https://www.facebook.com/anjumanpublication?pnref=lhc -डॉ. शिखा कौशिक 'नूतन'
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वो लड़की- रौद दी जाती है अस्मत जिसकी
  वो लड़की रौंद दी जाती है  अस्मत जिसकी  , करती है नफरत अपने ही वजूद से जिंदगी हो जाती है बदतर उसकी मौत से .  वो लड़की रौद दी जाती है अस्मत जिसकी , घिन्न आती है उसे अपने ही जिस्म से , नहीं चाहती करना अपनों का सामना , वहशियत की शिकार बनकर लाचार घबरा जाती है ...
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shikha kaushik

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अग्नि-परीक्षा सीता की अपराध था घनघोर
भूतल  में  समाई  सिया  उर कर रहा धिक्कार पितृ सत्ता के समक्ष लो  राम गया  हार   ! देवी अहिल्या को लौटाया नारी  का सम्मान अपनी  सिया का साथ न दे  पाया किन्तु  राम है वज्र सम ह्रदय मेरा करता हूँ मैं स्वीकार ! पितृ सत्ता के  समक्ष  ........ वध किया  अनाचारी का...
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पंचायत अपना फैसला सुना चुकी थी .नीला के बापू -अम्मा , छोटे भाई-बहन बिरादरी के आगे घुटने टेककर पंचायत का निर्णय मानने को विवश हो चुके थे .निर्णय की जानकारी होते ही नीला ने उस बंद -दमघोंटू कोठरी की दीवार पर अपना सिर दे मारा था ...
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सबसे सुन्दर प्रिया !
गुलाबी फूल
हरी बेल पर
अत्याधिक आकर्षक !
.................................
ओस की बूँदें
हरे पत्तों पर
अत्याधिक मोहक !
.................................
जल की फुहार
चमकती हुई धुप में
अत्याधिक उज्ज्वल !
..................................
लेकिन सबसे सुन्दर
तुम ...
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