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Ramesh Bahadur Singh
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Ramesh Bahadur Singh

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Happy holi
 
अहंकार और क्रोध तरल हो जाए ,समझो होली है।
मन का यदि व्यवहार सरल हो जाए ,समझो होली है।
रंगों और गुलालों की होली भी कोई होली है ,
आत्मा का श्रृंगार अगर हो पाये ,समझो होली है।

हिंदी साहित्य मार्गदर्शन की और से आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ !!
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Ramesh Bahadur Singh

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Realty
 
क्या आप जानते हैं हम मीडिया को बिकाऊ क्यूँ कहते हैं ?

क्या आप जानते हैं हमारा मीडिया पश्चिमीकरण का समर्थन और भारतीयता का विरोध क्यों करता है ?

सन् 2005 में एक फ़्रांसिसी पत्रकार भारत दौरे पर आया उसका नाम 'फ़्रैन्कोईस' था,उसने भारत में हिंदुत्व के ऊपर हो रहे अत्याचारों के बारे में अध्ययन किया और उसने फिर बहुत हद तक इस कार्य के लिए मीडिया को जिम्मेवार ठहराया,

फिर उसने पता करना शुरू किया तो वह आश्चर्य चकित रह गया कि भारत में चलने वाले न्यूज़ चैनल, अखबार वास्तव में भारत के है ही नही
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फिर भारत के मीडिया समूह और उसकी आर्थिक श्रोत के बारे में पता किया गया जो निम्न है

1. द हिन्दू:-जोशुआ सोसाईटी, बर्न,स्विट्जरलैंड, इसके संपादक एन॰ राम, इनकी पत्नी ईसाई में बदल चुकी हैं।

2. एनडीटीवी:-गोस्पेल ऑफ़ चैरिटी, स्पेन,यूरोप

3. सीएनएन, आईबीएन 7, सीएनबीसी:-100 %
आर्थिक सहयोग साउथर्न बैपिटिस्ट चर्च द्वारा


4. द टाइम्स ऑफ़ इंडिया, नवभारत, टाइम्स
नाउ:- बेनेट एंड कोल्मान द्वारा संचालित, 80% फंड वर्ल्ड क्रिस्चियन काउंसिल द्वारा, बचा हुआ 20% एक अंग्रेज़ और इटैलियन द्वारा दिया जाता है ,इटैलियन व्यक्ति का नाम रोबेर्ट माइन्दो है जो यूपीए अध्यक्षा सोनिया गाँधी का निकट सम्बन्धी हैl

5. हिन्दुस्तान टाइम्स,दैनिक हिन्दुस्तान:-मालिक बिरला ग्रुप लेकिन टाइम्स ग्रुप के साथ जोड़ दिया गया है।

6. इंडियन एक्सप्रेस:-इसे दो भागों में बाँट दिया गया है, दि इंडियन एक्सप्रेस और न्यू इंडियन एक्सप्रेस(साउथर्न एडिसन) फंडिंग लंदन से

7. दैनिक जागरण ग्रुप:-इसके एक प्रबंधक समाजवादी पार्टी से राज्यसभा में सांसद है ,अब आगे कुछ कहने की ज़रूरत नही आप जानते हैं.l

8. दैनिक सहारा:-इसके प्रबंधन सहारा समूह
देखती है,इसके निदेशक सुब्रोतो राय भी समाजवादी पार्टी के बहुत मुरीद हैं

9. आंध्र ज्योति:- हैदराबाद की एक मुस्लिम
पार्टी एम्आईएम् MIM

10. दि स्टेट्स मैन:-कम्युनिस्टपार्टी ऑफ़ इंडिया द्वारा संचालित

11. अमर उजाला के मालिक
अमर सिँह है

12. इंडिया न्यूज:- प्रबन्धक कार्तिकेय शर्मा
(जेसिका लाल हत्या के आरोपी मनु शर्मा का भाई), जिनके पिता विनोद शर्मा हरयाणा से काँग्रेस विधायक हैं।


13. स्टार टीवी ग्रुप(एबीपी न्यूज़):-सेन्ट पीटर पोंतिफिसिअल चर्च, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया।

स्टार न्यूज़ (एबीपी न्यूज़) सदा से ही भारत में हिंदू विरोधी रहा है,भारत में इसके मुख्य संपादक शाजी जमान हैं जो शुरू से ही हिंदू विरोधी रहे हैंl

आज तक न्यूज़:-क्रिश्चियन कॉउंसिल ऑफ़ लंदन,100% फंडिंग लंदन
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इस तरह से एक लंबी लिस्ट है जिससे ये पता चलता है की भारत की मीडिया भारतीय बिलकुल भी नहीं है और जब इनकी फंडिंग विदेश से होती है है तो भला भारत के बारे में कैसे सोच सकते हैं
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कृपया इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो के पास पहुंचाएँ
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Ramesh Bahadur Singh

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प्रतापगढ़ के 50 गांवों को मिला खुद की नदी का पानी



खुद की नदी? यह सुनकर चौंक जरूर गये होंगे और सोच रहे होंगे कि नदी भी कहीं खुद की हो सकती है। यह तो प्राकृतिक संपदा है, जिस पर सबका हक है। लेकिन फिर भी हम यही कहेंगे कि प्रतापगढ़ में बहने वाली बकुलाही नदी यहां के लोगों की अपनी नदी है।
http://dhunt.in/WcjJ
via Dailyhunt


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Ramesh Bahadur Singh

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True position
 
एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए, उजड़े वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये!

हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ??

यहाँ न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा !

भटकते भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज की रात बीता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे !

रात हुई तो जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे, उस पर एक उल्लू बैठा था।

वह जोर से चिल्लाने लगा।

हंसिनी ने हंस से कहा- अरे यहाँ तो रात में सो भी नहीं सकते।

ये उल्लू चिल्ला रहा है।

हंस ने फिर हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया है कि ये इलाका वीरान क्यूँ है ??

ऐसे उल्लू जिस इलाके में रहेंगे वो तो वीरान और उजड़ा रहेगा ही।

पेड़ पर बैठा उल्लू दोनों की बातें सुन रहा था।

सुबह हुई, उल्लू नीचे आया और उसने कहा कि हंस भाई, मेरी वजह से आपको रात में तकलीफ हुई, मुझे माफ़ करदो।

हंस ने कहा- कोई बात नही भैया, आपका धन्यवाद!

यह कहकर जैसे ही हंस अपनी हंसिनी को लेकर आगे बढ़ा

पीछे से उल्लू चिल्लाया, अरे हंस मेरी पत्नी को लेकर कहाँ जा रहे हो।

हंस चौंका- उसने कहा, आपकी पत्नी ??

अरे भाई, यह हंसिनी है, मेरी पत्नी है,मेरे साथ आई थी, मेरे साथ जा रही है!

उल्लू ने कहा- खामोश रहो, ये मेरी पत्नी है।

दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। पूरे इलाके के लोग एकत्र हो गये।

कई गावों की जनता बैठी। पंचायत बुलाई गयी।

पंचलोग भी आ गये!

बोले- भाई किस बात का विवाद है ??

लोगों ने बताया कि उल्लू कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है और हंस कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है!

लम्बी बैठक और पंचायत के बाद पंच लोग किनारे हो गये और कहा कि भाई बात तो यह सही है कि हंसिनी हंस की ही पत्नी है, लेकिन ये हंस और हंसिनी तो अभी थोड़ी देर में इस गाँव से चले जायेंगे।

हमारे बीच में तो उल्लू को ही रहना है।

इसलिए फैसला उल्लू के ही हक़ में ही सुनाना चाहिए!

फिर पंचों ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि सारे तथ्यों और सबूतों की जांच करने के बाद यह पंचायत इस नतीजे पर पहुंची है कि हंसिनी उल्लू की ही पत्नी है और हंस को तत्काल गाँव छोड़ने का हुक्म दिया जाता है!

यह सुनते ही हंस हैरान हो गया और रोने, चीखने और चिल्लाने लगा कि पंचायत ने गलत फैसला सुनाया।

उल्लू ने मेरी पत्नी ले ली!

रोते- चीखते जब वह आगे बढ़ने लगा तो उल्लू ने आवाज लगाई - ऐ मित्र हंस, रुको!

हंस ने रोते हुए कहा कि भैया, अब क्या करोगे ??

पत्नी तो तुमने ले ही ली, अब जान भी लोगे ?

उल्लू ने कहा- नहीं मित्र, ये हंसिनी आपकी पत्नी थी, है और रहेगी!

लेकिन कल रात जब मैं चिल्ला रहा था तो आपने अपनी पत्नी से कहा था कि यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ उल्लू रहता है!

मित्र, ये इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए नहीं है कि यहाँ उल्लू रहता है।

यह इलाका उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ पर ऐसे पंच रहते हैं जो उल्लुओं के हक़ में फैसला सुनाते हैं!

शायद 68 साल की आजादी के बाद भी हमारे देश की दुर्दशा का मूल कारण यही है कि हमने उम्मीदवार की योग्यता न देखते हुए, हमेशा ये हमारी जाति का है. ये हमारी पार्टी का है के आधार पर अपना फैसला उल्लुओं के ही पक्ष में सुनाया है, देश क़ी बदहाली और दुर्दशा के लिए कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार हैँ!

"कहानी" अच्छी लगे तो आगे भी बढ़ा दें...
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Ramesh Bahadur Singh

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:डायलाग से साभार ÷
अमेरिका के हाॅवर्ड विश्वविद्यालय से लेकर भारत के आई.आई.टी. तक में क्या कोई ऐसी शिक्षा दी जाती है कि छात्र की आंखों पर रूई रखकर पट्टी बांध दी जाए और उसे प्रकाश की किरण भी दिखाई न दे, फिर भी वो सामने रखी हर पुस्तक को पढ़ सकता हो ? है ना चैंकाने वाली बात ? पर इसी भारत में किसी हिमालय की कंद्रा में नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के गृहराज्य गुजरात के महानगर अहमदाबाद में यह चमत्कार आज साक्षात् हो रहा है। तीन हफ्ते पहले मुझे इस चमत्कार को देखने का सुअवसर मिला। मेरे साथ अनेक वरिष्ठ लोग और थे। हम सबको अहमदाबाद के हेमचंद्र आचार्य संस्कृत गुरूकुल में विद्यार्थियों की अद्भुत मेधाशक्तियों का प्रदर्शन देखने के लिए बुलाया गया था। निमंत्रण देने वालों के ऐसे दावे पर यकीन नहीं हो रहा था। पर, वे आश्वस्त थे कि अगर एक बार हम अहमदाबाद चले जाएं, तो हमारे सब संदेह स्वतः दूर हो जाएंगे और वही हुआ। छोटे-छोटे बच्चे इस गुरूकुल में आधुनिकता से कोसों दूर पारंपरिक गुरूकुल शिक्षा पा रहे हैं। पर उनकी मेधा शक्ति किसी भी महंगे पब्लिक स्कूल के बच्चों की मेधा शक्ति को बहुत पीछे छोड़ चुकी है।

आपको याद होगा पिछले दिनों सभी टी.वी. चैनलों ने एक छोटा प्यारा सा बच्चा दिखाया था, जिसे ‘गूगल चाइल्ड’ कहा गया। यह बच्चा स्टूडियो में हर सवाल के सेकेंडों में उत्तर देता था। जबकि उसकी आयु 10 वर्ष से भी कम थी। दुनिया हैरान थी उसके ज्ञान को देखकर। पर, किसी टीवी चैनल ने यह नहीं बताया कि ऐसी योग्यता उसमें इसी गुरूकुल से आयी है।

दूसरा नमूना, उस बच्चे का है, जिसे आप दुनिया के इतिहास की कोई भी तारीख पूछो, तो वह सवाल खत्म होने से पहले उस तारीख को क्या दिन था, ये बता देता है। इतनी जल्दी तो कोई आधुनिक कम्प्यूटर भी जवाब नहीं दे पाता। तीसरा बच्चा गणित के 50 मुश्किल सवाल मात्र ढ़ाई मिनट में हल कर देता है। यह विश्व रिकाॅर्ड है। ये सब बच्चे संस्कृत में वार्ता करते हैं, शास्त्रों का अध्ययन करते हैं, देशी गाय का दूध-घी खाते हैं। बाजारू सामानों से बचकर रहते हैं। यथासंभव प्राकृतिक जीवन जीते हैं और घुड़सवारी, ज्योतिष, शास्त्रीय संगीत, चित्रकला आदि विषयों का इन्हें अध्ययन कराया जाता है। इस गुरूकुल में मात्र 100 बच्चे हैं। पर उनको पढ़ाने के लिए 300 शिक्षक हैं। ये सब शिक्षक वैदिक पद्धति से पढ़ाते हैं। बच्चों की अभिरूचि अनुसार उनका पाठ्यक्रम तय किया जाता है। परीक्षा की कोई निर्धारित पद्धति नहीं है। पढ़कर निकलने के बाद कोई डिग्री भी नहीं मिलती। यहां पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे 15-16 वर्ष से कम आयु के हैं और लगभग सभी बच्चे अत्यंत संपन्न परिवारों के हैं। इसलिए उन्हें नौकरी की चिंता भी नहीं है, घर के लंबे-चैड़े कारोबार संभालने हैं। वैसे भी डिग्री लेने वालों को नौकरी कहां मिल रही हैं ? एक चपरासी की नौकरी के लिए 3.5 लाख पोस्ट ग्रेजुएट लोग आवेदन करते हैं। ये डिग्रियां तो अपना महत्व बहुत पहले खो चुकी हैं।

इसलिए इस गुरूकुल के संस्थापक उत्तम भाई ने ये फैसला किया कि उन्हें योग्य, संस्कारवान, मेधावी व देशभक्त युवा तैयार करने हैं। जो जिस भी क्षेत्र में जाएं, अपनी योग्यता का लोहा मनवा दें और आज यह हो रहा है। दर्शक इन बच्चों की बहुआयामी प्रतिभाओं को देखकर दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं।

खुद डिग्रीविहीन उत्तम भाई का कहना है कि उन्होंने सारा ज्ञान स्वाध्याय और अनुभव से अर्जित किया है। उन्हें लगा कि भारत की मौजूदा शिक्षा प्रणाली, जोकि मैकाले की देन है, भारत को गुलाम बनाने के लिए लागू की गई थी। इसीलिए भारत गुलाम बना और आज तक बना हुआ है। इस गुलामी की जंजीरें तब टूटेंगी, जब भारत का हर युवा प्राचीन गुरूकुल परंपरा से पढ़कर अपनी संस्कृति और अपनी परंपराओं पर गर्व करेगा। तब भारत फिर से विश्वगुरू बनेगा, आज की तरह कंगाल नहीं। उत्तम भाई चुनौती देते हैं कि भारत के 100 सबसे साधारण बच्चों को छांट लिया जाए और 10-10 की टोली बनाकर दुनिया के 10 सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में भेज दिया जाए। 10 छात्र उन्हें भी दे दिए जाएं। साल के आखिर में मुकाबला हो, अगर उत्तम भाई के गुरूकुल के बच्चे शेष दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के विद्यार्थियों के मुकाबले कई गुना ज्यादा मेधावी न हों, तो उनकी ‘‘गर्दन काट’’ दी जाय और अगर ये बच्चे सबसे ज़्यादा मेधावी निकले, तो भारत सरकार को चाहिए कि वो गुलाम बनाने वाले देश के इन सब स्कूलों को बंद कर दे और वैदिक पद्धति से चलने वाले गुरूकुलों की स्थापना करे।

उत्तम भाई और उनके अन्य साथियों के पास देश को सुखी और समृद्ध बनाने के ऐसे ही अनेक कालजयी प्रस्ताव हैं। जिन्हें अपने-अपने स्तर पर प्रयोग करके सिद्ध किया जा चुका है। पर, उन्हें चिंता है कि आधुनिक मीडिया, लोकतंत्र की नौटंकी, न्यायपालिका का आडंबर और तथाकथित आधुनिक शिक्षा इस विचार को पनपने नहीं देंगे। क्योंकि ये सारे ढांचे औपनिवेशिक भारत को झूठी आजादी देकर गुलाम बनाए रखने के लिए स्थापित किए गए थे। पर, वे उत्साहित हैं यह देखकर कि हम जैसे अनेकों लोग, जो उनके गुरूकुल को देखकर आ रहे हैं, उन सबका विश्वास ऐसे विचारों की तरफ दृढ़ होता जा रहा है। समय की देर है, कभी भी ज्वालामुखी फट सकता है।

301 / ए, 37-38-39 अंसल भवन,
वा णिज्यिक परिसर डॉ.. मुखर्जी नगर, दिल्ली - 110009
फोन: 011-27652829,
फैक्स: 27654588
Email :
dialogueindia.in@gmail.com

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Ramesh Bahadur Singh

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Ramesh Bahadur Singh

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लाइक या कमेन्ट ना करे पर शेयर ज़रूर करे और भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक छोटी सी लड़ाई में मेरा साथ दे !

कल मैं इस बस में दिल्ली से जयपुर के लिए सफ़र कर रहा था | ड्राईवर ने बस हाईवे पर शाहजहाँपुर पे खुशबु होटल पर खाने के लिए रोकी | वहां मैंने देखा की एक बुज़ुर्ग ने जो की देखने में बहुत ही दरिद्र था उसने एक आलू का पराठा आर्डर किया जिसका मूल्य 20 रुपये था | कुछ ही देर में वेटर दो पराठे और थोडा रायता ले कर आया और टेबल पे रख दिया !बुज़ुर्ग ने कहा की मुझे एक ही चाहिए तो वेटर ने कहा 20 में दो मिलते है उसके बाद वेटर एक छोले की प्लेट लाया और टेबल पे रख दी ! बुज़ुर्ग ने कहा की नहीं चाहिए तो वेटर ने कहा की पराठे के साथ फ्री है पर बुज़ुर्ग ने वो छोले नहीं खाये ! खाना ख़त्म करने पर जब बुज़ुर्ग पैसे चुकाने गया तो गल्ले पर बैठे होटल मालिक ने उन से 140 रुपये मांगे ! हिसाब यूँ बताया गया की 40 रुपये दो पराठे के 20 रुपये रायता के और 80 रुपये छोले के ! बुज़ुर्ग के विरोध करने पर होटल मालिक ने उसे पिटाई करने की धमकी दी ! होटल मालिक के पास बस का कंडक्टर भी बैठा था जो ये सब देख कर हंस रहा था ! जिसकी फ़ोटो भी मैंने पोस्ट की है ! उस बुज़ुर्ग ने उस से शिकायत करी की आपने कैसे होटल पे बस रोकी है तो कंडक्टर ने कहा की यहाँ तो ऐसे ही होगा तूने खाया है तो चुकाना ही होगा अन्यथा हम तुझे यहाँ छोड़ जाएंगे ! बुज़ुर्ग ने गीली आँखों से 140 रुपये चुकाए और कहा की छोले पैक कर दो इस पर मेरे सामने वेटर छोले को वापिस रसोई में ले जाकर और पड़े छोले के बर्तन में मिला दिया और कहा की आपके छोले तो कूड़े में फेंक दिए अब ! और सारे कर्मचारी और होटल मालिक व कंडक्टर हंसने लगे ! ठीक इसी प्रकार और भी यात्रियों के साथ हुआ और सभी ने बस छूटने की जल्दी में गलत रकम चुकाई !

बस में चढ़ने पर मैंने कंडक्टर से बहस की तो उसने कहा हो बन सके कर लो तो मैंने बस में जो शिकायत एवं सुझाव के मोबाइल नंबर्स लिखे थे उन पे कॉल करने की सोची पर जैसा की आप पोस्ट की गई फ़ोटो में देख सकते है की एक भी नंबर पूरा देखने लायक नहीं है ! रोडवेज के कर्मचारियों द्वारा सभी नंबर्स में से कुछ मिटा दिए गए है ताकि कोई भी इनकी शिकायत ना कर सके !

दोस्तों यह तो एक उदाहरण मात्र है ऐसे किस्से हज़ारो की संख्या में पुरे राज्य और देश में रोडवेज कर्मचारी और होटल मालिकों की मिलीभगत से हो रहे है ! हम सब इसे एक मामूली सी घटना मानकर अनदेखा कर देते है पर दोस्तों 140 रुपये किसी गरीब रिक्शा चालक की सारे दिन की मेहनत होती है जिस पर उसका पूरा परिवार आश्रित होता है ! हो सकता है की आपलोगो के लिए इस घटना का कोई महत्व ना हो पर मुझे तो भीतर तक झकझोर गई है !

मैं आशीष कुमार शर्मा निवासी रतनगढ़ राजस्थान आप सभी आदरणीय नागरिकों से विनम्र अपील करता हूँ की इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करे और किसी एक भी निकृष्ट रोडवेज कर्मचारी और होटल मालिक का हृदय परिवर्तन करने में अपना छोटा सा योगदान अवश्य दे !

पोस्ट में कुछ बड़े लोगो को टैग कर रहा हूँ ताकि किसी बड़े सरकारी अधिकारी या नेता या मंत्री तक ये पोस्ट पहुंच सके और कोई तो कुछ सकारात्मक प्रयास करे !

किसी को असुविधा हुई हो तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ !

"भारत माता की जय" (मेरे पास यह पोस्ट डा·सुधीर व्यास जी के सौजन्य से मिली है जोकि जयपुर सिविल अस्पताल में ह्दय रोग विशेषज्ञ है)

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Ramesh Bahadur Singh

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Real path
 
'श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज' के अनुसार-
गीता के आकर्षण निम्नलिखित प्रश्न हैं, जिनका आशय आधुनिक समाज खो चुका है। वे इस प्रकार हैं, जिन्हे, 'यथार्थ गीता' में आप पायेंगे-

१. श्रीकृष्ण-
एक योगेश्वर थे।

२. सत्य-
आत्मा ही सत्य है।

३. सनातन-
आत्मा सनातन है, परमात्मा सनातन है।

४. सनातन धर्म-
परमात्मा से मिलाने वाली क्रिया है।

५. युद्ध-
दैवी और आसुरी सम्पदाओं का संघर्ष 'युद्ध' है, ये अन्त:करण की दो प्रवृत्तियाँ हैं। इन दोनों का मिटना परिणाम है।

६. युद्ध स्थान-
यह मानव शरीर और मन सहित इन्द्रियों का समूह युद्धस्थल है।

७. ज्ञान-
परमात्मा की प्रत्यक्ष जानकारी 'ज्ञान' है।

८. योग-
संसार के संयोग वियोग से रहित अव्यक्त ब्रह्म के के मिलन का नाम 'योग' है।

९. ज्ञानयोग-
आराधना ही कर्म है। अपने पपर निर्भर होकर कर्म में प्रवृत्त होना 'ज्ञानयोग'है।

१०. निष्काम कर्मयोग-
इष्ट पर निर्भर होकर समर्पण के साथ कर्म में प्रवृत्त होना 'निष्काम कर्मयोग' है।

११. श्रीकृष्ण ने किस सत्य को बताया ?
श्रीकृष्ण ने उसी सत्य को बताया, जिसको तत्त्वदर्शीयों ने पहले देख लिया था और आगे भी देखेंगे।

१२. यज्ञ
साधना की विधि-विशेष का नाम यज्ञ है।

१३. कर्म-
यज्ञ को कार्य रूप देना ही 'कर्म' है।

१४. वर्ण-
आराधना की एक ही विधि, जिसका नाम कर्म है। जिसको चार श्रेणियों में बाँटा है, वही चार वर्ण हैं। एक ही साधक का ऊँचा-नीचा स्तर है, न कि जाति।

१५. वर्णसंकर-
परमात्म-पथ से च्युत होना, साधन में भ्रम उत्पन्न हो जाना वर्णसंकर है।

१६. मनुष्य की श्रेणी-
अन्:करण के स्वभावसके अनुसार मनुष्य दो प्रकार का होता है- एक देवताओं जैसा, दूसरा असुररों-जैसा यही मनुष्य की दो जातियाँ हैं, जो स्वभाव द्वारा निर्धारित हैं और यह स्वभाव घटता बढ़ता है।

१७. देवता- हृदय-देश में परमदेव का देवत्व अर्जित करानेवाले गुणों का समूह है। बाह्य देवताओं की पूजा मूढ़बूद्धि की देन है।

१८. अवतार- व्यक्ति के हृदय में होता है, बाहर नहीं।

१९. विराट दर्शन-
योगी के हृदय में ईश्वर द्वारा दी गयी अनुभूति है। भगवान साधक में दृष्टि बन कर खड़े हों, तभी दिखायी पड़ते हैं।

२०. पूजनीव देव 'इष्ट'-
एक मात्र परात्पर ब्रह्म ही पूजनी देव है। उसे खोजने का स्थान हृदय-देश है। उसकी प्राप्ति का श्रोत उसी अव्यक्त स्वरूप में स्थित 'प्राप्तिवाले महापुरुष' के द्वारा है।

अब इनमें से योगेश्वर का स्वरूप समझने के लिये अध्याय तीन तक आप को पढ़ना होगा, और अध्याय तेरह तक आप स्पषट समझने लगेंगे की श्रीकृष्ण एक योगी थे।
अध्याय दो से ही सत्य निखर जायेगा। सनातन और सत्य एक दूसरे के पुरक हैं, यह अध्याय दो से ही स्पष्ट होगा, वै से पुर्तिपर्यन्त चलेगा। युद्ध अध्याय चार तक स्ष्ट होने लगेगा, ग्यारह तक संशय निर्मुल हो जायेगा; वैसे अध्याय सोलह तक देखना चाहिये ।
'युद्धस्थल' के लिये अध्याय तेरह बार-बार देखें।

🌺 श्री सद्गुरुवे नमः ।

यथार्थ गीता ( श्रीमदभगवद्गीता ) संपूर्ण मानवता हेतु परम प्रभु का वह वरदान हॆ, जिसे मनुष्य जब चाहे अपनी आत्मिक क्षुधा की तृप्ति एवं परमलक्ष्य के ध्येय को प्राप्त करने के निमित्त निश्चित पथ मानकर अनुसरण कर सकता हॆ । संसार में जब कभी भी जीवात्मा अपनी अंशी से मिलने को व्याकुल होती हॆ तो केवल सद्गुरु शरण एवं उनसे जागृत होने वाला गीतोक्त पथ ही जीव का उद्धार करने में सक्षम होता हॆ अन्य कोई मार्ग नहीं।

जब यही सत्य हॆ, क्योंकि ऎसा ही हमारे आदि ऋषियों ने पाया एवं ग्रन्थों में गायन किया, तब क्यों मनुष्य इस अविनाशी योग के अतिरिक्त अन्य अन्य उपायों का सहारा लेती हॆ, जिसे गीता में योगेश्वर ने अज्ञान कहा । स्पष्टत अब भी अज्ञान जीवित हॆ, आगे भी यह संभावना बनी रहेगी, क्योंकि जब तक इस अज्ञानी जीव को इसके निदान का उपाय किसी भी माध्यम से न मिल जाए, यह केवल गीता ज्ञान द्वारा ही संभव हॆ ।

प्रतिदिन संसार में प्रत्येक देशों की सरकारें अपने कार्यों एवं कार्य प्रणाली को सुचारू रुप से चलाने के लिए अनेकों कानूनो को बनाने एवं मानव के लिए उपयोगी होने के कारण उन्हें मानने की अनिवार्यता निश्चित करती रही हॆ । पर आश्चर्य हॆ कि परमात्मा ने जिस सृष्टि की रचना की , उसके नियम सिद्धान्त गीता द्वारा निश्चित किए, यह भी बताया कि जीवात्मा का उद्देश्य क्या? जगत का उपयोग कॆसे ? मानवतन की सार्थकता क्या ? मनुष्य का परमलक्ष्य क्या ? जगत मे मित्र एवं शत्रु कॊन. आदि संपूर्ण मार्ग जो सभी दो हाथ एवं दो पॆर वाले मनुष्यों हेतु हॆ । इसलिए ही गीता मानव मात्र का स्वाभाविक धर्मशास्त्र हॆ जो सभी के लिए अनुशीलन करने योग्य हॆ ॐ।
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Ramesh Bahadur Singh

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कलाम साहेब के बाद एक ओर मुस्लिम आदर्श....
एक विधायक ऐसा भी
फटा पायजामा ,पुरानी अम्बेस्डर कार जिसका पेंट जगह-जगह से उखड़ा हुआ , हाथ में 750 रूपये वाला चायना मोबाईल , सरकार द्वारा दिया गया एक पुलिस वाला जो ड्यूटी निभाने का बस, फर्ज अदा करता है उसे भी पता है, इस विधायक की तरफ कोई ऊँगली उठाना तो दूर ,ताकता भी नहीं , और एक ड्राईवर बस यही इनका काफिला होता है ।
रास्ते में चाय पीने का मन किया तो ,किसी झोपड़ी वाली दूकान के सामने गाडी खड़ी हो जाती है । जो चाहे मिल ले ,कभी समय लेने की जरुरत नहीं । सरकारी धन , मंदिर मस्जिद ,क्षेत्र के विकास में जाता है ,कोई कमीशन नहीं । खोजने पर भी इनका कोई दुश्मन नहीं मिलेंगा बिलकुल बिंदास जिंदगी ,भौतिकता से काफी दूर । अब आप सोच रहे है ,इनका जल्दी से नाम बता दो तो लो भाई किस बात की देर , ये है--- 73 वर्षीय निजामाबाद ,आजमगढ़ के सपा विधायक "श्री आलमबदी साहब" 1953 में साईंस मैथ्स से 12 वीं पास किए थे , तब से जन सेवा को ही इन्होंने अपना जीवन बना लिया है आज तक इनके ऊपर कोई दाग नहीं लगा है किसी भी प्रकार का कोई आपराधिक मुकदमें नहीं , एक बैंक खाता है 9 हजार रूपये उसमें जमा पूंजी बस ।
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