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Journalist Zuber Ahmed Khan
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इस्लामिक लॉ के हिसाब से तीन चेतावनियां तो हो गई अब भारत को सचेत होना पड़ेगा और डोकलाम पे कोई निर्णय लेना ही होगा. हलाके चीन एक कम्युनिस्ट देश हे वहां किसी भी मज़हब को नहीं माना जाता हे लेकिन तीन चेतावनी दे के कोई काम करना सिर्फ इस्लामिक नियम का हिस्सा ही नहीं हे बल्कि कोई भी इंसानी हक़ की हिमायत करने वाला इस सिद्धांत को मनाता हे. ताके सामने वाले को अपने आप को सुधारने और सँभालने का पूरा मौका दिया जाय. हां जो भारत के आतंकवादी हे उनकी बात अलग हे वो तो सूवर के झुंड की तरह ४०-५० की तादात में आते हे और बगैर चेतावनी अकेले निहत्ते इंसान को पीट पीट के मार डालते हे. लेकिन तीन चेतावनी का सिद्धांत कोई भी अमन पसंद देश या अमन पसंद इंसान निभाता हे.
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After looking the elections and the environment in Gujarat, an old adage has been remembered, in which the Hindu terrorists fully believe that “Everything is fair in love and war” generally the kind of filth, abuse extreme meagre language used for…
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जब मोदी प्रधान मंत्री की आकांक्षाएं ले कर दिल्ली की सल्तनत पे काबिज़ होने का सपना देख रहा था उसी समय उसने तब के प्रधान मंत्री और मैत्रीपूर्ण पडोसी देश पाकिस्तान के प्रधान मंत्री को भी राजनीती के गंदे दलदल में घसीटने की कोशिश की थी. मोदी अपनी चुनावी सभाओ में पाक के प्रधान मंत्री श्री शरीफ साहब पे लांछन लगाता है के नवाज़ शरीफ ने मेरे देश के प्रधान मंत्री का अपमान किया उन्होंने भारत के प्रधान मंत्री की तुलना एक देहाती औरत से की फिर इस पत्रकार ने तुरत अपने पाक पत्रकारों से ज़्यादा जानकारी ली तभी उन्होंने पाक प्रधान मंत्री का किया हुआ इंटरव्यू इस पत्रकार को इस सन्देश के साथ भेज दिया के हमारे प्रधान मंत्री सभ्यता पे यकीन रखते है और सभ्य भाषा का प्रयोग करते है. ख़ास कर के अगर ये भाषा किसी देश के प्रधान मंत्री के लिए की जाए. आगे उन्होंने लिखा ऐसी असभ्य भाषा किसी आतंकी, फरेबी, झूठे की हो सकती है जो चुनाव जितने के लिए सारी मर्यादा भूल जाए और भूल जाए के विदेशी उच्च गरिमा वाले व्यक्तित्व को कैसे सम्भोदित किया जाना चाहिए.
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मोहब्बत और जंग में सब नजाइज़ हो रहा है
गुजरात में चुनाव और उसका माहौल देखते हुए एक पुरानी कहावत याद आ गई जिसपे हिन्दू आतंकवादी पूरी तरह से यकीन रखते है  " मोहब्बत और जंग में सब जाइज़ है " आम तौर पे जिस तरह की गाली गलौच ओछी भाषा का इस्तेमाल एक दुसरे के ऊपर कीचड उड़ाना .  झूठे आरोप प्रत्यारोप ये अब ...
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Certainly this Journalist would not consider him Prime Minister of India rather this Journalist consider him as the Head of Hindu State (Hindu Rashtra). Two main reasons this Journalist would like to clarify to makes his statement more strong and stiff. Firstly he is not elected representative of the Public but imposed through EVM. Secondly he closed his eyes on all sort of atrocities on Muslims, Christians, Dalits but when any Terrorists killed in attack entire cabinet started crying against the killing. Muslims are killed not by the Terrorists but now Khakee Terrorists (Police) are also killing them. Three days back two teenage 20 and 22 years killed in the name of encounter by Khakee Terrorists (Police) at Alwar Rajasthan one of the part captured by Hindu State Terrorists. Khakee terrorists did not conduct the post-mortem on the deceased or handover the cadaver to the family members for the last rites.

निश्चित रूप से यह पत्रकार इस नामुराद को भारत भारत के प्रधान मंत्री के रूप में स्वीकार नहीं करता है बल्कि इस पत्रकार ने उसे हिंदू स्टेट (हिन्दू राष्ट्र ) के प्रमुख के रूप में मानता है। दो मुख्य कारण यह पत्रकार अपने बयान को अधिक मजबूत और कठोर बनाने के लिए स्पष्ट करना चाहते हैं। सबसे पहले वह जनता के दुवारा चूना हुआ प्रतिनिधि नहीं है बल्कि ईवीएम के माध्यम से लाया गया और लादा हुआ प्रतिनिधि है। दूसरे, उसने मुसलमानों, ईसाइयों, दलितों पर सभी तरह के अत्याचारों पर अपनी आंखें बंद कर दीं, लेकिन जब कोई भी आतंकवादी मारा गया तो पूरे कैबिनेट ने हत्या के खिलाफ रोना शुरू कर दिया। मुसलमानों को न सिर्फ आतंकवादियों द्वारा मार दिया जाता है, बल्कि अब खाकी आतंकवादी (पुलिस) भी उन्हें मार रहे हैं। तीन दिन पहले अलवर राजस्थान हिंदू स्टेट (के आतंकवादीओ दोवारा कब्ज़ा किया हुआ एक हिस्सा) में खाकी आतंकवादियों (पुलिस) द्वारा मुठभेड़ के नाम पर दो २० और २२ साल के किशोरों की हत्या कर दी। इतना ही नहीं खाकी आतंकवादीओ ने शव का प्रोस्टमॉर्टम नहीं होने दिया और न ही शव को अंतिम संस्कार के लिए परिवार वालो को सौपा।
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Updated December 10, 2017 A paramilitary soldier killed four of his comrades and injured another inside a camp in central India, an official said on Sunday. The trooper turned his gun on his fellow soldiers at around 5pm local time on Saturday in Bijapur…
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आतंकवादी के समर्थन में अकेले खड़ा रह गया
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रम्प का इजरायल की राजधानी के
रूप में यरूशलेम को मान्यता देना का निर्णय और तेलअवीव से जेरूसलम को अमेरिकी दूतावास
को स्थानांतरित करने का निर्णय उनके मानसिक दिवालियापन को दर्शाता है। यह निर्णय फिलिस्तीन
नागरिकों को ...
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Latest decision of American President Mr. Donald Trump to recognise Jerusalem as the Capital of Israel and relocate American Embassy from Tel Aviv to Jerusalem shows the mental bankruptcy of Mr. Trump.  The decision is like lunatic asylum of Palestine…
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वो भी रावण का षड्यंत्र था जिसमे उसके लंगूर पत्रकारो ने हवा दी थी. शरीफ साहब ने ऐसा कुछ भी नहीं बोला था. उसी समय सारा मामला साफ़ हो चूका था और इस पत्रकार ने कहा था ये चुनावी षड्यंत्र का हिस्सा है. फिर इस पत्रकार ने डौन और पाक के दीगर पत्रकारों से समूची और विस्तृत जानकारी ले कर भारत के लंगूर पत्रकारों को बे नकाब कर दिया था. जो इसका मकसद ही है. जब जब ये लंगूर पत्रकार जनता के मन को झूटी खबरों के साथ भ्रमित करेंगे या हिन्दू आतंकवादी अपनी नीच करतूत से मुस्लिम या क्रिस्टी समाज को बदनाम करेंगे ये पत्रकार अंतराष्ट्रीय समाचारो का ज़खीरा ले के उनके सामने खड़ा होगा. टाइम्स ऑफ़ इंडिया और नव भारत टाइम्स से मेरे किये हुए वक्तव की कॉपी मंगवा सकते हे. आप लगता है बोहोत लेट लतीफी में जी रहे हे. नहीं तो जो बात साफ़ हो चुकी है उसपे फिर से कमेंट नहीं करते.
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कांग्रेस नहीं बीजेपी सत्ता की मलाई खाने के लिए गद्दारो आतंकवादीओ और पाकिस्तान से मदद लेती है. कांग्रेस के १० सालो के शासन में मनमोहन कभी भी पाक नहीं गए. दूसरी बात एक भी कांग्रेस का कार्यकर्त्ता ध्रुव सक्सेना जैसा बता दो जो आई.इस.आई. के लिए काम करता हो और सेना की ख़ुफ़िया जानकारी पाक को मोहिय्या करता हो. जितने भी १५-२० पकडे गए उनका सम्बन्ध या तो विध्यापीठ की आतंकी संघटन ए.बी.वि.पि. से था या भाजपा से. फिर मोदी जी तो इतने बड़े पाक भक्त है के बगैर बुलावे के ही पाक पहुँच गए. कोई भी आधिकारिक दौरा नहीं था अफगानिस्तान के रास्ते सीधे गौ मॉस की बरियानी खाने शरीफ के बंगले पे पहुँच गए. तीसरी बात पाक का नाम लिए बगैर बीजेपी की कोई भी चुनावी रैली पूरी नहीं होती. एक तो चुनाव बीजेपी ऐसा बता दे के बगैर पाक का नाम लिए चुनाव जीता हो. कब तक पाक की बैसाखी ले कर चुनाव जीतते रहोगे कभी तो अपने बलबूते पे जीतो.
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