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Santosh Kumar Govan (गोवन)
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शोधार्थी, हिंदी विभाग, गोवा विश्वविद्यालय
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देवनागरी लिपि में भारत की भाषाओं को लिखने की अद्भुत क्षमता
आजकल देश के दक्षिण भागों में हिंदी भाषा के विरोध में माहौल तैयार किया जा रहा है। जिसका कारण कुछ छोटी-छोटी बातों को आधार बना कर किया जा रहा है। साइनेज बोर्ड को देवनागरी भाषा में न लिखा जाए। आप को जानकारी होगी कि दक्षिण भारतीय भाषाओं विशेष कर कन्नड, तेलुगु और...
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शिक्षा का महत्व शिक्षा एक
व्यापक शब्द है जो अपने आप में बहुत बड़ा अर्थ समाहित किए हुए है। इसकी व्यापकता
की पहुंच जीवन के प्रत्येक कोने में हैं। शिक्षा जीवन को ऊपर उठाने का सबसे
बेहतरीन साधन है। शिक्षा का अर्थ होता है सीखने और सिखाने की प्रक्रिया। यह ‘शिक्ष्...
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विश्वविख्यात पहलवान नरसिंह यादव के साथ धोखा क्यों?
क्या थी उसकी गलती ? क्यों उसे डोपिंग में फंसाया? क्यों एक उभरते होनहार का, निर्दयता से गला दबाया। क्या उसने अपनी काबीलियत साबित कर दी तुमसे बेहतर क्यों उसके दुश्मनों ? देश के पुत्र को फंसाया। राष्ट्रकुल के अखाड़े में  स्वर्ण से भारत मां का मान बढ़या दक्षेस ...
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अपने देश में विरोधी संघर्ष
अपने ही देश में  सफलता के लिए करने पड़ते हैं विरोधी संघर्ष उन लोगों से  जो अपने देश के लिए  भलाई के काम करने के पदों पर बैठे हैं, पैदा होने के बाद, जब बच्चा बालवाड़ी जाना शुरू करता है सभी से शुरू हो जाता है संघर्ष पढ़ना, लिखना, सीखना आभाव में शिक्षक और किता...
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मुझे कुछ महत्त्वपूर्ण लेख निकालने पड़े।
कहते शोध का तात्पर्य नई खोज और नए तरीकों को अपनाना है किंतु नियमों को पूर्ण करने के लिए शोध के सिद्धांत से समझौता करना पड़ता है। आगे नहीं बोल सकता क्यों कि समझाना मुश्किल है.......................................................................................
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मुझे इस उत्पाद के बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है कि इसका ऑफलाइन प्रयोग कैसे करेंगे किंतु गुगल का विश्वास है कि यह उपयोगी और उपभोक्ता के लिए लाभप्रद होगा।
Google Docs Offline
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मित्र पर कविता
      मित्र जिन्हें हम मित्र समझे हैं,                               बहुत खामोश रहते हैं, मालूम नहीं वे! खुश या नाराज़ होते हैं, हम तो अपनों को शुभ प्रभात कहते हैं।
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Santosh Kumar Govan (गोवन) commented on a post on Blogger.
धन्यवाद सर, बहुत खुब लिखा है। यह गंदगी भारतीयों के खुन में है। कभी किसी वस्तु को निरपेक्ष और वैज्ञानिक दृष्टि से नहीं देखते। कबीर दास, राजाराम मोहन राय, विवेका नंद और प्रेमचंद  ने भारतीयों को आइना दिखाए हैं किंतु ये चालाक-मूर्ख उसे भी नहीं देख पाते। सुंदर और उपयोगी व्यंग्य पढ़ने को मिलता रहे यही आशा करते है।
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