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kamal bhatt
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तू ज़ोर दलीलों पर ना दे बस कह दे किसे कह दूं खुदा
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धूप
तुम कपड़े सुखाने छत पे  जाना साथ ले जाना चादरें और रजाई मत ले जाना तकिया नमकीन सी खुशबू , कब कौन पहचान ले फर्स्ट फ्लोर पे रहने वाले अगरबत्तियां जलाते हैं दिन में रूह को सीलन लग गई है पचमंजली ईमारत के तहखाने में रहते हुए मैं इस मई घर जाऊँगा और ले आऊंगा तुम्हा...
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धूप
तुम कपड़े सुखाने छत पे  जाना  साथ ले जाना चादरें और रजाई  मत ले जाना तकिया  नमकीन सी खुशबू , कब कौन पहचान ले  फर्स्ट फ्लोर पे रहने वाले  अगरबत्तियां जलाते हैं दिन में  रूह को सीलन लग गई है  पचमंजली ईमारत के तहखाने में रहते हुए  मैं इस मई घर जाऊँगा  और ले आऊं...
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जिन्हे उड़ाया करते थे प्लेन बनाके छत से पुराने पैम्पलेट में छपे हुए छात्र संघ के नेता मिलते हैं उड़ाते हुए अब किसी और की पतंगे वो कैसा घर था की जिसमे पांचवीं मंजिल भी थी और फिर एक आँगन भी मौजूद था किसी रोज एक गुसलखाने की छत ही उठाकर बदल दिया था ठिकाना नलके का...
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अलमोड़ा की जलेबी’
१) यूं  गुड़गुड़ाए बैठे हो महल्ले की छत में, दूर तक कोहरा निकलता है।  हुक्के के हिस्से की सुबहें अब सिगरेट की खाक छानती हैं । २)  ‘बरेली की बर्फ़ी’ सा कोई सस्ता उपन्यास लिखा कभी तो  तुम्हारी क़सम उसका नाम ‘अलमोड़ा की जलेबी’ रखूँगा ! ३)  O मेट्रो में सीट पान...
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तुमने भेजी हैं जो   फैज़ की गजलें  गुलजार की त्रिवेणियाँ  और पॉश की कवितायेँ  दब चुके हैं  वव्हाट्सप्प की चैट हिस्टरी में | उन्हें ढूढ़ना कुछ ऐसा है जैसे तुम्हारी मुस्कराहट से छानना शिकायतें सागर से निकाल लाना कागज़ की कश्तियाँ माना के कुछ भी नामुमकिन तो नहीं ...
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इतना सा पानी
मेरी है . हमारी है, सारी दुनिया प्यारी है खुद में खुद की पूरी की पूरी हिस्सेदारी है । छतरी के किनारे हैं, बारिशों के धारे हैं, इतना सा पानी या फिर प्यासे हम तुम्हारे हैं । ............ ऊपर चादर नीली, नीचे खाली है गुफ़ा दुनिया दो का पहाड़ा , भूलो तो जरा । देखी...
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रेलगाड़ी
१)कमर मे स्वेटर बांध   कुछ मील कड़ी
धूप में मट्टी के टीलों के
इस ओर पतझड़ के पेड़ों के नीचे   छितरी हुई छांव के
नीचे पानी की आखिरी दो
घूंट बोतल में बचाए हुए एक पैदल सफ़र का
बकाया याद है । मैने जवाब में लिखा
तो था कि जिन्दगी ठहर सी गई
है पर उसे शायद , लगता है ठी...
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रेलगाड़ी
१)कमर मे स्वेटर बांध   कुछ मील कड़ी धूप में मट्टी के टीलों के इस ओर पतझड़ के पेड़ों के नीचे  छितरी हुई छांव के नीचे पानी की आखिरी दो घूंट बोतल में बचाए हुए एक पैदल सफ़र का बकाया याद है । मैने जवाब में लिखा तो था कि जिन्दगी ठहर सी गई है पर उसे शायद, लगता है ठीक ...
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रेलगाड़ी
१)कमर मे स्वेटर बांध   कुछ मील कड़ी
धूप में मट्टी के टीलों के
इस ओर पतझड़ के पेड़ों के नीचे   छितरी हुई छांव के
नीचे पानी की आखिरी दो
घूंट बोतल में बचाए हुए एक पैदल सफ़र का
बकाया याद है । मैने जवाब में लिखा
तो था कि जिन्दगी ठहर सी गई
है पर उसे शायद , लगता है ठी...
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रेलगाड़ी
1)ट्रेन जब कभी किसी मुड़े हुए ट्रैक पे खुद को पलट के देखती है, सीटी बजाती है ! C1 की विंडो सीट पे कहीं तुम तो नहीं ? 2)यही हासिल-ए-मुलाकात रह गया तुम सवा हो गई मैं पौना रह गया !! 3)  कमर मे स्वेटर बांध   कुछ मील कड़ी धूप में मट्टी के टीलों के इस ओर पतझड़ के पे...
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