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Himanshu Kumar Pandey
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"बना कर फकीरों का हम भेष ग़ालिब / तमाशाए अहले करम देखते हैं।"
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कारगर है! मुफ़्त की अच्छी सुविधा है, आजमाईये।
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डायरी के कुछ पृष्ठ
[message] डायरी के पन्ने ब्लॉग पर डायरी लिखने की आदत बचपन से है। नियमित-अनियमित डायरी लिखी जाती रही। यद्यपि इनमें बहुत कुछ व्यक्तिगत है, परन्तु प्रारम्भिक वर्षों की डायरियों के कुछ पन्ने मैंने सहजने के लिए ब्लॉग पर लिख देना श्रेयस्कर समझा, चूँकि ब्लॉग भी एक...
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सच्चा लहरी : तीन
तेरे चारों ओर वही कर रहा भ्रमण है खुले द्वार हों तो प्रविष्ट होता तत्क्षण है  उसकी बदली उमड़ घुमड़ रस बरसाती है जन्म-जन्म की रीती झोली भर जाती है। होना हो सो हो, वह चाहे जैसे खेले उसका मन, दे सुला गोद में चाहे ले ले  करो समर्पण कुछ न कभीं भी उससे माँगो बस उसक...
By Himanshu Kumar Pandey
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pankil.ramyantar.com
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दिन पर दिन बीतते गए हा! मेरे प्राण बहुत बरसे हैं..(गीतांजलि का भावानुवाद)
Geetanjali : Tagore The rain has held back for days and days,  my God, in my arid heart.  The horizon is fiercely naked-not the thin- nest cover of a soft cloud,  not the vaguest hint of a distant cool shower.  Send thy angry storm, dark with death,  if it ...
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कविता : आशा
सुहृद! मत देखो- मेरी शिथिल मंद गति, खारा पानी आँखों का मेरे, देखो- अन्तर प्रवहित उद्दाम सिन्धु की धार और हिय-गह्वर का मधु प्यार। मीत! मत उलझो- यह जो उर का पत्र पीत इसमें ही विलसित नव वसंत अभिलषित और मत सहमो- देख हठी जड़ प्रस्तर इससे ही उज्ज्वल जीवन जल निःसृत...
कविता : आशा
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blog.ramyantar.com
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कविता: बादल तुम आना
विलस रहा भर व्योम सोम मन तड़प रहा यह देख चांदनी विरह अश्रु छुप जाँय, छुपाना बादल तुम आना ।। 1 ।। झुलस रहा तृण-पात और कुम्हलाया-सा मृदु गात धरा दग्ध, संतप्त हृदय की तृषा बुझाना बादल तुम आना।। 2 ।।
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