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एक शुरुआत लोग कहते है तरकी कर, दोस्त कहते है मजे़ कर। गुरु कहे कुछ भी कर ,मगर सही तरीके से कर । कोई कहे प्यार कर ,तो कोई कहे इंतजार कर। कोई कहे ये कर तो कोई कहे बो कर। पर मेरा दिल कहता है ,कि एक नई शुरुआत कर। भूल जा दुनिया “और … Continue reading एक शुरुआत…

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नाच रहा है मोर हो गया है भोर, वर्षा हुई घनघोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा है मोर| बयार चल रही चारों ओर, तृप्त हुआ अवनी का एक-एक छोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा है मोर| उर में हर्ष नहीं है थोर, दादुर मचा रहे हैं शोर; बाँधे प्रीति की डोर, नाच रहा ……

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तनहाई की महफ़िल में मुस्कान नहीं सीखा नाजुक फूलों सा कभी मुरझाना नहीं सीखा टूटा हूँ बहुत लेकिन गिर-गिर के सम्भला हूँ कैसी भी हो राह मगर रुक जाना नहीं सीखा भूल गए वो लोग जिनका साथ दिया हर पल उनकी तरह मैंने अहसान जताना नहीं सीखा कड़वा सच बोलता हूँ भले नफरत…

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याद आ रही बचपन की गाँव के उन पलों की नही भा रही हवा मुझे शहर के जलजलों की सरसों के खेतों में भाग-भाग कर पतंग लूटना पहिया चलाने वाले दोस्तों का साथ छूटना छुपा छुपाई का खेल लम्बी कूद,पेड़ों पर चढ़ना यारी ऐसी थी हमारी सुबह दोस्ती शाम को लड़ना गाँव की सुहानी हवा…

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महफ़िल सजा ली यारों की, तो हुई बदनामी बगिया खिला ली बहारों की, तो हुई बदनामी यह कैसा समाज, जो बदनाम करता फिरता है? मदद कर दी बेसहारों की, तो हुई बदनामी। किसी पे दिल अगर ये मर लिया, तो हुई बदनामी बाँहों में किसी को भर लिया, तो हुई बदनामी। बदनामी के दौर में…

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दृष्टिदोष समझा नहीं किसी ने, समझेगा उस दिन जब मैं दुनियाँ छोर चला जाऊँगा ! खोजेगी दुनियाँ, पर मैं मिलूँगा नहीं !! देखते हैं लोग अपनी दृष्टि से, जितने लोग उतनी दृष्टि से ! भला कैसे दिखेगी दुनियाँ एक जैसी ? जो है वो दिखता नहीं, दिखता वह, जो है नहीं! देखेगी…

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कलाम को मेरा सलाम हुआ था एक बुद्धि-सम्राट, कथा है जिसकी बहुत विराट; कभी न भाया जिसे आराम, उस कलाम को मेरा सलाम। हिंद को किया परमाणु प्रदान, वह था धरणी माँ का वरदान; जिसने किए खोज तमाम, उस कलाम को मेरा सलाम। जो `मिसाइल मॅन´ कहलाया, शास्त्र जगत में इतिहास…

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भँवर में सही कश्ती को मुड़ाकर तो देखो बारिश में पैर जमीं पे गड़ाकर तो देखो कुछ भी है मुमकिन अगर ठान लें हम सब हाँथ समानता की ओर बढ़ाकर तो देखो भेदभाव ख़त्म कर अब अपनी बेटी को शिक्षा के शिखर पर चढ़ाकर तो देखो हुनर है इनमे दुनियाँ को बदलने का बेटियों को ……

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साहित्य की इस दुनियाँ को युवा झकझोर गए कितने लेखक दुनियाँ में छाप अपनी छोड़ गए लोग साहित्य खो रहे या कविता अपनी अहमियत साहित्य ने इस दुनियाँ को लेखक दिया अनगिनत आज के इस दौर में, गुमनाम हो रही है कविता अस्तित्व बचाने के लिए अब रो रही है कविता। मोबाईल के…

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है मेरी अभिलाषा छू लूँ गगन बिना लिए पर, किसी का न हो मुझको डर; मंजिल छोडू न भी मरकर, है मेरी अभिलाषा। सामर्थ्य रहे मुझमें इतना, करूँ मैं सभी का उद्धार; बनूँ मैं दीन का जीवनाधार, कुछ न लगे मुझे अपार; है मेरी अभिलाषा। यदि कहीं हो भ्रष्टाचार, कर दूँ उसे मैं…
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