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Abhishek Shukla
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हवा में उड़ते कागज को जब देखता हूँ
तो सोच में पढ़ जाता हूँ ,
की क्या ये लवारीस सा ज़्होके में झूलता कागज़ वही है ,
जिसपे जहाज बना कर , बचपन उदाया था,
या ये वो है जिसपे अपने मासूम से सपनो को सजाया था,
कहीं ये वो कागज़ तो नहीं ,
जिसपे अपने इज़हार-ऐ-इश्क़ को,
दिल की स्याही से लिख के आया था ,

सोच ही सोच में ये भी सोच जाता हूँ,
क्या ये पन्ना वो तो नहीं ,
जिसपे खुद से खुद की उम्मीदों का ज़िक्र कर के आया था,
या ये वो पन्ना है ,
जिसपे में दर्दो को ग़मों को लिख फेंक आया था,

सोचता हूँ पकड़ के देख लूँ ,
ये ज़्होंका फिर क्या ले आया था,

फिर सोचता हूँ उड़ ही जाने दो इस कागज़ को ,
बीते लम्हे को पड़के क्या मिल पायेगा ,
जानता हूँ समय की चाल को,
ये फिर से सामने कोरा कागज़ लाएगा,
होगें कई नए किस्से,
बीतता लम्हा फिर से कुछ लिखवाएगा,
अगला ही ज़्होंका उसे भी उड़ा ले जायेगा !

© Abhishek Shukla, The Voice of Heart:कागज़
https://itstheheartstalk.blogspot.in/ -BLOG
https://www.facebook.com/itstheheartstalk/

हवा में उड़ते कागज को जब देखता हूँ
तो सोच में पढ़ जाता हूँ ,
की क्या ये लवारीस सा ज़्होके में झूलता कागज़ वही है ,
जिसपे जहाज बना कर , बचपन उदाया था,
या ये वो है जिसपे अपने मासूम से सपनो को सजाया था,
कहीं ये वो कागज़ तो नहीं ,
जिसपे अपने इज़हार-ऐ-इश्क़ को,
दिल की स्याही से लिख के आया था ,

सोच ही सोच में ये भी सोच जाता हूँ,
क्या ये पन्ना वो तो नहीं ,
जिसपे खुद से खुद की उम्मीदों का ज़िक्र कर के आया था,
या ये वो पन्ना है ,
जिसपे में दर्दो को ग़मों को लिख फेंक आया था,

सोचता हूँ पकड़ के देख लूँ ,
ये ज़्होंका फिर क्या ले आया था,

फिर सोचता हूँ उड़ ही जाने दो इस कागज़ को ,
बीते लम्हे को पड़के क्या मिल पायेगा ,
जानता हूँ समय की चाल को,
ये फिर से सामने कोरा कागज़ लाएगा,
होगें कई नए किस्से,
बीतता लम्हा फिर से कुछ लिखवाएगा,
अगला ही ज़्होंका उसे भी उड़ा ले जायेगा !

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हवा में उड़ते कागज को जब देखता हूँ
तो सोच में पढ़ जाता हूँ ,
की क्या ये लवारीस सा ज़्होके में झूलता कागज़ वही है ,
जिसपे जहाज बना कर , बचपन उदाया था,
या ये वो है जिसपे अपने मासूम से सपनो को सजाया था,
कहीं ये वो कागज़ तो नहीं ,
जिसपे अपने इज़हार-ऐ-इश्क़ को,
दिल की स्याही से लिख के आया था ,

सोच ही सोच में ये भी सोच जाता हूँ,
क्या ये पन्ना वो तो नहीं ,
जिसपे खुद से खुद की उम्मीदों का ज़िक्र कर के आया था,
या ये वो पन्ना है ,
जिसपे में दर्दो को ग़मों को लिख फेंक आया था,

सोचता हूँ पकड़ के देख लूँ ,
ये ज़्होंका फिर क्या ले आया था,

फिर सोचता हूँ उड़ ही जाने दो इस कागज़ को ,
बीते लम्हे को पड़के क्या मिल पायेगा ,
जानता हूँ समय की चाल को,
ये फिर से सामने कोरा कागज़ लाएगा,
होगें कई नए किस्से,
बीतता लम्हा फिर से कुछ लिखवाएगा,
अगला ही ज़्होंका उसे भी उड़ा ले जायेगा !

© Abhishek Shukla, The Voice of Heart:कागज़
https://itstheheartstalk.blogspot.in/ -BLOG
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हवा में उड़ते कागज को जब देखता हूँ
तो सोच में पढ़ जाता हूँ ,
की क्या ये लवारीस सा ज़्होके में झूलता कागज़ वही है ,
जिसपे जहाज बना कर , बचपन उदाया था,
या ये वो है जिसपे अपने मासूम से सपनो को सजाया था,
कहीं ये वो कागज़ तो नहीं ,
जिसपे अपने इज़हार-ऐ-इश्क़ को,
दिल की स्याही से लिख के आया था ,

सोच ही सोच में ये भी सोच जाता हूँ,
क्या ये पन्ना वो तो नहीं ,
जिसपे खुद से खुद की उम्मीदों का ज़िक्र कर के आया था,
या ये वो पन्ना है ,
जिसपे में दर्दो को ग़मों को लिख फेंक आया था,

सोचता हूँ पकड़ के देख लूँ ,
ये ज़्होंका फिर क्या ले आया था,

फिर सोचता हूँ उड़ ही जाने दो इस कागज़ को ,
बीते लम्हे को पड़के क्या मिल पायेगा ,
जानता हूँ समय की चाल को,
ये फिर से सामने कोरा कागज़ लाएगा,
होगें कई नए किस्से,
बीतता लम्हा फिर से कुछ लिखवाएगा,
अगला ही ज़्होंका उसे भी उड़ा ले जायेगा !

© Abhishek Shukla, The Voice of Heart:कागज़
https://itstheheartstalk.blogspot.in/2017/03/blog-post.html

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न बोल पाए तुमसे
-------------------------------------------------------------------------
न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,

न पहुच पाए तुम तक
न ही मेरे पास लौट पाए
आज दिल के निशान
नदीं की रेत पे रह गए ,




न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,


न बेचैन नींदों से कह पाए
खुद के टूटने का दर्द ,
ये सपने खुद ही सह गए

न पहुच पाए ये तुम तक
न आ पाए वापस
ये लफ्ज़ ख़ामोशी में ही खो गए,

न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,

हम तब भी बेगाने थे
आज भी खुद से बेगाने ही रह गए
हम तब बहते बदल थे
आज भी हम, एक खुशगवार झोंका बनके रह गए,

न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए


© Abhishek Shukla, The Voice of Heart:न बोल पाए तुमसे
(http://itstheheartstalk.blogspot.com/2016/12/blog-post.html)

न बोल पाए तुमसे
-------------------------------------------------------------------------
न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,

न पहुच पाए तुम तक
न ही मेरे पास लौट पाए
आज दिल के निशान
नदीं की रेत पे रह गए ,




न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,


न बेचैन नींदों से कह पाए
खुद के टूटने का दर्द ,
ये सपने खुद ही सह गए

न पहुच पाए ये तुम तक
न आ पाए वापस
ये लफ्ज़ ख़ामोशी में ही खो गए,

न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,

हम तब भी बेगाने थे
आज भी खुद से बेगाने ही रह गए
हम तब बहते बदल थे
आज भी हम, एक खुशगवार झोंका बनके रह गए,

न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए


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न बोल पाए तुमसे
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न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,

न पहुच पाए तुम तक
न ही मेरे पास लौट पाए
आज दिल के निशान
नदीं की रेत पे रह गए ,




न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,


न बेचैन नींदों से कह पाए
खुद के टूटने का दर्द ,
ये सपने खुद ही सह गए

न पहुच पाए ये तुम तक
न आ पाए वापस
ये लफ्ज़ ख़ामोशी में ही खो गए,

न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,

हम तब भी बेगाने थे
आज भी खुद से बेगाने ही रह गए
हम तब बहते बदल थे
आज भी हम, एक खुशगवार झोंका बनके रह गए,

न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए


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न बोल पाए तुमसे
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न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,

न पहुच पाए तुम तक
न ही मेरे पास लौट पाए
आज दिल के निशान
नदीं की रेत पे रह गए ,




न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,


न बेचैन नींदों से कह पाए
खुद के टूटने का दर्द ,
ये सपने खुद ही सह गए

न पहुच पाए ये तुम तक
न आ पाए वापस
ये लफ्ज़ ख़ामोशी में ही खो गए,

न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,

हम तब भी बेगाने थे
आज भी खुद से बेगाने ही रह गए
हम तब बहते बदल थे
आज भी हम, एक खुशगवार झोंका बनके रह गए,

न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए


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न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,

न पहुच पाए तुम तक
न ही मेरे पास लौट पाए
आज दिल के निशान
नदीं की रेत पे रह गए ,




न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,


न बेचैन नींदों से कह पाए
खुद के टूटने का दर्द ,
ये सपने खुद ही सह गए

न पहुच पाए ये तुम तक
न आ पाए वापस
ये लफ्ज़ ख़ामोशी में ही खो गए,

न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

आज मेरे प्यार के टुकड़े
अश्को में कतरा कतरा बाह गए ,

हम तब भी बेगाने थे
आज भी खुद से बेगाने ही रह गए
हम तब बहते बदल थे
आज भी हम, एक खुशगवार झोंका बनके रह गए,

न बोल पाए तुमसे
न ही अपने मैं दबा सके ,

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