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RS Jha ji

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 कितनो को टोपी पहनाकर, फिर आ गए केजरीवाल ! धरना को भर्ना लगाकर, लो आ गए भ्रष्टाचार के काल ! कितनो को टोपी पहनाकर, फिर आ गए केजरीवाल ! वानारस से दिल्ली गूंज रहे, थोक रहे है तलबे पर ताल !   खाँसी तो मुफ्त के पानी में थी, अब तो सब है खुशहाल ! भाग गए मैंगो मै...
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 कितनो को टोपी पहनाकर, फिर आ गए केजरीवाल ! धरना को भर्ना लगाकर, लो आ गए भ्रष्टाचार के काल ! कितनो को टोपी पहनाकर, फिर आ गए केजरीवाल ! वानारस से दिल्ली गूंज रहे, थोक रहे है तलबे पर ताल !  खाँसी तो मुफ्त के पानी में थी, अब ...
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 ताबर -तोर हमला है जारी,मुख्य शस्त्र नेताजी  के असल में जुबान है !!    ********************************** सत्ता के कुरुक्षेत्र में सब हैं यंहा आमने सामने, न गद्दा, न धनुष और न कोई बाण है ! कितने हुए मूर्क्षित, ताबर -तोर हमला है जारी,  मुख्य शस्त्र नेताजी ...
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 ताबर -तोर हमला है जारी,मुख्य शस्त्र नेताजी  के असल में जुबान है !!    ************************************ सत्ता के कुरुक्षेत्र में सब हैं यंहा आमने सामने, न गद्दा, न धनुष और न कोई बाण है ! कितने हुए मूर्क्षित, ताबर -तोर हम...
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पार्टी या संगठन जितने उतावले से उस आन्दमय पल को निहार रहे होते है कि कब सत्ता उनके हवाले हो?, क्या सत्ता के लालयित और बरसो से हतोउत्साहित को सत्ता मिलते ही कुछ इस कदर मदमस्त तो नहीं हो जाते है कि सत्ता के सिवाय कुछ और सुहाते ही नहीं  सब कुछ हरा भरा दिखने लगते है क्या अन्तः  लोगों के उम्मीद और जरुरत को भूल कर सत्ता के भोग भोगने में लीं हो जाते है ?
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UPA २ सरकार के कार्यकाल का संक्षिप्त लेखा जोखा.... UPA-२ सरकार ने जाती -जाती मंहगाई के जोड़के झटके दे गयी, सरकार जहाँ एक तरफ जिस कदर प्राकृतिक सम्पदा का लूट मचा रखी थी और दूसरी तरफ मध्यम वर्ग को मंहगाई के व्रजपात कर रही थी इससे साफ़ जाहिर है कि सरकार के काम...
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UPA -२ सरकार के कार्यकाल का संक्षिप्त लेखा- जोखा.... UPA-२ सरकार ने जाती -जाती मंहगाई के जोड़के झटके दे गयी, सरकार जहाँ एक तरफ जिस कदर प्राकृतिक सम्पदा का लूट मचा रखी थी और दूसरी तरफ मध्यम वर्ग को मंहगाई के व्रजपात कर रही थी ...
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UPA-२ सरकार ने जाती जाती मंहगाई के जोड़के झटके दे गयी, सरकार जहाँ एक तरफ जिस कदर प्राकृतिक सम्पदा का लूट मचा रखी थी और दूसरी तरफ मध्यम वर्ग को मंहगाई के व्रजपात कर रही थी इससे साफ़ जाहिर है कि सरकार के काम काज जनता के संतुष्टि के कसौटी पर कभी कड़ी नहीं उतरी। भारत के लोक तंत्र इतिहास यदि UPA-२सरकार को याद रखेंगे जायेंगे तो सिर्फ भ्रष्टाचार के लिए क्यूंकि सरकार के अपनी पूरी कार्यकाल के दौरान सिर्फ भ्रष्टाचार के लिए ही सुर्ख़ियों में रही। हालाँकि भारत के आनेवाले पीढ़ी शायद मनमोहन सिंह को कभी भी देश के बेहतरीन प्रधानमंत्री का दर्ज़ा नहीं दे पाएंगे क्यूंकि वे आत्ममंथन करने के पश्चात शायद यही निष्कर्ष निकाले कि भगवान के कृपा से तो पञ्च ज्ञान इंद्री होते हुए न कभी आँख का ही उपयोग किया, काश किया होता तो इस तरह के भ्रष्टाचार हरगिज़ देखने को नहीं मिलता जबकि कान का उपयोग उस पल ही बंद कर दिए थे जब उन्होंने अपने को प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित होते सुने थे ऐसा नहीं था कि वह बधिर हो गए थे ब्लिक सिर्फ और सिर्फ मैडमजी को ही सुना करते थे। नतीजन उनके अपने दल से लेकर सहयोगी  सभी देश और सरकार को लुटते रहे और चुपचाप देखते रहे, नौकरशाह एक के बाद एक हैरतअंगेज और नकुसानदेह फैसला लेते रहे और बेझिझक हामी भरते रहे।  यद्दिप  गुणवत्ता और विद्वत्ता के नज़रिये से अभीतक जितने भी प्रधानमंत्री हुए है उनमें से अव्वल रहे है पर वह गुणवत्ता और विद्वत्ता किस काम के जो तर्कसंगत न हो और जो राष्ट हित में न हो।वास्तविक में UPA-२ के सभी मंत्रालय के काम काज का लेखा जोखा करे तो किसी भी मंत्रालय का काम काज संतोष जनक नहीं रहा। इसीलिए प्रमुख मंत्रालय के काम काज के ऊपर एक नज़र डालते है ;-
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 उद्घोषणा व घोषणा पत्र नहीं ब्लिक इच्छाशक्ति को जनता टटोल रही है.… समस्त देश में चुनावी सरगर्मी खूब जोरों पर हैं हालाँकि आम चुनाव का श्री गणेश ७ तारिक के मतदान के पश्चात् शुरू हो गया।  इस असमंजस की  स्थिति में जंहाँ एक खेमे  बड़ी बेसर्बी से मतगणना के उस पल क...
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 उद्घोषणा व घोषणा पत्र नहीं ब्लिक इच्छाशक्ति को जनता टटोल रही है.… समस्त देश में चुनावी सरगर्मी खूब जोरों पर हैं हालाँकि आम चुनाव का श्री गणेश ७ तारिक के मतदान के पश्चात् शुरू हो गया।  इस असमंजस की  स्थिति में जंहाँ एक खेमे  ...
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रष्ट्राचार, मंहगाई , बेरोजगारी और गरीबी देश के प्रमुख मुद्दे है जिसका हल लोक चाहते है जबकि सरकार यदि कर्मठ और अग्रसर हो तो इसके बिरुद्ध अपनी पूर्णतः ताक़त तो झोंक देती है, पर इसको अभी तक कारगार समाधान नहीं ढूंढ पायी है। परिणामस्वरूप ऐसी परिशानियों से कुछ समय के लिए निज़ात तो मिलती है पर दीर्घकाल के लिए नहीं ऐसे में दूरदृष्टि के मद्दे नज़र किसी भी तरह के के कदम उठाये जाय तो हो सकता कि तुरंत इसका परिणाम देखने को न मिले पर भविष्य में जरुर ही ये सार्थक कदम  माने जायेंगे अर्थात इसका इलाज़ एलोपैथिक विधि से न करके आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक तरीके से करे तो जरुर ही इन समस्याएं का उपचार करने में सफल हो पायेगी। कोई भी सियाशी पार्टी या सरकार आते है और थोड़ी बहुत प्रयास दिखा कर फिर खामोश हो जाती है और परेशानियों के सामने नतमस्तक होकर वहाँ से ध्यान कँही और केंद्रित कर लेती है अन्तः हार मानकर उन परेशानियाँ को पूर्वावस्था में ही छोड़ देती है
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सत्ता के कुरुक्षेत्र में सब हैं यंहा आमने सामने,
न गद्दा, न धनुष और न कोई बाण है !
कितने हुए मूर्क्षित, ताबर -तोर हमला है जारी,
 मुख्य शस्त्र नेताजी के असल में जुबान है !
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लोक तंत्र के धुरी में आखिर कबतक पीसते रहेंगे हमलोक ? लोक तंत्र के धुरी में आखिर कबतक पीसते रहेंगे हमलोक जनतंत्र के ईश से मिले, क्या यूँ ही सहते रहेंगे  प्रकोप चीख भी निशब्द हुए फिर भी बिलखते है अंतरआत्मा  जन दर्द पर करे क्यूँ परवाह मजे में है तंत्र के...
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लोक तंत्र के धुरी में आखिर कबतक पीसते रहेंगे हमलोक ? लोक तंत्र के धुरी में आखिर कबतक पीसते रहेंगे हमलोक जनतंत्र के ईश से मिले, क्या यूँ ही सहते रहेंगे  प्रकोप चीख भी निशब्द हुए फिर भी बिलखते है अंतरआत्मा  जन दर्द पर करे ...
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