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rajender tyagi
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असत्‍य ही सत्‍य है जहां
सत्‍य है , वहां सुशासन नहीं ! और , जहां सुशासन है , वहां सत्‍य नहीं ! अत: हे , सत्‍यान्‍वेषकों ! हे , सत्‍यानुगामियों सत्‍य से पल्‍ला झाड़ , असत्‍य का अनुगमन करो। असत्‍य पर आरूढ़ होकर सुशासन आ रहा है। सुशासन का स्‍वागत
करो।   असत्य
ह...
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आनन्‍द स्‍मृतियां ! दीवार पर चस्‍पा , काई की परतें। कल्‍पनाएं ! बंद किवाड़ों की बिवाइयों से झांकता आंगन । स्‍मृतियां / कल्‍पनाएं अतीत / भविष्‍य और , वर्तमान ? मुरझा गया है , बंद किवाड़ों के आंगन में खड़े शजर की तरह। अतीत मृत्‍यु 
है , स्‍मृतियां मृत्‍यु का ...
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मूंग की दाल
  बॉस की झाड़ और राह की धूल , दोनों झाड़ने के बाद मुन्नालाल खाना
खाने बैठ गया। रोटी का टुकड़ा तोड़ा और सब्जी की कटोरी में भिगोया। टुकड़ा कटोरी में
ऐसे डूब गया जैसे बिना पतवार की नाव नदी में। मुन्नालाल का जायका बे-जायका हो गया।
उसने चिल्लाकर पत्नी से पूछा , '' भा...
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चरण कमल बंदौ..!
उन्हें आज
शर्मा जी के विद्यालय का उद्ंघाटन करने आना है। समारोह का उदघोषक बार-बार घोषणा कर
रहा है- मंत्रीजी के चरण कमल शीघ्र ही पड़ने वाले हैं। उदघोषक मंत्रीजी के आने में विलंब का
कारण बता रहा है , मंत्रीजी
किसी आवश्यक मीटिंग में व्यस्त हैं। वह शाश्वत सत्य का...
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'आप' से 'खाप' बनने की क़वायद
लोकतांत्रिक राजनीति में प्राय: दो प्रकार के जीव पाए जाते हैं, बुद्धूजीवी और बुद्धिजीवी। बुद्धूजीवी जीवों की प्रकृत्ति दीमक मार रसायन के समान होती है। अर्थात जिस प्रकार दीमक मार रसायन लकड़ी की रक्षा करता रहता है। उसी प्रकार बुद्धूजीवी जीव लोकतंत्र की रक्षा मे...
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"भाजपा पीडीपी की साझा कश्मीर सरकार ने अलगाववादी मसरत आलम को रिहा किया।" जरूर कॉमन मिनीमम प्रोग्राम के तहत रिहा किया होगा! क्यों मोदी जी? वास्तव में आपकी राजनैतिक सूझबूझ पर प्रश्न चिह्न नहीं लगाया जा सकता!
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दो पाटन के बीच में
रंग न रंगोली इस बार अपनी होली बैरंग ही होले-होले आगे-आगे होली।
अट्ठाइस को अच्छे दिन का बजट था , पाँच की होली ,   आठ को महिला दिवस! हमारा पाँच न आठ हो पाया
न अट्ठाइस , बस तीन-तेरह हो कर रह गया। दो पाटों के बीच फंसी हमारी स्थिति संत
कबीर समान थी। गनीमत बस इतन...
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नैकिता के मायने
                    डॉक्टर वात्स्यायन से महर्षि अरविन्द-दर्शन पर
टिप्स लेने के लिए मेरठ आया था। ' अरविन्द-दर्शन
में मानववाद ' मेरे शोध-प्रबन्ध का विषय था। विचार
कुछ बदला , सोचा पहले कुछ समय कॉलेज की लाइब्रेरी
में ही बैठकर अरविन्द दर्शन पर नोट ले लिए जाएं और...
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हीरामन
हीरामन
munnalal.blogspot.com
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