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CHANDAN KUMAR
जिसको जीना हो घबराये, हमको तो मर जाना है।
जिसको जीना हो घबराये, हमको तो मर जाना है।
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बांग्लादेशियों के घुसपैठ की समस्या इतनी भयावह हो गयी है। फिर भी आपको जानकर यह आश्चर्य होगा की बांग्लादेशियों का भारत में घुसना आज भी जारी है। अररिया, किशनगंज के रास्ते जानवरों का व्यापार आज भी जारी है। हरेक चीज की कीमत तय होती है, किशनगंज बिहार के पिछड़े जिलों में शामिल है, लेकिन बिहार पुलिस, जीआरपी, आरपीएफ के जवानों और अधिकारियों के लिए मालदार जगह है, इन जगहों पर पोस्टिंग के लिए पैरवी और रसूख सब कुछ झोंका जाता है तब जाकर यहां पोस्टिंग हो पाती है, यह कोई इंडस्ट्रियल एरिया भी नही है, न ही कोई दिल्ली, बम्बई, पुणे जैसा विकसित महानगर। कारण है, अवैध लोग और अवैध व्यवसाय से मिलने वाला हिस्सा, सबसे ज्यादा कमाई तो उस व्यवसाय में है जहां लोगों को अवैध घुसपैठिये से वैध भारतवासी बना दिया जाता है। यह खेल आज का नही है यह अरसों से जारी है।

देशद्रोहियों का साथ देते हुए खुद को देशभक्त बतलाते रहने की आपकी आदत देशभक्ति नही है, ये आपके अंदर का दोगलापन है। जो बार-बार हिलोरे मार कर बाहर आ रहा है।

अभिव्यक्ति की आजादी जिस संविधान से मिली है। उसी का विरोध करने के लिए अभिव्यक्ति की आजादी का उपयोग हो रहा है।
अभिव्यक्ति की आजादी की वकालत करने वालों को अभिव्यक्ति की आजादी भी चाहिए तो भारतीय राष्ट्र राज्य का विरोध करने के लिए।
सरकार भी सबका साथ, सबका विकास, समाजिक सौहार्द और सम्प्रदायिक सौहार्द दिखाने की कोशिश में देशहित को नजरअंदाज करती दिख रही है। और देशद्रोही, हरामी, दल्ले सरकार के इन नाजुक और बनावटी भावना पर वार कर इनके नाजुक और बनावटी भावना का बखूबी उपयोग कर रहे हैं।

संसद लोकतन्त्र का बहुत बड़ा मन्दिर है। और इतना बड़ा मन्दिर है, इतना बड़ा मन्दिर है की वहां जाने वाला हर कोई भगवान है। किसी फरियादी को संसद जाते नही देखा आजतक। मन्दिर होता तो राजनीति से पीड़ित, समाज के शोषित, वंचित, दुःखी, गरीबी से पीड़ित लोग अपनी फरियाद लेकर जाते। मन्दिर के बाहर खड़े होकर कहते भगवान, माई-बाप दुःख दूर करो।
मान लो हमने आप के कहे अनुसार संसद को मन्दिर मान लिया, लेकिन वहां के भगवान से कौन अपनी आपबीती बताएगा, जब भगवान आपस में ही रक्तपात कर रहे हैं, भगवान एक दूसरे को गाली बक रहे हैं। जहां के भगवान चोरी और सीनाज़ोरी में लिप्त हैं। जहां के भगवान हत्या और बलात्कारी भी रहे हैं। जहां भगवान झूठ बोलते हैं।

आदर्शों के सहारे जनता को फिर वेबकुफ़ क्यों बनाते हो।

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भारतीय रेल के सफर में गरीब आदमी अच्छे दिन महसूस करते हुए।
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राजनीति की फसल में इतने नेता पैदा हो गए, कि कृषिप्रधान देश कुर्सिप्रधान हो गया।

वो तोड़ देता है दिल मेरा हरबार की तरह,
फिर भी दिल में जूनून ए वफ़ा उसीका है।

अश्लील भोजपुरी गानों से स्त्रियों के ऊपर फ़ैल रही असहिष्णुता पर भी चर्चा हो। असहिष्णु अश्लील भोजपुरी गानों को बन्द किया जाना चाहिए।

कहते थे आम जनता की आवाज बुलन्द करेंगे। नेता चुने गए, और दौलत वालों के दलाल बन गए।
नेता, मीडिया, दोनों में ज्यादा दलाल हैं।
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