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Dilbag Virk
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77 कविताओं और 25 क्षणिकाओं से सज़ा कविता-संग्रह “ मुट्ठी भर धूप ” अल्पना नागर का पहला कविता-संग्रह है | “ मुट्ठी भर धूप ” किसी कविता का शीर्षक न होकर कवयित्री की उस आशावादी सोच का परिचायक है, जो इन कविताओं में यत्र-तत्र व्याप्त है |
ऐसा नहीं कि कवयित्री वर्तमान हालातों से निराश नहीं, लेकिन निराशा से पार जाकर वह बार-बार आशावादी सुर छेड़ती है | यह आशावादी सुर पहली कविता से लेकर आखिरी कविता तक विद्यमान है | व्यस्तताएं सीलन भरे अँधेरे कमरे हैं, लेकिन इनमें फुर्सत की खिड़की भी है, जिसमें से आने वाले झोंके गहरी नींद में सोई आत्मा को झकझोर देते हैं |

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ज़िंदगी की कुरूपता में आशा की धूप देखता कविता-संग्रह
कविता-संग्रह – मुट्ठी भर धूप कवयित्री – अल्पना नागर  प्रकाशक – हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी  पृष्ठ – 126 कीमत – 200 /- ( सजिल्द ) 77 कविताओं और 25 क्षणिकाओं से सज़ा कविता-संग्रह “ मुट्ठी भर धूप ” अल्पना नागर का पहला कविता-संग्रह है | “ मुट्ठी भर धूप ” किसी कविता...

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रूप देवगुण की काव्य साधना को दिखाती पुस्तक
पुस्तक
– काव्य का अनवरत यात्री :
रूप देवगुण लेखिका
– डॉ. आरती बंसल प्रकाशक
– सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल पृष्ठ
– 144 कीमत –
300 /- कविता की आलोचना के लिए भावुक मन और तार्किक बुद्धि दोनों की आवश्यकता होती है, क्योंकि भावुक मन कविता से तादात्म्य बैठाने में मदद करत...

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समीक्षक की पसंद
न जाने क्यों .....? - रिजल्ट

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समीक्षकों की नजर में
भाग- 1 ,  भाग - 2  ,  भाग - 3  ,  भाग - 4  ,  भाग - 5  ,  भाग - 6  ,  भाग - 7 ,  भाग - 8   अंतिम भाग पुस्तक प्राप्ति का स्थान  दिलबागसिंह विर्क 

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प्रपंच
राजनीति पर्याय है प्रपंचों का लेकिन राजनैतिक प्रपंच निंदनीय नहीं श्लाघनीय होते हैं क्योंकि वे रचे जाते हैं धर्म  जातिय अभिमान और राष्ट्रीय गौरव की आड़ में यकीन न हो तो  पलट लेना इतिहास के पन्ने पढ़ लेना  किसी भी कूटनितिज्ञ का जीवन चरित्र । दिलबागसिंह विर्क  *...

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इन 17 कहानियों में प्रेम का श्वेत पक्ष भी है और श्याम पक्ष भी | प्रेम कहीं उभर कर सामने आता है, तो कहीं यह छुपा हुआ है | प्रेम के विविध रूप हैं और अधिकाँश रूपों का प्रतिनिधित्व इस संग्रह की कहानियाँ करती हैं | पहले तीन संग्रह बीसवीं शताब्दी के अंतिम दो दशकों में प्रकाशित हुए हैं और चौथा संग्रह भी आज से बारह वर्ष पहले प्रकाशित हुआ है, ऐसे में आज की कहानियों से शैलीगत भिन्नता स्वाभाविक है, लेकिन प्रेम शाश्वत है | हालांकि आज की कहानियों में प्रेम का वर्णन अमर्यादित भी होता है, लेकिन रूप देवगुण की कहानियों में यह पूरी तरह से मर्यादित है |

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रूप देवगुण की कहानियों में प्रेम ( अंतिम भाग )
मानवेतर प्राणियों से प्रेम  प्रेम का संबंध सिर्फ व्यक्तियों से नहीं | मानवेतर प्राणियों से भी प्रेम हो जाता है | मानवेतर प्राणी भी प्रेम को समझते हैं और प्रत्युत्तर में प्रेम करते हैं | सामान्यत: उनकी वफादारी आदमी से भी अधिक होती है | कुत्ता इनमें से सबके आ...
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