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Anurag Anant
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दिल्ली..!!
तुम दिल्ली थी तुम्हें हर कोई पाना चाहता था मैं भी दिल्ली था मुझे हर कोई लूट लेना चाहता था हम दोनों का दिल भी दिल्ली था सौ बार उजड़ने के बाद भी बस ही जाता था समय भी दिल्ली था वो मुझे, तुम्हें, हमारे दिल को 'कुछ नहीं' समझता था लोग भी दिल्ली थे 'सब कुछ' समझते थ...
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तेरा चेहरा वो खंज़र है हुस्ना..!!
हुस्ना तेरे साथ बिताया हर लम्हा रह रह कर कविता बनकर रिसता है भीतर है कोई जो तेरी याद में रोता है बाहर है कोई जो हर एक बात पर हंसता है तेरा चेहरा वो खंज़र है हुस्ना  जिसका क्या कहना वो हर धड़कन के साथ थोड़ा और ज़िगर में धंसता है हुस्ना तेरे साथ बिताया हर लम्हा र...
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रोजगार पे चोट पकौड़ा...!!
इधर पकौड़ा, किधर पकौड़ा देखव जिधर , उधर पकौड़ा अजर पकौड़ा, अमर पकौड़ा भइया सबसे जबर पकौड़ा मर गये जेका खाय के बापू अइसा तगड़ा ज़हर पकौड़ा नदी पकौड़ा, नहर पकौड़ा सुबह, शाम, दोपहर पकौड़ा हँस कर सब पर ढाय दिहिन मोदी जी फिर कहर पकौड़ा सड़क पकौड़ा, डगर पकौड़ा गली,मोहल्ला, शहर प...
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बोलय में ऊ तेज हैं भइया..!!
बोलय में ऊ तेज हैं भइया बहुत बड़े रंगरेज़ हैं भइया लंद-फंद के गज़ब मास्टर बिल्कुलय अंग्रेज है भइया कीचड़ कमल तालाब हैं भाइया शेरवानी टंका गुलाब हैं भाइया चेहरे से महताब हैं भाइया नेचर से आफ़ताब हैं भइया जुमले वाली किताब हैं भइया हीरो में अमिताभ हैं भइया ख़ुद में ...
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ख़याली ख़ब्त भाग 2
असंतोष बहुत जरुरी है  संतोष, सिर्फ एक शब्द नहीं है. ये अपने आप में एक दार्शनिक राजनीति है. जो आपकी चेतना को बदलकर आपके भीतर एक ऐसी सांस्कृतिक समझ रचती है कि आप हिसाब करना और हिसाब लेना भूल जाते हैं फिर कहीं से कोई बोलता "कोऊ नृप होय हमें का हानि" और आप संतो...
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ख़याली ख़ब्त भाग 1
रात को नींद नहीं आती. मुक्तिबोध को भी नहीं आती थी. और मजाज़ को भी नहीं आती थी. रात भर मुक्तिबोध अपने चौकीदार दोस्त के साथ बीड़ी फूंकते हुए टहलते रहते थे. मजाज़ भी तो रात में जागते-टहलते खुद के दिल से ही पूछते रहते थे "ए गम-ए-दिल क्या करूँ, ए वहशत-ए-दिल क्या कर...
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दिल की बात !!
मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि मैं आजतक वो नहीं कह सका जो मुझे कहना था मैं अकेला नहीं हूँ तुम भी हो मेरे साथ जो नहीं कह पाया है दिल की बात फ़र्क बस इतना है कि मैं ये बात कह पा रहा हूँ और तुम हो कि इतना भी नहीं कह पाते मुझे मेरी ख़ामोशी में चुभन महसूस होती है इ...
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प्यार...!!
प्यार से सबसे पहले आधा 'प' अलग हुआ और बचा सिर्फ 'यार' जिसमे बाद में 'र' रुपये में बदल गया और 'या' से याद ही बची सीने में और तुम हो कि पूछते हो मजा आ रहा है जीने में ? अनुराग अनंत
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मैं एक रहस्य ही हूँ..!!
मैं खुद को एक नदी समझता था और वो मुझे एक तालाब समझती थी मुझे लगता था मैं नदी की तरह आगे निकल जाऊंगा और उसे लगता था कि मैं तालाब की तरह वहीँ रह जाऊंगा वो ना तालाब थी, ना नदी वो पानी थी और उसके जाने के बाद मैं ना तालाब रहा, ना नदी मैं क्या हूँ ? अब ये एक रहस्...
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एक अधूरी सी कहानी..!!
एक अधूरी रात अधूरा इश्क़ अधूरी ज़िंदगी एक अधूरी मुलाकात अधूरा ख़ुदा अधूरी बंदगी एक अधूरी वाह अधूरी आह अधूरी चाह है एक अधूरी नदी अधूरा समंदर अधूरी थाह है एक अधूरा सा कदम है एक अधूरा सा सनम है एक अधूरे से हम हैं एक अधूरा सा ख़्वाब है एक अधूरा सा जवाब है एक अधूरा ...
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