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Anurag Anant
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प्रेम और परिवर्तन..!!
जब आवाज़ों में घुला हुआ सन्नाटा और सन्नाटों में लिपटी हुई आवाज़ सुनाई देने लगे तुम्हे और तुम रातों के दोनों सिरों के बीच उलझन के पुल पर सवालों की छड़ी टेकते हुए चलो तो समझना कि कोई उतरा है तुम्हारे दिल के सरोवर में इस तरह कि पूरा पानी गुलाबी हो गया है या टूटा ...

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अभिशप्त नट..!!
चादर पर पड़ी सिलवट मेरी परेशानियों की केचुल है और बिस्तर पर जागती करवट उस किताब के पन्ने पलटने की क्रिया जिसमे दर्ज हुआ है, मेरा अतीत और लिखा जाना है मेरा भविष्य मैं उन जगती हुई आँखों की तरह हूँ जिसमे भरीं हैं स्मृतियों की किरचें और खाली कर दी गयी है नींद जा...

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खाली सफ़े की कविता
जो लिखा है सब अधूरा है, लाचार है इसलिए कभी कभी सोचता हूँ लिखना बेकार है किसी दिन छोड़ दूंगा खाली सफ़ा जो मन में आए पढ़ लेना उसपे तुम्हारे और मेरे अनकहे, अनसुने की इससे बेहतर दूसरी कोई कविता हो ही नहीं सकती खाली सफ़े भी कविता होते हैं पर हम उन्हें पढ़ नहीं पाते ज...

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आदिकवि
वो आदिकवि अभिवक्ति के मामले में सबसे असफल व्यक्ति रहा होगा जो अपने भीतर अटकी बात को लाखों बार, हज़ारों तरीके से कहने के बाद भी नहीं कह सका रचनाओं पे रचनाएँ, रचता रहा पर वो नहीं रच सका वो जो उसके भीतर फकीरों की तरह भटकता था अधमरे आदमी की तरह कराहता था पागलों ...

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आशा के गीत लिखूंगा मैं....!!
इस पतझड़ में, घोर निराशा में आशा के गीत लिखूंगा मैं जब क्षण-क्षण में छाई पराजय है तब कण कण में जीत लिखूंगा मैं जब मित्रों में शत्रु उग आए हों तब शत्रु से प्रीत लिखूंगा मैं जब अपनों में परायापन जागा हो तब परायों को मीत लिखूंगा मैं इस पतझड़ में, घोर निराशा में ...

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तेरी याद आती है.....!!
एक टुकड़ा याद अटकी है साँसों में मैं जी रहा हूँ तो वो भी जी रही है जब-जब ये सांस आती है तब-तब तेरी याद आती है तेरी याद तड़पाती है तरसाती है, जलाती है तेरी याद आती है.....!! जिस क़दमों का हर एक निशाँ मक्का मदीना है मेरा तेरी याद एक समंदर है जिसमे खोया सफ़ीना है ...

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इश्क़ का कारोबार..!!
तेरी झूठी झूठी आँखों से मुझे सच्चा सच्चा प्यार हुआ मैंने लाख समझया था दिल को पर सब समझना बेकार हुआ आँखों ने किया आँखों का सौदा और इश्क़ का कारोबार हुआ कल से लेकर आज तलाक ऐसा ही हर बार हुआ इश्क़ का कारोबार हुआ ऐसा इश्क़ का कारोबार हुआ-2 तेरी थिरकन पे थिरके थे क...

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वो शायर, जो चाँद को महबूब नहीं मामा कहता था..!!
अजीब आदमी था वो, जो उड़ती हुई जुल्फों की लय पर मचलते हुए कुंआरियों के दिल की खबर रखता था। जो घडी की टिक टिक की आवाज़ का घेरा तोड़ कर, घोड़े को टिक टिक टिक चलने के लिए कहता था और बच्चों के बचपन के खेलों में घुल जाता था। वो दूर चाँद से महबूब का नहीं मामा का रिश्त...

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स्वाहा, आहा और वाह !!
जिस समय हत्याओं की साजिशें महायज्ञ की तरह की जा रहीं हैं और सबको स्वाहा में एक आहा खोजने को कहा जा रहा है तुम उसी समय अपनी कलम में धार करो इसलिए नहीं क्योंकि इसकी जरूरत है बल्कि इसलिए क्योंकि ये तुम्हारी मजबूरी है अगर तुम्हारी कलम में धार और आवाज़ में आधार न...

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सूरत बदली जाती है...!!
सीने की आग, बर्फ सी चुप्पी धीरे धीरे पिघलाती है सड़कों पर तनती है मुट्ठी जगह जगह लहराती है गाती है, गाती है, जवानी गीत वही दोहराती है मेरा रंग दे बसंती चोला वाला गीत वही दोहराती है सूरत बदली जाती है हाँ सूरत बदली जाती है-2 जो तख़्त पे बैठा, बना बादशाह मूछों प...
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