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ajay brahmatmaj
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फिल्‍म समीक्षा : नाम शबाना
फिल्‍म रिव्‍यू दमदार एक्‍शन नाम शबाना -अजय ब्रह्मात्‍मज नीरज पांडेय निर्देशित ‘ बेबी ’ में शबाना(तापसी पन्‍नू) ने चंद दृश्‍यों में ही अपनी छोटी
भूमिका से सभी को प्रभावित किया था। तब ऐसा लगा था कि नीरज पांडेय ने फिल्‍म को
चुस्‍त रखने के चक्‍कर में शबाना के च...

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ग्राउंड जीरो की सच्‍चाई - अनारकली
-आशिता दाधिच कुछ फिल्में तमाचा मारती है , इतना तेज तमाचा की कुछ पलों के लिए आपको दिखाई देना , सुनना सब बन्द हो जाता है , और किसी गहन शून्य में खो जाते हैं आप। कुछ फिल्में आपको एक अजब दुनिया में धकेल देती है , आप प्रोटोगोनिस्ट के साथ रोना चाहते है , बुक्का फ...

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गुस्‍सा तुम्‍हरा खारा खारा - अनारकली
मेरी एक पोस्‍ट पर टिप्‍पणी के रूप में आई है सरला माहेश्‍वरी की यह कविता। आप सभी के लिए इसे यहां सुरक्षित कर रहा हूं। अनारकली ऑफ़ आरा ! -सरला माहेश्वरी अनारकली ऑफ आरा वाह ! तुम्हारा पारा ग़ुस्सा तुम्हारा खारा खारा बजबजाता शहर आरा नंगा बेचारा उस पर टमाटर जैसा...

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मुखर प्रतिरोध की कहानी - अनारकली
हम ने फेसबुक पर आग्रह किया था कि अगर कोई अनारकली ऑफ आरा पर लखना चाहता है तो वह अपना लेख हमें भेज दें। उसे चवन्‍नी पर प्रकाशित किया जाएगा। फेसबुक स्‍टेटस में पांच-दस पंक्तियों में सभी अपनर राय रख रहे हैं। समय के साथ वह अतीत के आर्काइव में खो जाएगाा। यहां प्र...

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फिल्‍म समीक्षा - फिल्‍लौरी
दो युगों में की प्रेमकहानी फिल्‍लौरी -अजय ब्रह्मात्‍मज भाई-बहन कर्णेश शर्मा और अनुष्‍का शर्मा की कंपनी ‘ क्‍लीन स्‍लेट ’ नई और अलग किस्‍म की कोशिश
में इस बार ‘ फिल्‍लौरी ’ लेकर आई है। फिल्‍लौरी की लेखक अन्विता दत्‍त हैं। निर्देशन
की बागडोर अंशय लाल ने संभाल...

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फिल्‍म समीक्षा - अनारकली ऑफ आरा
फिल्‍म रिव्‍यू ’ मर्दों ’ की मनमर्जी की उड़े धज्जी अनारकली ऑफ आरा     -अमित कर्ण 21 वीं सदी में आज भी बहू , बेटियां
और बहन घरेलू हिंसा , बलात
संभोग व एसिड एटैक के घने काले साये में जीने को मजबूर हैं। घर की चारदीवारी हो या
स्‍कूल-कॉलेज व दफ्तर चहुंओर ‘ मर्दो...

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मामूलीपन की भव्यता बचाने की जद्दोजहद : अनारकली ऑफ आरा
मामूलीपन की भव्यता बचाने की जद्दोजहद : अनारकली ऑफ आरा -विनीत कुमार अविनाश
दास द्वारा लिखित एवं निर्देशित फिल्म “अनारकली ऑफ आरा” अपने गहरे अर्थों
में मामूलीपन के भीतर मौजूद भव्यता की तलाश और उसे बचाए रखने की जद्दोजहद
है. इसे यूं कहे कि इस फिल्म का मुख्य क...

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कहालियों में इमोशन की जरूरत - शिवम नायर
कहालनयों में इमोशन की जरूरत - शिवम नायर -अजय ब्रह्मात्‍मज तापसी पन्‍नू अभिनीत ‘ नाम
शबाना ’ के निर्देशक शिवम नायर हैं। यह उनकी
चौथी फिल्‍म है। नई पीढ़ी के कामयाब सभी उनका बहुत आदर करते हैं। संयोग ऐसा रहा कि
उनकी फिल्‍में अधिक चर्चित नहां हो सकीं। ‘ नाम शबान...

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शबाना नाम है जिसका- तापसी पन्‍नू
शबाना नाम है जिसका - तापसी पन्‍नू -अजय ब्रह्मात्‍मज तापसी पन्‍नू की ‘ नाम शबाना ’ भारत की पहली ‘ स्पिन ऑफ ’ फिल्‍म है। यह प्रीक्‍वल नहीं है। ‘ स्पिन ऑफ ’ में पिछली फिल्‍म के किसी
एक पात्र के बैकग्राउंड में जाना होता है। तापसी पन्‍नू ने ‘ नीरज पांडेय ’ निर्द...

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ckबार- बार नहीं मिलता ऐसा मौका - राजकुमार राव
राजकुमार राव -अजय ब्रह्मात्‍मज राजकुमार राव के लिए यह साल अच्‍छा होगा। बर्लिन में
उनकी अमित मासुरकर निर्देशित फिल्‍म ‘ न्‍यूटन ’ को पुरस्‍कार मिला। अभी ‘ ट्रैप्‍ड ’ रिलीज हो रही है। तीन फिल्‍मों ’ बरेली की बर्फी ’ , ’ बहन होगी तेरी ’ और ‘ ओमेरटा ’ की शूटिंग...
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