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Nitish Priyadarshi
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My statement on importance of Tropic of cancer passing from Ranchi city, Jharkhand State of India.

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रांची शहर के तुपुदाना में साल के जंगल के बीच स्थित है १९५६ का पुराना बाँध। इस जगह की ऊंचाई समुद्र तल से २,१०० फ़ीट है। ये बाँध रामकृष्ण मिशन टी बी सैनेटोरियम के परिसर में नहर कटा नदी पर बना हुआ है। जब ये आश्रम बना तो पानी के लिए इस नदी पर छोटा सा बांध बनाया गया। इस नदी के पानी को वहां के गाँव वाले कई सालों से इस्तेमाल कर रहे हैं। अभी फ़िलहाल आश्रम की तरफ से इस बाँध को और नदी को साफ़ किया जा रहा है । १९५६ में दामोदर वैली कारपोरेशन ने ये बांध बनवाया। नदी का पुराना नाम नाहक सिंघा था जो बाद में चल के नहर कटा हो गया। ये नदी वहाँ के पठारी चट्टानों से निकल के आगे जा के स्वर्णरेखा नदी से मिल जाती है। उस वक़्त ये बांध ५०,००० गैलन पानी प्रतिदिन गर्मियों में भी सप्लाई करने की क्षमता रखता था । Dam built on Nahar Kata river in 1956 by Damodar Valley corporation in the campus of Ramkrishna Mission Tuberculosis Sanatorium, Ranchi. It was capable of supplying 50,000 gallons of water daily even in summer. The surroundings are quiet and peaceful and the climate is bracing.
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6/19/17
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View of Kanke dam in Ranchi city of Jharkhand state.

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जब भी कोई जलाशय दिखाई दे तो ध्यान करना चाहिये। यहाँ ये शांत जल ईश्वर की विराट शांति का स्मरण करता है। हमारे संतो के अनुसार जिस प्रकार जल में सभी वस्तुओं का प्रतिबिम्ब पड़ता है , उसी प्रकार सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड विश्व - चैतन्य में प्रतिबिंबित होता है। जल है तो जीवन है। ( ये रुक्का डैम की तस्वीर है ) ।
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भारत में पिछले कुछ वर्षों से मौसम लगातार बदल रहा है जिसके चलते आंधी तूफ़ान तथा आसमान से बिजली गिरने की खबर आ रही है। बिजली गिरने से हर साल कई लोगों की मृत्यु हो जाती है। इस वर्ष भी आसमानी बिजली गिरने की वजह से कई लोगों की असामायिक मृत्यु हुई खासकर बिहार , झारखण्ड , ओड़िसा, मध्य प्रदेश इत्यादि राज्यों में। २०१६ में बिजली गिरने से बिहार, झारखंड और मध्यप्रदेश में करीब १०० से ऊपर लोगों की मौत हो गई, जबकि 24 लोग घायल हुए। इस प्राकतिक आपदा में 13 पशुओं की भी मौत हुई। बिहार के पटना, नालंदा, पूर्णिया, भोजपुर, रोहतास, बक्सर और औरंगाबाद में आसमानी बिजली इंसानों पर कहर बनकर टूटी । झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी अलग-अलग जगहों पर बिजली गिरने से कई लोगों की मौत हुई। लोगों में जागरूकता की कमी से लोगों को जान से हाथ धोना पड़ता है। आइये ये जानने की कोशिश करें की जब आसमान में कस के बिजली चमक रही हो तो क्या करना चाहिए।

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My small journey on River Ganges with kids in Varanasi city of India.

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कितने पुराने हैं राँची के जंगल ?
झारखण्ड में करोडो साल पहले भी थे घने जंगल।
द्वारा
डा. नितीश प्रियदर्शी
रांची के आस पास जो बचे हुए प्राकृतिक जंगल में अगर आप जाएं तो ये जरूर समझने की कोशिश करें की जिस जंगल में आप जा रहे हैं वो कितना पुराना है। रांची के जंगल को ट्रॉपिकल जंगल (Dry tropical type) की श्रेणी में रखा गया है। ये ज्यादातर पहाड़ों पर या उसके ढाल में हैं। शोध कि अगर माने तो विश्व में इस तरह के जंगल की आयु करीब १४५ से २०० मिलियन वर्ष पुरानी है। रांची के आस पास के वनों में पेड़ों की आयु औसतन ५० से लेके ५०० वर्ष तक हो सकती है। लेकिन इसपर शोध की आवश्यकता है।
१ मिलियन वर्ष पहले पृथ्वी पर हिमयुग ने इस तरह के जंगल को ढक लिया। लेकिन आज से १२००० वर्ष पहले जब हिमयुग समाप्त हुआ तो फिर से जंगल पनपने लगे। अगर रांची के आस पास की जंगलों की बात करे तो ये भी लाखों साल पुराने हो सकते हैं सिर्फ पुराने पेड़ हटते गए और नए आते गए। पेड़ों का आकार बदलता गया तथा वन क्षेत्र कम होते गए। अगर झारखण्ड के साहेबगंज और राजमहल की बात करे तो वहाँ जो पेड़ो के अवशेष (फॉसिल्स) मिले हैं वो जुरासिक काल के हैं (जब पृथ्वी पर डायनासोर का राज था ) यानि २०० से ५० मिलियन वर्ष पहले के। झारखण्ड में २०० से ३०० मिलियन वर्ष पहले (Permian age)भी जंगल थे लेकिन अब उनका सिर्फ फॉसिल्स के रूप में अवशेष दिखता है पत्तों के रूप में। इन पत्तों के फॉसिल्स को आप यहाँ के दामोदर घाटी में कोयला खानों के पास शैल चट्टानों में देख सकते हैं। इन्ही जंगलो के चलते यहाँ हज़ारों साल से सभ्यता फलती फूलती रही। इन्ही जंगलों की वजह से रांची को उस वक़्त बिहार का ग्रीष्म कालीन राजधानी घोषित किया गया। हम मनुष्य आज अपने इस प्राचीन जंगल को ख़त्म करने में लगे हुए हैं जंगल भी अस्वस्थ हो रहा है। जंगल है तो ऑक्सीजन है तथा पानी है वरना सब ख़त्म।

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4/20/17
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राँची शहर आज भारत के गिने चुने शहरों में से एक है जहाँ आज भी शहर के बीच में गांव जिन्दा है। बढ़ते शहर के बीच में खेत खलिहान है, कच्चे मकान हैं , तथा आज भी मिट्टी के चूल्हे का इस्तेमाल होता है। ये खेत गर्मी में शहर के तापमान को नियंत्रित करता है। यहाँ तक की छोटे कसबे के बाजार की तरह यहाँ भी बाजार और हाट लगता है। राँची शहर जैव विविधता में भी धनी है। ये अलग बात है की बढ़ते शहरीकरण के चलते इसमें अब कमी आ रही है। बीच से होके बहती नदियां, तालाब , पहाड़, कई तरह के पक्षी , आस पास जंगल का होना इत्यादि इस शहर के स्वस्थ होने का संकेत देता है। लेकिन अब इसके स्वास्थ में गिरावट का खतरा मंडरा रहा है। यहाँ के कई कृषि भूमि पर भू माफियाओं की नज़र है। नदियों और पहाड़ों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। तालाब ख़त्म हो रहे हैं। मैदानों को ख़त्म किया जा रहा है। हरियाली ख़त्म हो रही है। प्रदूषण बढ़ रहा है।
Ranchi is one of the few cities in India where the village and village culture exists. In the city you can see the agricultural land, mud houses, market resembling village market etc. Ranchi is also rich in biodiversity. But due to increasing population and urbanization, it’s under threat.
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4/8/17
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