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Akanksha Yadav
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कालेज में प्रवक्ता के बाद साहित्य,लेखन और ब्लागिंग के क्षेत्र में प्रवृत्त।
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" #स्वतंत्रता दिवस" एवं " #श्रीकृष्ण #जन्माष्टमी" के शुभ #पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ !!
Happy #Independence day & Happy #Krishna #Janmashtami.

#AkankshaYadav with #KrishnaKumarYadav
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आज #रक्षाबंधन पर्व को नए परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। इसे भाई-बहन के संबंधों तक सीमित करके देखना और #बहन को अशक्त मानते हुए #भाई द्वारा रक्षा जैसी दकियानूसी बातों से जोड़ने का कोई औचित्य नहीं रहा। जो समाज बेटियों-बहनों को #माँ की कोख में ही खत्म कर देता है, क्या वाकई वहाँ बहनों की रक्षा का कोई अर्थ है ? आज जिस तरह से समाज में #छेड़खानी और महिलाओं के साथ #अत्याचार की घटनाएँ बढ़ रही हैं, वह यह सोचने पर विवश करती हैं कि क्या ऐसा करने वालों की अपनी बहनें नहीं हैं। रक्षाबंधन के दिन बहन की रक्षा का संकल्प उठाना और घर से बाहर निकलते ही बेटियों-बहनों को छेड़ना और उनके साथ बद्तमीजी करना .... यह दोहरापन रुकना चाहिए। अन्यथा हर बहन अपने भाई से यही कहेगी कि- "मुझ जैसा कोई रो रहा है। क्योंकि, तुम जैसा कोई उसको छेड़ रहा है। भैया ! क्या तुम ऐसा कर सकते हो कि हर नारी सुरक्षित रहे। क्या हर नारी को सम्मान दे सकते हो ताकि वो बिना भय के खुली हवा में साँस ले सके। तभी सही अर्थों में #राखी की शान बढ़ेगी।" #AkankshaYadav #Rakshabandhan #Rakhi #Festival
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आकांक्षा यादव को 'रचना प्रतिभा सम्मान' व 'शतकवीर सम्मान', मंजिल ग्रुप साहित्यिक मंच ने जोधपुर में किया सम्मानित

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राजस्थान की बालिका वधू रूपा यादव अब बनेगी डॉक्टर : जब मन में लगन हो तो परिस्थितियाँ भी रास्ता दिखाने को मजबूर हो जाती हैं। ऐसा ही हुआ राजस्थान की बालिका वधू रूपा यादव के साथ। जिस उम्र में रूपा को शादी का मतलब भी नहीं पता था, उस उम्र में वह शादी के बंधन में बंध गईं। लेकिन रूपा की मेहनत और लगन ने अंतत: रंग दिखाया और 21 साल पूरा करने से पहले ही अब वह राजस्थान के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज से डॉक्टर बनने की पढ़ाई करेगी।

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कभी #करवाचौथ पर दीदार ।।
कभी #ईद पर इन्तजार।।
#चाँद बता तेरा मजहब क्या है ।।
तू सब का है, तो धरती पर ये तमाशा क्या है ।।
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आज विश्व #रक्तदान दिवस है। एक कवि की यह पंक्तियाँ कभी अपने #ब्लॉग पर लिखी थी। आज पुन: याद हो आईं।

मैं हूँ इंसान और इंसानियत का मान करता हूँ,
किसी की टूटती सांसों में हो फिर से नया जीवन
मैं बस यह जानकर अकसर 'लहू’ का दान करता हूँ।

(कवि दिनेश रघुवंशश्री)
#AkankshaYadav
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इक्कीसवीं सदी में भी जब अपने देश की बेटियों को शिक्षा के लिए गुहार लगानी पड़ती है, और वह भी उस राज्य में जहाँ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" का नारा बुलंद किया था, तो यह घटना समाज को आइना दिखाती नज़र आती है।

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हिन्दी ब्लॉगिंग अपने सफर के डेढ़ दशक पूरा करने की ओर अग्रसर है। 21 अप्रैल 2003 को हिंदी का प्रथम ब्लॉग ’नौ दो ग्यारह’ बना था, तबसे इसने कई पड़ावों को पार किया है। न्यू मीडिया के एक स्तंभ के रूप में ब्लॉगिंग ने कई नई इबारतें भी लिखी हैं तो सोशल मीडिया के तमाम माध्यमों, विशेषकर फेसबुक के आने के बाद हिन्दी ब्लॉगिंग के प्रति लोगों का मोहभंग भी हुआ है। पर इसके बावजूद आज एक लाख से ज्यादा हिन्दी ब्लॉग देश-दुनिया में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं। कुछ अभी भी लिखे जा रहे हैं, कुछ कभी-कभी.......और कुछ सिर्फ नाम के लिए। 21 अप्रैल 2017 को हिन्दी ब्लॉगिंग ने 14 सालों का सफर पूरा कर लिया है। 14 सालों बाद भगवान श्रीराम का वनवास पूरा हुआ था, पर लगता है कि हिन्दी ब्लॉग 14 सालों के बाद अपने वनवास की ओर अग्रसर है। खैर, इन सबके बीच भी ब्लॉगिंग का अपना आनंद और जुनून है और हम तो सपरिवार इससे जुड़े हुये हैं।
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