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Sourabh Sharma
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बस्तर में मृतक स्तंभ
बस्तर की अंदरूनी सड़कों पर
अक्सर पेड़ों में डंगालों में कलश मिल जाते हैं पास ही जली हुई चिता की राख और
करीब में बैठे परिजन। यहाँ मौत पर स्यापा नहीं होता। जैसा हमारी अदालतों में होता
है किसी को मृत्यु दंड देने से पहले पूछ लिया जाता है कि तुम्हारी आखरी इच्छा ...

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श्री शैलं टाइगर रिजर्व एवं हैदराबाद
    यह भारत का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। श्री
शैलं पहुँचने तक लगभग 60 किमी का रास्ता इस टाइगर रिजर्व में हमने गुजारा। उस दिन
बंगाल की खाड़ी में विक्षोभ था और घना कोहरा टाइगर रिजर्व में उतर गया था। मैंने
जीवन में पहली बार वो घास के मैदान देखें जिन्हें मीडोज...

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श्री शैलं मल्लिकार्जुन यात्रा
  जब
बच्चे में ईश्वर गुणों और अवगुणों का बंटवारा करते हैं तो वे खास मेहनत नहीं करते,
कम से कम मेरे मामले में तो उन्होंने बिल्कुल ही मेहनत नहीं की। मेरे अंदर पापा और
मम्मी के कुछ गुण और अवगुण पूरी तौर पर उतर आए हैं। जैसे मम्मी को साहित्य में
अनुराग है पापा क...

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इंतजार हुसैन और जातक कथाएँ
मैं इंतजार हुसैन साहब का
शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ। उन्हें पाकिस्तान में लिविंग लिजेंड कहा जाता है। इस
बार किताबों की दुकान में उनकी कहानी संग्रह कछुए दिखी जिसे मैंने खरीद लिया। इसका
नाम आश्चर्य पैदा करता है कछुए और किताब पढ़ने पर शीर्षक से उपजा विस्मय एक...

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बीच सफर में( कहानी)
अनूपपुर के छोटे से स्टेशन
में एक वासंती दोपहर वो ट्रेन में सवार हुआ, माथे पर उभर आए पसीने की बूँदों को
पोछते हुए उसने अपनी सीट पर सामान जल्दी-जल्दी रख दिए। ट्रेन चली, हवा कुछ मेहरबान
हुई। उसका जाना-पहचाना शहर पीछे छूटता गया। शहर के छूटते ही एक सड़क नजर आने ...

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पाप
खेल-खेल में मेरी पाँच साल
की भांजी ने मेरी बेटी से कहा कि मानु ऐसा मत कर तुझे पाप लग जाएगा। मेरी बेटी ने
पूछा कि पाप क्या होता है। भांजी ने बताया कि गंदा काम करने पर भगवान नाराज हो
जाते हैं फिर सजा देते हैं। इतने मासूम बच्चों के शब्दकोष में पाप कहाँ से आ गय...

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वेरियर एल्विन और शुभ्रांशु चौधरी के दौर के बीच बदलता बस्तर....
इन दिनों दो पुस्तकें मैंने पढ़ी, पहली पुस्तक उसका नाम वासु नहीं, यह शुभ्रांशु चौधरी की पुस्तक है दूसरी पुस्तक वेरियर एल्विन ने लिखी है जिसका नाम मुड़िया एंड देयर घोटुल है। दोनों ही पुस्तकें बहुत अच्छी भाषा में और कड़ी मेहनत के बाद लिखी गई है दोनों को लिखने ...

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फारूख शेख का जाना
फारूख शेख को विदा करने का
सबसे अच्छा तरीका था उनकी फिल्म साथ-साथ के तीन गाने सुन और देख लेना। तुमको देखा
तो ये ख्याल आया, ये तेरा घर और प्यार मुझसे किया तो क्या पाओगी। वो बिना इन किया
हुआ शर्ट पहनते थे फिर भी दीप्ति नवल फिल्मों में उन्हें प्यार करती थीं, यह...

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प्रयाग शुक्ल
हिंदी साहित्य के प्रेमियों के साथ यह विडंबना है कि उनके समय के साहित्यकारों की फैनफालोविंग वैसी नहीं जैसी प्रसाद- निराला के दौर में रही होगी लेकिन यह इतनी भी कम नहीं हुई कि कोई भी साहित्य प्रेमी उनसे मिल ले। मैं अशोक वाजपेयी जी से मिलना चाहता था और काफी प्र...

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निकष भैया और उनकी कविता
धमतरी की कुछ स्मृतियाँ मेरे दिमाग में रह गई हैं उसमें सबसे खास है बया का घोसला। मेरे घर के सामने एक कॉलेज था और उसमें बया ने तीन घोसले बनाए थे। पीले रंग की चिड़िया जब इसमें आती थी तो मुझे लगता था कि झांक की देखूँ, बया की फैमिली कैसी है। घर के पीछे भी कुछ खा...
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