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समय अविराम
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आपकी ज़िंदगी से रूबरू आपकी ज़िंदगी का एक आईना
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बुर्जुआ जनवाद (bourgeois democracy), पूंजी की सत्ता के उपयोग के लिए सबसे ज़्यादा सुविधाजनक है। वह मेहनतकशों (working people) को औपचारिक मताधिकार तो देता है, परंतु उनके चुने जाने के अवसरों तथा राज्य के प्रशासन में भाग लेनें की संभावना को अधिकतम सीमा तक घटा देता है। समसामयिक पूंजीवादी समाज में क़ानून के सामने औपचारिक समानता तो जाहिर की जाती है परंतु इसको वास्तविक आर्थिक समानता से पूरित नहीं किया जाता।

जब वर्गों (classes) के बीच अंतर्विरोध (contradictions) बहुत तीक्ष्ण हो जाते हैं, तो पूंजीपति वर्ग ऐसे नरम जनवाद (moderate democracy) को भी किनारे कर देता है और खुली सैनिक-पुलिस (open military-police) या फ़ासिस्ट तानाशाही (fascist dictatorship) के रूप ग्रहण कर लेता है। इस सदी के पूर्वार्ध में इटली तथा जर्मनी में फ़ासिस्ट राज्यों के उत्थान, उनके द्वारा छेड़े नये दूसरे विश्वयुद्ध का इतिहास विश्वसनीय ढंग से दर्शाता है कि ऐसे तानाशाही शासन बड़े इजारेदार पूंजीपतियों (monopoly capitalists) का हित-साधन करते हैं। कुछ देशों में, जहां बुर्जुआ जनवाद के मामूली तरीक़े काम नहीं देते, विद्यमान सैनिक-पुलिस राज्य भी उन्हीं अंचलों की सेवा करते हैं।

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अधिरचना की प्रणाली में राज्य - ३
हे मानवश्रेष्ठों , यहां पर ऐतिहासिक भौतिकवाद पर कुछ सामग्री एक शृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार यहां समाज की अधिरचना की प्रणाली में राज्य पर चर्चा चल रही थी, इस बार हम उसी चर्चा को और आगे बढ़ाएंगे। यह ध्यान में रहे ही कि यहां इस शृंखला में,...

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समाजवादी समाज में संक्रमण (transition) के साथ एक नये प्रकार के राज्य - समाजवादी राज्य (socialist state) - का जन्म होता है। यह संपूर्ण जनता के राजनीतिक प्राधिकार (authority) का उपयोग करनेवाले संगठन होते हैं। देश की ठोस दशाओं के आधार पर तथा राजनीतिक शक्तियों की अवस्थिति और अंतर्राष्ट्रीय स्थिति के अनुरूप पूंजीवादी समाज में निर्मित राजकीय तंत्र में कमोबेश गहरे रूपांतरण (transformation) होते हैं और नये क़ानून बनाये जाते हैं। किंतु राजकीय सत्ता के संगठन का कोई एकल (single), अनिवार्य नमूना (obligatory model) नहीं होता, जो सारे देशों और राष्ट्रों के लिए उपयुक्त हो। समाजवादी राज्य की स्थापना में, राष्ट्रीय परंपराओं, राजनीतिक संघर्ष की तीक्ष्णता (acuteness) तथा अन्य कारकों पर निर्भर करते हुए, ठोस रूपों की बड़ी विविधता की पूर्वापेक्षा की जाती है।

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अधिरचना की प्रणाली में राज्य - २
हे मानवश्रेष्ठों , यहां पर ऐतिहासिक भौतिकवाद पर कुछ सामग्री एक शृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने यहां समाज की अधिरचना की प्रणाली में राज्य पर चर्चा शुरू की थी, इस बार हम उसी चर्चा को आगे बढ़ाएंगे। यह ध्यान में रहे ही कि यहां इस शृंखला म...

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राज्य ( state ) हमेशा विद्यमान नहीं था। समाज के वर्गों ( classes ) में विभाजित होने तक सैकड़ों-हज़ारों वर्ष के दौरान लोग राज्य तथा शासकीय निकायों व एजेंसियों के बिना ही काम चला लिया करते थे। तो फिर राज्य का जन्म क्यों हुआ? और यह है क्या?

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अधिरचना की प्रणाली में राज्य - १
हे मानवश्रेष्ठों , यहां पर ऐतिहासिक भौतिकवाद पर कुछ सामग्री एक शृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने यहां इतिहास के सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रेरक बल के रूप में वर्ग और वर्ग संघर्ष पर चर्चा की थी, इस बार हम समाज की अधिरचना की प्रणाली में राज्य...

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आधुनिक पूंजीवादी सिद्धांतकार समाज के वर्ग विभाजन को मान्यता तो देते हैं, किंतु उसे या तो शाश्वत ( eternal ) या अनुच्छेदनीय ( unabolishable ) मानते हैं या यह दावा करते हैं कि वर्ग हितों ( class interests ) के पारस्परिक विरोध को सार्विक समृद्धि ( universal prosperity ) के समाज की रचना से, किंतु निजी संपत्ति को हाथ लगाये बिना, ख़त्म किया जा सकता है। ऐतिहासिक भौतिकवाद की एक महानतन उपलब्धि वर्गों तथा वर्ग संघर्ष की उत्पत्ति के वस्तुगत कारणों ( objective reasons ) को खोजना और इस प्रस्थापना ( proposition ) को प्रमाणित करना था कि इन कारणों के लुप्त हो जाने पर विश्व इतिहास में अंततः एक नयी अवस्था का, यानी वर्गहीन समाज ( classless society ) की अवस्था का सूत्रपात हो जायेगा। वर्गों और वर्ग संघर्ष की उत्पत्ति के कारण क्या हैं? और वर्ग क्या है?

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समाज में वर्ग और वर्ग संघर्ष
हे मानवश्रेष्ठों , यहां पर ऐतिहासिक भौतिकवाद पर कुछ सामग्री एक शृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने यहां समाज के आधार और अधिरचना पर चर्चा की थी, इस बार हम इतिहास के सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रेरक बल के रूप में वर्ग और वर्ग संघर्ष पर चर्चा करे...

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समाज की प्रत्ययवादी तथा व्यक्तिवादी संकल्पना के विपरीत ऐतिहासिक भौतिकवाद ( historical materialism ) इसे एक जटिल प्रणाली ( complex system ) या एक ऐसा सामाजिक अंगी ( social organism ) मानता है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति विभिन्न सामाजिक बंधनों और संबंधों के ज़रिये अन्य सबसे जुड़ा होता है। समाज को समझने और उसके विकास तथा उसकी कार्यात्मकता ( functioning ) के नियमों का अध्ययन करने के लिए ज़रूरी है कि सबसे पहले मौजूदा सामाजिक बंधनों ( ties ), संबंधों और प्रक्रियाओं को समझा जाये। ऐसे स्थायी बंधनों और संबंधों ही के कारण, पीढ़ियों में परिवर्तन के बावजूद समाज की मुख्य विशेषताएं सदियों तक बनी रहती हैं, वह एक ही वस्तुगत प्रतिमान ( objective patterns ) से संचालित होता है। अतः समाज की जीवन को समझने की कुंजी अलग-अलग ‘रॉबिन्सन क्रूसोओं’ के अध्ययन में नहीं, बल्कि उन सामाजिक संबंधों व संयोजनों ( connections ) के अध्ययन में निहित है, जो लोगों के विभिन्न समूहों और अलग-अलग व्यक्तियों को अपने दायरे में ले लेते हैं।

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समाज के आधार और अधिरचना
हे मानवश्रेष्ठों , यहां पर ऐतिहासिक भौतिकवाद पर कुछ सामग्री एक शृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने यहां समाज के विकास तथा कार्यात्मकता के आधार के रूप में उत्पादन पद्धति पर चर्चा की थी, इस बार हम समाज के आधार और अधिरचना को समझने और सुपरिभ...
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