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AGAT SHUKLA
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अमरदास मानिकपुरी
  छत्तीसगढ़ के वादक अमरदास मानिकपुरी को संगीत नाटक अकादेमी की फैलोशिप  तथा अकादेमी सम्मान से 23 अक्टूबर 2015 को दरबार हाल, राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया जायेगा। छत्तीसगढ़ के ग्राम्य परिवेश में बीत गये समय का नाचा जो आंखों में झूल-झूल जाता है। 'दर्शकों के...
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गोविन्द राम निर्मलकर
गोविन्द राम निर्मलकर विश्व रंगमंच पर छत्तीसगढ़ की पताका फहराने वाले... छत्तीसगढ़ की धरा के सच्चे प्रतिनिधि... नाचा रग-रग में नदी सा बहा... जन्म    10 अक्टूबर 1935, राजनांदगांव मृत्यु    27 जुलाई    2014, रायपुर गोविन्द राम निर्मलकर छत्तीसगढ़ के लोक नाट्य कल...
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जयदेव बघेल
डाॅ. जयदेव बघेल बस्तर पर आगत की दृश्टि... जीवन भर सूर्य की रष्मियों को अपनी भट्टी में उगाकर पीतल को सोने सा चमकाकर उसे कला से संवारते-निखारते जयदेव बघेल,  शिल्प गुरू  64 वर्ष यहां रहने के बाद 9 नवम्बर 2014 को ब्रम्ह महूर्त में सुबह 4.00 बजे सूर्यवार (रविवार...
जयदेव बघेल
जयदेव बघेल
agatshukla1.blogspot.com
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बैगा अचानकमार के
बैगा अचानकमार के  बैगाओं की सांस्कृतिक धनीभूत भूमि बैगाचक कहलाती है। संयोग से वह नये राज्य बनने के साथ राजनैतिक व्यवस्था के तहत दूर हो गयी हैं। बैगाचक से सांस्कृतिक कला और संस्कृति की लहरें अब भी इस क्षेत्र को झंकृत करती रही हैं। पर लमनी, मुंगेली जिला,छत्ती...
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मिठ्ठी बाई-छत्तीसगढ़ी पौराणिक भित्ति उद्रेखण कला
छत्तीसगढ़ की पौराणिक भित्ति उद्रेखण कला मिठ्ठी बाई-जिनके हाथों से पौराणिक मांगलिक सौंदर्य झरता रहा...   मिठ्ठी बाई, छत्तीसगढ़, भित्ति उद्रेखण मिठ्ठी बाई छत्तीसगढ़ अंचल की भित्ति कला की विलक्षण कलाकार रहीं हैं। मिठ्ठी बाई गढ़ उपरोढ़ा, कठघोरा, बिलासपुर को उनके विश...
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सोनाबाई रजवार
सोनाबाई रजवार, छत्तीसगढ़ सोनाबाई, जी हां भारत की बेटी के तौर सोनाबाई की कला का जादू पूरे विश्व में अपने शीर्ष पर आया है। दरअसल सोनाबाई ने अपने घर के आंगन और गांव के चबूतरे पर बैठ अपने चिंतन से उस चित्रांकन को आकार दिया जो उनके शायद शून्य की समाधि से उतर कर आ...
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बसदेवा छत्तीसगढ़
बसदेवा कथा गायकों की सबसे बड़ी बस्ती चिरहुलडीह, रायपुर में हैं जहां लगभग 800 बसदेवा परिवारों का निवास हैं इनमें से लगभग 200 कथा गायकों ने अपनी कला परम्परा का निर्वाह करते हुए छत्तीसगढ़ को बसदेवा छत्तीसगढ़ कथा, आख्यानों से लगातार गुंजित किया है। छत्तीसगढ़ के निर...
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लिंगोपेन: देवगांव, बस्तर
लिंगोपेन गाथा संकलन : देवगांव, बस्तर भारत में आख्यानों का समय वैदिक काल के बाद का है। यज्ञ आयोजनों में आख्यानों का पाठ होता था ये आख्यान नाट्य, नृत्य गीत के विविध पक्षों से सौन्दर्य सत्ता का प्रदर्शन भी करते थे। छत्तीसगढ़ की इस धरती को जब महाकान्तर नाम से पु...
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