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Mohan Srivastava Poet
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चाह नही मुझे ऐसी भेंट का, जब राहों में मैं फेंका जाऊं । मैं तो अपनी डाली में मस्त हूं, जहां हंसते हंसते मैं मर जाऊं ॥ चाह नही मुझे ऐसी सेज क
चाह नही मुझे ऐसी भेंट का, जब राहों में मैं फेंका जाऊं । मैं तो अपनी डाली में मस्त हूं, जहां हंसते हंसते मैं मर जाऊं ॥ चाह नही मुझे ऐसी सेज क

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"तुमको निहारूं श्याम"


तुमको निहारूं श्याम , दिन - रात सुबो शाम ,
जिंदगी तो तेरी ही , कहानी अब लगती |
मूरतिया प्यारी तेरी , देखूं बस घड़ी घड़ी ,
तेरी हर बात ही , सुहानी अब लगती ||

गाल है गुलाबी तेरे , नैन हैं शराबी तेरे ,
तुममे रहूं मस्त , मस्तानी अब लगती |
दरशन की है आश , बुझती नहीं है प्यास ,
मीरा जैसी मै भी , दिवानी अब लगती ||

मोहन श्रीवास्तव ( कवि )
http://kavyapushpanjali.blogspot.com/2018/07/blog-post.html


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उस कुल में मेरा जन्म न हो ,
बेटी जिनको स्वीकार न हो |
जहां नफरत और अपमान मिले ,
और जीने का अधिकार न हो ||
उस कुल में मेरा ...........

कोख पे आरी चल जाती ,
और माँ ममता की उजड़ जाती |
जब कभी पिले हाथ हुए तो ,
दहेज की बलि है चढ़ जाती ||

ऐसे हैवानों के यहाँ ,
मेरा अपना घर -द्वार न हो ...
उस कुल में मेरा ..........

जहां नारी का सम्मान न हो ,
ऐसे घर मेरा बिवाह न हो |
जहां शब्दों के तीन तलाक मिले ,
वहां मेरा कभी निकाह न हो ||

जहां हिंसा और हो मार -काट ,
वहां कभी मेरा ब्यवहार न हो ....
उस कुल मे मेरा ...........

ऐसे घर मेरा जन्म न हो ,
जहां मजहब की दिवारें हों |
बेटी जिनको मंजूर न हो ,
और बेटे जिन्हें दुलारे हों ||

उस कोख की मुझको चाहत है ,
जिसमें मेरी खुशियाँ उधार न हों ......

उस कुल में मेरा जन्म न हो ,
बेटी जिनको स्वीकार न हो |
जहां नफरत और अपमान मिले ,
और जीने का अधिकार न हो ||
उस कुल में मेरा ...........
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जगद्गुरु जी के चरणों में कोटि कोटि प्रणाम ..

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"मेरे आने की खबर पाके मचलती होंगी"

मेरे आने की खबर पाके,मचलती होंगी |

बड़ी बेचैनी से आंगन में, टहलती होंगी ||

मेरे आने की खबर पाके..............

सुहाने सपने सजा, जुल्फें बना,बेंदी लगा |

उनकी उम्मीदें न पल भर, को बहलती होंगी ||

मेरे आने की खबर पाके..............

मेरी दस्तक की आहट में, लगें कानो की |

सौ दफे फीकी सी ,मुस्कान बदलती होंगी ||

मेरे आने की खबर पाके..............

कभी झरोखे से ,तकने से,रहगुजारों में |

इन्तिजारी की नही, बर्फ पिघलती होगी ||

मेरे आने की खबर पाके..............

आँखों से उनके जज्बात, छलकते होंगे |

बेखयाली में तेज, धडकनें चलती होंगी ||

मेरे आने की खबर पाके,मचलती होंगी |

बड़ी बेचैनी से आंगन में टहलती होंगी ||

मेरे आने की खबर पाके..............

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
http://kavyapushpanjali.blogspot.in/2013/12/blog-post_26.html

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