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Mohan Srivastava Poet
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चाह नही मुझे ऐसी भेंट का, जब राहों में मैं फेंका जाऊं । मैं तो अपनी डाली में मस्त हूं, जहां हंसते हंसते मैं मर जाऊं ॥ चाह नही मुझे ऐसी सेज क
चाह नही मुझे ऐसी भेंट का, जब राहों में मैं फेंका जाऊं । मैं तो अपनी डाली में मस्त हूं, जहां हंसते हंसते मैं मर जाऊं ॥ चाह नही मुझे ऐसी सेज क

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"यारों कंगाल मैं हो गया"


नींद आँखों की अब उड़ गई
चैन दिल का मेरा खो गया ।
आठ नवंबर की रात को
हाय! कंगाल मैं हो गया ।

पाँच सौ और हजार के ,
नोट जोडे थे करके जतन ।
मोदी सरकार के वार से ,
हाय!दिल ये मेरा रो गया ।

झूठ,बेईमानी , मक्कारी से ,
मैं बना पाया था कालाधन ।
यूँ तिजोरी में डाका पड़ा ,
काँटे सुख मे मेरे बों गया।

इससे भी  बढ़के चिंता मुझे ,
मेरी बेनामी संपत्ति की ।
कितनी मुश्किल से जोड़ा था इन्हें,
सारे सपने मेरे धो गया ।

अब डर- डरके जीता हूं मैं,
जेल जाना कहीं ना पड़े।
मुश्किलों का मेरा दौर है,
मोहन क्या से ये क्या हो गया ।

नींद आँखों की अब उड़ गई
चैन दिल का मेरा खो गया ।
आठ नवंबर की रात को
हाय! कंगाल मैं हो गया ।



मोहन श्रीवास्तव (कवि)
रचना क्रमांक :-(1053)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com

"यारों कंगाल मैं हो गया"


नींद आँखों की अब उड़ गई
चैन दिल का मेरा खो गया ।
आठ नवंबर की रात को
हाय! कंगाल मैं हो गया ।

पाँच सौ और हजार के ,
नोट जोडे थे करके जतन ।
मोदी सरकार के वार से ,
हाय!दिल ये मेरा रो गया ।

झूठ,बेईमानी , मक्कारी से ,
मैं बना पाया था कालाधन ।
यूँ तिजोरी में डाका पड़ा ,
काँटे सुख मे मेरे बों गया।

इससे भी  बढ़के चिंता मुझे ,
मेरी बेनामी संपत्ति की ।
कितनी मुश्किल से जोड़ा था ,
सारे सपने मेरे धो गया ।

अब डर- डरके जीता हूं मैं,
जेल जाना कहीं ना पड़े।
मुश्किलों का मेरा दौर है,
मोहन क्या से ये क्या हो गया ।

नींद आँखों की अब उड़ गई
चैन दिल का मेरा खो गया ।
आठ नवंबर की रात को
हाय! कंगाल मैं हो गया ।



मोहन श्रीवास्तव (कवि)
रचना क्रमांक :-(1053)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com

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"यारों कंगाल मैं हो गया"


नींद आँखों की अब उड़ गई
चैन दिल का मेरा खो गया ।
आठ नवंबर की रात को
हाय! कंगाल मैं हो गया ।

पाँच सौ और हजार के ,
नोट जोडे थे करके जतन ।
मोदी सरकार के वार से ,
हाय!दिल ये मेरा रो गया ।

झूठ,बेईमानी , मक्कारी से ,
मैं बना पाया था कालाधन ।
यूँ तिजोरी में डाका पड़ा ,
काँटे सुख मे मेरे बों गया।

इससे भी  बढ़के चिंता मुझे ,
मेरी बेनामी संपत्ति की ।
कितनी मुश्किल से जोड़ा था ,
सारे सपने मेरे धो गया ।

अब डर- डरके जीता हूं मैं,
जेल जाना कहीं ना पड़े।
मुश्किलों का मेरा दौर है,
मोहन क्या से ये क्या हो गया ।

नींद आँखों की अब उड़ गई
चैन दिल का मेरा खो गया ।
आठ नवंबर की रात को
हाय! कंगाल मैं हो गया ।



मोहन श्रीवास्तव (कवि)
रचना क्रमांक :-(1053)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com

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"यारों कंगाल मैं हो गया"


नींद आँखों की अब उड़ गई
चैन दिल का मेरा खो गया ।
आठ नवंबर की रात को
हाय! कंगाल मैं हो गया ।

पाँच सौ और हजार के ,
नोट जोडे थे करके जतन ।
मोदी सरकार के वार से ,
हाय!दिल ये मेरा रो गया ।

झूठ,बेईमानी , मक्कारी से ,
मैं बना पाया था कालाधन ।
यूँ तिजोरी में डाका पड़ा ,
काँटे सुख मे मेरे बों गया।

इससे भी  बढ़के चिंता मुझे ,
मेरी बेनामी संपत्ति की ।
कितनी मुश्किल से जोड़ा था ,
सारे सपने मेरे धो गया ।

अब डर- डरके जीता हूं मैं,
जेल जाना कहीं ना पड़े।
मुश्किलों का मेरा दौर है,
मोहन क्या से ये क्या हो गया ।

नींद आँखों की अब उड़ गई
चैन दिल का मेरा खो गया ।
आठ नवंबर की रात को
हाय! कंगाल मैं हो गया ।



मोहन श्रीवास्तव (कवि)
रचना क्रमांक :-(1053)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com

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(आप सभी को दिपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं व बधाई)
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

"आओ दिवाली मनाए हम"

आओ दिवाली मनाए हम
घरों मे दीप जलाएं ।
नफरत को जड़ से मिटा करके
सबमे प्रीत जगाएं ।।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹

कोई भी  घर मे अंधेरा ना हो
और ना ही कोई भूखा सोए ।
दूध के लिए व्याकुल होकर
ना ही कोई वच्चा रोए ।।

जरुरत मंदो की सेवा कर
जग मे पुण्य कमाएं ......
आओ दिवाली मनाए......
🌹🌹🌹🌹🌹🌹

लोगों को देख देख कर
अपने खर्चे नही बढाएं ।
जितनी अपनी चादर हो
उतना ही पांव फैलाएं ।।

संतोष का फल मिठा होता है
भाव ये दिल मे लाएं ........
आओ दिवाली मनाएं......
🌹🌹🌹🌹🌹🌹
असली दिवाली तो यही होगी
कि दिल से दिल को मिलाएं
्दुश्मनी को दिल से भुला करके
दोस्ती का हाथ बढाएं ।।

दीपक बनकर सब के घरों मे
उजियारा फैलाएं.......
आओ दिवाली मनाएं हम .........

मोहन श्रीवास्तव
शोभा श्रीवास्तव

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 kavyapushpanjali.blogspot.com 🌹
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काम, क्रोध, मद, लोभ और अहंकार पर विजय   के पर्व विजया दशमी की आप सभी को अनेकानेक शुभकामनाएँ
🌹🌹🌹🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
मोहन श्रीवास्तव
शोभा मोहन श्रीवास्तव

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हमे अपने देश को गद्दारों से बचाना चाहिये 
#धन्यवाद_माेदी_जी

2 साल पहले कितनो को पता था JNU में भारत को टुकड़े करने की और बर्बादी तक जंग लड़ने की बात कही जाती है...?

2 साल पहले कितनो को पता था JNU में आतंकियों के मौत पर शर्मिंदगी महसूस की जाती है......?

2 साल पहले कितनो को पता था भारत में सेना पर भी प्रश्न उठाने वाले लोग भारी मात्रा में उपलब्ध हैं....?

2 साल पहले कितनो को पता था की बॉलीवुड पाकिस्तान परस्तो से भरा पड़ा है...?

2 साल पहले कितनो को पता था बड़े-बड़े महान कलाकार की सोच हैं कि "सेना का जवान मरता है तो हम क्या करें... क्यों जाते है मरने ?"

2 साल पहले कितनो को पता था कि कैसे-कैसे देशद्रोहीे लोगों को और किस की भक्ति करने के लिए भारत के बड़े-बड़े अवार्ड दिए गए थे.....?

2 साल पहले कितनो को पता था हैदराबाद विश्वविद्यालय में भारत विरोध में क्या खेल खेला जा रहा है...?

2 साल पहले कितनो को पता था FTTI में भारतविरोधी विचारधारा सिखाई जाती हैं.....?

2 साल पहले कितनो को पता था देश में अस्थिरता और भारत विरोध के लिए NGO गैंग को कहाँ-कहाँ से पैसा आ रहा है....?

2 साल पहले कितनो को पता था कि भारत में सेना के प्रति अविश्वास और सेना द्वारा कही गई बातो को गलत बताने वाले बहुतायत में लोग हैं.....?

2 साल पहले कितनो को पता था की हमारे देश में अफजल, याकूब, बुरहान वानी जैसे आतंकियों के समर्थको की लिस्ट कितनी लंबी है.....?
.
---------
.
धन्यवाद मोदी जी को..., आपके आने के बाद ही देश को ये सब बातें पता चली !!

https://m.facebook.com/groups/422087971312269?view=permalink&id=607533629434368
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पाकिस्तान नही आतंकिस्तान है वह,
जहा आतंकवादियों को उपज़ाया जाता!
भारत है उसका मूल-मंत्र ,
जहां बचपन से पाठ पढ़ाया जाता!!

ईस्लाम का नकाब ऒढ़कर वह
शैतानों सी हरकतें करता है!
जिसे सुनकर कलेजा दहल जाए ,
वह कई अत्याचारों मे शिरकतें करता है!!

ईस्लाम का हिमायती अपने को बता कर ,
वह विदेशों से पैसा वसूलता है!
ऐसे धनों का वह दुरुपयोग कर,
बे- गुनाहों की हत्याएं करता है!!


खाने के लिए भोजन न हो,
पर हथियारों से पेट वह भरता है!
दुश्मनी है उसकी नस-नस मे,
पर मित्रता की बात वह करता है!!

भारत के विकास को देख-देखकर,
वह दिन -रात सुलगता रहता है!
अपनी नकामियों को छिपाने के ,
लिए वह भारत पर ज़हर उगलता है!!

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-४/०१/२००० 

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"आलू सब्जियों का राजा तो मिर्ची सब्जी की रानी"


आलू सब्जियों का है राजा,

तो मिर्ची सब्जी की रानी ।

गोभी,बैगन की बात ही क्या,

पर टमाटर का ना कोई शानी ॥


पालक,मेथी,चौराई,

और हरा साग सबको भाता ।

चाहे जैसा सब्जी हो,

पर सबका धनिया स्वाद बढ़ाता ॥


मूली,शलजम,गाजर,अदरक,

प्याज व लहसुन किसी से कम है नही ।

चिचिन्धा,परवल,लौकी,तोरई,

पर कटहल,सूरन मे भ्रम हो नही ॥


मशरुम,चुकन्दर व कुनुरु,

शिमला मिर्च भी मन को भाये ।

हरा मटर व चना की सब्जी,

प्यार से सब कोई खाये ॥


सब्जियां होती कई तरह की,

पर बिधि पुर्वक इन्हें बनाया जाए ।

फिर खाने के बाद इन्हे,

पेट पे हाथ फिराया जाए ॥


फिर खाने के बाद इन्हे,

पेट पे हाथ फिराया जाए ॥


मोहन श्रीवास्तव (कवि)
रचना क्रमांक:-(650)
9009791406
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
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"आया होली का त्योहार"


आया होली का त्योहार,

देखो दुश्मन बने है यार,

कैसे गले वो मिलने लगे !

सबके गाल गुलाबी लाल,

उनके कपड़े हुए बेहाल,

कैसे वो देखो लगने लगे !!

आया होली का त्योहार...


नन्हे-मुन्नों कि पिचकारी,

घर मे गूंजे है किलकारी,

रंग देखो वो छिड़्कने लगे !

सब कोई भागे जोर-जोर,

भंग पी के करे शोर,

सब खुशी से उछलने लगे !!

आया होली का....


जिनको है किसी से प्यार,

मिलता बहाना है यार,

कैसे लुका-छिपी करने लगे !

गालों मे लगाते गुलाल,

दिल मे उठता है भूचाल,

खुशी आंखों से झरने लगे !!

आया होली का...


जिजा-शाली की होली,

उनके सखियों की टोली,

उनपे रंग बरसाने लगे !

चारों ओर उड़े अबीर,

बिरहा के दिल मे उठे पीर,

सब गीत होली के गाने लगे !!


आया होली का त्योहार,

देखो दुश्मन बने है यार,

कैसे गले वो मिलने लगे !

सबके गाल गुलाबी लाल,

उनके कपड़े हुए बेहाल,

कैसे वो देखो लगने लगे !!

आया होली का त्योहार...


मोहन श्रीवास्तव (कवि)
रचना क्रमांक:-(323)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
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