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Kamal Astro
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गंडा-ताबीज देने वाले के लिए दिशा-निर्देश
* गंडा देन वाले मांत्रिक, तांत्रिक, ओझा या मौलवी का चरित्र साफ होना चाहिए तथा लाभ या कष्ट निवारण के लिए ही गंडा बनाकर देना चाहिए।
* किसी का अनिष्ट या बुरा करने के उद्देश्य से कभी गंडा नहीं देना चाहिए, क्योंकि बुरे कर्म का फल भी बुरा ही होता है।
* धन के लालची लोग दूसरों को पीड़ा पहुँचाने में तनिक भी नहीं हिचकिचाते, किन्तु बाद में उन्हें इसका फल भोगना पड़ता है।
* किसी को हानि पहुँचाना, पीड़ित करना अथवा रोगी बना देना, धन के लालच में ऐसा कृत्य करना सर्वथा निंदनीय है।
* गंडे का निर्माण करने वाले को स्वच्छ रहना चाहिए व स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए।
* स्वच्छ व शुद्ध स्थान पर बैठकर गंडा बनाना या धारणकर्ता को देना चाहिए।
* नीच व्यक्तियों के साथ वार्तालाप व उनका स्पर्श नहीं करना चाहिए।
* झूठ नहीं बोलना चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए तथा जहाँ तक हो सके चुप रहना चाहिए। चित्त स्थिर व स्वस्थ रखना चाहिए।
* किसी को शाप या आशीर्वाद नहीं देना चाहिए। अपना नित्यकर्म बराबर करते रहना चाहिए।
* किसी भी धर्मशास्त्र की अथवा व्यक्ति की निंदा नहीं करनी चाहिए।
* निर्भय होना चाहिए और विश्वासपूर्वक कार्य करना चाहिए।
* काम, क्रोध, मोह, लोभ, मद, हिंसा और असत्य से जहाँ तक हो सके, बचना चाहिए।

ध्यान दें : इन सभी दिशा-निर्देशों को उस समय भी ध्यान में रखना चाहिए, जबकि आप स्वयं पर ही गंडे का प्रयोग करें।

मुकदमा जीतने का गंडा

जिसे मुकदमे में हार जाने का डर हो या जो निचली अदालत में हार का मुँह देख चुका हो उसे निम्न प्रक्रिया से गंडा धारण करना चाहिए।
उसे मार्गशीर्ष की पूर्णिमा के दिन मोरशिखा (एक प्रकार का वृक्ष) की मूल (जड़) लाना चाहिए।
इसके बाद रवि पुष्य नक्षत्र के दिन किसी कुँवारी कन्या के हाथ से बँटे सूत को सात लपेटें देकर गंडा तैयार करें। इसमें जड़ को बाँध दें। तत्पश्चात उसको दायीं भुजा पर बाँध लें और बिना किसी भय के अदालत में जाएँ, तो मुकदमे में निश्चित ही जीत होगी।

बुरी नज़र का गंडा

सफेद आक (इसे मदार तथा अकौआ भी कहते हैं। इसकी सफेद जाति बहुत कम होती है, अतः काफी खोजने पर ही यह प्राप्त होती है) की जड़ का टुकड़ा लेकर और उसमें छिद्र करके, काले कच्चे सूत को बँटकर और उसे जड़ में पिरोकर गंडा तैयार करें।
धागे में एक गाँठ भी लगा दें, ताकि जड़ भागती न फिरे। यह गंडा बच्चे के गले में पहना दें। इससे वह हर किसी की बुरी नज़र से बचा रहेगा।

भूतबाधा निवारण का गंडा

अगर आप भूत बाधा से पीड़ित हैं तो निम्न प्रकार से तैयार किया गया गंडा इससे मुक्ति दिलाएगा :
रविवार के दिन स्नान कर के तुलसी के आठ पत्ते, आठ काली मिर्च और सहदेवी की जड़ एकत्रित कर लें।
इन तीनों वस्तुओं को काले कच्चे सूत में बाँधकर गंडा तैयार करें। गंडे को गले में धारण कर लें।
किसी परिचित को भूतबाधा से मुक्ति दिलाना :
रविवार के दिन सफेद सूत और काले धतूरे का गंडा बना लें।
अब इसे पीड़ित व्यक्ति की दायीं बाँह में बाँध दें, वह भूत-प्रेत की बाधा से मुक्त हो जाएगा।
वायव्य आत्माओं से मुक्ति का गंडा :
काले सूत के द्वारा सफेद घुंघुची की जड़ अथवा काले धतुरे की जड़ का गंडा बनाएँ।
इस गंडे को दाएँ हाथ में बाँधें। अपकी समस्त वायव्य आत्माओं से ग्रस्त पीड़ा दूर हो जाएगी।
यह प्रयोग किसी भी दिन किया जा सकता है। शनिवार को अगर किया जाए तो अधिक फलदायी होता है।

मिरगी निवारण का गंडा

शनिवार के दिन घोड़बच के सात या ग्यारह टुकड़ो में काले सूत से गाँठ देकर माला की भाँति गंडा बनाएँ।
इस गंडे को मिरगी के रोगी के गले में डाल दें। दौरा तुरंत रुक जाएगा। बाद में इस माला को बिना किसी के चुपचाप चौराहे पर डाल आएँ।
ताजी हरी ब्रह्यबूटी की जड़ी को उखाड़कर सूत में बाँधकर गंडा बनाएँ तथा रोगी के गले में पहना दें। इससे मिरगी के पुराने रोग में लाभ होगा।

बवासीर-नाशक गंडा

बबूल के पेड़ पर कभी-कभी एक पौधा अपने आप उग आता है, जिसके पत्ते आम के पत्तों जैसे होते हैं। यह पौधा 'बंदा बूटी' कहलाता है।
- शनिवार की संध्या को इस पेड़ के पास जाकर श्रद्धा भाव से उसे प्रणाम करके, दीपक जलाते हुए यह आमंत्रण कर आएँ कि प्रातःकाल हम बंदा बूटी लेने आएँगे।
- रविवार के सूर्योदय के समय बंदा बूटी ले आएँ।
- एक काले कोरे कपड़े में बूटी को सिलकर लाल रंग के सूती धागे में बाँध कर गंडा बनाएँ।
- रोगी की कमर में इस गंडे को बाँध दें। इसके बँधे रहने से पुरानी बवासीर ठीक होगी और फिर आयु पर्यन्त नहीं होगी।
काले धतूरे की जड़ (लगभग छ: माशा) धागे के सहारे कमर पर बाँधने से भी बवासीर चाहे जैसी हो, मिट जाती है।

अतिसारनाशक गंडा

- सहदेई की जड़ के सात टुकड़े करें।
- बँटे हुए टुकड़े लाल सूत में लपेट कर गंडा तैयार कर लें।
- यह गंडा कमर में बाँधने से अतिसार दूर होता है।

धड़कन सामान्य करने का गंडा

प्रतिदिन ताजे दौने की पत्तियों का गंडा (सफेद सूत में पत्तियों को डंठल की तरफ से बाँधकर) गले में पहनना चाहिए।
कुछ ही दिनों में हृदय की धड़कन सामान्य होकर नियंत्रित हो जाएगी।
पत्तियों के मुरझा जाने पर गंडे को (चुपचाप) नजदीक के किसी चौराहे पर रख आएँ।

कंठमाला ठीक करने का गंडा

लाल अपामार्ग की तरोताजा पत्तियों की माला प्रतिदिन पहनने से कंठमाला का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
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Pandit Ashu Bahuguna
कैसे बनाये ग्रहों को अपने अनुकूल ..????
कहा जाता हैं ’’ ग्रहा धिंन जगत सर्वम ’’ अर्थात प्रत्येक मनुष्य ग्रह के अधीन रहकर कार्य करता हैं और सांसारिक सुख एवं दुखः को भोगता हैं। किन्तु मनुष्य अपने सुख का समय तो आराम से बिता लेता हैं और जैसे ही कष्ट प्राप्त होते हैं उस समय उसे ईश्वर के शरणागत होना पड़ता हैं। अपने पूज्य श्रेष्ठ लोगों से राय मशवरा लेकर समय बिताना होता हैं। उसी परेशानी के हल हेतु जब वह किसी विज्ञ ज्योतिषी के पास जाता हैं तो ग्रहों के प्रतिकूल होने की जानकारी प्राप्त करता हैं। उन्हें अनुकूल बनाने हेतु उसे कई उपाय करना होते हैं इस हेतु आप निम्न उपाय कर ग्रहों का प्रतिकूल से अनुकूल बना सकते हैं। ये उपाय परिक्षती हैं और सहजता से कम खर्च में स्वंय के द्वारा अथवा सामान्य सहयोग लेकर किये जा सकते हैं।

सूर्य के प्रतिकूल होने पर: -
1. भगवान सूर्य नारायण को ताँबे के लौटे से सूर्योदय काल में जल चढ़ावें व 3ाोहम सूर्याय नमः का जाप करें।
2. भगवान सूर्य के पुराणोक्त, वेदोक्त अथवा बीच मंत्र से किसी एक का 28000 बार जाप करें अथवा योग्य ब्राह्मण से करवायें।
3. सूर्य यंत्र को अपने दाहिने हाथ बांधे।
4. रविवार को भोजन में नमक का सेवन न करें।
5. सूर्योदय पूर्व उठकर पवित्र हो सूर्य नमस्कार करें।

चन्द्र के प्रतिकूल होने पर: -
1. भगवान शिव की अराधना सूर्योदय काल में करें।
2. भगवान शिव के स्त्रोत पाठ करें।
3. चन्द्र के पुराणोक्त, वेदाक्त अथवा बीज मंत्र में से किसी एक का 44000 बार जाप करें अथवा जाप करवायें।
4. सोमवार का व्रत करें।
5. मोती, दूध, चांवल अथवा सफेद वस्तु का दान करें।

मंगल ग्रह के प्रतिकूल होने पर: -
1. मंगलवार का व्रत करें।
2. भगवान हनुमान जी की अराधना करें।
3. मंगल के पुराणोक्त, वेदोक्त, तंत्रोक्त अथवा बीज मंत्र का 40000 बार जाप करें।
4. मसूर की दाल, लाल वस्त्र, मूंगा आदि का दान करें।
5. हनुमान चालीसा अथवा सुन्दर काण्ड का पाठ प्रातः काल में करें।

बुध ग्रह के प्रतिकूल होने पर: -
1. भगवान गणेश जी की अराधना करें।
2. आप कोई भी बुध मंत्र 34000 बार जाप करें।
3. बुध स्त्रोत का पाठ करें।
4. मूंग की दाल, हरे वस्त्र, पन्ना आदि का दान करें।
5. विद्वानों को प्रणाम करें व सम्मान करें।

गुरू के प्रतिकूल होने पर: -
1. सूर्योदय पूर्व पीपल की पूजा करें।
2. भगवान नारायण (विष्णु) की आराधना करें व सन्तों का सम्मान करें।

शुक्र के प्रतिकूल होने पर: -
1. शुक्र स्त्रोत का पाठ करें।
2. नारीजाति का सम्मान करें।
3. सफेद चमकीले वस्त्र एवं सुगन्धित तेल आदि वस्तुओं का दान करें।
4. 3ाोम शुक्राय नमः या अन्य किसी शुक्र मंत्र का 64000 बार जाप करें।
5. औदुम्बर वृक्ष की जड़ को दाहिने हाथ पर सफेद डोरे में बाँधे।

शनि के प्रतिकूल होने पर: -
1. शनि स्त्रोत का पाठ करें एवं किसी भी शनि मंत्र का 92000 बार जाप करें।
2. जूते, चप्पल, लोहे, तेल आदि का दान करें।
3. शनिवार का व्रत करें एवं रात्रि में भोजन करें।
4. हनुमान चालीसा अथवा सुन्दर काण्ड का पाठ करें।
5. नित्य हनुमान जी के दर्शन कर कार्य प्रारम्भ करें।

राहू के प्रतिकूल होने पर: -
1. भगवान शिव की अराधना करें।
2. राहू के मंत्र का जाप करें।
3. गरीब व निम्न वर्ग के लोगों की मदद करें।
4. राहू स्त्रोत का पाठ करें।
5. सर्प का पूजन करें।

केतु के प्रतिकूल होने पर: -
1. भगवान गणेश जी की अराधना करें।
2. प्रतिदिन स्वास्तविक के दर्शन करें।
3. केतु के मंत्र का जाप करें।
4. गणेश चतुर्थी का व्रत करें।
5. लहसुनियां का दान करें।.............
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